Wednesday, 28 August 2019

बच्चे कभी-कभी चक्कर में डाल देने वाले प्रश्न कर बैठते हैं।

अल्पज्ञ की पिता बड़ा दयनीय जीव होता है मेरी छोटी लड़की ने जब उस दिन पूछ लिया कि आदमी के नाखून क्यों बढ़ते हैं। 

तुम्हें कुछ सोच ही नहीं सका हर तीसरे दिन नकुल बढ़ जाते हैं।
बच्चे कुछ दिन तक गुरु ने बढ़ने दें तो मां-बाप अफसरों ने डांटा करते हैं।
 पर कोई नहीं जानता कि यह आप भाग्य नाखून क्यों किस प्रकार बर्ड्स करते हैं।
काट दीजिए यह चुपचाप दंड स्वीकार कर लेंगे पर निर्लज्जा अपराधी की भांति फिर जुड़ते ही सीधे पर हाजिर। 
मेरा मन पूछता है किसी और मनुष्य की ओर बढ़ रहा है। पशुता की ओरिया मनुष्यता की ओर स्तर बढ़ाने की ओर या शस्त्र काटने की और मेरी निर्बाध बालिका ने मानो मनुष्य जाति से ही प्रश्न किया है। जानते हो नाखून क्यों बढ़ते हैं यह यह हमारी पशुता के अवशेष हैं मैं भी पूछता हूं जानते हो यह स्तर शस्त्र क्यों बढ़ रहे हैं, यह हमारी पशुता की निशानी है भारतीय पशुओं और भारतीय भाषाओं की अंग्रेजों के शब्द का समानार्थक शब्द व्यवस्था होता है।

हमारे इतिहास बहुत पुराना है

 हमारे शास्त्रों में इस समस्या को ना वैभव और नाना पहलुओं से विचार आ गया है हम कोई ना शिकवा नहीं है। जो रातों-रात अनजान जंगल में पहुंचकर  रक्षित छोड़ दिए गए हो हमारी परंपरा महिमाई उत्तराधिकारी विपुल और संस्कार उज्जवल है।

जातियां इस देश में ले गई है लड़की जागृति भी रही है। 

फिर प्रेम पूर्वक बस भी गई सभ्यता कि मैं ना सीढ़ियां पर खड़ी और नाना ओर मुख करके चलने वाली इन जातियों के लिए सामान्य धर्म खोज निकालकर कोई सहज बता नहीं थी भारतीय वर्ष के दृश्यों ने अनेक प्रकार से इस विषय को समझाने की कोशिश की थी पर एक बात उन्होंने लक्ष्य की थी उस समस्त वर्णों को समझ जाती हो का एक सामान्य आदर्श भी है वह अपने ही धर्म यह बंधनों से अपने को बांधना मनुष्य पशु से किसी बात में भिन्न है और निर्णय और पशु सुलभ सब सब का स्वभाव ठीक उसी प्रकार का है जैसे अन्य प्राणियों के लिए हुए फिर भी पशु से भिन्न है इसमें से मियां है।
इसे कोई दिन आ सकता है जो कि मनुष्य के नाखूनों का बढ़ना बंद हो जाए पुरानी शास्त्रियों कैसे अनुमान है कि मनुष्य का अनावश्यक उसी प्रकार जुड़ जाएगा जिस प्रकार उसकी पूर्ण चढ़ गई है उस दिन मनुष्य की पशु तक लुप्त हो जाएगी शायद उस दिन वह मुरैना शास्त्रों का प्रयोग भी बंद कर सकता है।

इतिहास आगे बढ़ता गया।

लेकिन आदमी को चैन कहा द्विवेदी जी कहते हैं। 

मनुष्य ने लोगों से हथियार बनाने शुरू किए थे जिनकी अलग भाग पर निकली लोहा लगा होता था बारी गधा तलवार कपड़ा आदि अस्त्र शस्त्र का निर्माण किया पुराणों में से ऐसा वर्णन है। कि धातु के हत्यारों के कारण देवता भी आदमी के पास सहायता मांगना तिथियों के देवता भी आदमी के पास आया करते थे धरती पर मनुष्य से सहायता मांगने के लिए।
इतिहास आगे बढ़ता गया और मनुष्य ने नए नए हथियार बनाना सीख लिए अपने हवाई जहाजों से वह दुश्मन देशों पर बम गिराने लगा जैसे द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर बम गिरा कर लाखों लोगों की मौत के घाट उतार दिया था।

जब उनकी जगह आधुनिक हथियारों ले ली है।

 अब यह दूसरों पर प्रभाव जमाने शासन करने के साधन बन गए इन हथियारों के बल पर मनुष्य ने मनुष्यता पर कलंक लगाया है। उस प्रसूता से ऊपर नहीं उठने दिया है उसने नाखून में अब इतना जोर नहीं रहा कि वह पेड़ों को पकड़ सके या अपनी सहायता के लिए नाखूनों से कुछ कर सके इससे पहले ही उनका हथियार से प्रहार किया जा सकता है इसलिए मनुष्य जो आगे बढ़ रहा है उन्हीं को घटा है।

आप जानते हो पहले मनुष्य के पास हथियार का होता है। 

जब वह आनी आदिमानव थे तो उनके पास नाखून के सबसे बड़ा हथियार था उसी की वजह से अपनी रक्षा कर पाते थे घास पत्ते फूल आदि को अपने शरीर में त्वचा के रूप में वह अपने शरीर को ऐसे लपेट ते थे जैसे मानो कोई वस्त्र धारण किया हो आजकल तो ऐसे वस्त्र चल गए कि आप सोच भी नहीं सकते कि पहले के आदिमानव कैसे रहते थे जंगलों में और कैसे अपने नाखूनों से अपने बचाव करते हैं आप के बचाव के लिए तो आजकल इंडियन आर्मी की जैसी इंडियन ने तकनीकी विकसित कर रखी है कि आप तक कोई समस्या नहीं देते हैं।

दो व्यक्ति थे मिर्जा साहब और अमीर साहब।

इन दोनों के व्यक्तित्व में अनेक समानताएं हैं क्योंकि यह एक ही वर्क है।

प्रेमचंद ने इन दोनों की सम्मान प्रवृत्तियों के आधार पर तत्कालीन वातावरण को विचित्र करने का प्रयास किया है। वह तो रूम में जो विलासी फैली थी उससे यह भी ग्रस्त है।
 इनके अतिरिक्त कहानी के अन्य पात्र हैं।
मिर्जा साहब की बेगम बादशाह ही सवार और नौकरानी हरिया आदि सबसे पहले हम मिर्जा साहब के व्यक्तित्व की विशेषताओं को समझाते हैं।
मुझे सब का पूरा नाम मिर्जा सज्जाद अली था।
 वह लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह के एक जादूगर थे।
अपनी जीविका चलाने की कोई चिंता नहीं थी क्योंकि उनके पास पैतृक संपत्ति थी।
उन्हें शतरंज खेलने का बहुत शौक था। यह कह की पूरी लगती हुए बहुत आलसी और कामचोर इंसान के उनके शतरंज खेलने की आदत के बारे में उनके पास के लोग नौकर और चक्कर भी अच्छी राय नहीं रखते तथा उसकी बुराई करते रहते हैं मिराज शतरंज के खेल में इतने डूब जाते हैं। कि घर की चिंता करना भी छोड़ देते हैं। इसलिए उनकी बेगम भी उनसे परेशान रहती थी और हमेशा मिर्जा साहब को लड़ाती थी।

शतरंज के खिलाड़ी एक विशिष्ट प्रकार के ऐतिहासिक प्रीवियस को व्यक्त करने वाली कहानी है। 

इसलिए इसमें पत्रों की अधिक संख्या पर बल्लू इसलिए आप यह पाएंगे कि मिर्जा और अमीर अली अलग-अलग पात्र होते हुए भी एक वर्ग और एक ही तरह के पर्वतीय को व्यक्त करने वाले पात्र हैं।

इसमें समानता है यदि के अंतर कम है। 

निशा को पूरा नाम अमीर रोशन अली है इसके पास भी मिर्जा साहब की तरफ से तक जागीरदारी है इन्हें भी अपनी जीविका चलाने की कोई चिंता नहीं है मुझे शतरंज खेलना देता पान हुक्का चिलम जैसे मादकहै। का सेवन करना आदि इनकी आदत है उनकी इस आदत नहीं उसके स्वाभिमान को नष्ट कर दिया है। मिर्जा साहब की पत्नी इसके बेहद नफरत करती है फिर भी यह मेजर साहब वह घर जाना नहीं छोड़ा वीरा सबको मिर्जा की बेगम का बोलना बुरा लगता है इसलिए मेजर साहब की बेगम के सामने तन कर रहने की नसीहत देते हैं।

Monday, 26 August 2019

आपने पी दो नदियों और पर्वतों से संबंधित अनेक कथाएं सुनी होंगी।

आपने पी दो नदियों और पर्वतों से संबंधित अनेक कथाएं सुनी बहुत पहले से ही तुम्हारी कथाओं में अनेक मानवीकरण किया जा रहा है। 

प्रत्यय पर्वतों के बारे में तो यह कल्पना भी की गई है कि उनके पंख होते थे वे इधर-उधर उड़ते फिरते थे बूढ़ी पृथ्वी का दुख में पहाड़ के मनी करण का उद्देश्य अलग ही है आइए इस समय।
जिस तरह कभी तुम्हें पहले कुछ सुनना कुछ देखना और कुछ सोचने का आग्रह किया गया है ऐसे ही कुछ महसूस करने पर भी बल दिया गया है किरते हुए पेड़ की धनुष के संदर्भ में भी महसूस करना ₹1 चुका है इस अंश में पार्ट की भयंकर यातना को मैसेज करने का आग्रह किया गया है इसमें मनुष्य के लिए दो दिल देना ने का प्रयोग सुना ही होगा जब कोई भयानक स्थिति है विपत्ति आती है

 तो उसे देखकर या उसका सामना करना करते हुए व्यक्ति का दिल दिलाता है। 

 पहाड़ मून समाधि ले बेटा या ताज विशाल पाठ की स्थिति को देखकर लगता है जिसे वे मौन समाज में बैठा हूं एक चित्रों में अपने ऋषि-मुनियों को इस तरह बैठा देखा होगा पहाड़ भी इसी मुद्रा में बैठ दिखते हैं सुंदर कल्पनाओं को सुंदर बनाता है मनुष्य का पहाड़ के साथ किया गया और मनुष्य एक तरह निर्माण करता है तो दूसरी तरफ इस विनाश भी करता है।
हमने देखा है कि आजकल अधिकतर लोग ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं प्राप्त करने की होड़ में व्यस्त है।
जी के जलते हुए लोगों ने अपने लिए अनेक उलझन खड़ी कर ली है

अब उनके पास मनी होते हैं तो तब भेज दूंगी अधिकारी के लिए भी समय नहीं है। 

 उसका प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है अपने आसपास के कुछ गहरे घरों में बुजुर्गों को देखकर उन्होंने अपनी संतान को पाल पोस कर बड़ा किया और अब उनकी संतान के पास इतना भी समय नहीं है कि वह उनकी देखभाल करें और सेवा कर सके उनसे बात करने उनका दुख सुख में यह बुड्ढे बुड्ढे गुप्ता दुखी रहते हैं उनको की तरह हमारी पृथ्वी की स्थिति हो गई है।
बूढ़ी पृथ्वी का दुख सवाल उठता है कि पृथ्वी को यह पर बूटी क्यों कहा गया है इसलिए कि यदि पेड़ पौधे कम हो रहे हो नदियां सूख रही हो पहाड़ों को नष्ट किया जा रहे हो पानी गंदा हो रहा हो वह प्रदूषित हो रही हो तथा पृथ्वी कैसी लगेगी।

चना और अलसी दोनों एक ही खेत में पास पास खड़े हैं।

तुलसी का पौधा दुबला पतला और लचीला होता है इसलिए हवा से मिलता जुलता रहता है अलसी के तीन विशेष दिए हैं।

 वह मिला है, वह दिल की पतली है, और उसकी कमर लच ली है, वह पतली होने के कारण हिलती तो रहती है, लेकिन टैंकर सीधी भी हो जाती है।
तंत्र सिद्धि खड़ी रहती है इसलिए एटीवीपी है इसके साइड पर कुछ बड़े गोलाकार की डोडिया होती है जो खुलती है और उन्हें में बीज बनते हैं अलसी का फूल नीले रंग का होता है अलसी को देखकर कवि को लगता है। कि यह दुबली पतली लड़की है जो मचलती दिख रही है। मानो कह रही है। जो मुझे छू लो उसे अपना हृदय दे दूंगी प्यार करने लगी इसी की हो जाऊंगी हटली होने। के बावजूद भी प्यार के लिए लालायित है।

उसको कि मैं पूछूं किसी के निराले पन की बात करनी होती है।

तो एक बात ऐसी ही शुरु करते हैं अरे सो बाकी ने पूछो उस की तो बात ही कुछ और है यह सब की बात न पूछो उसे जैसा तो कोई है ही नहीं इसी अंदाज में कभी कहता है वह सरसों की न पूछो सर सब सियानी हो गई है शनि होने के तीन अर्थ है एक तो समझदार हो ना दूसरे युवक पर लेना और तीसरा चतुर होना यह सरसों के विशेष में उस सैनी के कर कभी नहीं होती होने की ओर संकेत किया है और बताएं कि विवाह योग्य हो गए इसलिए उसने अपने हाथ पीले करके हाथ पीले करने का एक मोहरा जिसका शादी कर लेना है।

सरसों के प्रश्न में ही हाथ पीले करने का प्रयोग क्यों किया क्योंकि सरसों जो खुलती है।

 तो पूरा खेत ही पीला हो जाता है तो पीली सरसों बिहार के मंडप में पधार चुकी है वह गुलाबी साफा बांधना पहले से ही बेटा है वहां विवाह की हलचल में फागुन का महीना कैसे चुप रहता बांग आता हुआ या इंसान का गाना चने का सजना सरसों का हाथ मिलाकर ना सब में एक दूसरे का हो जाना ही लचक है।
सूर्य दृश्य में कवि को लगता है जैसे स्वयंबर हो रहा है सरसों जिस प्रकार मां विवाह मंडप में कन्या के ऊपर से में भरे आंचल की छांह करती है उसी प्रकार यहां पर गति मां की भूमिका निभा रही है प्रगति का अनुराग भरा आंचल हिला रही है यह दृश्य कवि के मन में को छू लेता है इस लगता है कि ग्रामीण अंचल में किसी नगर की अपेक्षा अधिक प्यार भरा वातावरण है मगर तू विवाह सीखो गए हैं विवाह सिंह नगरों में प्यार कम जीता है ग्रामीण अंचल की भूमि प्रेम प्यार के लिए अधिक जावे जैसे कि निर्जल आंचल में भी प्रगति के चप्पे-चप्पे में प्यार दिखाई पड़ रहा है

मोहन ने अपने गुरु के सामने यह जिज्ञासा रखी की।

मोहन ने अपने गुरु के सामने यह जिज्ञासा रखी की नन्हे से बच्चे द्वारा उछल कूद मचा ने बर्फी और खुश रहना अर्थ अर्थ उछलता का नाम आजादी है। 

दूसरा संदर्भ देते हुए शहर गीत गाता है। लगभग असंभव समझ जाने वाले काम को पूरा करने के दुस्साहस को आजादी का जश्न जा सकता है। सूरज में घोंसला बनाने के लिए उड़ान भरने वाली चिड़िया का काम कुछ ऐसा ही है सार गीत नहीं यह भी पूछा कि कहीं उत्तर दिशा में सीटी बजाती हुई, तेज भागती रेलगाड़ी का नाम तो आजादी नहीं यहां आपके मन में सवाल उठ सकता है। कि रेलगाड़ी किसी अन्य दिशा में क्यों नहीं जा सकती सिर्फ उत्तर दिशा की ओर ही क्यों दरअसल यह कविता मलयालम में लिखी गई है जो केरल की भाषा में है कभी भारत के दक्षिणी उसे का है। इसलिए रेलगाड़ी उत्तर दिशा में बात का करता है केरल से चलने वाली रेलगाड़ी केवल उत्तर दिशा की ओर ही जा सकती है।

क्योंकि बाकी तीनों में से पर गीत के माध्यम से करता है। 

क्या शेर सपाटा वास्तव में कुछ लोग खास तौर पर 12 वर्ष की उम्र के किशोर कुमार गीत का यह प्रशन उचित नहीं है आपने पूछता है। कि क्या अंधेरे में भटकने वाले का लाल पेस्ट मिल जाए तो उसकी परेशानी समाप्त हो जाती है इस प्रश्न को यात्रा पर निकले और यात्रा के दौरान मिल जाए क्या यह कुछ समय के लिए रुकना यात्रा का अंत हो सकता है। ठीक उसी प्रकार सारगी है पूछ रहा है कि क्या मुसाफिर का अंधेरे में किसी पोस्ट के नीचे रुकना आजादी है मंजिल की प्राप्ति है,

आजादी के बारे में पूछता है कि क्या दूसरा नाम आजादी है। 

स्त्री पांच प्रकार के संदर्भों का उल्लेख अन करने के बाद कविता का मूल बिंदु सामने आता है। यह साबित के मन में जो प्रश्न भरे हुए उसकी चिंता क्षमता को बता रहे हैं सर की धनि मुक्ति आजादी के बारे में पूछता है? कि अमित कपड़े के ढेर सिलाई मशीन के अंतर्गत से हो रही पहाड़ियों कपड़े पर चलने वाली सीढ़ियों से मुक्त होने का नाम आजादी नहीं है कि क्या कर्म से मुक्त हुई आजादी है। जरा सोचिए कि क्या आपके मन में भी देश में आजादी किस प्रकार की होनी चाहिए इसके बारे में तरह-तरह के विचार आते होंगे लेखक की आजादी की खेती के बारे में बातें आज सूची है।

मैंने बहुतों को रूप से पाते देखा था।

भूतों को धन उससे और गुणों से भी बहुतों को पत्ते देखा था।

 पर मानवता के आंगन से संपूर्ण और प्राप्ति का यह अद्भुत स्वरूप आज अपनी आंखों से देखा कि कोई अपनी पीड़ा से किसी को पाए और किसी का उत्सर्ग मुद्दा किसी की पीड़ा के लिए सुरक्षित रहें।
ऊपर के बरामदे में खड़े-खड़े मैंने एक जादू की पुड़िया देखी, जीती जगती जादू की पुड़िया आदमियों को मक्खी बनाने वाला काम रूपी का जादू नहीं मक्खियों को आदमी बनाने वाला जीवन का जादू होम की सबसे बढ़िया मंदिर की मार्केट इतना नाटक कि मैं गुड़िया का जा सके पर उनकी चाल में गजब की चुस्ती कदम में फुर्ती और विवाद में मस्ती हंसी उनकी योग की माताओं की बोरी खुल पड़ी और काम हो या की मशीन मा ते मा ने भारत में 40 वर्ष से सेवा में रसीली जिससे और कुछ सुने जीवन में अब जाना भी तो नहीं।

ओरिजिन के लिए एक रोगी आई है।

 ऐसा राम में पला जीवन के ने कि बेचारे को अध्ययन का उसे क्या पता पर कष्ट क्या पात्र की क्षमता देखकर आता है? मदर मर जाऊंगी उसने विह्वल होकर कहा वातावरण चित्रकार की विवेल से भर गया पर बूटी मंदिर की हंसी के दीपक ने जबकि तक नहीं आई बोली कुछ नहीं कुछ नहीं आज है। कल कुछ कुछ और बस तमिले्रन कुछ नहीं और इतनी जोर से खिलखिला कर हंसी की आस पास कोई होता तो जॉब जाता।
एक रोगी उन्हें देखकर चिंता के कर्ज युटुब भर्ती रोग  जोर से चुटिया बजाकर की उत्पत्ति अर्थी उठी उठी।
यह अनुभव कितना चमत्कारी है। कि यहां जोक जितनी अधिक बूटी है

वह उतनी ही अधिक लोग मुस्कान नहीं है यह किसी दीपक की जोत है।

 जा गुप्ता जीवन की लक्ष्य दर्शी जीवन की सेवा निरंतर जीवन की अपने विश्वास के साथ एक ग्रह जीवन की भाषा के भेद रहे हैं। रहेंगे भी पर यह जोत विश्व की सर्वोत्तम ज्योतिष ईस्ट कृष्ट हेल्ड का तबादला हो गया अवैधानिक इविल सेवा केंद्र में काम करेगी वह उस जंगली जीवन में ग्रुप पर का पक्का तो अपने स्वरूप में इतनी लीन है। कि उसे सूरत के अतिरिक्त और कुछ दिखाई नहीं देता।

किसी तरह कुछ लोग पीड़ितों की सेवा करते हैं।

आप कभी न कभी किसी अस्पताल ए नर्सिंग होम में अवश्य गए होंगे वहां आपने यह ध्यान दिया होगा।

किसी तरह कुछ लोग रोगियों  तक पीड़ितों की सेवा करते हैं। ऐसा दृश्य आप में भी दूसरों के लिए कुछ कर पाने की इच्छा जागते होंगे आप अपनों की सेवा तो सभी करते हैं और बड़ी बात तो तब है। जब दूसरों के लिए भी कुछ किया जाए दूसरों के लिए कुछ करने की भावना से भरे लोग जाति क्षेत्र भाषा धर्म लिंग में रंग अधिक के बंधन को नहीं मानते हुए तो बस यही मानते हैं। कि मनुष्य मनुष्य में भेद के मनुष्य तो मनुष्य हुए और कुछ हो ही नहीं सकता आई स्मार्ट के माध्यम से ऐसा ही भावना रखने वाले लोगों के विषय में जानना उनसे प्रेरणा लेने का प्रयास करें।

कल तक जिनका अतिथि था आज उनका परिचारक हो गया।

क्योंकि मेरी अतिथि या अचानक ग्रुप की लपेट में आ गई और उन्हें, इंदौर के रोबोट नर्सिंग होम में लाना पड़ा।
रुक अगर पूरे वेग में परिणाम कब का पता और वातावरण चिंता से गिरा गिरा कि हम सबसे सस्ते तभी मैंने चुप कर देखा कि अपने विशिष्ट धवल वेश में आच्छादित नारी कमरे में आ गए हैं।
दे उनकी कोई 45 वसंत देखी वर्ण हम समवेत पर अरुणोदई की रेखाओं से  अनु रंजीत कद लंबा और सीता सादा।

नंबर मुंह अच्छा नहीं लगता बीमार के पास लंबा मुंह नहीं।

 आते ही उन्होंने कहा साफ-सुथरी भाषा उच्चारण साहब और सूअर आदेश का पर आदेश में अधिनायक का अधिकारी का पूर्णिमा का जिसका आरंभ होता है चिकन से और अंत गोद में राम वे माही थी उनकी आदित्य मदर टेरेसा मार्ग भूमि जिनकी फ्रांस और कर्मभूमि भारत की तरफ से उम्र के इस ब्लाउजों की सेवा में काम धाम भी राजी चावल बस यही है।
तबीयत खटक और हमारे डॉक्टर कमरे के भीतर मुद्र ने उस देखते ही का डॉक्टर तुम्हारा बीमार हंस रहा है तुम हंसी भी करते जो वह डॉक्टर ने अपने जान कितने अनुभव योग एक ही वाक्य में कूद गए मैंने भावना से अभिभूत हो सोचा जो बिना प्रसाद की मां बन सकती है वह ₹30 मासिक पर 20 वर्ष से दिन और रात सेवा में लग सकती है।

Wednesday, 21 August 2019

हरिशंकर परसाई हिंदी के पहले रचनाकार है।

जिसमें किसी भी व्यक्ति का अलग रह पाना  संभव सामाजिक पाखंड और रूढ़िवादी जीवन मूल्यों की खिल्ली उड़ाती हुई।

 हरिशंकर परसाई हिंदी के पहले रचनाकार है। जिन्होंने विन को विदा का दर्जा दिलाया और उन ने हल्के-फुल्के मनोरंजन की परंपरागत प्रीति से उबर कर समाज के समय प्रश्नों से जुड़े उनके व्यंग रचनाएं हमारे मन में गुदगुदी पैदा नहीं करती बल्कि हमें उन सामाजिक वास्तविकता के समान खड़ा करती है
उन्होंने सदैव विवेक और विज्ञान समझ दृष्टि को सकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया है उनकी भाषा शैली में खास किस्म का अपनापन है जिससे पाठक लेखक के साथ का चमकता का अनुभव करता है।
लेखक ने अपने एक परिचित रिटायर्ड कर्मचारी की दुख पूर्ण यथार्थ घटना से प्रेरित होकर इस कहानी की रचना की कहानी का कथानक इतना है कि भोलाराम के जीव की तलाश वर्ग में हो रही है मगर उसका जीव यमदूत को चकमा देकर अपनी पसंद की फाइल में घुस गया जीव की तलाश करते हुए नाराज आता है।

वह सब को गुस्से में अपनी मीणा देखकर दाबी फाइल निकल आते हैं। 

फाइल में  चिपके भोलाराम के जीव से सूरत चलने के लिए कहते हैं मगर भोलाराम का जीव कहता है कि मैं तो अपनी पेंशन की दरख्वास्त में ही चिपक रहना चाहता हूं।
कनी सुंदरी कथा तक मैंने होकर उसके सारे ऊपर गई थी कि मार्ग और छुट्टी ले व्यंग के माध्यम से साकी ढांचे की लालफीताशाही घूसखोरी और करतूत को उजागर करने का प्रयत्न किया है।

भारत की समाज व्यवस्था और प्रशंसा तंत्र का चित्र इस कहानी में कुशलता और धार्मिकता के साथ किया।

गया इसमें मम्मी करता भी मानवीय संवेदना भी है पूर्ति के व्यंग से से तिलमिला देने वाली गंभिर भी है ऐसा कभी नहीं हुआ था पहले।
धर्मराज लाखों वर्षों से असंख्य आदमियों को कर्म और सिफारिश के आधार पर स्वर्ग नरक में निवास स्थान नोट करते आ रहे थे पर ऐसा कभी नहीं हुआ था सम्मान बेटे चित्रगुप्त  बार थूक से पन्ने पलटकर रजिस्टर देख रहे थे गलती पर मैं नहीं आ रहा था कि आखिर उन्होंने खींचकर रजिस्ट्री इतने जोर से बंद किया कि मक की में चपेट में आ गई थी।

शिव समग्र जीव जगत के लिए कल्याण तत्व है।

किरण तुमने भारतीय नारियों के बारे में सोच कर मुझे फेरे में डाल दिया है।

 इस समृति के चित्रपट के चित्रपट पर सैकड़ों हजारों मित्रों की भांति चमकते दमकते जीबीन एक के बाद एक ऐसे पढ़ते पढ़ते हैं। कि कल उसने पड़ गए हैं, किसका वर्णन हुआ और किसका नहीं उस अभी तो एक से एक बढ़कर है। कोई छोटा हो या बड़ा छोटे कहते अपराध की स्थिति है तो फिर जैसे-जैसे चित्र उभरता है उसका आंगन करता जाता है। सब तो एक जैसी गरीयसी मासी है और पत्र में बहुत अधिक लिखा भी भी तो नहीं जा सकता।
तुमने गोरी का नाम सुना है। वह पार्वती जिसने हिमाचल के घर जन्म लिया और पति रूप में शिव की प्राप्ति के लिए घोर तप किया था अब इस अभियान को समझने की कोशिश करो पार्वती नारी जाति का प्रतिनिधित्व करती है।

 शिव समग्र जीव जगत के लिए कल्याण तत्व है। 

जहां मानव दानव सुर असुर असुर दतिया सुर असुर दतिया गंधर्व सब एक समान आश्चर्य पाते हैं। वहां सांप बिच्छू बॉक्सिंग मूषक और मयूर सब एक साथ आनंद विचरण करते हैं शिव वह तत्व भी है। जो विषय वासना को पसंद करने की क्षमता रखता है। ऐसी कल्याणकारी शिव शक्ति को संसार के लिए सुलभ करने के नेतृत्व में सफल साधन की तुलना करने करने करने के बाद शिवजी संसार में खो गए थे  उनकी पूजा करती है,

सावित्री की कथा तो तुम्हें याद ही होगी। 

राज महल के लाड प्यार में पली उस सुकुमारी में ससुराल की मर्यादा की रक्षा के लिए किस प्रकार सहर्ष वन्यजीव अपना लिया था, उसने अनुसार ससुर की सेवा के साथ-साथ अनुपम पर्णपाती वर्तक आदर्श आदर्श संस्कार इस संसार के सम्मुख रखा इस त्याग तपस्या और निष्ठा से उसने ऐसी अलौकिक शक्ति का स्रोत पड़ा कि वे यमराज के फंदे से मृत्यु को भी जीवित लोटा जीवित लोटा भी जीवित लोटा जीवित लोटा लाने में समर्थ हुई।
एक थी माता अनुसूया ने श्री अत्रि की पत्नी उसके प्रतिवर्ती और राजनीति शक्ति के क्या कहने परीक्षा लेने आए त्रिदेव ब्रह्मा विष्णु और महेश और बन गईल समस्या सती की गोद में मचल तनिष्का सती सती का प्रताप भारतीय नारी की लोकोत्तर शक्ति अपने पुत्रों को शिक्षा देने वाली मौतों में 1 नाम होता है माता मदालसा का देवी बदल सब ब्रह्म ज्ञान की साकार ज्ञान की साकार ब्रह्म ज्ञान की साकार ज्ञान की साकार प्रतिभा थी ।

राम कृष्ण का विवाह बहुत कम उम्र में हो गया।

यदि रथ का पहिया निकल जाता तो पता नहीं क्या होता। 

राजा दशरथ विरत होकर पराजित भी हो सकते थे जानते हो कि तूने क्या किया वे राजा के साथ उसी रत्न थी जिसने की किस स्थान पर उंगली लगा दी रथ चलता रहा युद्ध उतारा विजय राजा की हुई,
तब उनका ध्यान गया।
 उसकी उंगली की और वह सब कुछ समझ गई उन्होंने रानी का जीवन आजीवन आभार माना एक थी।
संहिता हालात यह थे।
पलंग पीटते जी गोदारा सीएनएनमनी कटोरा ऐसी राजकुमारी ऐसी परिस्थिति में पली-बढ़ी किंतु जब पति को भूल गई, अपनी सुख-सुविधा और पति की सेवा के लिए प्रदेश में 14 वर्ष में सेवा के लिए प्रदेश में  हजारों सीता को वनवास दिया वह सीता को कोई शिकायत नहीं।

फिर जब अयोध्या कर राम राजा  बने तो सीता को वनवास दे दिया वह सीता को को कोई शिकायत नहीं। 

कोई प्रतिवाद नहीं जो मर्जी पति परमेश्वर की हुई, हो उसने आत्म बल का सहारा लिया जंगल में जाकर कुटी छवाय वह पुत्रों के रूप में लव कुश नामक दो अनमोल निंदिया पाई और वह पुत्र भी कैसे कैसे भी कैसे कैसे अभी दूध के दांत भी नहीं टूटे थे। कि सीता के लालू ने अश्वमेध के घोड़े के लिए लड़ते समय राम की सेना के महारथियों के दांत खट्टे कर दिए ऐसी थी सीता की शक्ति ऐसी थी, उसने सुनी की शिक्षा आधुनिक युग की भर्ती महिलाओं में तुम रानी लक्ष्मी के बारे में इतिहास में नारियों ने भी अपने साथ सूर्य त्याग मृत्यु प्राप्त किया है।

 रामकृष्ण परमहंस की पत्नी शारदा मणि को भूल नहीं जा सकता।

 राम कृष्ण का विवाह बहुत कम उम्र में हो गया उनकी पत्नी शारदा मणि तो बहुत ही छोटी थी शारदा मणि ससुराल की सेवा में लग गई, उनके एक काली मंदिर के पुजारी थे और मां काली की पूजा करते थे।
वेतन तीव्र गति से अध्यात्म की ओर अग्रसर होने लगे मां शारदा मणि का सपूत दृश्य का मनोरथ भंग होने लगा किंतु यही उनकी भारतीय चरित्र उजागर हुआ।

मन किसी काम में नहीं लगता भूख भी पहले से कम हो गई है।

दिव्या अनिल की छोटी बहन है। यूं तो वे शुरू से ही कमजोर है लेकिन इधर कुछ दिनों से उससे हर समय थकान महसूस होती रहती है।

 मन किसी काम में नहीं लगता भूख भी पहले से कम हो गई है। अस्पताल में उसे डॉक्टर ने तो देखा तो कहां लगता है दिव्या के शरीर में रक्त की कमी हो गई है। जांच कराकर देखते हैं यह कहकर उन्होंने दिव्या को रक्त की जांच के लिए पास के एक कमरे में भेज दिया वहां अनिल को अपने ही जान पहचान के डॉक्टर  दीदी ना कहो अनिल कैसे आना हुआ। अनिल ने बताया कि डॉक्टर ने दिव्या को खून की जांच के लिए आपके पास भेजा है। इतना सुनते ही डॉक्टर दीदी ने दिव्या की उंगलियों से रक्त की कुछ बूंदे एक एक छोटी सी में डाल दी और पर लगा दी, अनिल से बोली अनिल से रिपोर्ट अगले दिन अस्पताल पहुंच कर दीदी के कमरे के दरवाजे पर दस्तक दी आ जाओ अनिल ने कमरे में प्रवेश द्वारा एक फ्लाइट की जांच कर रही थी। दीदी के पास रखी कुर्सी पर बैठ गया फ्लाइट की जांच पूरी होने पर ठीक हो जाएगा।
एक सवाल पूछूं।

हां हां क्यों नहीं डॉक्टर दीदी ने कहा एनीमिया से आपका क्या मतलब है। 

दीदी उसने पूछा यह जानने के लिए तुम्हें रक्त के बारे में जानना होगा, डॉ दीदी ने कहा फिर बोली अनिल देखने में रक्त लाल दुर्गा दुर्गा के समान दिखता है। किंतु इसे सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखे तो यह भानुमति के पिटारे से कम नहीं मोटे तौर पर इसके 2 भाग होते हैं एक बाग में जो तरल है।
जिसे में प्लाज्मा कहते हैं दूसरे हुए जिसमें छोटे-बड़े कई तरह के कण होते हैं कुछ लाल कुछ सफेद वह कुछ ऐसे जिनका कोई रंग नहीं जिन्हें प्लेटलेट कम कहते हैं।
इतना कि के डॉक्टर दीदी ने सूक्ष्मदर्शी के नीचे एक स्लाइड लग गई उसे फॉक्स किया और बोली देखो अनिल सूक्ष्मदर्शी द्वारा जो कल तुम्हें दिखाई दे रहा है। यह लाल रक्त कन्हैया से  लाइट देख मानव आश्चर्य से चल पड़ा था, अनिल रक्त की एक बूंद में इतने सारे गण इसकी तो वह कल्पना भी नहीं कर सकता वह बोलना इन्हें देखकर तो ऐसा लग रहा है,

 मानो बहुत सी छोटी-छोटी बालूशाही रख दी गई है। 

हां दीदी बोली लालगढ़ बनावट में बालूशाही की तरह ही होते हैं। गोलू और कल्याणी बीच में दबे हुए रक्त की एक बूंद में इनकी संख्या लाखों में होती है, यदि 1 मिलीमीटर रक्त ले तो उसमें हम 40 से 55 लोग कल मिलेंगे उनके कारण ही हमें रक्त लाल रंग का नजर आता है।

यह भारतीय चिंतन और आचरण की एक महाशक्ति है।

यह जानकर बड़ी प्रसन्नता हुई कि पिछली परीक्षा में तुम्हें अच्छे अंक प्राप्त हुए हैं। 

अब तुम्हें सातवीं कक्षा में पहुंचा गया हो तुमने यह भी लिखा है कि तुम्हारी बहन रोमा और अनुज शंकर को को को रमेश तीसरी और दूसरी कक्षा में आ गए हैं, मुझे यह जानकर और भी अधिक खुशी हुई कि मेरी पोती रोमा को अपनी कक्षा में प्रथम स्थान मिला है।
इस सफलता के लिए तुम्हें सभी बच्चों बच्चियों को बाबा की ओर से सनसनी बधाई हो।
अब तुम्हारे पत्र का उत्तर तुम भारत की मन इस वनी महिलाओं के विषय में कुछ जानना चाहती हो तुम्हारी इस जिज्ञासा में अपनी पूजा भारतीय महिलाओं के प्रति हमारी श्रद्धा जलती है।

 यह एक बड़ा ही शुभ लक्षण है। 

मनुष्य जैसा सोचता है वैसा ही बनता है तुमने सुनी महिलाओं के बारे में जाने की तो उनके सद्गुणों अनायास तुम्हारी मन में आ जाएगी, तुम्हारे जीवन में उनके करमास समावेश से से तुम्हारे उज्जवल भविष्य का पथ प्रशस्त प्रशस्त प्रशस्त हो जाएगा भारतीय नारियां अनादि काल से ही अपनी विद्या बुद्धि कला कुशलता सरिता के आधार पर मानव जीवन और जगत् को अधिकांश सुख में बनाने का सफल प्रयास करती है, साथ ही अपने त्याग तपस्या सॉरी उदारता भक्ति वात्सल्य सम्मुख उच्च आदर्श प्रस्तावना करती आ रही है इनकी कीर्ति कल आपसे आपसे आज भी समस्त भारतीय वंश में उनका शोरूम शैली है।

आज भी किसी अनजान व्यस्क महिला को माताजी के क संबोधित करने की परंपरा विद्यमान है। 

यह भारतीय चिंतन और आचरण की एक महाशक्ति है। नारी जाति के प्रति पुरुष वर्ग का यह श्रद्धा सम्मान बुरा आचरण अकारण नहीं प्रत्यक्ष कारण है। नारी नहीं मनुष्य को गृहस्थ और किसान बनाया उसका यह प्रत्येक मानव सभ्यता संस्कृति के भवन की नींव की पहली शीला प्रमाणित हुई, स्वयं ग्रस्त जीवन के केंद्र में स्थित रहकर भारतीय नारी ने बड़े बूढ़ों की सेवा की को पाला पोसा और पति के कंधे से कंधा मिलाकर पारिवारिक निवारण किया है।

Sunday, 18 August 2019

बिच्छू संस्कृति वरुण और मंत्रों को लिखने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने लगे हैं।

जापान में संस्कृति को भीतर बसा के स्थान प्राप्त हुआ है। 

बिच्छू संस्कृति वरुण और मंत्रों को लिखने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने लगे हैं।
सिंघम का अर्थ ऐसी लिपि जो सीख देती है आज भी जापानी विद्वान संस्कृति के अध्ययन के लिए उत्सुक रहते हैं वास्तव में बौद्ध ग्रंथों की भाषा के होने के कारण संस्कृति भारत और जापान के मध्य एक महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य कर रही है सातवीं शताब्दी में राजकुमार छोटू के समय चीनी भाषा में अनूदित बौद्ध ग्रंथ जापान पहुंचे थे, वहीं ग्रंथों के दुश्मन से बहुत प्रभावित हुए त्रिविध मूल्य के उत्तर में बहुत ही ऊंचे पठार पर बसा है।

 तिब्बत के लोग बुधनी माना जाता है।

तिब्बत के राजा नरदेव ने अपने एक मंत्री फोन में वोट के साथ शोले श्रेष्ठ विद्वानों को मगध भेजा इन विद्वानों ने अपने भारतीय शिक्षकों से ज्ञान प्राप्त किया उस समय के पश्चात थाना कुसमी चले गए थे, ऐसा कहा जाता है। कि भारतीय लिपि के आधार पर तिब्बत के लिए एक नई लिपि का आविष्कार किया आज तक इस लिपि का प्रयोग किया जाता है। तथा ऐसा मालूम पड़ता है कि पुस्तकों ले गए तिब्बत लोड कर दोनों में समर्थन ने तिब्बती लोगों के लिए नए व्याकरण की रचना की यह पानी यह पानी द्वारा लिखी संस्कृत व्याकरण पर आधारित मानी जाती है संवादों के माध्यम से यह आई साहित्य के प्रति राज्य इतना आकर्षित हुआ है। कि उसने साहित्य के दिन हो 4 साल बिता दिए उसने संस्कृत में तिब्बती भाषा में अनुवाद की नींव डाली है।

भारत और जापान के सांस्कृतिक संबंधों का इतिहासिक 15 वर्ष पुराना माना जाता है। 

लेकिन भारतीय संस्कृति की जापान में प्रवेश के लिखित प्रमाण चंपारण सुबह उनसे है उस समय कोरिया के सम्राट ने जापानी सम्राट के लिए अनेक प्रकार की भेंट भेज इसमें बहुत मूर्तियां सूत्र पूजा में प्रयोग होने वाली संस्थाओं और एक साथ मूर्तियां कलाकार और शिकारी सम्मिलित हुए हैं, उनके साथ और इस तरह भारत में और जापान में संस्कृति भाषा का उल्लेख गया और इसी के कारण भारत और जापान के बीच बहुत गहरा संबंध है इसी भाषा के कारण और माना जाता है। कि आज भी पहले भी और आने वाले दिनों में भी यह बस इसी तरह चलती रहेगी भारत और जापान के बीच में।

भारत से धर्म दर्शन मूर्ति बनाने की कला चित्रकला जाति विज्ञान आदि।

भारत और चीन के आपसी संपर्क दूसरी शताब्दी ईस्वी में आरंभ हुआ है। 

भारतीय संस्कृति ने सर्वप्रथम दो भारतीय चोरी उधर म्यूजिक शिवपुर कश्यप मांगद के माध्यम से चीन में प्रवेश किया जो चीनी सम्राट में किस सन में चीन गए थे। आचार्य धर्म और कश्यप मातंग के पश्चात चीन और भारत के बीच विद्वानों का आना-जाना नियंत्रण विभाग की गति से चलता राजीनी बहुत ही सभ्य लोग थे। सभी नए बुध की पूर्ण कहानियों को बहुत ध्यान से सुना जो भी चीनी यात्री ज्ञान की खोज में उन्होंने अपनी यात्रा की दृष्टि से मेरे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण बन गई है। भारतीय विश्वविद्यालयों और बिहारियों के अनेक शिक्षक चीन में प्रसिद्ध हुए हैं।

दुश्मन एचडी वीडियो न्यू को आकर्षित किया।

क्योंकि उन्हें के पास पहले से ही नमक विकसित दर्शन थे।
छठी शताब्दी में वंश के राजाओं ने सत्ता संभाली विश्वास के पहले सम्राट ने बौद्ध धर्म को विराज ब्रह्म घोषित कर दिया इसके बौद्ध दर्शन के प्रचार को गति मिली इस काल में हजारों संस्कृति किताबों को चीनी भाषा में अनुवाद हुआ था संकट में भयानक और लंबी यात्रा को बहादुर सिंह की भूमि पर आई।
कोरिया चीन के उत्तर पूर्व में स्थित है कोरिया को भारतीय संस्कृति के प्रति चीन से प्राप्त हुए थे सबसे पहले सुनना मूवी बुध की मूर्ति और सूत्र लिखकर सन में कोरिया पहुंचा उसका फ्रांसन 380 में आचार्य आनंद  कोरिया के भारतीय मंदिरों का निर्माण निर्माण करवाया था।

 इसके बाद अनेक भारतीय शिक्षक कोरिया जाते रहे हुए।

भारत से धर्म दर्शन मूर्ति बनाने की कला चित्रकला जाति विज्ञान आदि विषयों के ज्ञान अपने साथ लाए ज्ञान की खोज करते करते कोरिया से भी विद्वान द्वारा विशेष रूप से ज्योतिषी विज्ञानं आयुर्वेदिक विज्ञान के अन्य कई क्षेत्रों में परीक्षण प्राप्त किया कोरिया में मंदिर और धर्म के साथ ज्ञान केंद्र भी बड़ी संख्या में किया गया। इतिहास में भारत और भूटान के बीच संबंध का एक प्रमाण यह है कि भिक्षु को और शिक्षकों का आगमन निरंतर चलता रहा वहां से प्राप्त पहली शताब्दी के सिक्कों पर एक वह चीनी भाषा में लिखा हुआ है। तो दूसरी ओर प्राकृत भाषा में खरोष्ठी लिपि में गोदान की संस्कृति को प्रमाणित करता है।

Monday, 12 August 2019

फिर जीवन का प्रथम वसंत आया।

गिल्लू को जाली के पास बैठकर अपनेपन से बाहर जाते देखकर मुझे लगा कि इससे मुक्त कराना आवश्यक है।

 भूख लगने पर चिक चिक करके मानोगे मुझे सूचना देता और काजू या बिस्कुट मिले जाने पर उसी स्थिति में लिफाफे से बाहर वाले पंजों से पकड़ कर उसे पुत्र आता रहता।फिर ब्लू के जीवन का प्रथम वसंत आया।
अभिषेक कागज पत्रों के कारण मेरे बाहर जाने पर कमरा बंद ही रहता है।
 मेरे कॉलेज से लौटने पर जैसे ही कमरा खोला और मैंने भीतर पर रखा वैसे ही गिल्लू अपने जाली के द्वार से भीतर आकर मेरे पैर से सिर और सिर से पैर तक दौड़ लगाने लगा तब से यह नित्य का करम हो गया मेरे कमरे से बाहर जाने पर वह भी खिड़की की खुली जाली की रहा है।
बाहर चला जाता और दिनभर गिलहरियों के झंडे का नेता बना और डाल पुस्तक विक्रेता और ठीक बजे हुए खिड़की से भीतर आकर अपने झूले में झूलने लगता मुझे चुप करने कि उसने जाने कब और कैसे उत्पन्न हो गई थी फूलदान के फूलों में छिप जाता का वीडियो में मेरे पास बहुत से पशु-पक्षी है,

और उनका मुझ से लगाओ भी कम नहीं है। 

गिल्लू इन में अपवाद था मैं जैसे ही खाने के कमरे में पहुंची खिड़की से निकल कर आंगन की दीवार बंदे पार करके मेज पर पहुंच जाता हूं, और मेरी थाली में बैठ जाना चाहता बड़ी कठिनाई से मैंने उसे थाली के पास बैठना सिखाया जा बैठ कर बैठ, मेरी थाली में से एक-एक चावल उठाकर बड़ी सफाई से खाता रहता का जूस का प्रिय खाद्य था और कई दिनों का जो ने मिलने पर रहने खाने की चीजें या तो नाना बंद कर देता है।
या झूले से नीचे फेंक देता था।

उसी बीच मुझे मोटर दुर्घटना में आहत होकर कुछ दिनों से हड़ताल में रहना पड़ता। 

उन दिनों जब मेरे कमरे का दरवाजा खोला जाता गिल्लू अपने झूले से उतरकर दौड़ने और फिर किसी दूसरे को देखकर तेजी से अपने घोंसले में जा बैठता था।
 मेरी अवस्था में वैद्यकीय परशुराम ने बैठकर अपने नन्हे नन्हे पंजों से मेरे शरीर और बालों को इतना होले होले से लाता रहता, कि उसका घटना एक परी तारीख के हटने के समान लगता।

Sunday, 11 August 2019

जिस कारण इस योग को जागरण का युग का जाता है।

नए नियम तथा नए प्रकार की खोज की जिस कारण इस योग को जागरण का युग का जाता है। 

पुनर्जागरण मेंन नमक कलाकारों का उदय हुआ। जिनके पास शरीर रचना से संबंधित ज्ञान कम था। लेकिन के दौरान पश्चिमी यूरोपीय वास्तुकला का वर्णन करने की मेघा सकती थी यही कारण है। कि उन्होंने अपने पेट में विज्ञान समय और दृष्टिकोण को अच्छी तरह से चित्रित किया।
किस युग के प्रसिद्ध कलाकार लियोन डाल डॉक्टर भीम सीरियल तथा माइकल एंजेला उपयुक्त चित्रकार चंद्रावती चिल्ली की करती है। जो आसपास बनाया था कृतियों से प्रेरणा पाकर बनाए गए, चित्रों में इसकी गणना की जाती है। इस चित्र में ग्रीस की प्राचीन देवी विस्कोसिटी में से पैदा होते हुए दिखलाया गया।
निर्भर देवी सांसारिक प्रेम के स्थान पर आध्यात्मिक प्रेम को निरूपित करती है।

सौंदर्य तथा शक्ति के रूप में व्यस्त है। 

दिखाई देती है, करते हुए दिखाई देते हैं। उसके शरीर के अंग पतले और लंबे है। धुअपार करती प्रकाश के प्रयोग से कोमल तथा शांति में सुंदरी का बोध होता है। लियोनार्डो डा विंची की है ।
मोनालिसा के अतिरिक्त उसकी अन्य कर दिया जैसे विषय में ख्याति प्राप्त है, वह है। लास्ट सपर वर्जन ऑफ मोनालिसा एक महिला का चित्र है। जिसे पहाड़ी लकड़ी पर तालियां माध्यम से बनाया गया है। चित्र में इतनी सजीव पता है मानो वह दर्शक को देख रही है।

इस चित्र को पिरामिड डिजाइन में बनाया गया है। नहीं दिखाई दे रहा है। 

 इस प्रसिद्ध मूर्ति में कुमारी मेरी कौन द्वारा बनाई गई मूर्ति निर्जीव शरीर की गोदी में लिए हुए दिखाया गया है। मां बेटी है।
और यीशु मरता था मां की गोदी में है। इस चित्र में मूर्तिकार की कला में पूर्ण आयु के सौंदर्य का प्राचीन आदेश कथा कलाकार की अपने अंतरराष्ट्रीय की मूर्ति रचना उत्कृष्ट और परिस्थिति के वस्त्र में एक परिवार है। तथा शरीर संरचना अद्भुत है, माइकल एंजेला की आकृति डेविड रोम में स्थित मशहूर है।

Sunday, 4 August 2019

हमारे देश में ऐसी चितपुर आठों की संख्या करोड़ों में है।

 हम किसी प्रकार इनके मानस मंदिरों में शिक्षा की ज्योति जगह सके। 

मान धर्म और सबसे पवित्र कर्तव्य का पालन होगा रेलगाड़ी और बिजली की  से भी अपरिचित लोगों का होना हमारी प्रकृति पर कलंक है इस योजना से गांव में एक सीमा तक आत्मनिर्भरता एक ही हर बात के लिए शेरों की और काटने की प्रवृत्ति समाप्त होगी।
निरंतर रूढ़ियों और अधिमान शो में फंसे हुए।
और अपने गाढ़े पसीने की कमाई को नगरों की भेंट चढ़ाने वाले यह हमारे भाई प्रोड शिक्षा से निश्चित ही सचेत और विवेक बनेंगे स्वास्थ्य सफाई उन्नति तथा आपसी सद्भावना के प्रतीक और शिक्षा उनको जागरूक बना सकती है। इससे उनकी मेहनत की कमाई डालने से बचेगी।
अखबारों में जगह के हिसाब से समाचार संपादक समाचारों का सारा लेखन करते हैं।

कई बार लिखो यह तक की पुस्तकों तक का शर्तिया किया जाता है। 

सरकारी कार्यालयों में ही सही सहायक द्वारा पात्रों और कभी-कभी तो पूरी फाइल का सहारा लेकर किया जाता है हमें एक बार कैसे पढ़ना चाहिए और क्या मैं पढ़ना चाहिए वह अखबार वालों को सारा खबर रहता है और उसे किस जगह क्या छापने इस पृष्ठ पर क्या लिखना है उसे इस बात का पूरा नॉलेज रहता है। आप यह भी जानते हैं कि मनुष्य के सारे बाशा की महत्व भूमिका क्या होती है।
हम अखबार पढ़ते हैं। तो हमें पता होता है कौन से पृष्ठ पर क्या लिखा होता है।
 और तो और हम अपनी मन की इच्छा के बगैर अखबार नहीं पढ़ते।
अब ऐसी सामग्री पढ़ने के तरीके बताते हैं।

जो आपने कभी नहीं पड़ी जो आपके लिए बिल्कुल नहीं है। 

या नहीं पटी चाहिए जब आप किसी ने पटेल सामग्री को पढ़ना शुरू करें तो उससे पहले उस पर एक नजर ऊपर से नीचे तक डाले आपको देखते ही कुछ मोटी मोटी सी चीजें समझ में आ जाएगी जैसे पढ़ने सामग्री का शिष्य क्या है इसके बारे में क्या लिखा है वह पहले पढ़ते वक्त यह ध्यान करते हैं कि इस सामग्री में क्या होता है तब जाकर उसे पूरा पढ़ते हैं।
किसी किसी मनुष्य की तैयारी होती है कि वह अखबार को पहले पीछे से पड़ता है फिर आगे से पड़ता है।
क्योंकि आप आप की पढ़ने की सबकी अलग-अलग रुचि है।
 और क्या पढ़ना है उसे वह सब उसे मालूम है।
अखबार में रोज-रोज नई खबर आती है।
अखबार का समय काल सुबह से लेकर शाम तक होता है। जो कि बहुत ही है।
अखबार रोज नए नहीं आते रहते हैं और मनुष्य को मालूम होता है।
कि मैं कौन सी चीज क्या पढ़नी है वह सब उसकी वजह से ही पड़ता है ग्वार का समय सुबह 6:00 बजे होता है। जो कि सबसे अखबार को इंतजार करते हैं फिर से 15 मिनट में उसका समय काम खत्म हो जाता है इसलिए एक बार का समय बहुत ही कम होता है। इसलिए मनुष्य अपनी तरक्की करता है और करते ही रहता है।

हमारे देश में बहुत ही अधिक अबकी बार वर्षा हुई है आइए जानते हैं।

वर्षा का मौसम है और कहां कितनी वर्षा हो रही है। 

हमारे देश में बहुत ही अधिक अबकी बार वर्षा हुई है।
कई इलाकों पर तो इतना पानी भरा हुआ है कि बाढ़ की आशंका है।
 और कहीं-कहीं तो इतना है कि अभी तक पानी कबूल क्यों नहीं टक्कर हमारे अजमेर में इतनी बारिश हुई है कि वहां बाढ़ का हालत बना हुआ है।
आना सागर का पानी पूरे चौपाटी पर फैला हुआ है।
आने जाने का रास्ता बंद हो गया और शहर के बीचो बीच में आना सागर का पानी होने से शहर में बहुत ही पानी का दिक्कत हो रहा है वह कहीं वहां से पानी बाहर निकालने की जगह नहीं है और पानी पूरे अगर वहां बाढ़ आ जाए तो पूरा शहर का आनासागर चौपाटी भेज सकता है तो हमारे शहर में पानी की आशंका बहुत अधिक है यहां पानी बहुत ही ज्यादा बढ़ता जा रहा है वर्षा होने पर यहां से चलना भी मुश्किल होता जा रहा है।

कहीं के इलाकों पर तो पानी इतना कम है कि पूछो ही मत हमारे देश में पानी बार बहुत हुआ है। 

क्या आपने कभी सोचा होगा कि वर्षा इतनी तेज हो सकती है।
बाढ़ के हालात बन सकते हैं जोधपुर अजमेर बहुत ऐसे कई इलाके हैं। जहां बाढ़ के हालात बने हुए हैं 10 दिन वीं सदी दिन में बारिश होती है वह गांव में धीरे-धीरे पानी आते जा रहा है। कहीं अब जाकर कहीं समंदर या तालाबों में पानी पीता हो रहा है वर्षा अबकी बार इतनी तेजी है गांव में तालाबों में पानी आ रहा है। जिसे मर के तुम अब की बार रची हुई है जिससे फसल बहुत अच्छी है और कहीं पहले तो रोड भी हुआ था कि तुम और अब जाकर कहीं पर आ रही है।

अजमेर का आना सागर में कितना पानी आया है।

 कि आपको सूचित करता हूं कि आप अपने बच्चों का ध्यान रखें उन्हें बाहर ना भेजें अभी भी अजमेर में आना सागर के पानी आने से एक से बैठ गया। और साथ में छड़ी भी बेगी ऐसे बहुत ही नुकसान हो सकता है। इसलिए आप अपने बच्चों को घर पर ही रखे बाहर ना जाने दे कहीं आपके बच्चों को कुछ चोट लग जाएगी बहन ने जाएगी इसलिए पूरा अपने घर का ख्याल रखें और किसी को बाहर जाने ना दे।

पृथ्वी अमृत देवी का प्रतीक माना गया है।

कडप्पा मोहनजोदड़ो तथा अन्य स्थानों से मिट्टी की मूर्ति बहुत बड़ी संख्या में प्राप्त हुई है। 

सिंधु सरस्वती सभ्यता में भाषा एवं लिपि का विकास हुआ सिंधु सरस्वती सभ्यता का प्रमुख देवता पशुपति शिव थे विश विभिन्न रूपों में उनकी मूर्ति हैं। उन चित्र देखने को मिलते हैं इनमें से सबसे प्रमुख योगी की मुद्रा में बैठे हुए त्रिमूर्ति का चित्र है।
व्यापार का हिसाब किताब रखने के लिए संभोग का विकास हुआ।

 सिंधु सरस्वती सभ्यता के प्रमुख के समग्र अध्ययन से स्पष्ट है। 

कि यह भारत की प्राचीनतम नगरिया व्यापार वाणिज्य प्रधान सभ्यता थी जहां पर आज मैं किसको का यूकाटन नामक स्थान है।
ऐसा माना जाता है कि उत्तर में पर्वतीय प्रदेशों से आए सुमेरियन लोग मसू पेट्रोलियम में बस गए और उन्होंने एक अत्यंत समृद्ध सभ्यता का विकास किया है।
चीनी लोगों का धर्म शुरू श्रद्धा और परिष्कृत रहा चीन में प्राकृतिक शक्तियों के साथ-साथ वनस्पति अस्त्र-शस्त्र पूर्वजों आदि को भी पूजा जाता है। जहां जादू टोना द्वारा परमात्मा को नियंत्रण करने की प्रथा थी बालाथल से प्राप्त विशेष आकार प्रकार के चमकदार मिट्टी के बर्तन दो प्रकार के एक कुदुरे दीवारों वाले लैब किए हुए मिलता है काले तथा लाल बर्तनों के सामान्य सफेद रंग के चित्र मिलते हैं बालाथल के टीले के मध्य में एक विशाल दुर्ग स्वरूप सरचना खोजी गई, जिसका दीवार लगभग बहुत ऊंचा है यह दुर्ग क्षेत्र में फैला हुआ था यह दुर्ग मिट्टी देता पत्रों से बनाया गया बालू स्थल की खुदाई में 11 कमरे के बड़े भवन की रचना प्राप्त हुई है।

वैदिक दर्शन के अनुसार कर्म के आधार पर पुनर्जन्म होता है। 

इससे व्यक्ति उत्तम कार्य समाप्ति कर जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है प्रत्येक जीवन अपने द्वारा किए गए कर्मों के अनुसार उनका फल भोगने के लिए पूर्ण जन्म लेना पड़ता है विश्व की समस्त अनुभूतियों की बौद्धिक व्यवस्था तथा उनके मूल्यांकन के प्रयास होने वाले प्रमुख दर्शन मनुष्य को प्राप्त होते हैं जैन दर्शन का इतिहास अत्यधिक प्राचीन दर्शन के विकास में तीर्थ कारों की महत्व भूमिका रही है। महावीर स्वामी से पहले सारे तीर्थ कार यहां आए हुए थे प्रथम तीर्थ का वेद थे।

हम परिवार के जीवन चक्र का आरंभ व्यवस्था से करेंगे या युवावस्था से करेंगे।

 यह जीवन का वह इस तरह जब व्यक्ति अपने स्वयं की पहचान प्राप्त करता है। 

और एक संयुक्त युवा दिवस के रूप में उभरता है। वह भावात्मक शारीरिक सामाजिक तथा वित्तीय रूप से स्वतंत्र इकाई है। अब वह परिवार से अलग रह सकता है अपने स्वास्थ्य तथा पोषण का स्वयं ध्यान रख सकता है परिवार के बाहर भी दीर्घकालीन निकट संबंध स्थापित कर सकता है यह अंतर्गत युवाओं को परिवार से अलग रहकर भी कटिंग समय और दूसरी चुनौतियों का सामना करने की क्षमता प्रदान करती है। इस प्रकार के निकट संबंधों को स्थापित करने के लिए प्रतिबंधक तथा विवाह व्यवसाय भी कहा जाता है लगाओ अनिवार्यता सब कुछ या व्यवस्था में होता है।

युवा करके व्यक्ति सर्वाधिक घनिष्ठ संबंध की स्थापना करता है। 

युवा व्यक्ति के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है युवती का विवाह वश में किया जाता है। और विवाहित युवा का वर्ष की आयु में कहा जाता है। पहले नहीं करना चाहिए यह माना जाता है। कि इस आयु तक युवा व्यस्क अपनी मूलभूत नियंत्रण शिक्षा प्राप्त कर लेते हैं। देता अपने जीवन यापन के लिए तैयार हो जाता है परंपरागत रूप से भारत में माता पिता को ही बच्चों के लिए जीवनसाथी चुनने का अधिकार होता है। किंतु आजकल युवा वर्ग अपने जीवन साथी के चयन में विवाह करने के समय में स्वयं निर्णय लेते हैं जो कि यह गलत है। माता पिता के बिना स्वयं निर्णय लेते हैं और आगे जाकर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है इसलिए आप अपने माता-पिता से सहायता की अपना विवाह की रचना करें।

विवाह की तैयारियां अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। 

क्योंकि विवाह की प्रक्रिया में अनेक जिम्मेदारी होती विवाह के अनंत रविवार युवती एक साथ रहना शुरू कर देते हैं। तो जीवन में अनेक परिवर्तन होते हैं। युवा के बंधन में बनने वाले दोनों युवाओं को विवाह की परंपरा का सामना करने के लिए भावात्मक सामाजिक शारीरिक तथा मानसिक रूप से तैयार होना चाहिए अपने जीवन में समझ ही स्थापित करना है। सहन शक्ति विकसित करने तथा उससे निपटने तथा अपनी भावनाओं को नियंत्रण करने के लिए परिवार के अनुभवी विषयों से सलाम लेनी चाहिए।

हम सभी ने समान मूल्यों को ग्रहण किया है।

इस परिवार में आऊंगा अपने क्षमता को विकसित करते हैं।

एक सुंदर मनोहर सुबह के समय गर्म चाय की प्याली के साथ-साथ एक समाचार पत्र भी मिल जाए तो उससे बेहतर कुछ नहीं है। यह एक बहुत अच्छा गुण है, जो बहुत कम दिखाई देता है वह उस बैग से रोककर निकाल कर दिया बेवकूफी सकता था किंतु उसने ऐसा नहीं किया उसके विवेक ने उसे ऐसा नहीं करने दिया और उसे सही निर्णय लिया ईमानदारी व मूल्य है जो ऑफिस के पास है आप यह सोच रहे होंगे कि मुरली क्या होता है।
यह कहां से आता है क्या मूल्य नैतिकता से भिन्न होता है। और ऐसा ही एक सवाल आपके मन में घूम रहे होंगे तो आपको सब कुछ इस में पता चल जाएगा।

आप रोजाना समाचार पत्रों में अनेक प्रकार की खबर पढ़ते हैं। 

जिससे भ्रष्टाचार खाद्य मिलावट अपहरण हिंसा तथा अत्यधिक आदि हमारे समाज को यह क्या हो रहा है लोग अपनी चेतना को मारकर पैसा के पीछे क्यों भाग रहे हैं हमारे समाज में मूल्य धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। कुछ लोग अनैतिक माध्यमिक उसे संपन्नता प्राप्त कर रहे हैं आपने समाज में हमें ऐसे क्यों होने दे रहे हैं हम अपने समाज के इस पतन को रोकने के लिए मिलकर प्रयास क्यों नहीं कर रहे हैं। इसके लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि हम वैसे हर व्यक्ति जीवन के हर क्षेत्र में मूल्यों का अनुसरण करें यदि इस मूल्य का अनुसरण नहीं किया जाए तो हमारे समाज का क्या होगा आप ऐसे ही अनेक प्रश्नों के बारे में विचार विमर्श कर सकते हैं।
यदि समाज के सभी सदस्य मूल्यों तथा नैतिकता का अनुसरण नहीं करें उन्हें तो समाज में पूर्ण रूप से संतुलन तथा व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

हम सभी एक परिवार में रहते हैं जो व्यक्तित्व रूप से हमारा पोषण करते हैं। 

 एक दूसरे को स्नेह देते हैं प्राप्त करते हैं परिवारिक जीवन व्यक्ति को स्वस्थ संबंध स्थापित करना देता हूं उन ने बनाए रखने का अवसर प्रदान करता है परिवार में व्यक्ति महत्वपूर्ण सामाजिक कौशल जैसे दूसरों की देखरेख करना वस्तुओं को दूसरों के साथ बांटना तथा शांति को भी शिक्षित करता है।
जब अंकिता दोपहर में घर वापस आए तो उसकी मां ने उससे पूछा कि सुबह के अनुभव के बारे में उसे कैसा लगा।