Saturday, November 16, 2019

अंजू ने कहा लेकिन मिनी का ध्यान आते ही उसने अपने मुंह पर हाथ रख लिया।

यहां तो इसका कोई दोस्त भी नहीं बनेगा क्योंकि यह लंगडी हो गई है सभी जने बत्तख की बात कर रहे थे। 

 मैं उसके पैर और पंखों दवाई लगा कर ठीक कर दूंगी ठीक होते ही देखना ही फिर से उड़ सकेगी मिनी ने कहा सभी बच्चों ने हमें अपनी गर्दन हिलाई धीरे-धीरे बच्चे मिनी के दोस्त बन गए कुछ दिन बाद शैली बिल्कुल ठीक हो गई एक कमरे से दूसरे कमरे में उड़ती रहती थी एक दिन मिनी के पिताजी मिनी और बच्चों को नहर के पास वाले पार्क में ले गए।
शैली को भी साथ लेकर गेम शैली को नहर में तैरने के लिए उतारा वे धीरे-धीरे तेल में लगी और फिर पंख फड़फड़ा ते पानी में उछलने लगी बच्चे बहुत दूर तक उसे तैरते हुए देख रहे वे तेरे ते तेरे ते दूर निकल गई।

मिनी और बच्चे सेलीको टाटा बाय-बाय कह कर अपने घर लौट आए। 

सभी को शाम बच्चे अपने घर लौट आए।
मिनी उदास बैठी थी बच्चे भी खेलने नहीं आए थे तभी दरवाजे की घंटी बजी सारे बच्चे वहां खड़े थे अंजू ने कहा आंटी मिनी को हमारे साथ खेलने भेज दीजिए। हम उसे बहुत संभाल कर ले जायेंगे हम सब उसका ध्यान रखेंगे बंटी बोलना मिनी को अब बहुत से मित्र मिल गए थे

 अब मिनी उदास और अकेली नहीं रहेगी। 

वह धीरे-धीरे जो मिनी ने अपने पांव और हाथ की कमजोरी खाई थी वह उन बच्चों के साथ खेलते खेलते वापस मिल गई और मिनी आज बहुत खुश है उसने भी अपने दोस्तों के साथ खेलना शुरू कर दिया और वह भी स्कूल जाने लग गई और उस टायर वाली साइकिल को छोड़ दिया आज मिनी बहुत खुश है।

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