Saturday, 13 July 2019

बेणेश्वर की यात्रा आइए यात्रा करते हैं।

बेणेश्वर की यात्रा आइए यात्रा  मैंने गत वर्ष अखबारों पढ़ाता बेणेश्वर धाम करते हैं।

 यहां माघ शुक्ल एकादशी से कृष्ण पंचमी तक मेला भरता है गुजरात मध्य प्रदेश तथा राजस्थान के लोग इस में भाग लेते हैं समाचार बहुत ही रोचक था मेरे मन में यह मेला देखने की प्रबल इच्छा जागृत होती हां कहते साल बीत गए मैंने तैयारी तो कर ही रखी थी आखिर माघ शुक्ल एकादशी नजदीक ही गई मैं बेणेश्वर धाम के लिए रवाना हुआ था।
चांदनी रात थी मैं बस में सवार था बस अरावली की पहाड़ियों को चीरती हुई बेणेश्वर धाम की ओर बढ़ रही थी यहां तीर्थ स्थान डूंगरपुर और बांसवाडा जिलों की सीमा पर स्थित है।

इससे आदिवासियों का कुंभ का जाता है।

बस यहां यहां लोग देखने को आते हैं मेला को।
महाराज नीचे की आवाज के साथ मेरी नींद खुल गई लोग आपस में बात कर रहे थे। और आप लोग अभी गिव अवे तो बेणेश्वर धाम 100 किलोमीटर है क्यों।
एबेला शिव जी ना मंदिर ना बहनों का ईश्वर के हैं।
सब हंस पड़े कुछ ही देर में साबला आ गया बस रुक गई आज माघ शुक्ल एकादशी है आज से मेला शुरू हो रहा है यह 10 दिन तक चलेगा पंचमी को पूरा होगा मुख्य महिला पूर्णिमा को रखता है। में बेणेश्वर टॉपिक पर पहुंचा यहां लगभग 240 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ टापू है यहां कई मंदिर है मेरी नजर शिलालेखों पर पड़ी इसके बाद मैंने शिव मंदिर देखा इसका निर्माण डूंगरपुर के महा रावण ने लगभग 5 साल पहले यहां बहुत पुराना हो गया था, इसलिए इसकी मरम्मत करवाई गई थी।
कहते हैं।

इस मंदिर में बैठकर मावजी महाराज ने अपना चोपड़ा लिखा था। 

मावजी क्षेत्र के प्रसिद्ध संत हुए हैं उनका जन्म 28 जून में हुआ था लोग इसको कृष्ण का अवतार मानते।
महाराज के नए सॉन्ग सागर प्रेम सागर मेघा सागर रत्न सागर सागर नामक ग्रंथ की रचना की थी बागड़ी भाषा में चोपड़ा का जाता है।
भविष्यवाणी लिखी हुई है अब तक सही साबित हुई है मुझे यह भी बताया गया कि उनकी बेटी है।

No comments:

Post a Comment