Thursday, 11 July 2019

मालदेव की मृत्यु पश्चात में चंद्रसेन छोटा होते हुए।

इसी समय प्रताप को मुगल सेना ने घेरा लिया।

 स्थिति में जाला मानकर के राज जी ने दसवीं गति ने अपने सिर पर धारण कर मुड़ मुगलों को धोखे में डाल दिया। और उसमें का बलिदान कर दिया लीड हल्दीघाटी से कुछ दूर बलीचा नामक स्थान पर घायल चेतक की मृत्यु हो गई, यार चेतक की छतरी बनाई हुई है। हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की तरह से झाला बिदा मानसिंह सोना ग्राम 7 ग्राम साहेब और उसके 3 पुत्र वीरता का प्रसारण करते हुए, मारे गए। सलूंबर का रावत कृष्णदास चूंडावत राव गोपाल दास मामासाहेब क्षेत्र में बसने वाले थे प्रमुख सरदार थे।

इस तरह हल्दीघाटी का युद्ध समाप्त हुआ फिर भी तत्कालीन एवं कालीन प्रणाम जो भी हुए। 

 इस युद्ध के दूरगामी परिणाम प्रताप एवं मेवाड़ के पक्ष में गए। हल्दीघाटी युद्ध के बाद अकबर ने प्रताप को बुरी तरह से के लिए साहिबा को तीन बार मेवाड़ भेजा किंतु उसे भी सफलता प्राप्त नहीं हो। सकी में अकबर ने अब्दुल रहीम खानखाना के विरुद्ध भेजा खान खान के साथ बंदी बनाया महाराणा प्रताप नाराज हुए। और उन्होंने रहीम खानखाना के परिवार को छोड़ दिया गया। आने के लिए कहा राणा प्रताप ने भामाशाह से प्राप्त आर्थिक सहायता से सेना का अपमान किया मेवाड़ का मैराथन की संख्या।ै प्रताप के विरूद्ध अंतिम अभियान  में जन्म कथा के कछुआ है। मैं किया गया किंतु उसको सफलता नहीं मिली।
धनुष की प्रत्यंचा खींचने में पर्यटन में मारा प्रताप घायल हो। गए। और 19 जनवरी 1597 ईस्वी को 57 वर्ष की आयु में प्रताप। मिश्रण चावल-600 गया।

राव चंद्रसेन जोधपुर के शासक राव मंदिर के कनिष्ठ पुत्र थे।

 मालदेव की मृत्यु पश्चात  में चंद्रसेन छोटा होते हुए। भी मारवाड़ का शासक बन गया थे। दोनों भाई राम सिंह और मोटा राजा सिंह उसके नाराज हो।गए बड़े भाई राम ने अकबर की शरण में जाकर शाही सहायता की प्रार्थना की एक हुसैन कुली खां के नेतृत्व में अपनी सेना जोधपुर के किले पर अधिकार कर लिया, राजेंद्र सर ने बाद अर्जुन में जाकर शरण ली।

No comments:

Post a Comment