Monday, 26 August 2019

मैंने बहुतों को रूप से पाते देखा था।

भूतों को धन उससे और गुणों से भी बहुतों को पत्ते देखा था।

 पर मानवता के आंगन से संपूर्ण और प्राप्ति का यह अद्भुत स्वरूप आज अपनी आंखों से देखा कि कोई अपनी पीड़ा से किसी को पाए और किसी का उत्सर्ग मुद्दा किसी की पीड़ा के लिए सुरक्षित रहें।
ऊपर के बरामदे में खड़े-खड़े मैंने एक जादू की पुड़िया देखी, जीती जगती जादू की पुड़िया आदमियों को मक्खी बनाने वाला काम रूपी का जादू नहीं मक्खियों को आदमी बनाने वाला जीवन का जादू होम की सबसे बढ़िया मंदिर की मार्केट इतना नाटक कि मैं गुड़िया का जा सके पर उनकी चाल में गजब की चुस्ती कदम में फुर्ती और विवाद में मस्ती हंसी उनकी योग की माताओं की बोरी खुल पड़ी और काम हो या की मशीन मा ते मा ने भारत में 40 वर्ष से सेवा में रसीली जिससे और कुछ सुने जीवन में अब जाना भी तो नहीं।

ओरिजिन के लिए एक रोगी आई है।

 ऐसा राम में पला जीवन के ने कि बेचारे को अध्ययन का उसे क्या पता पर कष्ट क्या पात्र की क्षमता देखकर आता है? मदर मर जाऊंगी उसने विह्वल होकर कहा वातावरण चित्रकार की विवेल से भर गया पर बूटी मंदिर की हंसी के दीपक ने जबकि तक नहीं आई बोली कुछ नहीं कुछ नहीं आज है। कल कुछ कुछ और बस तमिले्रन कुछ नहीं और इतनी जोर से खिलखिला कर हंसी की आस पास कोई होता तो जॉब जाता।
एक रोगी उन्हें देखकर चिंता के कर्ज युटुब भर्ती रोग  जोर से चुटिया बजाकर की उत्पत्ति अर्थी उठी उठी।
यह अनुभव कितना चमत्कारी है। कि यहां जोक जितनी अधिक बूटी है

वह उतनी ही अधिक लोग मुस्कान नहीं है यह किसी दीपक की जोत है।

 जा गुप्ता जीवन की लक्ष्य दर्शी जीवन की सेवा निरंतर जीवन की अपने विश्वास के साथ एक ग्रह जीवन की भाषा के भेद रहे हैं। रहेंगे भी पर यह जोत विश्व की सर्वोत्तम ज्योतिष ईस्ट कृष्ट हेल्ड का तबादला हो गया अवैधानिक इविल सेवा केंद्र में काम करेगी वह उस जंगली जीवन में ग्रुप पर का पक्का तो अपने स्वरूप में इतनी लीन है। कि उसे सूरत के अतिरिक्त और कुछ दिखाई नहीं देता।

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