Tuesday, November 12, 2019

शरारत का परिणाम।

शरारत का परिणाम प्रमोद की उम्र मात्र 7 वर्ष की थी। 

परंतु वह बड़ा ही नटखट था हर रोज कोई न कोई शरारत अवश्य करता था जहां तक कि जो काम उसके बस का नहीं होता, वह भी करने का प्रयास करता रहता उसके सिर पर बड़ा बनने की धुन सवार थी इस धुन के चलते हुए नई-नई हरकतें करता रहता था। उसके पापा एक डॉक्टर थे वे उसे शरारत करने से रोकने की कोशिश करते उसे समझाते तुम अभी बहुत छोटे हो बड़े जैसे काम तुम नहीं कर सकते।
की तरफ से भी उसे रोज झिड़कियां मिलती थी।

वह सब की अनसुनी कर दिन भर इसी उधेड़बुन में लगा रहता था कि बड़ा कैसे बना जाए। 

प्रमोद के डॉक्टर पापा ने कमरे में मरीज को देखने के लिए खुशी टेबल लगा रखी थी वह बैठकर वे मरीजों का उपचार करते थे।
प्रमोद रोज वहां जा कर देखता रहता था एक दिन मौका देकर प्रमोद उस कमरे में अकेला पहुंच गया अब बड़ा बनने की धुन में पापा वाली कुर्सी पर बैठकर नकल करते हुए टेबल पर पड़े सामान को उलट-पुलट करने लगा।
सीरीज की सुई सीसी के बजाय उसकी उंगली में घुस गई खून बहने लगा दर्द कराओ उठा।

उसकी चीख सुनकर मम्मी पापा बागे बागे कमरे में आई है उसकी शरारत पर उन्हें बहुत गुस्सा आया। 

परंतु है अपनी हंसी को रोक भी नहीं पाई उंगली में से सुई निकलकर मलमपट्टी की फिर उन्होंने प्रमोद को समझाया कि तुम बहुत छोटे हो बड़े नहीं बन सकते हो बड़े बनने के चक्कर में कभी बड़ा नुकसान कर बैठोगे सुई किस चुंबन से उड़ते दर्द और पापा की सलाह ने प्रमोद को प्रेरणा दी।

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