Monday, 12 August 2019

फिर ब्लू के जीवन का प्रथम वसंत आया।

 गिल्लू को जाली के पास बैठकर अपनेपन से बाहर जाते देखकर मुझे लगा कि इससे मुक्त कराना आवश्यक है।

 भूख लगने पर चिक चिक करके मानोगे मुझे सूचना देता और काजू या बिस्कुट मिले जाने पर उसी स्थिति में लिफाफे से बाहर वाले पंजों से पकड़ कर उसे पुत्र आता रहता।फिर ब्लू के जीवन का प्रथम वसंत आया।
अभिषेक कागज पत्रों के कारण मेरे बाहर जाने पर कमरा बंद ही रहता है।
 मेरे कॉलेज से लौटने पर जैसे ही कमरा खोला और मैंने भीतर पर रखा वैसे ही गिल्लू अपने जाली के द्वार से भीतर आकर मेरे पैर से सिर और सिर से पैर तक दौड़ लगाने लगा तब से यह नित्य का करम हो गया मेरे कमरे से बाहर जाने पर वह भी खिड़की की खुली जाली की रहा है। बाहर चला जाता और दिनभर गिलहरियों के झंडे का नेता बना और डाल पुस्तक विक्रेता और ठीक बजे हुए खिड़की से भीतर आकर अपने झूले में झूलने लगता मुझे चुप करने कि उसने जाने कब और कैसे उत्पन्न हो गई थी फूलदान के फूलों में छिप जाता का वीडियो में मेरे पास बहुत से पशु-पक्षी है,

और उनका मुझ से लगाओ भी कम नहीं है। 

गिल्लू इन में अपवाद था मैं जैसे ही खाने के कमरे में पहुंची खिड़की से निकल कर आंगन की दीवार बंदे पार करके मेज पर पहुंच जाता हूं, और मेरी थाली में बैठ जाना चाहता बड़ी कठिनाई से मैंने उसे थाली के पास बैठना सिखाया जा बैठ कर बैठ, मेरी थाली में से एक-एक चावल उठाकर बड़ी सफाई से खाता रहता का जूस का प्रिय खाद्य था और कई दिनों का जो ने मिलने पर रहने खाने की चीजें या तो नाना बंद कर देता है।
या झूले से नीचे फेंक देता था।

उसी बीच मुझे मोटर दुर्घटना में आहत होकर कुछ दिनों से हड़ताल में रहना पड़ता। 

उन दिनों जब मेरे कमरे का दरवाजा खोला जाता गिल्लू अपने झूले से उतरकर दौड़ने और फिर किसी दूसरे को देखकर तेजी से अपने घोंसले में जा बैठता था।
 मेरी अवस्था में वैद्यकीय परशुराम ने बैठकर अपने नन्हे नन्हे पंजों से मेरे शरीर और बालों को इतना होले होले से लाता रहता, कि उसका घटना एक परी तारीख के हटने के समान लगता।

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