Wednesday, 28 August 2019

दो व्यक्ति थे मिर्जा साहब और अमीर साहब।

इन दोनों के व्यक्तित्व में अनेक समानताएं हैं क्योंकि यह एक ही वर्क है।

प्रेमचंद ने इन दोनों की सम्मान प्रवृत्तियों के आधार पर तत्कालीन वातावरण को विचित्र करने का प्रयास किया है। वह तो रूम में जो विलासी फैली थी उससे यह भी ग्रस्त है।
 इनके अतिरिक्त कहानी के अन्य पात्र हैं।
मिर्जा साहब की बेगम बादशाह ही सवार और नौकरानी हरिया आदि सबसे पहले हम मिर्जा साहब के व्यक्तित्व की विशेषताओं को समझाते हैं।
मुझे सब का पूरा नाम मिर्जा सज्जाद अली था।
 वह लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह के एक जादूगर थे।
अपनी जीविका चलाने की कोई चिंता नहीं थी क्योंकि उनके पास पैतृक संपत्ति थी।
उन्हें शतरंज खेलने का बहुत शौक था। यह कह की पूरी लगती हुए बहुत आलसी और कामचोर इंसान के उनके शतरंज खेलने की आदत के बारे में उनके पास के लोग नौकर और चक्कर भी अच्छी राय नहीं रखते तथा उसकी बुराई करते रहते हैं मिराज शतरंज के खेल में इतने डूब जाते हैं। कि घर की चिंता करना भी छोड़ देते हैं। इसलिए उनकी बेगम भी उनसे परेशान रहती थी और हमेशा मिर्जा साहब को लड़ाती थी।

शतरंज के खिलाड़ी एक विशिष्ट प्रकार के ऐतिहासिक प्रीवियस को व्यक्त करने वाली कहानी है। 

इसलिए इसमें पत्रों की अधिक संख्या पर बल्लू इसलिए आप यह पाएंगे कि मिर्जा और अमीर अली अलग-अलग पात्र होते हुए भी एक वर्ग और एक ही तरह के पर्वतीय को व्यक्त करने वाले पात्र हैं।

इसमें समानता है यदि के अंतर कम है। 

निशा को पूरा नाम अमीर रोशन अली है इसके पास भी मिर्जा साहब की तरफ से तक जागीरदारी है इन्हें भी अपनी जीविका चलाने की कोई चिंता नहीं है मुझे शतरंज खेलना देता पान हुक्का चिलम जैसे मादकहै। का सेवन करना आदि इनकी आदत है उनकी इस आदत नहीं उसके स्वाभिमान को नष्ट कर दिया है। मिर्जा साहब की पत्नी इसके बेहद नफरत करती है फिर भी यह मेजर साहब वह घर जाना नहीं छोड़ा वीरा सबको मिर्जा की बेगम का बोलना बुरा लगता है इसलिए मेजर साहब की बेगम के सामने तन कर रहने की नसीहत देते हैं।

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