Wednesday, 21 August 2019

यह भारतीय चिंतन और आचरण की एक महाशक्ति है।

यह जानकर बड़ी प्रसन्नता हुई कि पिछली परीक्षा में तुम्हें अच्छे अंक प्राप्त हुए हैं। 

अब तुम्हें सातवीं कक्षा में पहुंचा गया हो तुमने यह भी लिखा है कि तुम्हारी बहन रोमा और अनुज शंकर को को को रमेश तीसरी और दूसरी कक्षा में आ गए हैं, मुझे यह जानकर और भी अधिक खुशी हुई कि मेरी पोती रोमा को अपनी कक्षा में प्रथम स्थान मिला है।
इस सफलता के लिए तुम्हें सभी बच्चों बच्चियों को बाबा की ओर से सनसनी बधाई हो।
अब तुम्हारे पत्र का उत्तर तुम भारत की मन इस वनी महिलाओं के विषय में कुछ जानना चाहती हो तुम्हारी इस जिज्ञासा में अपनी पूजा भारतीय महिलाओं के प्रति हमारी श्रद्धा जलती है।

 यह एक बड़ा ही शुभ लक्षण है। 

मनुष्य जैसा सोचता है वैसा ही बनता है तुमने सुनी महिलाओं के बारे में जाने की तो उनके सद्गुणों अनायास तुम्हारी मन में आ जाएगी, तुम्हारे जीवन में उनके करमास समावेश से से तुम्हारे उज्जवल भविष्य का पथ प्रशस्त प्रशस्त प्रशस्त हो जाएगा भारतीय नारियां अनादि काल से ही अपनी विद्या बुद्धि कला कुशलता सरिता के आधार पर मानव जीवन और जगत् को अधिकांश सुख में बनाने का सफल प्रयास करती है, साथ ही अपने त्याग तपस्या सॉरी उदारता भक्ति वात्सल्य सम्मुख उच्च आदर्श प्रस्तावना करती आ रही है इनकी कीर्ति कल आपसे आपसे आज भी समस्त भारतीय वंश में उनका शोरूम शैली है।

आज भी किसी अनजान व्यस्क महिला को माताजी के क संबोधित करने की परंपरा विद्यमान है। 

यह भारतीय चिंतन और आचरण की एक महाशक्ति है। नारी जाति के प्रति पुरुष वर्ग का यह श्रद्धा सम्मान बुरा आचरण अकारण नहीं प्रत्यक्ष कारण है। नारी नहीं मनुष्य को गृहस्थ और किसान बनाया उसका यह प्रत्येक मानव सभ्यता संस्कृति के भवन की नींव की पहली शीला प्रमाणित हुई, स्वयं ग्रस्त जीवन के केंद्र में स्थित रहकर भारतीय नारी ने बड़े बूढ़ों की सेवा की को पाला पोसा और पति के कंधे से कंधा मिलाकर पारिवारिक निवारण किया है।

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