Sunday, 18 August 2019

भारत से धर्म दर्शन मूर्ति बनाने की कला चित्रकला जाति विज्ञान आदि।

भारत और चीन के आपसी संपर्क दूसरी शताब्दी ईस्वी में आरंभ हुआ है। 

भारतीय संस्कृति ने सर्वप्रथम दो भारतीय चोरी उधर म्यूजिक शिवपुर कश्यप मांगद के माध्यम से चीन में प्रवेश किया जो चीनी सम्राट में किस सन में चीन गए थे। आचार्य धर्म और कश्यप मातंग के पश्चात चीन और भारत के बीच विद्वानों का आना-जाना नियंत्रण विभाग की गति से चलता राजीनी बहुत ही सभ्य लोग थे। सभी नए बुध की पूर्ण कहानियों को बहुत ध्यान से सुना जो भी चीनी यात्री ज्ञान की खोज में उन्होंने अपनी यात्रा की दृष्टि से मेरे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण बन गई है। भारतीय विश्वविद्यालयों और बिहारियों के अनेक शिक्षक चीन में प्रसिद्ध हुए हैं।

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क्योंकि उन्हें के पास पहले से ही नमक विकसित दर्शन थे।
छठी शताब्दी में वंश के राजाओं ने सत्ता संभाली विश्वास के पहले सम्राट ने बौद्ध धर्म को विराज ब्रह्म घोषित कर दिया इसके बौद्ध दर्शन के प्रचार को गति मिली इस काल में हजारों संस्कृति किताबों को चीनी भाषा में अनुवाद हुआ था संकट में भयानक और लंबी यात्रा को बहादुर सिंह की भूमि पर आई।
कोरिया चीन के उत्तर पूर्व में स्थित है कोरिया को भारतीय संस्कृति के प्रति चीन से प्राप्त हुए थे सबसे पहले सुनना मूवी बुध की मूर्ति और सूत्र लिखकर सन में कोरिया पहुंचा उसका फ्रांसन 380 में आचार्य आनंद  कोरिया के भारतीय मंदिरों का निर्माण निर्माण करवाया था।

 इसके बाद अनेक भारतीय शिक्षक कोरिया जाते रहे हुए।

भारत से धर्म दर्शन मूर्ति बनाने की कला चित्रकला जाति विज्ञान आदि विषयों के ज्ञान अपने साथ लाए ज्ञान की खोज करते करते कोरिया से भी विद्वान द्वारा विशेष रूप से ज्योतिषी विज्ञानं आयुर्वेदिक विज्ञान के अन्य कई क्षेत्रों में परीक्षण प्राप्त किया कोरिया में मंदिर और धर्म के साथ ज्ञान केंद्र भी बड़ी संख्या में किया गया। इतिहास में भारत और भूटान के बीच संबंध का एक प्रमाण यह है कि भिक्षु को और शिक्षकों का आगमन निरंतर चलता रहा वहां से प्राप्त पहली शताब्दी के सिक्कों पर एक वह चीनी भाषा में लिखा हुआ है। तो दूसरी ओर प्राकृत भाषा में खरोष्ठी लिपि में गोदान की संस्कृति को प्रमाणित करता है।

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