Monday, 26 August 2019

आपने पी दो नदियों और पर्वतों से संबंधित अनेक कथाएं सुनी होंगी।

आपने पी दो नदियों और पर्वतों से संबंधित अनेक कथाएं सुनी बहुत पहले से ही तुम्हारी कथाओं में अनेक मानवीकरण किया जा रहा है। 

प्रत्यय पर्वतों के बारे में तो यह कल्पना भी की गई है कि उनके पंख होते थे वे इधर-उधर उड़ते फिरते थे बूढ़ी पृथ्वी का दुख में पहाड़ के मनी करण का उद्देश्य अलग ही है आइए इस समय।
जिस तरह कभी तुम्हें पहले कुछ सुनना कुछ देखना और कुछ सोचने का आग्रह किया गया है ऐसे ही कुछ महसूस करने पर भी बल दिया गया है किरते हुए पेड़ की धनुष के संदर्भ में भी महसूस करना ₹1 चुका है इस अंश में पार्ट की भयंकर यातना को मैसेज करने का आग्रह किया गया है इसमें मनुष्य के लिए दो दिल देना ने का प्रयोग सुना ही होगा जब कोई भयानक स्थिति है विपत्ति आती है

 तो उसे देखकर या उसका सामना करना करते हुए व्यक्ति का दिल दिलाता है। 

 पहाड़ मून समाधि ले बेटा या ताज विशाल पाठ की स्थिति को देखकर लगता है जिसे वे मौन समाज में बैठा हूं एक चित्रों में अपने ऋषि-मुनियों को इस तरह बैठा देखा होगा पहाड़ भी इसी मुद्रा में बैठ दिखते हैं सुंदर कल्पनाओं को सुंदर बनाता है मनुष्य का पहाड़ के साथ किया गया और मनुष्य एक तरह निर्माण करता है तो दूसरी तरफ इस विनाश भी करता है।
हमने देखा है कि आजकल अधिकतर लोग ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं प्राप्त करने की होड़ में व्यस्त है।
जी के जलते हुए लोगों ने अपने लिए अनेक उलझन खड़ी कर ली है

अब उनके पास मनी होते हैं तो तब भेज दूंगी अधिकारी के लिए भी समय नहीं है। 

 उसका प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है अपने आसपास के कुछ गहरे घरों में बुजुर्गों को देखकर उन्होंने अपनी संतान को पाल पोस कर बड़ा किया और अब उनकी संतान के पास इतना भी समय नहीं है कि वह उनकी देखभाल करें और सेवा कर सके उनसे बात करने उनका दुख सुख में यह बुड्ढे बुड्ढे गुप्ता दुखी रहते हैं उनको की तरह हमारी पृथ्वी की स्थिति हो गई है।
बूढ़ी पृथ्वी का दुख सवाल उठता है कि पृथ्वी को यह पर बूटी क्यों कहा गया है इसलिए कि यदि पेड़ पौधे कम हो रहे हो नदियां सूख रही हो पहाड़ों को नष्ट किया जा रहे हो पानी गंदा हो रहा हो वह प्रदूषित हो रही हो तथा पृथ्वी कैसी लगेगी।

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