Friday, October 4, 2019

स्वच्छता एवं स्वास्थ्य एक मानवीय गुण है।

जब तक हम इस अपनी जीवन में नहीं अपनाते इसका अभाव हम अपने चारों ओर दिखाई देता है।

कई लोग अपने घर का कूड़ा कचरा कचरा पात्र नहीं डालकर उसे सड़क पर ही फेंक देते हैं जिससे वह कचरा सड़क पर ही सड़ता रहता है और बीमारी के कीटाणु को जन्म देता है जिससे हम बीमार हो सकते हैं।
सोचता तन की मंकी और बाहर सभी की होनी चाहिए प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठना सुबह-शाम नियमित समय पर सो जाना नित्य दांतो की सफाई करना स्वच्छ जल से स्नान करना मौसम के अनुसार स्वच्छ वस्त्र पहनना प्रातकाल खुशी हवा में घूमना शाम के समय नियमित रूप से कोई खेल खेलना।

आदत ऐसी है जो मरे स्वस्थ को बनाए रखती है।

सोच तन में सोच मन का वास होता है सोचता तभी रहेगी जब हम सभी घर में गली मोहल्ला सभी जगह से कोई रखेंगे यदि व्यक्ति सोच रहेगा तो उसका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा जिससे उसकी कार्य करने की क्षमता में वृद्धि होगी कार्य करने से देश में समृद्धि आएगी और हम समृद्ध होंगे।
लोग बसों में रेल में सफर करते समय कचरा फैलाते रहते हैं यह गलत आदत है यदि हम लोग ध्यान रख के कागज के टुकड़े छिलके फेंकने लायक चीजें अगर कचरा पात्र में ही डाले तो वातावरण को स्वच्छ रखा जा सकता है।

स्वच्छता का संबंध व्यक्ति के स्वास्थ्य से है हम देखते हैं।

कि प्रतिदिन कितनी धूल उड़ती है हमारी त्वचा में छोटे-छोटे कौन होते हैं।
छिद्रों से पसीना निकलता है इन पर धूल मिट्टी जम जाती है यदि हम प्रतिदिन स्नान न करें तो धीरे-धीरे छिद्र बंद हो जाते हैं इसे पसीना निकलने में रुकावट आने लगती है जिससे हम बीमार पड़ सकते हैं।

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