Thursday, 20 June 2019

मिश्रित अर्थव्यवस्था होती है।

निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र का शैक्षिक व श्रीमती अर्थव्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं। 

निजी तथा सार्वजनिक दोनों का सीएसएसयू है। सामाजिक लाभ के उद्देश्य से महत्वपूर्ण रोगों पर सरकार का अधिक होता है। जैसे जल विद्युत का उत्पादन किया जाता है। सारिका सरकार द्वारा भी किया जाता है। इस आर्थिक प्रणाली में भारी वे आधुनिक उद्योगों का संचालन विकास सरकार द्वारा किया जाता है। तथा कुटीर उद्योग कृषि कार्य आदि निजी क्षेत्र के अधीन होते हैं। इनके अतिरिक्त कक्ष की स्थापना भी की जाए।
मिश्रित अर्थव्यवस्था में वस्तु की कीमत निर्धारित की दोहरी प्रणाली होती है। निजी क्षेत्र में वस्तुओं की कीमत बाजार में स्वतंत्र रूप से होती है। परंतु सरकार कुछ मूल्य को तय करने का अधिकार अपने पास रखती है। जो सामान्य आदमी द्वारा उपयोग की जाती है। उदाहरण के लिए भारत में पेट्रोल डीजल के मूल्य सरकार द्वारा किए जाते हैं। मिश्रित अर्थव्यवस्था होती है।

जिसमें सरकार पूर्ण नियोजन के साथ सामाजिक एवं आर्थिक नीतियों निर्माण करती है। 

इन्हीं नीतियों के अनुरूप सामाजिक कार्यों को करती है। जैसे नदी घाटी परियोजना का निर्माण पेयजल सिंचाई पर्यटन मछली पालन विद्युत उत्पादन अधिकारियों का विकास करना सामाजिक लाभ के लिए आम जनता आपूर्ति करना सामाजिक महत्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर सरकार का नियंत्रण होने के कारण सरकार नियोजन किस प्रकार निर्भर करती है। कि सभी सत्रों का समान रूप से विकास हो सकता है। देसी शिक्षा चिकित्सा सड़क परिवहन पेयजल इत्यादि परिजनों का विस्तार एवं विकास।
मिश्रित अर्थव्यवस्था में नीचे क्षेत्र में उत्पादन करने उपभोग करने विनिमय तथा वितरण करने की व्यक्तिगत स्वतंत्रता दी है।

लेकिन यह स्वतंत्रता सामाजिक हित या कल्याण में वृद्धि करने

 की सत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डाल सकते इसलिए सरकार इसे स्वतंत्रता पर आंशिक नियंत्रण रखती है। जैसे सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान तथा मकानों का निषेध होना बाल बाल विवाह मृत्यु भोज आयोजन इत्यादि पर रोके।
विकास आर्थिक विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों के दोहे ने वस्तुओं और सेवाओं के उपयोग की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए होरे मानवीय मूल्यों और नैतिकता के हादसे में विश्व के पूंजीवादी एवं समाजवादी आर्थिक प्रणाली को विकास के एक विकल्प मार्ग को खोजने पर विशेष कर दे दिया जाता है। ऐसी परिस्थितियों में भारतीय आर्थिक चिंतन परंपरा का अध्ययन विषय का आर्थिक समस्याओं के समाधान की दिशा में मार्ग पर स्थित कर रहा है।

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