Tuesday, November 12, 2019

हृदय परिवर्तन बहुत समय पहले की बात है।

विचित्र से नाम का एक राजा था। 

मैं उटपटांग बातें सोचता और आदेश दे देता था एक बार उसने पूरे राज्य में ऐलान कर दिया कि जो व्यक्ति राज्य के सबसे बड़े मुंह को दरबार में हाजिर कर देगा उसे मुंह मांगा इनाम दिया जाएगा।
लोग इनाम के लालच में दरबार में आने लगे राजा विचित्र सेन सब की मूर्खतापूर्ण बातें सुनते और कहते हैं यह तो सामान्य सी मूर्खता है मैं देश के मुंह शिरोमणि की तलाश में हूं।
1 दिन महात्मा दरबार में आए और बोले राजन में महमूद का नाम आपको एक शर्त पर बता सकता हूं क्या शर्त है तुम्हारी राजा ने कहा।

ग्रुप की खामियों और कार पुजारियों को सुनने के पश्चात ही आप कोई निर्णय देंगे महात्मा बोले। 

राजा ने कहा मुझे मंजूर है बताओ कौन है वह मूर्ख साधु ने कहा वह स्वयं आप है राजन मैं तुमने मुझे मूर्ख कहा। क्रोध से आग बबूला हो उठा महात्मा बोले महाराज का भजन दे चुके हैं क्या कि मूर्ख की गुजरिया सुनने के बाद ही आप कोई निर्णय देंगे।

राजाजी चित्रसेन अपमान का कड़वा घूंट पीकर ले गया। 

महात्मा बोले राजन आप अपना कर्तव्य भूल कर बेकार ही बातों में उलझा हैं लोग मुक्ता के मन घटक किसे आपको सुनाते हैं आपको विद्वान की तलाश कर उनका विधाता का सम्मान करना चाहिए ना कि उठ पटाया की बातें।
राजा का क्रोध काफूर हो गया उसने गंभीर स्वर में कहा हम वास्तव में ग्रुप में अभी तक अज्ञानता के मकड़जाल में उलझा था मांगू अपना मुंह मांगा इनाम मांगू।
महात्मा बोले मैं आपसे आपका राज्य मांगता हूं दरबार में सन्नाटा छा गया।
और आजम महात्मा से माफी मांगने लगा और वह प्रजा पालक राजा बन गया।

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