Friday, October 4, 2019

विजय बहुत ही परिश्रमी किसान था।

मेहनत की कमाई एक गांव में विजय नामक किसान रहता था।

विजय बहुत ही परिश्रमी किसान था। वह अपने खेतों में कठिन परिश्रम करता था इसलिए उनके खेतों में फसल बहुत ही अच्छी होती थी विजय काका में 1 गुण और था कि वह पूरे गांव की यथासंभव मदद करते थे जिससे पूरा गांव उनका विजय काका कहकर पुकारता था।
विजय काका सभी तरह से सुखी थे परंतु उनका एक दुख था कि उनका एक बेटा था जिसका नाम रामू था वह मां के लाड प्यार से रामू बिगड़ गया था वह आराम मतलब तो तब भी परवाह हो गया था परिश्रम करने से हमेशा कतरा तथा विजय काका अपने बेटे को सुधारना चाहते थे।
इसलिए उन्होंने एक दिन अपने बेटे को अपने पास बुलाया और कहा जाकर कुछ कमा कर लाओ नहीं तो रात को खाना नहीं मिलेगा रामू सीधा अपनी मां के पास गया और रोने लगा।

मां ने बेटे की आंखों में आंसू देखे तो मैं बेचैन हो गई।

उसने अपना संधू खोला और 10 निकालकर बेटे को दिए रात को पिता ने बेटे से पूछा आज तुमने क्या कम है।
लड़के ने जेब से 10 निकाल कर पिता के सामने रख दिए।

बाप ने कईले कुएं में फेंका हूं लड़के ने तुरंत पिताजी की आज्ञा पालन किया।

दीनू सब कुछ समझ गया।
दूसरे दिन उसने अपनी पत्नी को मायके भेज दिया दूसरे दिन उसने फिर अपने बेटे को बुलाया और कहां जाकर कुछ कमा कर लाओ।
और नहीं तो शाम को खाना नहीं मिलेगा।

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