Saturday, 14 September 2019

नागौर में विशाल दरबार का आयोजन किया गया।

तूने पहली बार अजमेर में शेख मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह की यात्रा की रास्ते में आमेर के राजा भारमल से उसकी भेंट हुई।

 यह राजपूताने का प्रथम शासक था जिसने अकबर की अधीनता स्वीकार की और अपनी पुत्री का विवाह अकबर ने चित्तौड़ को करने का निश्चित अकबर ने चित्तौड़ पर अपनी सेना को भेजने का अभियान चलाया था।
उदय सिंह चित्तौड़ दुर्ग को जीवंतता नामक दो वीरों को संस्कृत पहाड़ियों में चला गया कड़े संघर्ष के बाद अकबर ने चित्तौड़ टू कोच्चि दिया। ग्रुप में राजपूत स्त्रियों ने जौहर किया चित्तौड़ के प्रचार पर आक्रमण किया। नागौर में विशाल दरबार का आयोजन किया गया।

जोधपुर और बीकानेर के साथ कौन अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली महाराणा प्रताप का मानसून कथा।

प्रताप ने मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं। की और मेवाड़ के गौरव की रक्षा की मुगलों के लोक देवता अपने अपने क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया। हल्दीघाटी के युद्ध के पश्चात अकबर ने कबूल कश्मीर सिंह उड़ीसा कंधार आदि, पर निर्णय तक प्राप्त किए हुए खानदेश को चांदी के प्रबल प्रतिरोध का सम्मान करते हुए अहमदनगर पर विजय प्राप्त की प्राप्त की।
जिससे धार्मिक विचार विमर्श हुआ करता था इशरत खान में अन्य धर्म संप्रदायों जैसे हिंदू जैन पारसी तथा ईसाई धर्मावलंबी भी विचार विमर्श करते हुए नजर आते थे।
अकबर के दरबार में नवरत्न ओं को संरक्षण प्रदान किया गया जिनमें बीरबल तानसेन अबुल फजल में फौजी आदि प्रमुख थे।

 सूफी संत शेख सलीम चिश्ती के आशीर्वाद से अकबर को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।

 जिसका नाम सलीम रखा गया यह सलीम आगे जाकर जहांगीर के नाम से अकबर का उत्तराधिकार सलीम मंसूरी दीन मोहम्मद जहांगीर बादशाह की विधि के शासन प्रशासन ने के कुछ समय बाद ही जागीर के पुत्रों ने विद्रोह कर दिया पुत्र था।
सजा के बचपन का नाम थावे जोधपुर के मोटर राजा उदय सिंह की पुत्री जगत शाहजहां के काल में खा जा लो दिव्य ज्वर सिंह का विद्रोह हुआ। जिसे दबा दिया गया संजय ने दक्षिण भारत में भी शामिल जीविका नीति को अपने असांजे ने चार पुत्र थे औरंगाबाद आगरा में कैद कर दिया।
अपने पिता को बंदी बना कर देता भाइयों की युद्ध में पराजित कर औरंगाबाद का राशि विषय हुआ उसने उसने अकबर की तरह उपाधि ग्रहण की।

भूमि उपयोग परिवर्तन के उदाहरण है।

वही कम वर्षा के रेगिस्तानी प्रदेशों में वनस्पति और वन्य जीवन हम यह कह सकते हैं।

 वनस्पति और वन्य जीवन और जलवायु और स्थिति का एक मिश्रण रूप है, विश्वास और प्रयासों पर जलवायु और स्टाइल करती का स्पष्ट प्रभाव दिखा देता है।
किसी भौगोलिक परिवेश में स्थित वृक्ष छोटे पौधे बताएं झाड़ियां घास कोई आदि को सम्मिलित रूप से वनस्पति कहा जाता है, प्राकृतिक वनस्पति भौगोलिक दशा में विकसित होती है।
सर्व पहुंचाए में बिनता होती है। निष्कर्ष रूप में प्राकृतिक वनस्पतियों का तरीका जल का प्रभाव रहता है। पश्चिमी राजस्थान में इंटर रूम में राजस्थान मरुस्थलीय भूमि के ब्यावरा को भूमि उपयोग परिवर्तन हुआ है, जो भूमि पर ले बेकार पड़ी रहती थी। वर्तमान में उसी भूमि का उपयोग करसोग नहर परिवहन सौर ऊर्जा संयंत्र में किया जाता है। या उपयोग परिवर्तन का  इसी प्रकार विश्व के कुछ भागों में दलदली भूमि को सुखाकर उस आवास एवं अन्य उपयोगों में किया जाए कृषि भूमि का प्रतिशत विश्व के कुल भौगोलिक क्षेत्र का मात्र  ही है। तथा  वर्ष के मैदानों का प्रतिशत घटकर रह गया है, भूमि उपयोग परिवर्तन के उदाहरण है।

बदलते समय के साथ विश्व के सभी क्षेत्रों में भूमि उपयोग में परिवर्तन होता रहा है। 

क्योंकि जनसंख्या वृद्धि के साथ आवाज कृषि उद्योग परिवहन आदि की आवश्यकता पड़ती है, जिससे इनमें भूमि का उपयोग बढ़ता जा रहा है। लेकिन विश्व के कुल क्षेत्रफल को नहीं बढ़ाया जा सकता है। तो किसी दूसरे कार्य का भूमि उपयोग कम हुआ है। और इसे ही भूमि उपयोग में परिवर्तन कहा जाता है, वनों को काटकर कृषि और चरणों को विकास करना। पहाड़ों को काटकर रास्ता बनाना।
बंधनों को सुखाकर कर सिद्ध करना समुद्रों के पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ाओ करके नगरों का विकास एवं कृषि करना खनन शुरू करना आदि। भूमि उपयोग परिवर्तन के उदाहरण है, नीचे दिए गए से स्पष्ट है।

भारत में पिछले कुछ दशकों में भूमि उपयोग से व्यापक परिवर्तन हुए हैं, भारत में भूमि उपयोग  हुए हैं।भारत में वन एवं वन्य भूमि उपयोग में वृद्धि हुई। 

तथा कृषि चारागाह एवं बंजर भूमि के उपयोग की कमी आ रही है। इसे भूमि निम्नीकरण या भूमि की गुणवत्ता में कमी आ कहा जा सकता है। भूमि और अन्य प्राकृतिक व मानवीय दोनों कारणों से होता है, लेकिन मानवीय कारणों से होने वाला भूमि अवनयन वर्तमान में चिंता का विषय है, मानचित्र से स्पष्ट है। कि विषय का अधिकांश भाग मानव द्वारा भूमि के उपयोग अधिक दोहन के कारण भूमि अवनी की समस्या से ग्रसित है।
 ऐसी भूमि का उपयोग लगातार कम हो रहा है, इससे कृषि वनस्पति मानव विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। मानचित्र में भारत की भूमिका की स्थिति को देखिए सामान्य  भारत में भूमि अधिनियम की समस्या  की जाती है।

तार के इस गर्म मरुस्थल की जलवायु बहुत सुस्त है।

किसी क्षेत्र के निवासियों के भौतिक पर्यावरण के बीच होने वाली क्रिया प्रक्रिया भी अलग-अलग होती है। 

आइए हम अध्याय 6 एवं साथ भिन्न-भिन्न भौतिक पर्यावरण क्षेत्रों में मानवीय गतिविधियों को समझने का प्रयास करते हैं। सर्वप्रथम मरुस्थलीय परिवेश में मानव की गतिविधियों को समझते हैं। हम विषय में पाए जाने वाले सामान्य वर्ग में रख सकते हैं, इनके हैं। एक गर्म मरुस्थल हमारे राज्य के पश्चिमी भाग में स्थित है। जिससे हम थारी या मरुस्थल  हैं। आगे हम गर्म मरुस्थल के निवासियों का सामान्य जीवन बचाओ का जन करेंगे।
 राजस्थान में अरावली पर्वत के पश्चिमी मरुस्थल है। जो पंजाब एवं हरियाणा के दक्षिणी भागों से गुजरात के कच्छ रण तक फैला हुआ है, धार का मरुस्थल कहा जाता है।
संपूर्ण रेतीला मैदान है। जिसमें मिलते हैं, स्तूप कहा जाता है। किस के पूर्वी भाग में अरावली की पहाड़ियां पाई जाती है। तार के इस गर्म मरुस्थल की जलवायु बहुत सुस्त है। और मुख्य तक ग्रीष्म ऋतु में रेत की आंधियां चलती है। दिन में तापमान बहुत बढ़ जाता है।

 वही रात होते-होते तापमान कम हो इस क्षेत्र में वर्षा बहुत ही कम होती  है। 

जो वर्षा ऋतु में मानसूनी पावना द्वारा होती है। वर्षा की प्रकृति अनिश्चित और अनियमित होती है।
यहां अधिकतर छोटे कटीले वृक्ष और जा पाई जाती है। किन की पत्तियां मोटी और छोटी होती है। तथा जड़े लंबी और वृक्षों के तनोट पर कांटे होते हैं।
बबूल केजरी नोएडा क्षेत्र के मुख्य वृक्ष खनिज तेल का उत्पादन किया जा रहा है। इस प्रदेश में जनसंख्या का घनत्व राज्य में सबसे कम है। जल के अभाव के कारण जनसंख्या छोटे-छोटे गांव में जल स्रोतों के निकट अधिक पाई जाती है। नेहरू के विकास से सिंचित क्षेत्रों में अब जनघनत्व तेजी से बढ़ रहा है।
भौगोलिक दशाएं अधिक प्रतिकूल नहीं होने के कारण विश्व के सभी मरुस्थल की तुलना में इस मरुस्थल में सर्वाधिक घनत्व पाया जाता है। जलवायु मर्दा सलाहकार की वनस्पति जीव जंतु आदि इसी परिवेश के विभिन्न तत्व या कारक है।

 यह सारे तत्व या कारक एक दूसरे से मिलकर ऐसे परिवेश का निर्माण करते हैं।

जिसे हम पर्यावरण कहते हैं जो अन्य परिवारों से भिन्न होता है। मनुष्य रावण का एक अभिन्न हिस्सा है,
मनुष्य ने अपने उपयोग की वस्तुएं अपने आसपास के परिवेश से ही प्राप्त की है। हम प्रकृति के मनुष्य प्रकृति द्वारा प्रदत्त सांसदों का अति दोहन कर पर्यावरण का और अपने ही नुकसान किया गया है।
 साथ ही साथ मनुष्य ने अपने परिवार की रक्षा और उन्नत बनाने की चेष्टा की है। हमने पिछले जलवायु और जल के में विस्तार से पड़ा था। इस अध्याय में हम परिवार के प्रमुख घटक वन और वन्य जीवन के साथी मानव द्वारा सरंक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी चर्चा करेंगे। प्रतिज्ञा जलवायु प्रदेश में वनस्पति और वन्य जीवन एक ऐसा जैसा होता है।

इस कारण भारत राजनैतिक और सैनिक दृष्टि से कमजोर हो।

भारत के विभिन्न भागों में स्वतंत्र राज्य बन गए राज्यों में अपनी प्रभुता स्थापित करने के लिए संघर्ष छिड़ गया।

इस कारण भारत राजनैतिक और सैनिक दृष्टि से कमजोर हो। 
इस राजनीतिक स्थिति का लाभ उठाकर आक्रमणकारियों ने भारत पर आक्रमण भारत पर आक्रमण किया। भारत की संस्कृति के प्रतीक कहीं मंदिर और स्मारक नष्ट हो।
गए महमूद गजनवी के बाद और प्रदेश के महमूद गौरी ने भारत पर आक्रमण किया और भारत में मुस्लिम साम्राज्य की स्थापना का बीजारोपण किया।
गोरी ने भारत में कई लड़ाइयां लड़ी परंतु उसके अजमेर के शासक पृथ्वीराज चौहान के साथ लड़े। किंतु तराइन के दूसरे युद्ध में प्रति चौहान हार गया भारत के इतिहास में यह एक निर्णायक युद्ध था। इस विजय के बाद विदेशी आक्रमणकारियों को भारत में शासन सत्ता प्राप्त करने का अवसर मिल गया।

भारत में गोरी का अंतिम अभियान समाप्त कर गोरी जब लौटा तो उसकी अचानक मृत्यु से उसके सेनापति और सुधारों ने शुरू हो गया इसमें गोरी का गुलाम और कुतुबुद्दीन है।

इसके साथ ही भारत में प्रथम मुस्लिम शासन की स्थापना हुई। इस दौरान विभिन्न राजवंशों ने दिल्ली पर राज किया जिनमें दास वंश खिलजी वंश वंश सैयद वंश और लोदी वंश प्रमुख हैं।
इन वनों को स्थान से निरंतर चुनौती मिलती रही हमें रणथंभौर के चौहान शासकों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण सकता है। और उसके हुई थी। ऐसी स्थिति में दिल्ली की ओर से निश्चिंत होकर यात्रा प्रारंभ की  सुल्तान के आदेश पर उल्लू और नुस्खा सेना लेकर रणथंबोर की और बड़े दोनों की संयुक्त सेना ने ज्वाइन की ओर से रणथंबोर पर आक्रमण किया आसानी से जान पर अधिकार कर लिया। और जी भर कर नगर को लूटा मित्रवर के आदेश पर राजपूती सेना ज्वाइन की और बड़ी सेना को खदेड़ दिया। इसके निकट की दलदली क्षेत्र जाता है। जिसे प्रदेश कहते हैं। नदियों द्वारा बिछाई गई पुरानी जलोढ़ मिट्टी के मैदानों को बनाया जाता है। तथा नवीन जलोढ़ मिट्टी के मैदान को कहा जाता है, ग्रीष्म ऋतु में बढ़ती है।

तथा वातावरण से इस क्षेत्र में पहले काफी वनस्पति पाई जाती थी।

 किंतु आबादी एवं कृषि कार्य बढ़ने के कारण यहां वनस्पति क्षेत्रों में कमी आ गई है। पॉपुलर साल सम्मेलन बबूल हल्दु एवं कई प्रकार की घास पाई जाती है। पॉपुलर का उपयोग प्लाईवुड बनाने में होता है। मैदानों की भौगोलिक परिस्थितियों कृषि को बढ़ावा देती है।
यहां की उपजाऊ मिट्टी के कारण खेती होती है, जाता है। वहीं सर्दियों में गेहूं सरसों और ब्रुसली की अच्छी पैदावार होती है। वैसे तो यहां मिट्टी इतनी उपजाऊ है। कि कोई भी फसल उगा सकते हैं। इन फसलों में मक्का और प्रेस नीर का उपयोग जानवरों की भी खुराक के रूप में उपयोग होता है, या गन्ने की फसल भी उगाई जाती है।

अगर उपमेय और उपमान कि यह समानताएं तुलना के रूप में आती है।

भारत में आजादी के लिए संघर्ष चल रहा था राजनीति और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कवि लेखक रचनाकार भी जन जागरण के प्रयास कर रहे थे।

 प्रसाद जी ने अपने नाटकों में भारतवासियों में जागृति लाने के लिए भारत के उस गौरवपूर्ण अतीत का वर्णन किया है। जिसमें लोग अपनी आजादी बचाने रखने के लिए संघर्ष करता है, इस कविता में भी हम यह संकेत दिखाई पड़ता है।कि अंतिम पंक्तियों में अंधेरों में और अमन राठौर के स्वर में बंद मलीयत से में बातों का संकेत मिलता है। 
कि कवि ने आह्वान किया है कि सभी समझते होते हुए भी सुबह देने का क्या मतलब जबकि सारे संसार में हलचल हो रही है तो फिर सो मत जागो और अपने लिए और अपने गांव और अपने देश के लिए कुछ करके दिखाओ।
आप जानते ही होंगे कि पहले अधिकांश गांवों में पानी लेने के लिए घर से दूर हुए नदी तालाब आदि तक जाना पड़ता था इधर पोपटी सुबह हुई उधर स्त्रियों के लिए पानी भरने को निकली वह स्थान जहां स्त्रियां पानी भर्ती है पनघट कहलाता है।
 क्योंकि आजकल बढ़ती जनसंख्या और बढ़ती जनरेशन के कारण हमारे संस्कृति को धीरे धीरे सब कुछ होते चले जा रहे हैं। 

जो हमारे देश के लिए अच्छा नहीं है।

अपने कभी रात के अंधेरे में दिन के उजाले को धीरे धीरे फैलता देखा है अभी सूरज निकला नहीं है, पर उजाला होने लगा है चिड़िया चर्च आने लगी है। लोग जाकर अपना काम शुरू कर रहे हैं। सूरज निकलने से पहले के इस समय को उस आया उषाकाल कहते हैं।
कविता में अक्सर किसी के सौंदर्य वर्णन के लिए किसी दूसरी वस्तु से उसकी सामने तो बताई जाती है। जिसकी क्षमता बताई जाती है।
अगर उपमेय और उपमान कि यह समानताएं तुलना के रूप में आती है। तो मैं उपमान अलंकार होता है जबकि दोनों के बीच कोई भेद नहीं नहीं रहता वह रूपक अलंकार के लेता इन पंक्तियों में बराबर तारा और उत्साह से कर मांस पनघट पर जब एक दूसरे के सामने स्त्रियां मिलती है। 

तब जाकर वह अलंकार बनता है कि वह तो आपको आजकल देखने को ही नहीं मिलता होगा।

एक सुखी दूसरी से कहती है। कि है सकी अब रात बीत चुकी है और उसे उस रूपी उत्तरी आकाश रूपी पनघट में तारे रूपी घड़े को डूब रही अर्थ उसका उपवास हो गया है आकाश से रात की कालीन दूर हो गई है आसमान रंग दिखने लगा है आप जानते हैं। कि पानी कारण भी आसमान नहीं दिखाई देता है क्योंकि इसलिए यह आकाश की कल्पना पानी भरने के घाट पनघट के रूप में की गई है आकाश का रंग बदल रहा है। और तारों की जन्म झिलमिल आहट भी हल्के होते होते लुप्त होती जा रही है जैसे गड़ा दिखते दिखते से पानी के अंदर डूब जाता है, उसी तरह इस तरह बातें करते-करते इतनी डूब जाती है कि उनको पता ही नहीं चलता कि कितना समय बीत चुका है।

यह ट्रेनिंग एक कमांडो की तरह होती है।

सभी रास्ट्रवादियों से प्रार्थना है कि ऐसे सन्देशों को फॉरवर्ड न करें।

ध्यान रखिएगा कि पाकिस्तान अलगाववादियों की प्रोपेगंडा मशीन एक्टिव हो चुकी होगी। जिस उम्र में बाकी परिंदों के बच्चे चिचियाना सीखते है उस उम्र में एक मादा बाज अपने चूजे को पंजे में दबोच कर सबसे ऊंचा उड़ जाती है। पक्षियों की दुनिया में ऐसी  किसी भी ओर की नही होती।
जितने ऊपर आधुनिक जहाज उड़ा करते हैं और वह दूरी तय करने में मादा बाज  मिनट का समय लेती है।
यहां से शुरू होती है
उस नन्हें चूजे की कठिन परीक्षा। उसे अब यहां बताया जाएगा कि तू किस लिए पैदा हुआ है  तेरी दुनिया क्या है तेरी ऊंचाई क्या है तेरा धर्म बहुत ऊंचा है और फिर मादा बाज उसे अपने पंजों से छोड़ देती है।
धरती की ओर ऊपर से नीचे आते वक्त लगभग  उस चूजे को आभास ही नहीं होता कि उसके साथ क्या हो रहा है।  के अंतराल के आने के बाद उस चूजे के पंख जो कंजाइन से जकड़े होते है, वह खुलने लगते है।
लगभग  आने के बाद उनके पंख पूरे खुल जाते है।

यह जीवन का पहला दौर होता है जब बाज का बच्चा पंख फड़फड़ाता है।

अब धरती से वह लगभग 50 मीटर दूर है लेकिन अभी वह उड़ना नहीं सीख पाया है। अब धरती के बिल्कुल करीब आता है जहां से वह देख सकता है उसके स्वामित्व को। अब उसकी दूरी धरती से महज  होती है लेकिन उसका पंख अभी इतना मजबूत नहीं हुआ है की वो उड़ सके।
धरती से लगभग  मीटर दूरी पर उसे अब लगता है कि उसके जीवन की शायद अंतिम यात्रा है। फिर अचानक से एक पंजा उसे आकर अपनी गिरफ्त मे लेता है और अपने पंखों के दरमियान समा लेता है।
यह पंजा उसकी मां का होता है जो ठीक उसके उपर चिपक कर उड़ रही होती है।
यह ट्रेनिंग एक कमांडो की तरह होती है। तब जाकर दुनिया को एक बाज़ मिलता है अपने से दस गुना अधिक वजनी प्राणी का भी शिकार करता है।

हिंदी में एक कहावत है.बाज़ के बच्चे मुँडेर पर नही उड़ते।

बेशक अपने बच्चों को अपने से चिपका कर रखिए पर उसे दुनियां की मुश्किलों से रूबरू कराइए, उन्हें लड़ना सिखाइए। बिना आवश्यकता के भी संघर्ष करना सिखाइए।
वर्तमान समय की अनन्त सुख सुविधाओं की आदत व अभिवावकों के बेहिसाब लाड़ प्यार ने मिलकर, आपके बच्चों को "ब्रायलर मुर्गे जैसा बना दिया है जिसके पास मजबूत टंगड़ी तो है पर चल नही सकता। वजनदार पंख तो है पर उड़ नही सकता क्योंकि गमले के पौधे और जंगल के पौधे में बहुत फ़र्क होता है।

छींक भी साथ में चालू हो जाती है।

यदि इस प्रकार भी कड़क से नहीं निकलता तो चिकित्सक की सहायता लेनी पड़ती है।

तब जाकर हमें कहीं रात मिलती है कभी-कभी तो ऐसी हालत इतनी खराब हो जाती है। कि कुछ दिखाई नहीं देता है। और छींक भी साथ में चालू हो जाती है। लेकिन चीन के सभी को आती है। स्वस्थ दिन में एक दूसरे का जाना कोई विचित्र बात नहीं नाक के भीतर जरासी उत्तेजना हुई नहीं कि छीनी गई रसूल में मसालों के बोलने से छींक आ जाती है।कुछ व्यक्तियों को ही तत्व खुशबूदार तेलों से भी छींक आ जाती है। यदि अंकों के साथ साथ कभी आंख और नाक से पानी बहने लगता है  चीन गाना और नाक से पानी बहना शरीर का वह स्वाभाविक प्रति प्रक्रिया है। उनके द्वारा शरीर उन तमाम और हानिकारक पदार्थों के बाहर निकलने की चेष्टा करता है। जो वायु द्वारा नाक के भीतर चले जाते हैं हमारे शरीर की सुरक्षा व्यवस्था हम विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाती है। मुख्य द्वार पर कार्य करता है खाने-पीने के पदार्थ का स्वाद लेकर वे उस पर लेता है पदार्थ को मारे जाने से इंकार कर देती है। भूल से आया हुआ कोई बाल हमारे मुंह के अंदर चला जाता है। 
वह जो खींच मिक्सर कभी-कभी हमारे को छींक आती है तो उसके कारणों से बाहर आ जाता है। तो ऐसे में आप ध्यान रखें अपना शरीर का। वातावरण में ऐसी गिरी गुण होते हैं, हमारे शरीर में प्रवेश पाने का प्रयत्न करते हैं। 

ताकि उन्हें आश्चर्य के साथ साथ भोजन भी मनुष्य के शरीर के ऊतकों को खा खाकर यह लगते बढ़ते और प्रजनन करते हैं उनके प्रभाव से रोग उत्पन्न हो जाते हैं। 

भीतर प्रविष्ट होने से रोकने का प्रयत्न करें।
सोच लेते समय भाइयों के साथ माटी माटी के रोगाणु हमारी नाक से द्वारा भी तर जाते हैं। इनमें से कुछ को तो नाक के बाल ही भीतर जाने से रोक देते हैं कुछ रुग्ण कोना के भीतर के श्लेष्मा में चिपक कर फंस जाते हैं।
मेरे भोजन दूध पानी आदि में लुक चुप कर अनेक प्रकार के रोग हमारे मुंह के अंदर चले जाते हहैं। ो हमें वह सब संक्रमण रोग जैसे अनेक प्रकार की बीमारियां उत्पन्न करते हैं। ऐसी चीजों से बचने के लिए रोज स्नान करना चाहिए और अपने शरीर को साफ रखना चाहिए अच्छे वस्त्र पहनना चाहिए और अच्छे खाने स्वस्थ खाना ढक कर खाना खाना चाहिए, जिससे कि हमारे शरीर में रोगाणु जाने से हम बचा सकते हैं।

हम साथ-साथ रहेंगे तो कई प्रकार के रोगाणुओं से हमारे शरीर की रक्षा कर सकते हैं।

इस प्रकार अपने शरीर का ध्यान रखें जो मैं कई प्रकार की बीमारियों से दूर रख सकते हैं।
और डॉक्टर से जाने से बचा सकते हैं और अपने नाक या कान में कुछ चला जाए तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें अन्यथा अपने हाथ से या कोई गोचर लेकर कोई भी हमारा ना क्या काम में नहीं डालना चाहिए जिससे वह भी तकलीफ हो सकती है।

Thursday, 12 September 2019

आप भले हो तो जग भला है।

एक विशाल कांच के मेल में ले जाने किधर से एक भटका हुआ कुत्ता घुस गया। 

हजारों कांच के टुकड़ों में अपनी शक्ल देखकर में चौक का। उसने जिधर नजर डाली उधर ही हजारों कुत्ते दिखाई दिए हैं। वे समझ जा यह सब उसे पर टूट पड़ेंगे हुए उसे मार डालेंगे। अपनी साल दिखाने के लिए वे अपने लगा, सब कुत्ते भोंकते हुए दिखाई पड़े। इसकी आवाज की ही प्रतिध्वनि उसके कानों में जोर जोर से आती है उसका दिल धड़कने लगा। और जोर से भोका। सब कुत्ते भी अधिक जोर से भोंकते हुए दिखाई दिए।
आखिर वे उन कुत्तों पर झपटा। मैं भी उस पर झपटे।
बेचारा जोर-जोर से उसलापुर दामों का लेकिन चिल्लाया।
अंक में हुए गश खाकर गिर पड़ा।
कुछ देर बाद उस ईमेल में एक दूसरा कुत्ता आया।

इसको भी हजारों कुत्ते दिखाई दिए हुए डरा नहीं, उसने प्यार से पूछ हिलाई। सभी कुत्तों की दुम मिलती दिखाई दी। 

खूब खुश हुआ और कुत्तों की और अपनी पूंछ हिलाता हुआ बड़ा सभी कुत्ते उसकी ओर को खिलाते हुए बड़े वह प्रश्न का सूचना खुदा अपनी इच्छा से खेला खुश हुआ और फिर पूछ लेता हुआ बाहर चला गया।
जब मैं अपने एक मित्र को हमेशा परेशान, नाराज जोर चिड़चिड़ा से देखता है, तब इसी कि सेकस मरण हो जाता है। मैं उनकी मिसाल भोकने वाले कुत्तों से नहीं देखना चाहता। यह तो बड़ी ऐसी स्थिति होगी। इस कहानी से वह चाहे तो कुछ सबक जरूर ले सकते हैं।
दुनिया का अर्थ के महल जैसी है अपने स्वभाव की छाया ही उस पर पड़ती है आप भले तो जग भला आप बुरे तो जग बुरा अगर आपको सूचित करते हैं दूसरों के दोषों को ने देखकर उनके गुणों की ओर ध्यान देते हैं,

दुनिया भी आपसे मिलने का और प्रेम का व्यवहार करेगी। 

अगर आप हमेशा लोगों के एबो की ओर देखते हैं, उन्हें अपना शत्रु समझते हैं और उनकी और भौखा करते हैं,
तू भी क्यों ले आपकी और गुस्से से बढ़ेंगे। अंग्रेजी में एक कहावत है की अगर आप हंसने की दुनिया भी आपका साथ देगी पर अगर आपको गुस्सा होना और रोना ही है तो दुनिया से दूर की जंगल में चले जाना ही हितकर होगा।

Monday, 2 September 2019

सावधानी में ही समझदारी है।

एक पेट्रोल पंप पर एक महिला अपनी कार में पेट्रोल भरवा रही थी। उसी समय एक व्यक्ति ने अपने को पेंटर बताते हुए परिचय दिया।

 विजिटिंग कार्ड उस महिला कोदिया और कहा की कभी आवश्यकता हो तो बुला सकती है। उस महिला ने बिना कुछ सोचे वो कार्ड पकड़ लिया तथा अपनी कार में बैठ गई। तब वो आदमी भी एक दूसरी कार में बैठ गया जो की कोई और व्यक्ति चला रहा था। जैसे ही वो महिला पेट्रोल पंप से चली, उसने देखा की वो आदमी भी उसी समय उसके पीछे पेट्रोल पंप से निकला। फिर अचानक उस महिला को अचानक चक्कर से आने लगे और साँस लेने में तकलीफ होने लगी। उसे कुछ गंध सी आने लगी तो उसने अपनी कार की खिड़की
खोलने की कोशिश की तब उसे ये अहसास हुआ
की वो गंध उसके हाथ से ही आ रही है जिस हाथ से उसने वो कार्ड पकड़ा था।
तभी उसने नोटिस किया की वो आदमी अपनी कार में ठीक उसके पीछे था। तो उसने सोचा की उसको कुछ करना चाहिए तो उसने सर्विस लेन में अपनी कार ले जाकर रोक कर अपने हॉर्न को जोर जोर से बजाना शुरू कर दिया।

 जिससे रस्ते से गुजरने वाले राहगीर उसकी गाड़ी के पास आने लगे।

 ये देख कर जो कार उस महिला के पीछे लगी थी वह से चली
गयी। उसके बाद उस महिला को अपने आप को
सुध में लाने का वक्त मिल गया।
इस घटना का जिक्र करने की वजह है आपको
एक ड्रग जोकि  कहलाती है के
असर से परिचित करना। आप इसके बारे में नेट पर
इनफार्मेशन पा सकते है। ये ड्रग किसी को कुछ
समय के लिए बेसुध कर सकती है। इस प्रकार उस
दौरान उस व्यक्ति से कीमती सामान चुराया
जा सकता है या महिला की इज़्ज़त पर हमला
हो सकता है।
अतः आप सब कभी भी अनजान व्यक्ति से कोई
कार्ड न ले। विशेषतः जब आप के पास नकदी
या बहुमूल्य वस्तु हो। साथ साथ कृपया सभी
महिला परिजनों को इस ड्रग के बारे में बताये
तथा उन्हें भी किसी अपरिचित व्यक्ति से
कार्ड विशेषतः जब वो अकेली हो न लेने को
सलाह दे।
उन महिलाओ को अवश्य सावधान करे जो
गृहणी है और घर पर अकेली होती है और दिन
भर में कई घर पर आने वाले सेल्समैन को मिलती
है। वो भी उनके दिए हुए किसी कार्ड को
सावधानी बरतते हुए न ले।
ऐसी घटना कही भी हो सकती है। सावधानी
में ही समझदारी है।

तीन बुरी खबरों ने देश को हिला दिया।

करोड़ की रेमण्ड कम्पनी का मालिक आज बेटे की बेरुखी के कारण किराये के घर में रह रहा है।
अरबपति महिला मुम्बई के पॉश इलाके के अपने करोड़ो के फ्लैट में पूरी तरह गल कर कंकाल बन गयी! विदेश में बहुत बड़ी नौकरी करने वाले करोड़पति बेटे को पता ही नहीं माँ कब मर गयी।
सपने सच कर आई. ए. एस. का पद पाये बक्सर के क्लेक्टर ने तनाव के कारण आत्महत्या की।
ये तीन घटनायें बताती हैं जीवन में पद पैसा प्रतिष्ठा ये सब कुछ काम का नहीं। यदि आपके जीवन में खुशी संतुष्टी और अपने नहीं हैं तो कुछ भी मायने नहीं रखता।
वरना एक क्लेक्टर को क्या जरुरत थी जो उसे आत्महत्या करना पड़ा।
खुशियाँ पैसो से नहीं मिलती अपनों से मिलती है।_
क्योकि सीता जब राम के
पास थी तो उसे सोने का
हिरण चाहिए था मगर वही सीता जब सोने के लंका मे  गयी  तो उन्हे राम चाहिए था।
इसलिए पैसा तो होता है
पर सब कुछ नही होता
पैसा बहुत कुछ है, लेकिन सब कुछ नही है।
जीवन आनन्द के लिए है, चाहे जो हों बस मुस्कुराते रहो.