Friday, October 4, 2019

सोनपुर गांव में एक कुमार रहता था वह मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए प्रसिद्ध था।

आपसी सहयोग बीच में पहले की बात है।

सोनपुर गांव में एक कुमार रहता था वह मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए प्रसिद्ध था। उसके बनाए गए बर्तन दूर-दूर तक बिकने के लिए जाते थे एक दिन कुमार को अपने आप पर बड़ा घमंड हुआ वह सोचने लगा कि यह घड़ा मेरा बनाया हुआ है यह मेरी मेहनत का फल है मिट्टी कुमार के इस घमंड को सहन न कर सके।
उसने कुमार से कहा यदि मैं नहीं होती तो तुम गढ़ा कैसे बनाते कुमार चुप रहा परंतु पानी को यह बात पसंद नहीं आई उसने मिट्टी से कहा मिट्टी बहन यदि मैं नहीं होता तो तुम और कुमार क्या कर सकते थे चाहिए सब सुन रहा था।

उसने तीनों से कहा यदि आप तीनों होते और मैं नहीं होता तो क्या यह घड़ा बन सकता था।

आपको चारों की मृत्यु पर हंसी आ गई उसने कहा यह क्यों भूल जाते हो कि तुम सब होते और मैं नहीं होती तो यह घड़ा पकता कैसे।

मेरी गर्मी के कारण ही तो यह पकता है सच तो यह है कि गड़ा में सब मेल का फल है।

हम मिल जुल कर रहना चाहिए हम एक दूसरे के मेल के बिना अधूरे हैं उस दिन से किसी ने अपने आप पर घमंड नहीं किया सब ने समझ लिया कि आपसी सहयोग से ही नहीं वस्तु बन पाती है अतः बच्चों आपसे सहयोग के लिए बिना कोई भी कार्य पूर्ण नहीं हो सकता।
हमें शिक्षा यह मिलती है हम सदैव मिलजुल कर कार्य करना चाहिए जिससे कार्य में उन्नति हो और हमारा कार्य भबड़े।

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