Wednesday, 28 August 2019

बच्चे कभी-कभी चक्कर में डाल देने वाले प्रश्न कर बैठते हैं।

अल्पज्ञ की पिता बड़ा दयनीय जीव होता है मेरी छोटी लड़की ने जब उस दिन पूछ लिया कि आदमी के नाखून क्यों बढ़ते हैं। 

तुम्हें कुछ सोच ही नहीं सका हर तीसरे दिन नकुल बढ़ जाते हैं।
बच्चे कुछ दिन तक गुरु ने बढ़ने दें तो मां-बाप अफसरों ने डांटा करते हैं।
 पर कोई नहीं जानता कि यह आप भाग्य नाखून क्यों किस प्रकार बर्ड्स करते हैं।
काट दीजिए यह चुपचाप दंड स्वीकार कर लेंगे पर निर्लज्जा अपराधी की भांति फिर जुड़ते ही सीधे पर हाजिर। 
मेरा मन पूछता है किसी और मनुष्य की ओर बढ़ रहा है। पशुता की ओरिया मनुष्यता की ओर स्तर बढ़ाने की ओर या शस्त्र काटने की और मेरी निर्बाध बालिका ने मानो मनुष्य जाति से ही प्रश्न किया है। जानते हो नाखून क्यों बढ़ते हैं यह यह हमारी पशुता के अवशेष हैं मैं भी पूछता हूं जानते हो यह स्तर शस्त्र क्यों बढ़ रहे हैं, यह हमारी पशुता की निशानी है भारतीय पशुओं और भारतीय भाषाओं की अंग्रेजों के शब्द का समानार्थक शब्द व्यवस्था होता है।

हमारे इतिहास बहुत पुराना है

 हमारे शास्त्रों में इस समस्या को ना वैभव और नाना पहलुओं से विचार आ गया है हम कोई ना शिकवा नहीं है। जो रातों-रात अनजान जंगल में पहुंचकर  रक्षित छोड़ दिए गए हो हमारी परंपरा महिमाई उत्तराधिकारी विपुल और संस्कार उज्जवल है।

जातियां इस देश में ले गई है लड़की जागृति भी रही है। 

फिर प्रेम पूर्वक बस भी गई सभ्यता कि मैं ना सीढ़ियां पर खड़ी और नाना ओर मुख करके चलने वाली इन जातियों के लिए सामान्य धर्म खोज निकालकर कोई सहज बता नहीं थी भारतीय वर्ष के दृश्यों ने अनेक प्रकार से इस विषय को समझाने की कोशिश की थी पर एक बात उन्होंने लक्ष्य की थी उस समस्त वर्णों को समझ जाती हो का एक सामान्य आदर्श भी है वह अपने ही धर्म यह बंधनों से अपने को बांधना मनुष्य पशु से किसी बात में भिन्न है और निर्णय और पशु सुलभ सब सब का स्वभाव ठीक उसी प्रकार का है जैसे अन्य प्राणियों के लिए हुए फिर भी पशु से भिन्न है इसमें से मियां है।
इसे कोई दिन आ सकता है जो कि मनुष्य के नाखूनों का बढ़ना बंद हो जाए पुरानी शास्त्रियों कैसे अनुमान है कि मनुष्य का अनावश्यक उसी प्रकार जुड़ जाएगा जिस प्रकार उसकी पूर्ण चढ़ गई है उस दिन मनुष्य की पशु तक लुप्त हो जाएगी शायद उस दिन वह मुरैना शास्त्रों का प्रयोग भी बंद कर सकता है।

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