Tuesday, November 12, 2019

राजा ने मनुष्य को मृत्युदंड देने को कहा।

राजा ने मनुष्य को मृत्युदंड देने को कहा रजनी काहे मंत्री यह व्यक्ति वास्तव में मनहूस है। 

हां सर्वप्रथम मैंने उसका मुंह देखा तो मुझे दिन भर भोजन नहीं नसीब हुआ।
इस पर मंत्री ने कहा महाराज क्षमा करें प्रातः इस व्यक्ति ने भी सर्वप्रथम आपका मुख देगा आपको तो भोजन नहीं मिला परंतु आपको मुख दर्शन से तो उसे मृत्युदंड मिल रहा है अब आप स्वयं निर्णय करें कि कौन में अधिक मनहूस है।

राजा भौचक्का रह गया। 

उसने इस दृष्टि से तो सोचा ही नहीं था राजा के इस विवाद को लेकर मंत्री ने कहा राजन किसी भी व्यक्ति का चेहरा मनुष्य नहीं होता मनहूसियत तो हमारे देखनी है सोचने के ढंग में होती है आप कृपा करके इस व्यक्ति को मुक्त कर दे राजा ने उसे मुक्त कर दिया।

इस प्रकार मंत्री ने अपनी चतुराई से निर्देश व्यक्ति को मृत्युदंड से बचा लिया। 

तुम मनुष्य कोई नहीं रहता हमारे सोचने के अलावा भगवान ने मनुष्य को सब कुछ एक समान बनाया है सबको एक ही रूप दिया है रंग दिया है बुद्धि दी है तुम्हारी सोचने की क्रिया ही अलग है किसी को मनुष्य मानते हैं कि तो किसी को शुभ मानते हैं तो हम इसलिए हमारे विचार से ही रहना चाहिए मनुष्य कोई नहीं होता उसे कोई नहीं होता जैसा हम सोचते हैं वैसा ही नहीं होता कर्म करते रहे और कर्म पर ही निर्भर करो मनोज कोई नहीं होता।
और वह मनुष्य उस मंत्री से बहुत प्रसन्न हुआ और अपने घर चला गया तब से उसे कोई भी मनहूस नहीं समझते हैं।

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