Tuesday, November 12, 2019

दर्द का अहसास।

सूरजपुर नगर के राजा भवानी सिंह शिकार के बेहद शौकीन थे। 

उनका अधिकतर समय शिकार खेलने में ही बीत जाता था वह सुबह से शाम तक जंगलों में जंगली जीवो का शिकार करते रहते थे जब तूणीर में एक भी तीर नहीं बचता तब वह अपने महल की और रुक करते थे कभी भी ऐसा दिन नहीं जाता था जब वह शिकार करने गए हो।
यह रोज नए-नए जंगली जानवरों का शिकार करते थे आज तक वह जानने उन्होंने कितने ही जंगली जानवरों को अपना निशाना बनाया था।

एक दिन में शिकार पर गए उसी जंगल में एक अन्य शिकारी भी शिकार खेल रहा था।

 राजा रहने दो ही अपना तीर सामने दौड़ रही हिरण पर मारा शिकारी का तीर राजा की पीठ में आग लगा राजा दर्द से चीख पड़ा चीख सुनकर शिकारी दौड़ता हुआ आया राजा को देखकर शिकारी ने हाथ पांव फूल गए।
उसे अपनी मौत आंखों के आगे मंडराती नजर आने लगी उसने हाथ जोड़कर राजा से माफी मांगी और उनकी पीठ में 10 साती निकालने लगा राजा ने मना करते हुए कहां पहले सामने तड़प रहे हिरण को यहां लाओ फिर तीर निकालना।

शिकारी कुछ समझ नहीं पाया फिर भी आज्ञा अनुसार हीरोइन को ले आया।

 हिरण घायल अवस्था में तड़प रहा था। घोड़े से नीचे उतर कर राजा ने हिरण की गर्दन में दशा तीर निकाला मलहम लगाया और पट्टी बांधी।
जिगर जाने लगा तो राजा ने टूटते हुए कहा सचमुच आज तुमने मेरी आंख खोल दी आज तुमने मुझे एहसास करा दिया कि दर्द क्या होता है।

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