Friday, November 15, 2019

संत कंवर राम उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ।

वे विचार में पड़ गए इतने में कवर राम तगारी खाली करके वहां आ गए। 

पहुंचे और उन्होंने मेहमान उसे पूछा आपको क्या चाहिए उनसे हनी मेहमानों ने कहा कि हम एक अमराराम जी के दर्शन करने हैं और यह आदमी आपसे मजाक कर रहा है कि आप ही संत कंवरराम है भला कोई सारी तगारी कैसे उठा सकता है कंवरराम हंसकर बोले कवरिस मिट्टी के पुतले का ही नाम है दरबार की सेवा ही परमात्मा की सेवा है जो बगैर तगारी उठाए कैसे पूरी हो सकती है।

खैर अब आप बताओ मेरे लिए क्या हुक्म है। 

अब उन तक अमराराम की सादगी सरलता सहजता और विनम्रता देख दंग रह गए हुए पैरों में गिर कर आशीर्वाद की प्रार्थना करने लगे उनकी संत प्रतिज्ञा के कारण ही आज भी उनका नाम बड़े आदर से और श्रद्धा के साथ लिया जाता है।
एक बार की घटना है संत कवर राम सुबह शिकारपुरा शहर के साईं बाग में भजन में मगन थे अचानक एक महिला ने रेशमी कपड़े में लिपटे हुए अपने मृतक बालों को संत के हाथों में देते हुए विनती की साईं कृपा इस बालक को लोरी दीजिए लोरी देते समय उन्हें ज्ञात हुआ कि बालक में हरकत नहीं है।

उन्होंने कपड़ा उठाकर देखा बालक जीवित नहीं है

 संत बालक को लोरी देते हुए ईश्वर आराधना में लीन हो गए कुछ देर पश्चात आकर खोली बच्चा हुआ करके रोने लगा।
संत ने बच्चे मां को देते हुए काम आता ऐसी परीक्षा नहीं लिया करें।
आगे का पार्ट आने वाला है।

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