Sunday, October 27, 2019

तुलसी महतो अपनी लड़की सुभागी से बहुत प्यार करते थे।

 छोटी उम्र में भी वह घर के काम में चतुर और खेती-बाड़ी के काम में निपुण थी। 

उसका भाई रामू जो उम्र में बड़ा था बड़ा ही कामचोर और आवारा था तुलसी ने सुभागी और रामू दोनों की शादी कर दी थोड़े दिन बीते अचानक एक दिन बड़ी आफत आ गई सुबह की बहुत छोटी उम्र में ही विधवा हो गई सुबह की के दुख की तो सीमा ही ने थी बेचारी को अपना जीवन पहाड़ जैसा लगने लगा था।

कुछ साल बीते लोग तुलसी महत्व पर दबाव डालने लगे।

 की लड़की की कहीं दूसरी शादी करा दो आजकल कोई से बुरा नहीं मानता तो क्या सोच विचार करते हो तुलसी ने कहा भाई मैं तो तैयार हूं लेकिन सुबह की भी तो माने वह किसी तरह राजी नहीं होती है हरियार मैं सुबह की को समझाकर कहां बेटी हम तेरे ही भले के लिए कहते हैं मां-बाप अब बूढ़े हो गए हैं उनका क्या भरोसा तुम इस तरह कब तक बैठी रहोगी सुबह कि मैं सर झुका कर कहा आपकी बात समझ रही हूं लेकिन मेरी मन शादी करने को नहीं करता।

मुझे आराम की चिंता नहीं है मैं सब कुछ जाने को तैयार हूं।

 जो काम माफ करो वह सिर्फ आपको केबल करूंगी मेरी मगर शादी के लिए मुझसे ले गई है।
सुभागी ने गर्व से भरे स्वर में काम मैंने आपको आसरा भी नहीं किया और भगवान ले जाए तो कभी करूंगी भी नहीं अब सुबह कि उनके साथ ही रहने लगी उसने घर का सारा काम संभाल लिया बेचारी पैर रात से उठकर घुटने में लग जाती चौका बर्तन करती गोबर था थी खेत में काम करने चली जाती।
रात को कभी मां के सिर में तेल लगाती तो कभी उसकी तह दबाती तब उसका बस चलता मां-बाप को कोई काम नहीं करने देती हां भाई को ने रोक की सोचती यह तो जवान आदमी है यह काम नहीं करेगा तो गृहस्ती कैसे चलेगी।
मगर राम को यह बुरा लगता अम्मा और दादा को तिनका का तक नहीं उठाने देती और मुझे पीसना चाहती है।

सुभागी का दुख भरा जीवन।

सुभागी ने तो कुछ जवाब नहीं दिया बात बढ़ जाने का भय था। 

मगर उसके मां बाप बेटे सुन रहे थे मैं तो से ले रहा गया बोला क्या है रामू से गरीब बन से क्यों लड़ते हो रामू पास आकर बोला तुम क्यों बीच में कूद पड़े मैं तो उसको कह रहा हूं तुलसी जब तक मैं जिंदा हूं तुम उसे कुछ नहीं कर सकते मेरे पीछे जो चाहे करना बेचारी का घर में रहना मुश्किल कर दिया है।
रामू आपको बेटी बहुत प्यारी है तो उसे गले में बांध कर रखी है मुझसे तो नहीं रुका जाता तुलसी अच्छी बात है अगर तुम्हारी यह मर्जी है तो यही होगा मैं कल गांव के आदमियों को बुलाकर बटवारा करा दूंगा तुम से अलग हो जाओ सुभागी अलग नहीं होगी।

रात को तुलसी लेट तो वह पुरानी बात याद आई। 

जब राम के जन्म जन्म उत्सव में उन्होंने रुपए कर्ज लेकर जलसा किया तो और सुबह की पैदा हुई तो घर में रिपेयर रहते हुए भी उन्होंने एक कोढ़ी तक खरीदने की अनुमति नहीं दी पुत्र को रतन समझौता पुत्री को पूर्व जन्म के पापों का दंड वेतन कितना कठोर निकले और यह दिल कितना मंगल में है इससे उनके मां-बाप सोचने लगे।
दूसरे दिन में तो ने गांव के आदमियों को इकट्ठा करके कहां पंचो आगरा मुक्का और मेरे घर का निवारण नहीं होता मैं चाहता हूं कि तुम लोग इंसाफ से जो कुछ मुझे दे दो मैं लेकर अलग हो जाऊं

 रात दिन की बस अच्छी नहीं है। 

 गांव के मुखिया बाबू सज्जन सिंह बड़े सज्जन पुरुष थे उन्होंने राम को बुलाकर पूछा क्यों भाई तुम अपने आप से अलग रहना चाहते हो तुम्हें शर्म नहीं आती मां-बाप को अलग कर देते हो रामा मैं ठिठाई के साथ का जब एक साथ गुजरने वह तो अलग हो जाना ही अच्छा है।
तुलसी देख लिया आप लोगों ने इसका मिजाज भगवान ने बेटी को दुख दे दिया नहीं तो मुझे खेती-बाड़ी लेकर क्या करना था जहां रहता वही कमाता खाता भगवान ऐसा बेटा वेरी को भी मैं लड़के से लड़की बड़ी हो रामू ऐसा सोचने लगा।

महतो ने सुभागी के माता-पिता को समझाया।

मगर शाहिद महतो को यह सुख बहुत दिनों तक बोगना ने लिखा था। 

सात आठ दिन से महत्व को बहुत तेज बुखार हुआ है लक्ष्मी पास बेटी रो रही है अभी एक्शन पहले महतो ने पानी मांगा था पर जब तक वह पानी लाई तब तक उनके हाथ-पांव ठंडे हो गई है सुबह कि उनकी यह दशा देखते ही रामू के घर गई और बोली भैया चलो देखो आज दादा ने जान कैसे हुआ आता है सात दिन से बुखार नहीं उतरा।
रामू ने चारपाई पर लेटे लेटे का तो क्या मैं डॉक्टर हकीम हूं कि देखने चलूं जब तक अच्छे थे।

 तब तक तो तुम उनके गले का हार बनी हुई थी आज जब मरने लगे तो मुझे बुलाई है। 

सुभागी ने फिर उससे कुछ नहीं कसीदे सज्जन सिंह के पास गई उधर सज्जन सिंह ने जूही महत्व की हालत के बारे में सुना तुरंत सुबह की के साथ भागे चले आए वहां पहुंचते ही महतो की दशा और खराब हो चुकी थी नाड़ी देखी तो बहुत धीमी थी समझ गई कि जिंदगी के दिन पूरे हो गए महतो जैसे नींद से जाग कर बोले बहुत अच्छी है भैया अब तो चलने की बेला है सुबह की के पिता अब तुम्हें हो उसे तुम ही को सोंपे जाता हूं।

सज्जन सिंह ने रोते हुए कहा भैया महत्व घबराओ मत भगवान ने चाहे। 

 तो तुम अच्छे हो जाओगे सुबह की को तुम मैंने हमेशा अपनी बेटी ही समझा है और जब तक जिऊंगा ऐसा ही समझता रहूंगा तुम निश्चित रहे हो कुछ और इच्छा हो तो वह भी कह दो  महतो ने विनती नेत्रों से देखकर का और नहीं कहूंगा भैया भगवान तुम्हें सदा सुखी रखे सजन रामू को बुला कर लाता है और उससे वह जो भूल चूक हुई शमा कर दो मैं तो नहीं भैया उसे पापी का मुंह में नहीं देखना चाहता।
उसके बाद गोदान की तैयारी होने लगी रामू को गांव वालों ने समझाया पर वेस्टी करने पर राजी नहीं हुआ का जिस पिता ने मरते समय मेरा मुंह देखना स्वीकार नहीं किया हुआ है ने मेरे पिता है ने में उसका बेटा हूं।

रणथंबोर की यात्रा।

हटीले हमीर की पुण्य धरा रणथंबोर स्मरण आते हैं। 

सभी के मन में इस धरा को देखने की इस वक्त ही इच्छा होती है अब यह सत्र वन क्षेत्र के रूप में विकसित है अरावली एवं विद्यांचल की सूर्यमणि पर्वतमाला के मध्य में स्थित विश्व प्रसिद्ध रणथंभोर बाघ अभ्यारण को देखने की परिवार के सदस्यों को तीव्र उत्कृष्टता हुई सभी ने मिलकर रणथंबोर को भ्रमण का कार्यक्रम तैयारी किया।
हम सभी ने 9 अक्टूबर को जयपुर से रेल देवरी सवाई माधोपुर के लिए रवाना हुई एक का एक मेरी बेटी ने मुझे पिताजी यह सवाईमाधोपुर कितनी दूर है।

मैंने बताया कि बेटी रेल मार्ग द्वारा जयपुर सवाई माधोपुर की कुल दूरी 132 किलोमीटर है। 

वहां हमने रेलवे स्टेशन के पास ही एक होटल में कमरा लिया और कुछ समय आराम किया।
सुबह उठकर सभी ने जल्दी-जल्दी स्नान से निवृत्त होकर बुकिंग खिड़की के लिए चल पड़े।
बुकिंग खिड़की हमारे होटल से लगभग कुछ ही दूरी पर थी बुकिंग खिड़की से प्रथम पारी में भ्रमण का टिकट लेना था बुकिंग खिड़की से ही उद्यान भ्रमण के लिए जिप्सी एक टैंकर मिलते हैं।

 जिसके द्वारा उज्जैन का भ्रमण करवाया जाता है हम सभी ने 6:00 बजे बुकिंग खिड़की पर पहुंच गई है। 

मैं आपको बता दूं कि रणथंबोर भ्रमण के लिए आप पारिवारिक सदस्यों में मेरी पत्नी मेरी दो बेटियां स्विंग ईवे श्रद्धा एक बेटा शुभम इस प्रकार कुल 5 सदस्य थे हम पांचों जिप्सी में सवार हो चुके थे रणथंबोर अभ्यारण की ओर निकल पड़े रणथंभोर बाघ अभ्यारण क्षेत्र की शुरुआत खिलचीपुर ग्राम पंचायत गणेश्वर धाम सिरोही से होती है जिसकी दूरी सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन से कुछ ही दूर है यहां अभ्यारण में प्रवेश करने के लिए चेक पोस्ट बनी हुई है।

शिवांगी भैया यह पानी कहां से आ रहा है।

हम बातों ही बातों में गणेश धाम सिरोही पर कब पहुंच गए। 

सच पूछो तो इसके दो कारण थे एक तो रणथंबोर के प्रति हमारी उत्कृष्टा और दूसरी और बच्चों द्वारा पहुंचा जा रे नए नियम प्रशन।
वैसे तो रणथंबोर की हरीतिमा सवाई माधोपुर नगर से निकलते ही प्रारंभ हो जाती है लेकिन गणेश धाम किराई के पश्चात घने जंगल की शुरुआत होती है हमने सभी में एक गाइड भी लिया था जो हमने नई जानकारियां दे रहा था। यूं ही हमने हरियाली से आच्छादित क्षेत्र में प्रवेश किया उससे सुर में दृश्य को देखकर सभी रोमांचित हो गई है और सभी के चेहरे खिल उठे।
सर्वप्रथम हमने मिस रुद्रा दरवाजा देखा हुआ

कल कल करते बहते झरने हुए को मुख से गिरता पानी देखा बहुत ही मनोहारी दृश्य था। 

मेरी बेटी शिवांगी ने गाइड से बातों ही बातों में जानकारी ली।
शिवांगी भैया यह पानी कहां से आ रहा है। गई पहाड़ों के ऊपर छोर पर एक पानी बहकर जड़ने के रूप में यहां आ रहा है। शिवांगी भैया यह अभ्यारण क्षेत्र कितने वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है गई पूर्व में रणथंबोर बाग क्षेत्र क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 13 से 34 पॉइंट 6 वर्ग किलोमीटर था।

शिवांगी बाघों की बढ़ती संख्या एवं भागों के परसूर घटकर से क्या तात्पर्य है। 

पूर्व में बाघों का शिकार हो जाने के कारण बाबू की संख्या घट गई थी केंद्र व राज्य सरकार तथा वन विभाग के प्रयासों से बाघों के शिकार पर रोक लगी और बाघों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी बाघ अपनी एक निर्धारित क्षेत्र बनाते हैं जिसका क्षेत्र लगभग 2 वर्ग किलोमीटर होता है उसे तो दूसरे भाग के प्रवेश करने पर उनमें टकराव की स्थिति बन जाती है। इस तरह शिवांगी ने गाइड से सारी जानकारी ली।

प्रातकाल की गिन्नी धूप में दोनों मस्त हो बेटे थे।

गाड़ी के बिल्कुल सामने झड़ने के किनारे एक बाघ और बाघिन धूप सेकते हुए दिखाई दिए। 

 बाग इन बाग के बालों को अपनी जीभ से साफ कर रहे थे गाइड ने बताया कि इस स्थान का नाम चिड़ी कोड है तथा यह दोनों भाग बाकी मां बेटे हैं।
बाघिन के नाम नूर और बाघ का नाम सुल्तान है यह रणथंबोर अभ्यारण में बाघों को नाम व नंबर दिए हुए हैं जिससे इनकी पहचान होती है बाघ बाघिन की हथेलियों हमने लगभग आधे घंटे तक नहीं हो रही है मनोहर में दृश्यता धूप उनके बदन को की चमक को बढ़ा रही थी काली धारियां और सफेद रंग की जाए उनके शरीर की शोभा को कई गुना बढ़ा दिया था।

बागोर बहुत सावधानी और चकना वन्य प्राणी होता है। 

 पानी के किनारे पर्स रे बाबू को मारा वह जम रहना अच्छा नहीं लगा होगा वह दोनों आराम से उठे अपनी रूबी मुद्रा में पूछ उठाई और धीरे-धीरे झाइयों के जुर्म में हमारी नजरों से ओझल हो गई गाइड के निर्देश पर हमारी गाड़ी आगे बढ़ी उसने जंगल में अनेक जंगली जानवर देख कर जिनके चुनकर आगरा भालू बंदर जंगली बिल्ली अनेक प्रकार के पक्षी थे।

बर्मन की समय सीमा नजदीक आ जाने के कारण हम मुख्य द्वार की ओर आगे बढ़े लगभग समय बीत चुका था।  

हम रणथंबोर के ऐतिहासिक दुर्ग के मुख्य द्वार पर पहुंच गए रणथंबोर दुर्ग को देखना जान पड़ता है कि यह इतिहास में बहुत प्राचीन और अभिजीत ग्रुप है। 
गाइड ने बताया कि इस ग्रुप के निर्माण का कहीं कोई इतिहास नहीं मिलता यहां के प्रतापी राजा राव अमीर व्यक्ति थे माना जाता है कि इस ग्रुप का निर्माण 1380 पूर्व हुआ था।
मेरी बेटी सीरियल ने गाइड शेर राव हमीर के बारे में पूछा गाइड ने बताया कि राव हमीर महान प्रतापी और शरणागत वत्सल राजा थे।

इस जानकारी लेते हुए पैदल ही आगे बढ़ रहे थे।

इस जानकारी लेते हुए पैदल ही आगे बढ़ रहे थे। 

चलते चलते हम रुक के प्रथम द्वार पर पहुंचे क्या विशाल दरवाजा था देखते ही हमारी आंखें फटी की फटी रह गई। इस नौलखा दरवाजा कहते हैं नौलखा दरवाजा में प्रवेश करें हम ग्रुप में आगे ही और बड़े आगे हमें हाथीपोल दरवाजा दिखाई दिया। यहां से दुर्ग की दीवार बिल्कुल सीधी है कहते हैं कि यह हमीर का घोड़ा अमीर को लेकर सीधा ग्रुप पर चढ़ा था हमें घोड़े के खुर के निशान देखकर आश्चर्यचकित रह गई दुर्गा मनोहर में दृश्य देखते देखते हम अंधेरी दरवाजे पर पहुंचे।

एक साथ तीन दरवाजे हैं तथा इन दरवाजों में अंधेरा रहता है।

अंधेरी दरवाजों को पार कर हम ग्रुप के ऊपर छोर पर आ पहुंचे वहां से चारों और दृश्य डालने पर हरियाली से आच्छादित जंगल बहुत ही सुंदर दिखाई दे रहा था यहां से थोड़ी आगे बढ़ने पर हमें खंभों की छतरी दिखाई दी लगभग 1 किलोमीटर की दूर की दुर्घटना चढ़ाई चढ़ने के पश्चात 32 खंभों की छतरी जाकर बैठे तो यह शीतल बयार बह रही थी।

गाइड ने बताया कि ग्रुप के सपोर्ट मैदान पर निर्मित। 

 यह छतरी राव हमीर के शासनकाल में चारों ओर से हवा खोल सभा दरवाजा विचार-विमर्श विश्राम व आमोद प्रमोद की जगह थी
 जिसका उपयोग काफी पर्यटक इन कामों के लिए करते हैं इस छतरी पर लगभग आधे घंटे विश्राम किया विश्राम पश्चात हम आगे बढ़े सपाट मैदान में एक और राव हमीर का महल खड़ा दिखाई दिया।
कहा जाता है कि राव हमीर की पुत्री पद्मावती इस तालाब में पारस पत्थर लेकर कूद गई थी पद्मावती के आत्म बलिदान के कारण इस तालाब का नाम पदमल पड़ा इस तालाब के पानी से किले में जलापूर्ति की जाती है हमने रानी हो तालाब को देखा काली मंदिर के नजदीक स्थित है गहराई वाला यह तालाब रानियों के स्नान करने के लिए था।

सुभाष चंद्र बोस का पत्र।

पिछले कुछ महीनों से आप को पत्र लिखने की सोच रहा था।

जिसका कारण केवल यह है कि आप तक ऐसी जानकारी पहुंचा दूं जिसमें आपको दिलचस्पी होगी मैं नहीं जानता कि आपको मालूम है। या नहीं कि मैं यह गत जनवरी से कारवास में हूं।
जब ब्रह्मपुत्र जेल में मुझे मॉडल जेल के लिए स्थानांतरण का आदेश मिला था तब मुझे यह समझ नहीं आया था कि लोकमान्य तिलक ने अपने कार्यकाल का अधिकांश भाग मॉडल जेल में ही गुजारा था इस चार दीवार में यहां के बहुत ही हतोत्साहित कर देने वाले परिवेश में स्वर्गीय लोकमान्य ने अपने सुप्रसिद्ध गीत वशीकरण कब परिणाम किया था।

जेल के जींस वर्ल्ड में लोकमान्य रहते थे वह आज तक सुरक्षित है।

 यद्यपि उस में फेरबदल किया गया है।
और उसे बड़ा बनाया गया है हमारे अपने जेल के बोर्ड की तरह हुए लकड़ी के तत्वों से बना है जिसमें गर्मी में लू उर्दू से वर्ष में पानी से शीत वर्षा ऋतु में सर्दी से तथा सभी ऋतु में धूल भरी हवाओं से बचाव नहीं हो पाता मेरे यहां पहुंचने के कुछ ही क्षण बाद मुझे उस वर्ड का परिचय दिया गया मुझे यह बात अच्छी नहीं लग रही थी कि मुझे भारत से निष्कासित कर दिया गया था।

हम जानते हैं कि लोकमान्य ने कार्रवाई में 6 वर्ष बिताए लेकिन मुझे विश्वास है।

 कि बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि उस अवधि में उन्हें किस हद तक शारीरिक और मानसिक यंत्रणा से गुजरना पड़ा था।
वहां एकदम अकेले थे और उन्होंने कोई बौद्धिक स्तर का साथी नहीं मिला मुझे विश्वास है कि उन्हें किसी अन्य बंदी से मिलने जुलने नहीं दिया जाता था।
यह था सुभाष चंद्र बोस पत्र का जवाब सुभाष चंद्र बोस कब पत्थर पूरा हो चुका है।

Friday, October 4, 2019

राजू ने रेल गाड़ी को रुकवा दिया।

राजू ने रेल गाड़ी को रुकवा दिया सभी ने राजू की सूझबूझ की प्रशंसा की।

अगले दिन समाचार पत्रों में उस घटना का विस्तृत वर्णन छपा वहां के स्टेशन मास्टर ने भारत सरकार से राजू को पुरस्कार देने की सिफारिश की 26 जनवरी के दिन राजू को वीर बालक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
तब राजू ने सभी गांव वालों से शिक्षा ली कि समय से पहले सूचना ही सबसे बड़ा काम होता है

 राजू उस समय अपना दिमाग नहीं लगाता तो बहुत बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।

 जब तक स्टेशन मास्टर आता तब तक तो दुर्घटना हो जाती है अगर राजू ने अपने वस्त्र खोल कर उस ट्रेन के आगे नहीं ढूंढना शुरू किया तो ट्रेन वहां आ जाती और पटरी टूटी हुई थी जिसके कारण बहुत बड़ी दुर्घटना हो सकती थी राजू ने अपने दिमाग से उस ट्रेन को रोक दिया जिससे गांव वाले बहुत प्रसन्न हुए पूरे ट्रेन में सफर कर रहे व्यक्ति ने राजू को प्रशंसा की।

राजू के पिताजी बहुत खुश हुए और राजू को सबसे अच्छी स्कूल में पढ़ाया। 

और बहुत बड़ा अफसर बना दिया और सारे ट्रेन वाली को उसके ऊपर गर्व हुआ और सभी ने राजू को और हौसला बढ़ाया और राजू ने आज बहुत बड़ी तरक्की कर ली है।
राजू को सफल होते देख सारे गांव वाले बहुत खुश हुए और उस दिन ट्रेन से सभी लोगों को बचाने के लिए ट्रेन वालों ने राजू को बहुत हिम्मत दी जिससे राजू आज बहुत ऊंचे स्तर पर पहुंच गया और सारे देश वालों की सेवा करने लगा।

अभी मैं थोड़ी ही दूर चला था कि उसने एक जगह रेलवे पटरी उखड़ी हुई दिखी।

राजू की बुद्धिमानी एक दिन राजू गांव से अपने पिताजी के लिए खाना देने जा रहा था।

अभी मैं थोड़ी ही दूर चला था कि उसने एक जगह रेलवे पटरी उखड़ी हुई दिखी। रेलवे पटरी उखड़ी देखकर उसके होश उड़ गए इस घटना को देखकर में तेजी से रेलवे चौकी की ओर भागा चौकी पहुंचते ही उसने सारी घटना अपने पिताजी को सुनाई राजू की बात सुनकर उसके पिताजी विषय में ठहरने के लिए किधर से निकले निकट की स्टेशन की ओर दौड़ पड़े अभी थोड़ी ही समय समय बीता था कि दूसरी ओर से रेलगाड़ी की सिटी सुनाई पड़ी हुए सूचना लगा यदि इसकी सूचना ड्राइवर को समय पर नहीं दी गई।

तो बहुत बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

संयोगवश राजू ने उस दिन लाल रंग की कमीज पहन रखी थी उसने जल्दी से अपनी कमीज़ उतारी और उसे हिलाते हुए उसी और दौड़ना प्रारंभ किया जिस ओर से रेलगाड़ी आ रही थी।
ग्रेवल ने लाल रंग का सिग्नल देखकर गाड़ी की चाल धीमी कर दी।

धीरे-धीरे गाड़ी रुक ड्राइवर ने राजू से पूछा क्यों क्या बात है गाड़ी क्यों रुक गई।

गड्डी रुकने पर सभी यात्री नीचे उतर आए उन्होंने भी गाड़ी रुकवाने पर राजू को बुरा भला कहा परंतु जब राज्यों ने उन्हें सारी घटना के बारे में बताया तो वह सब राजू के साथ उसकी सत्यता जानने के लिए चल पड़े।
राजू उन सबको लेकर उसी स्थान पर पहुंचा ही था कि उसके पिताजी भी स्टेशन मास्टर को साथ लेकर वहां पहुंच गए।

मेहनत रंग लाई एक छोटा सा गांव था।

गांव का नाम रामपुर था यहां गांव चार और पहाड़ियों के बीच बसा था।

पास में एक नदी बेटी थी वर्षा के दिनों में जब नदी उफन थी तब रामपुरा का संपर्क उस पार के गांव से टूट जाता बाढ़ में कभी कोई आदमी बह जाता।
कभी कोई बच्चा हजारों जानवर का पता तक नहीं लगता बाढ़ इतनी उत्तरण पर चारों और कीचड़ की कीचड़ हो जाता जिससे गांव वालों की गाड़ियां फंस जाती इस प्रकार महीनों रामपुरा का संपर्क पार के गांव से टूट जाता है यह दुख सभी का था किंतु कोई भी कुछ नहीं कर पाता।

गांव का ही एक छात्र इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करके वहां आया हुआ था।

उसने समझाया कि इस मुसीबत से छुटकारा तो पुल बनाने पर ही मिल सकता है इस सुझाव से सारे गांव वाले सहमत हो गए युवकों ने कहा कि विपुल के लिए प्रतिदिन 2 घंटे काम करेंगे सावित्री बहन नहीं स्त्रियों की ओर से विश्वास दिलाया कि वह भी अपने भाइयों से पूछे नहीं रहेगी।
ठेकेदार ने चुना मिट्टी और पत्थर लाने के लिए अपनी गाड़ी देने का वचन दिया विद्यार्थियों ने कहा कि वे टोलियां बनाकर नियमित श्रमदान करेंगे बस फिर क्या था पुल बनना शुरू हो गया।

पासी की पार्टी से बैलगाड़ी पत्र ला रही थी गधे वाले बिना पैसे रेतला रहे थे पानी तो नदी ही कथा ही।

गांव के युवक युवतियां और छात्र सभी पुल के निर्माण में हाथ बंटा रहे थे सारा गांव एक लक्ष्य से जुड़ गया था थोड़े ही दिनों में पुल के खंबे दिखाई देने लगे गांव के लोगों ने सरकारी अधिकारियों तक भी अपनी बात पहुंचाई उनकी भी खुली हुई उन्होंने फूल के लिए आर्थिक सहायता के लिए एक अधिकारी भेज दिया एक बार काम शुरू हुआ तो फूल बन कर ही लोगों ने दम लिया।

सोनपुर गांव में एक कुमार रहता था वह मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए प्रसिद्ध था।

आपसी सहयोग बीच में पहले की बात है।

सोनपुर गांव में एक कुमार रहता था वह मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए प्रसिद्ध था। उसके बनाए गए बर्तन दूर-दूर तक बिकने के लिए जाते थे एक दिन कुमार को अपने आप पर बड़ा घमंड हुआ वह सोचने लगा कि यह घड़ा मेरा बनाया हुआ है यह मेरी मेहनत का फल है मिट्टी कुमार के इस घमंड को सहन न कर सके।
उसने कुमार से कहा यदि मैं नहीं होती तो तुम गढ़ा कैसे बनाते कुमार चुप रहा परंतु पानी को यह बात पसंद नहीं आई उसने मिट्टी से कहा मिट्टी बहन यदि मैं नहीं होता तो तुम और कुमार क्या कर सकते थे चाहिए सब सुन रहा था।

उसने तीनों से कहा यदि आप तीनों होते और मैं नहीं होता तो क्या यह घड़ा बन सकता था।

आपको चारों की मृत्यु पर हंसी आ गई उसने कहा यह क्यों भूल जाते हो कि तुम सब होते और मैं नहीं होती तो यह घड़ा पकता कैसे।

मेरी गर्मी के कारण ही तो यह पकता है सच तो यह है कि गड़ा में सब मेल का फल है।

हम मिल जुल कर रहना चाहिए हम एक दूसरे के मेल के बिना अधूरे हैं उस दिन से किसी ने अपने आप पर घमंड नहीं किया सब ने समझ लिया कि आपसी सहयोग से ही नहीं वस्तु बन पाती है अतः बच्चों आपसे सहयोग के लिए बिना कोई भी कार्य पूर्ण नहीं हो सकता।
हमें शिक्षा यह मिलती है हम सदैव मिलजुल कर कार्य करना चाहिए जिससे कार्य में उन्नति हो और हमारा कार्य भबड़े।

पर्यावरण प्रदूषण हमारे देश की एक प्रमुख समस्या है।

आज संसार के छोटे बड़े देश इस समस्या से परेशान हैं।

और इसके निराकरण के लिए परिषद प्रयत्न कर रहे हैं पर्यावरण शब्द परी प्लस आवरण के योग से बना है परी का अर्थ चारों और आवरण का अर्थ है ढकने वाला अत्य पर्यावरण शब्द का अर्थ एवं चारों ओर से ढकने वाला।
प्रदूषण चार प्रकार का होता है भूमि प्रदूषण वायु प्रदूषण ध्वनि प्रदूषण और जल प्रदूषण आज व्यक्ति भौतिक सुखों को प्राप्त करने के लिए वनों को अंधाधुन काट रहा है बच्चे यह उन सभी को पता है कि वनों से हम लकड़ी खाद्य पदार्थ आदि प्राप्त होते हैं।

वनों की लगातार कटाई से भूमि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है कल कारखाने का विषैला दुआ वायुमंडल को दूषित कर रहा है।

विज्ञान की प्रगति और यातायात के अनेक साधनों के कारण प्रदूषण निरंतर बढ़ता ही जा रहा है इस बढ़ते हुए प्रदूषण के कारण मनुष्य आज के बीमारियों से ग्रस्त हो रहा है।

जिस आंखों की बीमारियां फेफड़ों के रोग आदि।

यातायात के साधन मशीन और कल कारखाने इतना शोर उत्पन्न करते हैं कि कान के पर्दे फटने लगते हैं आज हम छोटे से छोटे कार्यों में भी लाउडस्पीकर ओ का उपयोग करते हैं हमारी यह लापरवाही ध्वनि प्रदूषण को बढ़ावा दे रही है।
कल कारखानों द्वारा उत्पादित बेकार पदार्थो और दूषित जल को नदी नालों में बहा दिया जाता है जिससे जल प्रदूषण बढ़ता है जल प्रदूषण के और भी कई कारण हैं जिसे नदी नालों के किनारे शौच क्रिया करना जानवरों को जल महल आना घाटों पर वस्त्रों को धोना आदि जल प्रदूषण अक्षय पेट संबंधी कई बीमारियां उत्पन्न हो रही है।

लड़का अपनी बहन के पास जाकर रोने लगा।

रामू काका अपने बेटे से परिश्रम कराते हुए।

लड़का अपनी बहन के पास जाकर रोने लगा। मैंने अपना बटुआ खोलना उसमें से 10 निकाले और भाई को दे दिए रात को पिता ने अपने बेटे से पूछा आज तुमने क्या कमाया।
बेटे ने जेब से 10 निकाल के पिता के सामने रख दी बिताने का इन्हें कुएं में फेंक और लड़के ने तत्व के साथ आज्ञा का पालन किया। अनुभवी पिता सब कुछ समझ गया दूसरे दिन उसने अपनी बेटी को ससुराल भेज दिया इसके बाद उसने एक दिन फिर बेटे को बुलाकर कहा जाकर कुछ कमा करना नहीं तो रात को खाना नहीं मिलेगा।

बाजार में उसे एक सेठ मिला सेठ ने कहा मेरा संदूक उठाकर घर ले चल मैं तुझे 10 दूंगा।

राम ने संदूक उठाओ सेठ के घर पहुंचाया लेकिन उसकी सारी द है पसीने सेतर थी।
पांव कांप रहते पीठ और गर्दन में दर्द हो रहा था।
रात को पिता ने बेटे से पूछा आज तुमने क्या कमाया।

लड़के ने जेब से 10 निकाल कर पिता के सामने रख दिया पिता ने कहा जाए ने कुएं में फेंका आओ।

लड़की की आंखों में क्रोध की ज्वाला निकलने लगी हुए बोला मेरी गर्दन टूट गई है और आप कहते हैं इसे कुएं में फेंका अनुभवी यह सब कुछ समझ गया।
अबे अपनी कमाई का महत्व समझ गया था दूसरे दिन से रामू अपने पिता के साथ खेतों में काम करने जाने लगा दोनों के परिश्रम से खेतों में भरपूर फसल हुई जिससे हुए कुछ साल हो गए।

विजय बहुत ही परिश्रमी किसान था।

मेहनत की कमाई एक गांव में विजय नामक किसान रहता था।

विजय बहुत ही परिश्रमी किसान था। वह अपने खेतों में कठिन परिश्रम करता था इसलिए उनके खेतों में फसल बहुत ही अच्छी होती थी विजय काका में 1 गुण और था कि वह पूरे गांव की यथासंभव मदद करते थे जिससे पूरा गांव उनका विजय काका कहकर पुकारता था।
विजय काका सभी तरह से सुखी थे परंतु उनका एक दुख था कि उनका एक बेटा था जिसका नाम रामू था वह मां के लाड प्यार से रामू बिगड़ गया था वह आराम मतलब तो तब भी परवाह हो गया था परिश्रम करने से हमेशा कतरा तथा विजय काका अपने बेटे को सुधारना चाहते थे।
इसलिए उन्होंने एक दिन अपने बेटे को अपने पास बुलाया और कहा जाकर कुछ कमा कर लाओ नहीं तो रात को खाना नहीं मिलेगा रामू सीधा अपनी मां के पास गया और रोने लगा।

मां ने बेटे की आंखों में आंसू देखे तो मैं बेचैन हो गई।

उसने अपना संधू खोला और 10 निकालकर बेटे को दिए रात को पिता ने बेटे से पूछा आज तुमने क्या कम है।
लड़के ने जेब से 10 निकाल कर पिता के सामने रख दिए।

बाप ने कईले कुएं में फेंका हूं लड़के ने तुरंत पिताजी की आज्ञा पालन किया।

दीनू सब कुछ समझ गया।
दूसरे दिन उसने अपनी पत्नी को मायके भेज दिया दूसरे दिन उसने फिर अपने बेटे को बुलाया और कहां जाकर कुछ कमा कर लाओ।
और नहीं तो शाम को खाना नहीं मिलेगा।

स्वच्छता एवं स्वास्थ्य एक मानवीय गुण है।

जब तक हम इस अपनी जीवन में नहीं अपनाते इसका अभाव हम अपने चारों ओर दिखाई देता है।

कई लोग अपने घर का कूड़ा कचरा कचरा पात्र नहीं डालकर उसे सड़क पर ही फेंक देते हैं जिससे वह कचरा सड़क पर ही सड़ता रहता है और बीमारी के कीटाणु को जन्म देता है जिससे हम बीमार हो सकते हैं।
सोचता तन की मंकी और बाहर सभी की होनी चाहिए प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठना सुबह-शाम नियमित समय पर सो जाना नित्य दांतो की सफाई करना स्वच्छ जल से स्नान करना मौसम के अनुसार स्वच्छ वस्त्र पहनना प्रातकाल खुशी हवा में घूमना शाम के समय नियमित रूप से कोई खेल खेलना।

आदत ऐसी है जो मरे स्वस्थ को बनाए रखती है।

सोच तन में सोच मन का वास होता है सोचता तभी रहेगी जब हम सभी घर में गली मोहल्ला सभी जगह से कोई रखेंगे यदि व्यक्ति सोच रहेगा तो उसका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा जिससे उसकी कार्य करने की क्षमता में वृद्धि होगी कार्य करने से देश में समृद्धि आएगी और हम समृद्ध होंगे।
लोग बसों में रेल में सफर करते समय कचरा फैलाते रहते हैं यह गलत आदत है यदि हम लोग ध्यान रख के कागज के टुकड़े छिलके फेंकने लायक चीजें अगर कचरा पात्र में ही डाले तो वातावरण को स्वच्छ रखा जा सकता है।

स्वच्छता का संबंध व्यक्ति के स्वास्थ्य से है हम देखते हैं।

कि प्रतिदिन कितनी धूल उड़ती है हमारी त्वचा में छोटे-छोटे कौन होते हैं।
छिद्रों से पसीना निकलता है इन पर धूल मिट्टी जम जाती है यदि हम प्रतिदिन स्नान न करें तो धीरे-धीरे छिद्र बंद हो जाते हैं इसे पसीना निकलने में रुकावट आने लगती है जिससे हम बीमार पड़ सकते हैं।