Thursday, 20 June 2019

अर्थव्यवस्था समान कार्य के लिए समान मजबूरी के सिद्धांत पर कार्य करती है।

समाजवादी अर्थव्यवस्था से भरा एक ऐसी अर्थ प्रणाली से अमृत जिसे उत्पत्ति की के सभी साधनों पर सरकार द्वारा अभी तक संपूर्ण समाज का स्वामित्व होता है।

 अर्थात आर्थिक क्रियाओं का संचालन केंद्र द्वारा संविधान के उद्देश्य से किया जाता है।
कार्ल मार्क्स द्वारा विकसित समाजवादी विचारधारा से प्रभावित होकर सन 1917 में रूस की क्रांति हुई एवं समाजवादी अर्थव्यवस्था का प्रारंभ हुआ। और उसके बाद शेष कोर्स इन चीन युगोस्लावियन आदि देशों में आर्थिक प्रणाली को अपने-अपने परंतु वर्तमान में चीनी को छोड़कर शेष देशों से इस प्रणाली को छोड़ दिया है।
अर्थव्यवस्था में उत्पादन के भौतिक साधन अर्थात भूमि  कारखानों पूंजी खाने अधिक पर समाज या समाज का स्वामित्व और नियंत्रण होता है। इसे पूरा लिस्ट में नाम का उद्देश्य या निजी हित के लिए आर्थिक गतिविधियों का संचालन नहीं होता है।

व्यवस्था में वस्तुओं में उपयोग हो तू भोक्ता के चयन के प्रश्न पत्र उनकी वस्तुएं तक रहती है।

 जिन्हें सरकार के निर्देशानुसार किया गया है। सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा में ही उपभोक्ता द्वारा उपभोक्ता किया जाएगा समाजवादी अर्थव्यवस्था में समाजवादी आर्थिक लक्ष्यों में निर्धारित प्राप्ति हेतु। एक केंद्रीय सत्ता होती है। मैं आर्थिक निर्णय से क्या उत्पादन करना है। उत्पादन कैसे करना है। वह अधिनियम द्वारा ही लिए जाते हैं। अर्थव्यवस्था समान कार्य के लिए समान मजबूरी के सिद्धांत पर कार्य करती है। अतः इस आर्थिक प्रणाली में वर्ग संघर्ष की संपत्ति हो जाती है। साथ ही निजी पूंजी स्थापित करने हेतु। अवसरों की कमी के कारण आई कि ऐसा मानता भी कम हो जाती है।
समाजवादी अर्थव्यवस्था में केंद्रीय सरकार द्वारा सभी प्रकार के आर्थिक निर्णय अधिक केंद्रों में समाजिक में समूह को ध्यान में रखकर ही लिखे जाते हैं। ने की निजी लाभ के उद्देश्य से।

समाजवादी अर्थव्यवस्था का विश्लेषण निम्न गुण और दोषों के आधार पर कर सकते हैं।

 यह आर्थिक प्रणाली पूंजीवादी वे समाजवाद दोनों के आदर्श में लक्षणों का आदेश दे सकता अनुसार समावेश करने का एक प्रयास के दूसरे शब्दों में यह प्रणाली पूंजीवादी में समाजवाद के बीच का रास्ता है। श्रीमती अवस्था एक ऐसी प्रणाली है।
जिसमें निजी और सार्वजनिक क्षेत्र दोनों का स्विच में होता है। यह निजी उपकरण इजी लाभों का समर्थन करती है। उस परंतु साथ ही साथ संपूर्ण समाज के हितों की रक्षा के लिए सरकार के अस्तित्व को भी महत्वपूर्ण मानती है। श्रीमती अर्थव्यवस्था में यह प्रयास रहता है। कि निजी और सार्वजनिक क्षेत्र दोनों संयुक्त रूप से किस प्रकार कार्य में जिसे देश के सभी वर्गों का आर्थिक कल्याण बड़े एवं देश में वृद्धि व विकास भी संभावना का प्रवाह स्वतंत्रता के पश्चात भारत में ऐसी प्रणाली को अपनाया जाता है।

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