Monday, 26 August 2019

किसी तरह कुछ लोग पीड़ितों की सेवा करते हैं।

आप कभी न कभी किसी अस्पताल ए नर्सिंग होम में अवश्य गए होंगे वहां आपने यह ध्यान दिया होगा।

किसी तरह कुछ लोग रोगियों  तक पीड़ितों की सेवा करते हैं। ऐसा दृश्य आप में भी दूसरों के लिए कुछ कर पाने की इच्छा जागते होंगे आप अपनों की सेवा तो सभी करते हैं और बड़ी बात तो तब है। जब दूसरों के लिए भी कुछ किया जाए दूसरों के लिए कुछ करने की भावना से भरे लोग जाति क्षेत्र भाषा धर्म लिंग में रंग अधिक के बंधन को नहीं मानते हुए तो बस यही मानते हैं। कि मनुष्य मनुष्य में भेद के मनुष्य तो मनुष्य हुए और कुछ हो ही नहीं सकता आई स्मार्ट के माध्यम से ऐसा ही भावना रखने वाले लोगों के विषय में जानना उनसे प्रेरणा लेने का प्रयास करें।

कल तक जिनका अतिथि था आज उनका परिचारक हो गया।

क्योंकि मेरी अतिथि या अचानक ग्रुप की लपेट में आ गई और उन्हें, इंदौर के रोबोट नर्सिंग होम में लाना पड़ा।
रुक अगर पूरे वेग में परिणाम कब का पता और वातावरण चिंता से गिरा गिरा कि हम सबसे सस्ते तभी मैंने चुप कर देखा कि अपने विशिष्ट धवल वेश में आच्छादित नारी कमरे में आ गए हैं।
दे उनकी कोई 45 वसंत देखी वर्ण हम समवेत पर अरुणोदई की रेखाओं से  अनु रंजीत कद लंबा और सीता सादा।

नंबर मुंह अच्छा नहीं लगता बीमार के पास लंबा मुंह नहीं।

 आते ही उन्होंने कहा साफ-सुथरी भाषा उच्चारण साहब और सूअर आदेश का पर आदेश में अधिनायक का अधिकारी का पूर्णिमा का जिसका आरंभ होता है चिकन से और अंत गोद में राम वे माही थी उनकी आदित्य मदर टेरेसा मार्ग भूमि जिनकी फ्रांस और कर्मभूमि भारत की तरफ से उम्र के इस ब्लाउजों की सेवा में काम धाम भी राजी चावल बस यही है।
तबीयत खटक और हमारे डॉक्टर कमरे के भीतर मुद्र ने उस देखते ही का डॉक्टर तुम्हारा बीमार हंस रहा है तुम हंसी भी करते जो वह डॉक्टर ने अपने जान कितने अनुभव योग एक ही वाक्य में कूद गए मैंने भावना से अभिभूत हो सोचा जो बिना प्रसाद की मां बन सकती है वह ₹30 मासिक पर 20 वर्ष से दिन और रात सेवा में लग सकती है।

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