Wednesday, 28 August 2019

इतिहास आगे बढ़ता गया।

लेकिन आदमी को चैन कहा द्विवेदी जी कहते हैं। 

मनुष्य ने लोगों से हथियार बनाने शुरू किए थे जिनकी अलग भाग पर निकली लोहा लगा होता था बारी गधा तलवार कपड़ा आदि अस्त्र शस्त्र का निर्माण किया पुराणों में से ऐसा वर्णन है। कि धातु के हत्यारों के कारण देवता भी आदमी के पास सहायता मांगना तिथियों के देवता भी आदमी के पास आया करते थे धरती पर मनुष्य से सहायता मांगने के लिए।
इतिहास आगे बढ़ता गया और मनुष्य ने नए नए हथियार बनाना सीख लिए अपने हवाई जहाजों से वह दुश्मन देशों पर बम गिराने लगा जैसे द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर बम गिरा कर लाखों लोगों की मौत के घाट उतार दिया था।

जब उनकी जगह आधुनिक हथियारों ले ली है।

 अब यह दूसरों पर प्रभाव जमाने शासन करने के साधन बन गए इन हथियारों के बल पर मनुष्य ने मनुष्यता पर कलंक लगाया है। उस प्रसूता से ऊपर नहीं उठने दिया है उसने नाखून में अब इतना जोर नहीं रहा कि वह पेड़ों को पकड़ सके या अपनी सहायता के लिए नाखूनों से कुछ कर सके इससे पहले ही उनका हथियार से प्रहार किया जा सकता है इसलिए मनुष्य जो आगे बढ़ रहा है उन्हीं को घटा है।

आप जानते हो पहले मनुष्य के पास हथियार का होता है। 

जब वह आनी आदिमानव थे तो उनके पास नाखून के सबसे बड़ा हथियार था उसी की वजह से अपनी रक्षा कर पाते थे घास पत्ते फूल आदि को अपने शरीर में त्वचा के रूप में वह अपने शरीर को ऐसे लपेट ते थे जैसे मानो कोई वस्त्र धारण किया हो आजकल तो ऐसे वस्त्र चल गए कि आप सोच भी नहीं सकते कि पहले के आदिमानव कैसे रहते थे जंगलों में और कैसे अपने नाखूनों से अपने बचाव करते हैं आप के बचाव के लिए तो आजकल इंडियन आर्मी की जैसी इंडियन ने तकनीकी विकसित कर रखी है कि आप तक कोई समस्या नहीं देते हैं।

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