Friday, November 15, 2019

जिसे विधाता ने कठोरतम दंड दिया है।

कभी-कभी अचानक ही विधाता हमें ऐसे विलक्षण व्यक्तित्व से मिला देता है। 

जिस देव सेम अपने जीवन की ऋतिक ता बहुत छोटी लगने लगती है हमें तब लगता है कि भले ही उस अंतर्यामी ने हमें जीवन में कभी अक्सा मत अकारण ही दंडित कर दिया हो।
तुम्हारी किसी और को हमसे विवेचन करने हमें उससे विनचिप तो नहीं किया फिर भी हम में से कौन से सामान हुए जो अपनी विपत्ति के कठिन चरणों में विधाता को दोषी नहीं ठहरा था मैंने अभी पिछले ही महीने कैसी है अभिशप्त काया देखी है जिसे विधाता ने कठोरतम दंड दिया है।

किंतु उससे वह नतमस्तक आनंदी मुद्रा में झेल रही है। 

विधाता को कोर्स कर नहीं उसकी कोटी कहा था एकदम हमारे बंगले के अहाता से जुड़ा था अपनी शानदार कोठी में उसे पहली बार कार से उतरते देखा तो आश्चर्य से देखती ही रह गई कार का द्वार खुला एक रोड ठाणे उतरकर पिछली सीट से एक वहीं शहर निकालकर सामने रख।
दी और भीतर चली गई दूसरे ही क्षण धीरे-धीरे बिना किसी सहारे के कार से एक युवती ने अपने निर्जीव निचले सड़क को बड़ी दक्षता से नीचे उतारा फिर वैशाखी उसे ही वेलचेर तक पहुंची।

उसमें बैठ गई और बड़ी से उसे स्वयं चलाती कोठी के भीतर चली गई। 

मैं फिर नित्य नित्य समय पर उसका यह आवागमन देती और अनुसूचित जाति ठीक जैसे कोई मशीन बटन खटखट आती अपना काम किया चली जा रही हो।
धीरे धीरे मेरे उस से परिचय हुआ कहानी सुनी तो दंग रह गई नितिन के प्रति एकड़ 4 अगस्त को अति अंबानी वैद्य अनुसार से जलती हुई भर की लड़की मुझे किसी से कम नहीं लगी मैं चाहती हूं कि मेरी पंक्तियों को उदास आंखों वाले वह गोरा उज्जैन वस्तुओं से सुजीत लखनऊ का मेधावी युवक भी पढ़ें।

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