Sunday, October 27, 2019

इस जानकारी लेते हुए पैदल ही आगे बढ़ रहे थे।

इस जानकारी लेते हुए पैदल ही आगे बढ़ रहे थे। 

चलते चलते हम रुक के प्रथम द्वार पर पहुंचे क्या विशाल दरवाजा था देखते ही हमारी आंखें फटी की फटी रह गई। इस नौलखा दरवाजा कहते हैं नौलखा दरवाजा में प्रवेश करें हम ग्रुप में आगे ही और बड़े आगे हमें हाथीपोल दरवाजा दिखाई दिया। यहां से दुर्ग की दीवार बिल्कुल सीधी है कहते हैं कि यह हमीर का घोड़ा अमीर को लेकर सीधा ग्रुप पर चढ़ा था हमें घोड़े के खुर के निशान देखकर आश्चर्यचकित रह गई दुर्गा मनोहर में दृश्य देखते देखते हम अंधेरी दरवाजे पर पहुंचे।

एक साथ तीन दरवाजे हैं तथा इन दरवाजों में अंधेरा रहता है।

अंधेरी दरवाजों को पार कर हम ग्रुप के ऊपर छोर पर आ पहुंचे वहां से चारों और दृश्य डालने पर हरियाली से आच्छादित जंगल बहुत ही सुंदर दिखाई दे रहा था यहां से थोड़ी आगे बढ़ने पर हमें खंभों की छतरी दिखाई दी लगभग 1 किलोमीटर की दूर की दुर्घटना चढ़ाई चढ़ने के पश्चात 32 खंभों की छतरी जाकर बैठे तो यह शीतल बयार बह रही थी।

गाइड ने बताया कि ग्रुप के सपोर्ट मैदान पर निर्मित। 

 यह छतरी राव हमीर के शासनकाल में चारों ओर से हवा खोल सभा दरवाजा विचार-विमर्श विश्राम व आमोद प्रमोद की जगह थी
 जिसका उपयोग काफी पर्यटक इन कामों के लिए करते हैं इस छतरी पर लगभग आधे घंटे विश्राम किया विश्राम पश्चात हम आगे बढ़े सपाट मैदान में एक और राव हमीर का महल खड़ा दिखाई दिया।
कहा जाता है कि राव हमीर की पुत्री पद्मावती इस तालाब में पारस पत्थर लेकर कूद गई थी पद्मावती के आत्म बलिदान के कारण इस तालाब का नाम पदमल पड़ा इस तालाब के पानी से किले में जलापूर्ति की जाती है हमने रानी हो तालाब को देखा काली मंदिर के नजदीक स्थित है गहराई वाला यह तालाब रानियों के स्नान करने के लिए था।

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