Tuesday, November 12, 2019

राजा ने शिकारी को गिफ्ट दिया।

आज तक मैंने एसएम की तीरों से न जाने कितने जिलों की जान ली है। 

मैंने कभी भी नहीं सोचा कि इन्हें भी दर्द होता है मैं कितना पापी हूं भगवान मुझे कभी माफ नहीं करेगा आज से मैं कभी भी बेगुनाहों की जान नहीं लूंगा नहीं मरे रहते कोई इनका शिकार कर सकेगा।
कहते हुए राजा ने अपने तीर कमान फेंक दिए राजा के बदले व्यवहार से प्रभावित होकर शिकारी ने भी अपना धनुष बाण फेंक।
तब से उस राजा और वे शिकारी दोनों गहरे मित्र हो गए जब शिकारी ने राजा के छोटे हुए किरण को मारते हुए।

देखकर शिकारी ने राजा को तीर मार दिया। 

और राजा से शमा मांगने के लिए वह शिकारी राजा के पास पहुंचा और राजा का तेल निकालने लगा तब राजा को एहसास हुआ कि शिकारी का तीन लगने पर उसे कितना दर्द हुआ वैसे ही उसी रन को कितना दर्द हुआ होगा जो कि उस राजा ने उस हिरण को वह तीर मारा था।

जब तीर निकालने के बाद राजा ने शिकारी से बोला कि आज मुझे पता। 

चला कि कैसे किसी जीव को दर्द होता होगा मैंने न जाने कितने जीवो को मार दिया मुझे पता नहीं कि मैंने कितनी हत्या की है आज मुझे सब कुछ पता चला कि कैसा दर्द होता है।
तुमने मुझे बता ही दिया कि दर्द कैसा होता है तो मैं तुम्हें चलो महल चलो मैं तुम्हें गिफ्ट दूंगा।

No comments:

Post a Comment