Tuesday, November 12, 2019

बेटी भगवान ने हर प्राणी के लिए उसके जीने का तरीका बना रखा है।

मां की सीख 1 दिन रात को पर्वत जब बिस्तर पर जा कर लेती तो उसकी नजर दीवार से चिपकी एक छिपकली पर पड़ी। 

छिपकली ट्यूबलाइट के करीब छोटे-छोटे कीट पतंगों को लपक लपक कर खा रही थी कभी-कभी कोई गीत चिपकती कल पकने से पहले भाग भी निकलता था।
देखकर प्रभा को बड़ा आनंद आ रहा था परंतु छिपकली भी बड़ी सयानी थी कि जैसे ही दोबारा ट्यूबलाइट के समय तक दांत लगाकर उसका अपना शिकार बना ही लेती थोड़ी देर में छिपकली कीड़ों को निकालना बंद कर दिया शायद उसका पेट भर चुका था।

प्रभा ने दूसरी ओर करवट बदल ली पर नींद नहीं आ रही थी। 

व्हिच पगली के बारे में सोच रही थी आखिर यह दीवार से चिपक की कैसे रहती है गिरती क्यों नहीं परवाने ट्यूबलाइट की ओर देखा तो वह छिपकली नहीं थी तब उसने दरवाजे पर इधर उधर नजर दौड़ाई तो देखा कि छिपकली छत पर ठीक उसके ऊपर चिपकी हुई थी वह डर के मारे अचानक चिल्ला पड़ी मम्मी मम्मी जल्दी आओ।
प्रभु बिस्तर से उठकर एक कोने में बैठ गई उसकी मां आई तो उसने कहा मम्मी देखो कहीं में छिपकली मुझ पर गिरने पड़े परवाने अपनी मम्मी का हाथ पकड़ लिया। बेटी तुम तो बेकार डर रही हो यह छिपकली नहीं गिरती जा चुपचाप सो जा अब प्रभाव पर हाथ फेरते उसकी मम्मी बोली।

मम्मी आप कैसे जानती हैं कि छिपकली नहीं गिरेगी। 

बेटी भगवान ने हर प्राणी के लिए उसके जीने का तरीका बना रखा है छिपकली को छत पर चिपकना और चलना आता है लेकिन वह गिरती नहीं है उसकी मम्मी ने प्रभाव को सिखाया।

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