Sunday, October 27, 2019

रणथंबोर की यात्रा।

हटीले हमीर की पुण्य धरा रणथंबोर स्मरण आते हैं। 

सभी के मन में इस धरा को देखने की इस वक्त ही इच्छा होती है अब यह सत्र वन क्षेत्र के रूप में विकसित है अरावली एवं विद्यांचल की सूर्यमणि पर्वतमाला के मध्य में स्थित विश्व प्रसिद्ध रणथंभोर बाघ अभ्यारण को देखने की परिवार के सदस्यों को तीव्र उत्कृष्टता हुई सभी ने मिलकर रणथंबोर को भ्रमण का कार्यक्रम तैयारी किया।
हम सभी ने 9 अक्टूबर को जयपुर से रेल देवरी सवाई माधोपुर के लिए रवाना हुई एक का एक मेरी बेटी ने मुझे पिताजी यह सवाईमाधोपुर कितनी दूर है।

मैंने बताया कि बेटी रेल मार्ग द्वारा जयपुर सवाई माधोपुर की कुल दूरी 132 किलोमीटर है। 

वहां हमने रेलवे स्टेशन के पास ही एक होटल में कमरा लिया और कुछ समय आराम किया।
सुबह उठकर सभी ने जल्दी-जल्दी स्नान से निवृत्त होकर बुकिंग खिड़की के लिए चल पड़े।
बुकिंग खिड़की हमारे होटल से लगभग कुछ ही दूरी पर थी बुकिंग खिड़की से प्रथम पारी में भ्रमण का टिकट लेना था बुकिंग खिड़की से ही उद्यान भ्रमण के लिए जिप्सी एक टैंकर मिलते हैं।

 जिसके द्वारा उज्जैन का भ्रमण करवाया जाता है हम सभी ने 6:00 बजे बुकिंग खिड़की पर पहुंच गई है। 

मैं आपको बता दूं कि रणथंबोर भ्रमण के लिए आप पारिवारिक सदस्यों में मेरी पत्नी मेरी दो बेटियां स्विंग ईवे श्रद्धा एक बेटा शुभम इस प्रकार कुल 5 सदस्य थे हम पांचों जिप्सी में सवार हो चुके थे रणथंबोर अभ्यारण की ओर निकल पड़े रणथंभोर बाघ अभ्यारण क्षेत्र की शुरुआत खिलचीपुर ग्राम पंचायत गणेश्वर धाम सिरोही से होती है जिसकी दूरी सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन से कुछ ही दूर है यहां अभ्यारण में प्रवेश करने के लिए चेक पोस्ट बनी हुई है।

No comments:

Post a Comment