Saturday, 13 July 2019

हमने उनसे पूछा यह बस चलती भी है।

तुम पास मित्रों में तय किया कि शाम की बस से चले पन्ना से इसी कंपनी के बस इतना के लिए घंटे भर बाद मिलती है।

 जो जबलपुर की ट्रेन मिला देती है। सुबह घर पहुंच जाएंगे हम में से को सुबह काम पर हाजिर होना था इसलिए वापसी का यह रास्ता अपनाना जरूरी था। लोगों ने सलाह दी कि समझदार आदमी शाम को वाली बस से सफर नहीं करते क्या रास्ते में डाकू मिलते हैं नहीं बस बाकी ने बस को देखा तो सरदा उमड़ पड़ी खूब वयोवृद्ध थी। सदियों के अनुभव के निशान लिए हुई थी। लोग इसलिए सब इससे सफर नहीं करना चाहते हैं कि वृद्धावस्था से इसे कष्ट होगा यह बस पूजा के योग्य थी। उस पर सवार कैसे हुआ जा सकता है।

बस कंपनी के एक हिस्सेदार भी उसी बस से जा रहे थे।

हमने उनसे पूछा यह बस चलती भी है वह बहुत चलती क्यों नहीं जी अभी चलेगी हमने कहा वही तो हम देखना चाहते हैं अपने आप चलती है या और कैसे चलेगी गजब हो गया ऐसी बस अपने आप चलती हैं। हम आगा पीछा करने लगे डॉक्टर मित्र ने कहा डरो मत चलो नई नवेली बसों से ज्यादा विषय है हमें बेटों की तरह प्यार में से गोद में ले कर जाएगी हम बैठ गए जो छोड़ने आए थे ।वह इस तरह देख रहे थे कि अंतिम विदा दे रहे हैं। उनकी आंखें कह रही थी आना जाना तो लगा ही रहता है सो जाएगा राजा रंक फकीर आदमी को कुछ करने के लिए एक निमित्त चाहिए इंजन सचमुच स्टार्ट हो गए। ऐसा जैसे सारी बस ही इंजन है।
 और हम इंजन के भीतर बैठे हैं आज बहुत कम बचत है जो बचे थे खिड़की से दूर रहा था हमें लग रहा था। कि हमारी सीट के नीचे इंजन है बस सचमुच चल पड़ी और हमें लगा कि यह गांधीजी के असहयोग और विज्ञान रही होगी उसे ट्रेनिंग में चुकी थी। हर दूसरे से कर रहा था। विज्ञान के दौर से गुजर रहा था।
 कभी लगता सीटी को छोड़ कर आगे निकल गई है अभी आ रही है 8 दिन बाद सारे भेदभाव मिट गए यह समझ में नहीं आता था, कि सीट में हम बैठे हैं या सीट पर बैठी।

एकाएक बस रुक गई मालूम हुआ कि पेट्रोल की टंकी में छेद हो गया है।

 ड्राइवर ने बाल्टी में पेट्रोल निकालकर उसे बगल में रखा और नली डालकर इंजन में रखने लगा अब मैं उम्मीद कर रहा था कि थोड़ी देर बाद बस कंपनी के इशिता इंजन को निकालकर गोद में रख। लेंगे और उसे नली से पेट्रोल पिलाएंगे जैसे मां बच्चे के मुंह में दूध किसी से लगाती है बस की रफ्तार सब उस 1520 मिल हो गई थी। मुझे उस के किसी हिस्से पर भरोसा नहीं था ब्रेक फेल हो गया था स्टेरिंग टूट गई थी। प्रकृति के दृश्य बहुत लुभावने थे। दोनों तरफ हरे भरे पेड़ पर पक्षी बैठे थे मेहर पेड़ को अपना दुश्मन समझ रहा था जो भी पढ़ाता डर लगता है कि इससे बस निकल जाता है तो दूसरा लगा लेगी।

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