Thursday, 20 June 2019

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता प्रस्तुत पुस्तक संपन्न होते हैं।

निजी संपत्ति का अधिकार पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में उत्पादन के घटक जैसे खाने का प्रयोग कारखाने मशीनें आदि सभी पर निजी व्यक्तियों का स्वामित्व होता है।

 इन साधनों के स्वामी अपनी इच्छा अनुसार इनका प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र होते हैं। व्यक्तियों के संपत्ति रखने उसे बढ़ाने व उसे प्रयोग करने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।
पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता प्रस्तुत पुस्तक संपन्न होते हैं। अर्थात उपभोक्ता की आवश्यकता व उसकी इच्छा के अनुरूप हो ही उत्पादक वस्तुओं का उत्पादन करते हैं। इसे उपभोक्ता के उस चंपारण ऊपर कहा जाता है। इसे आर्थिक प्रणाली अपनी मैं उपभोक्ता अपनी आई को इच्छा अनुसार व्यय करने के लिए स्वतंत्र होता है।
 वक्ता को सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने हेतु के कारण इसके आर्थिक प्रणाली में उपभोक्ता को बाजार का राजा कहा जाता है।

प्रत्येक व्यक्ति अपनी इच्छा अनुसार किसी भी आर्थिक गतिविधि का संचालन कर सकता है। 

उत्पादन के लिए तकनीकी करने की उपयोगिता स्थापित करने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है। सरकार को कोई हंसता पेश नहीं होने के कारण पूंजीवादी अर्थव्यवस्था वाली अर्थव्यवस्था भी कहलाती है।
पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में विक्रेताओं के बीच अपने अपने उत्पादक अथवा वस्तुओं को बचने के लिए तथा कर्ताओं के बीच अपनी अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वस्तुओं को खरीदने के लिए प्रयुक्त प्रतिभूतियों चलती रहती है। जिससे बाजार में कुशलता बढ़ती है। विज्ञापन देना हार देना मूल्य में कमी कर देना आदि तरीके पर इस्थित पदों हेतु अपनाए जाते हैं।
पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति द्वारा किसी भी कार्य करने का निर्णय अथवा किसी वस्तु के उत्पादन का निर्णय मुख्य अतिथि से लागू भावना के आधार पर ही लिया जाता है। अर्थात काम करने के रूप में क्या वह कितना लाभ प्राप्त होता है।

 किसी प्रकार उपभोक्ता वस्तुओं को उपरोक्त निजी हित के लिए भी करते हैं।

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में समाज दो वर्गों में विभाजित हो जाता है। उगम लगाने जोखिम उठाने वाला पूंजीपति कहलाता है। यह यह साधन संपत्ती वर्ग होता है। गोगो में काम करने वाले वर्ग सर में कहलाता है। यह साधन विहीन वर्ग होता है। पूंजीपतियों मेला बढ़ाने का उद्देश्य व श्रमिकों में शोषण से बचने का उद्देश्य वृक्ष संरक्षण को जन्म देता है।
संपत्ति के असमान वितरण के कारण पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में गरीब व अमीर की विषमता की खाई बढ़ती है। पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का निम्न गुण दोष के आधार पर विश्लेषण कर सकते हैं।

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