Sunday, 4 August 2019

हम परिवार के जीवन चक्र का आरंभ व्यवस्था से करेंगे या युवावस्था से करेंगे।

 यह जीवन का वह इस तरह जब व्यक्ति अपने स्वयं की पहचान प्राप्त करता है। 

और एक संयुक्त युवा दिवस के रूप में उभरता है। वह भावात्मक शारीरिक सामाजिक तथा वित्तीय रूप से स्वतंत्र इकाई है। अब वह परिवार से अलग रह सकता है अपने स्वास्थ्य तथा पोषण का स्वयं ध्यान रख सकता है परिवार के बाहर भी दीर्घकालीन निकट संबंध स्थापित कर सकता है यह अंतर्गत युवाओं को परिवार से अलग रहकर भी कटिंग समय और दूसरी चुनौतियों का सामना करने की क्षमता प्रदान करती है। इस प्रकार के निकट संबंधों को स्थापित करने के लिए प्रतिबंधक तथा विवाह व्यवसाय भी कहा जाता है लगाओ अनिवार्यता सब कुछ या व्यवस्था में होता है।

युवा करके व्यक्ति सर्वाधिक घनिष्ठ संबंध की स्थापना करता है। 

युवा व्यक्ति के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है युवती का विवाह वश में किया जाता है। और विवाहित युवा का वर्ष की आयु में कहा जाता है। पहले नहीं करना चाहिए यह माना जाता है। कि इस आयु तक युवा व्यस्क अपनी मूलभूत नियंत्रण शिक्षा प्राप्त कर लेते हैं। देता अपने जीवन यापन के लिए तैयार हो जाता है परंपरागत रूप से भारत में माता पिता को ही बच्चों के लिए जीवनसाथी चुनने का अधिकार होता है। किंतु आजकल युवा वर्ग अपने जीवन साथी के चयन में विवाह करने के समय में स्वयं निर्णय लेते हैं जो कि यह गलत है। माता पिता के बिना स्वयं निर्णय लेते हैं और आगे जाकर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है इसलिए आप अपने माता-पिता से सहायता की अपना विवाह की रचना करें।

विवाह की तैयारियां अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। 

क्योंकि विवाह की प्रक्रिया में अनेक जिम्मेदारी होती विवाह के अनंत रविवार युवती एक साथ रहना शुरू कर देते हैं। तो जीवन में अनेक परिवर्तन होते हैं। युवा के बंधन में बनने वाले दोनों युवाओं को विवाह की परंपरा का सामना करने के लिए भावात्मक सामाजिक शारीरिक तथा मानसिक रूप से तैयार होना चाहिए अपने जीवन में समझ ही स्थापित करना है। सहन शक्ति विकसित करने तथा उससे निपटने तथा अपनी भावनाओं को नियंत्रण करने के लिए परिवार के अनुभवी विषयों से सलाम लेनी चाहिए।

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