Friday, November 15, 2019

ग्राम में गायों के बारे में कुछ।

घर-घर गाय और गांव-गांव गोठा की मान्यता की कुल में यह विचार रहा है। 

गाय प्रत्येक घर में है और प्रत्येक गांव में गौशाला और घोस्ट हो।
शास्त्रों में गौशाला के निर्माण को पुण्य कार्य कहा गया है इसका सीधा संबंध हमारे निरोगी जीवन से रहा है ऋषि यों ने बहुत पहले ज्ञान लिया था कि गोदन हमें सुख समृद्धि और स्वास्थ्य दे सकता है वैज्ञानिकों ने गायों पर जो अनुसाधन किया वह बताता है कि मानव जीवन के साथ गायों का संबंध भरण पोषण कहां होती है।
गाय से प्राप्त द्रव्य पंचगव्य के नाम से जाने जाते हैं आचार्यों ने पंचायत स्थित विश्व के नष्ट होने का विचार दिया है पेट के कीड़े हृदय रोग जलोदर कैंसर बवासीर के रोगी को मूत्र से ठीक हुए हैं गाय के गोबर से 16 तत्व पाए जाते हैं

 और गोमूत्र में 24 गोमूत्र असाध्य रोगों के उपचार में भी उपयोगी है। 

सम्मानित एक अच्छी गाय रोजाना 10 से लेकर 15 लीटर दूध देती है गाय को दूध में लगभग वह सारे गुण होते हैं जो मां के दूध में होते हैं कई मिठाईयां गाय के दूध से बनती है दही और छाछ भी उसी से मिलते हैं गाय के घी में महत्व आयुर्वेदिक में तू विशेष है कि अग्निहोत्र पर शोध करने वाले ने भी इसे महत्वपूर्ण माना है।
पर्यावरण की शुद्धता की समक्ष का गाय के घी से हवन करने में है यह उज्जैन प्रथम के क्षेत्र को पाटने में भी उपयोगी है।

आज भी गाय हमारी अर्थव्यवस्था का आधार सिद्ध हो सकते हैं। 

गोपालन से परिवार का भरण पोषण की अधिकांश गुजारा गोदन से प्राप्त दूध दही छाछ की जैसे पोषक पदार्थों से अवश्य जाता है खेती से सहायक बेल सामान ढोने में सहायक बने महंगे पेट्रोल पदार्थों से मुक्त ग्रामीण पर्यावरण संतुलित भी बनाते हैं गोधन का गोबर इंदन बचाने उड़ जा उत्पादन के आत्मनिर्भरता को मजबूत बनाता है।

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