Thursday, 18 July 2019

जिस बलिदान को प्रसिद्ध प्राप्त है।

वह ईट जो जमीन में इसलिए गार्ड गई।

 कि दुनिया के इमारत मिले को अंगूर मिल एक में एक दो शब्दों से ज्यादा पक्की थी यदि ऊपर लगी होती तो अंगूर की सौ बार सौ गुनी कर देती किंतु उसने देखा कि इमारत की पायल धारी उसकी न्यू पर निर्भर होती है। इसलिए उसने अपने को न्यू में अपील किया वे ईट जिसने अपने साथ जमीन के अंदर इसलिए गाड़ दिया।
कि हमारे जमीन क  हाथ ऊपर जा सके वे एड जिसने अपने लिए अन्य साथियों को स्वच्छ हवा मिलती है। बलिदान ईद का हो, या व्यक्ति का सुंदर इमारत बनने या कुछ पक्की पक्की लाल ईंटों को चुपचाप न्यू में जाना है। सुंदर समाज मैंने इसलिए कुछ तब तक पायल लोगों को मूर्ख शहादत का लाल चेहरा होना है।
आदत और मोनू की शहादत की सूरत है।

 जिस बलिदान को प्रसिद्ध प्राप्त है। 

वही इमारत का मंदिर का खेला सहित और समाज के राष्ट्रीय ही है। ईसाई धर्म को अमर बना दिया आप कह लीजिए कि मेरी समझ में इसाई धर्म को अमर बना उन लोगों ने जिन्होंने उस धर्म के प्रचार में अपने नाम कर दिया।
उसमें से कितने जिंदा जलाए गए कितने सूली पर चढ़ाए गए, कितने वन की खाल जंगली जानवरों के शिकार हुए। कितने उसके भी भयानक जंतु की भूख प्यास का शिकार हुए, किंतु इसाई धर्म उन्हीं के पुण्य प्राप्त किस से फल-फूल रहा है।
यह नींद की एक्सएक्स गाजर के  सदस्य से चमक है। आज हमारा देश आजाद हुआ सिर्फ उनके बलिदानों के कारण नहीं जिन्होंने इतिहास में आया है। यदि ऐसा होगा। जो जहां कुछ ऐसे नहीं हुए जिनकी हड्डियां हम जिस देश नहीं सके।

वैसे क्या नहीं यह मैं बूंद धारण ढूंढने से सत्य मिलता हमारा काम है। 

ऐसी नीव की ईट ओं के आधार पर ध्यान दो सदियों के बाद नए समाज की सृष्टि और हमने पहला कदम बढ़ाया। इसके निर्माण के लिए ही हम नवीन ईट चाहिए एपिसोड कंगारू बनने के लिए चारों ओर दौड़ा दौड़ा मची है।
नीव की ईंट बेचने के हो रही है। गांव का नव वर्ष हजारों वर्षों कोर कारखानों का कोई इसे संभव नहीं कर सकता जरूरत हहै। से नौजवानों की जो इस काम के लिए अपना चुपचाप खफा जो एक नई प्रेरणा से अनु पारित हो। एक नई चेतना से दूर होने की कामना की कामनाओं से दूर से दूर उदय के लिए आतुर हमारा समाज जिला रहा है, हमारी नीट किधर है देश के नौजवानों को यह चुनौती है।

मनुष्य निर्माण तथा चरित्र निर्माण में सहायक होै।

शिक्षा विविध जानकारियों का डर नहीं जो तुम्हारे मस्तिष्क में ढूंढ दिया गया है। 

और जो आदमी साथ हुए बिना वहां आजन्म पढ़ा रहे कर गड़बड़ मचाया करता है, हमें उन विचारों की अनुभूति कर लेने की आवश्यकता है।
 जो जीवन निर्माण मनुष्य निर्माण तथा चरित्र निर्माण में सहायक हो ,यदि आप केवल पांच ही पर के वे विचार आत्मसात कर उनके अनुसार अपने जीवन को चरित्र का निर्माण कर लेते हैं ।
तो उन पूरे संग्रहालय को कंठस्थ करने वाले की अपेक्षा अधिक शिक्षित है ,अपने भाइयों का नेतृत्व करने का उनकी सेवा करने का प्रयत्न करो नेता बनने की पूर्णता ने बड़े-बड़े जहाजों को इस जीवन रूपी समुद्र में डुबो दिया है ,मैं तुमसे यही चाहता हूं ।कि तुम आत्म प्रतिष्ठा दिल बंधी और एशिया को सदा के लिए छोड़ दो तुम्हें पृथ्वी माता की तरह सहनशील होना चचाहिए।

तुम यह गुण प्राप्त कर सको तो संसार तुम्हारे पैरों पर लौटेगा।

राष्ट्रीय लंदन में सक्रिय से भागी विचारे चिंतक और पत्रकार रामवृक्ष बेनीपुरी शुक्लोत्तर युग के प्रसिद्ध साहित्यकार थे। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में 8 वर्ष जेल में व्यतीत करने के साथ ही समाचार पत्रों के माध्यम से राष्ट्रीय जागरण का कार्य करते रहे ।
इनका जन्म बिहार में मुजफ्फरपुर जिले के बेनीपुरी नामक गांव में हुआ था। गांधी जी और जयप्रकाश नारायण से प्रभावित हो अध्ययन को छोड़कर पूर्णतया सावधानी आंदोलन से सक्रिय हैं। उनकी रचनाओं में जेल के कैदी हैं भारत के निर्माण की पृष्ठभूमि में त्याग भावना का संदेश देता है। राष्ट्रीय लाखों-करोड़ों के त्याग और निर्माण भावना और भव्य बनता है ,
इस सत्य की ओर इंगित करते हुए लेखक भारत के नव युवकों को मात्र की मनोवृति जागता है। निर्माण के पाठ के अनुच्छेद योजना विशेष ध्यान आकर्षित करती हैं एक-एक विचार भावपूर्ण वाक्यों में अभिव्यक्त किए गए हैं।और ऐसे अनुच्छेद बनाते हैं ,किंतु वे पाठक को बहुत सोचने विचारने के लिए प्रेरित करते हैं। वे जो चमकीली सुंदर सुदृढ़ इमारत हैं हम वह किस पर टिकी हैं ।

इसके कंगूरे को आप देखा करते हैं। 

क्या कभी आपने इसी न्यू की ओर भी ध्यान दिया है ,दुनिया चमक देती हैं ।ऊपर आवरण देखती हैं, आवरण के नीचे जो छोड़ सकते हैं ।उस पर कितने लोगों का ध्यान जाता है वह सत्य सदाशिवम है ,किंतु हम हमेशा ही सुंदर भी हो यह आवश्यक नहीं है।
सत्य कठोर होता है ।और तो और भद्दा पन साथ-साथ जन्मा करते हैजिया करते हैं, हम कठोरता से भागते हैं। अपन से मोड़ते हैं ।
इसलिए सत्य से भी भागते हैं ।नहीं तो हम इमारत के गीत न्यू के गीत से प्रारंभ करते हैं करती हैं ।और बस लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं किंतु धन्य है। वह जो जमीन से साथ-साथ नीचे जाकर गढ़ गई और इमारत की पहली ईद मनी क्योंकि इसी पर उसकी मजबूती और सारी इमारत की स्थिति निर्भर है।

लोकसभा में देशभक्ति की चर्चा करते हैं।

मैंने तो नवयुवक को का संगठन करने के लिए जन्म लिया है।

 यही क्या प्रत्येक नगर में सड़कों पर और जो मेरे साथ सम्मिलित होने को तैयार है, मैं चाहता हूं। कि इन्हें प्रीत गतिशील तरंगों की भांति भारत और भेजूं जो दीनू हेलो दलितों के प्रति करता कैसे उड़ते हैं।
 और इसे में करूंगा मैं सुधार के लिए विश्वास नहीं करता मैं विश्वास करता हूं।
स्वामित्व नीति  मैं अपने ईश्वर के स्थान पर पड़ती जल को अपने समाज के लोगों के सिर पर यह उपदेश तुम्हें इस बाती चलने होगा, दूसरे प्रकार नहीं मैंने के साहस नहीं कर सकता मैं तो सिर्फ उसे गिलहरी की बातें होना चाहता हूं। दूसरी रामचंद्र जी के पुल बनाने के समय थोड़ा बालू देकर अपना भाग पूरा कर संतुष्टि हो गई थी वही मेरी भी थी।

लोकसभा देशभक्ति की चर्चा करते हैं।

 सब देश भक्ति में विश्वास करता हूं। परसों देशभक्ति के संबंध में मेरे एक आदर्श है, बड़े काम करने के लिए तीनों चीजों की आवश्यकता होती है। और विचार शक्ति हम लोग की थोड़ी सेट कर सकती है वह हमको थोड़ी दूर अग्रसर करा देती है, और वहीं ठहर जाती है। किंतु के द्वारा हम मां शक्ति होती है। प्रेम अतः मेरे भाई संस्कार को मेरी भाभी देशभक्ति है।

और तुम हरदे बनो क्या तुम्हारे अज्ञात के काले बादल ने सारे भारत को अचानक कर लिया है।

 क्या तुम सब समझ कर कभी अस्तित्व थे, क्या तुम कभी इससे अन्य  हो। वह हो क्या वे तुम्हारे हरदे के स्पंदन से कभी मिले हैं। क्या उसने कभी तुम्हारे पागल बनाया है, क्या कभी तुम्हें निर्धनता और नाश्ता ध्यान आया है।
क्या तुम अपने नाम यह संपत्ति यहां तक कि हम अपने शरीर को भी भूल गए हो क्या तुम ऐसे हो गए हो। यदि तुम जानो कि तुमने सर देशभक्ति की पृथ्वी पर रखे हैं। मनुष्य उठो जागो सुबह जाकर औरों को जगाओ अपने मनुष्य जन्म को सफल करो लिस्ट जागृत प्राय उठो ।

जागो और तब तक रुको नहीं जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो। 

जाए यह एक बड़ी सच्चाई है। शक्ति ही जीवन और कमजोरी की मृत्यु है शक्ति परमसुख है। जीवन अधर्म अजर है। कमजोरी कभी नहीं हटने वाला बौद्ध और यंत्रणा एक कमजोरी ही मृत्यु है।
सबसे पहले हमारे दोनों को मजबूत बनाना है। धर्म इसके बाद ही वस्तु है ।मेरे तरुण मित्रों से मेरी संगीता के अध्ययन की अपेक्षा फुटबॉल खेल के द्वारा ही स्वर्ग के अधिकृत पहुंच सकोगे यह कुछ कर सकते हैं। पर मैं उन्हें कहना चाहता हूं।योंकि प्यार करता हूं ।मैं जानता हूं, ऋकि कांटा कहां छपता है।

भारत वर्ष का पुण्य स्थान होगा।

मेरी ऐसा मेरा विश्वास नई पीढ़ी नवीन के नवयुवक पर है। 

उन्हीं से मैं अपने कार्यकर्ताओं का निर्माण होगा। वह केंद्र से दूसरा केंद्र का विस्तार करेंगे, और इस प्रकार हम धीरे-धीरे इसमें भारत में फेल जाएंगे ।भारत वर्ष का पुण्य स्थान होगा, वह शारीरिक शक्ति से नहीं वरन आत्मा की शक्ति द्वारा व उत्थान विनाश की दवा लेकर नहीं वरन शांति और प्रेम की दवा भारत के राष्ट्रीय आदर्श त्याग और सेवा आराम कीजिए ।
और सब अपने आप ठीक हो जाएगा तुम काम में लग जाओ फिर देखोगे ,
इतनी शक्ति आई कि तुम उसे भूल न सकोगे दूसरों के लिए रत्ती भर सोचने काम करने से भीतर की शक्ति जागती है ,

दूसरों के लिए रत्ती भर सोचने से धीरे-धीरे का आ जाता है।

तुम लोगों से मैं इतना स्नेह करता हूं परंतु यदि तुम लोग दूसरों के लिए परिश्रम करते करते मर भी जाऊं तो भी यह देख कर मुझे पता ही होगी केवल वही व्यक्ति रूप से कार्य करता है।
जो पूर्णतया निस्वार्थ हैं तो धन की लालसा हैं ने की थी, कि उन्हें किसी अन्य वस्तु की ही और मनुष्य जब ऐसा करने में समर्थ हो जाएगा तो वह भी एक बुद्ध बन जाएगा। उसके भीतर से ऐसी प्रकट होगी जो संसार की व्यवस्था संपूर्ण रूप से परिवर्तित कर सकेगी। हमेशा बढ़ते चलो मरते दम तक गरीबों दलितों के लिए सहानुभूति यही हमारा आदर्श वाक्य है।
वीर युवकों बढ़ते चलो ईश्वर के प्रति आस्था रुको दुखियों का दर्द समझो और ईश्वर से सहायता की प्रार्थना करो ,वह अवश्य मिलेगी तुम लोग ईश्वर की संतान हो अमर आनंद के बागी हो ,पवित्र और पूर्ण आत्मा हो तुम एक कैसे अपने को जबरदस्ती दुर्बल करते हो उठो साहसी बनो वीर्य दान हो और सब उत्तरदायित्व अपने कंधे पर लो। यह याद रखो कि तुम स्वयं अपने भाग्य के निर्माता हो,

 तुम जो कुछ बल या सहायता तो सब तुम्हारे ही भीतर विद्यमान है। 

एक बात पर विचार करके देख कर मनुष्य नियमों को बनाता है?यह मनुष्य को बनाते हैं मनुष्य पैदा करता है ?या रुपैया मनुष्य को पैदा करता है ?मनुष्य की और नाम पैदा करता है या कीर्ति और नाम मनुष्य को पैदा करते हैं? मनुष्य बनी है तब आप देखेंगे कि वह सब बाकी चीजें स्वयं आपका अनुसरण करेगी,
परस्पर के गणेश भाऊ को छोड़िए और सदस्य सहर्ष का अवलंबन कीजिए। आप ने मनुष्य जाति में जन्म लिया है तो अपनी कीर्ति यही छोड़ जाएंगे हमें केवल मनुष्य की आवश्यकता है ।और सब कुछ हो जाएगा किंतु आवश्यकता विद्यमान तेजस्वी और अनंत तक पढ़ रही थी कि इस प्रकार के सोनोव्यू को से संसार के सभी भाव बदल दिए जा सकते हैं ।और सब चीजों की अपेक्षा इच्छाशक्ति का अधिक प्रभाव है। इच्छाशक्ति के सामने और सब शक्तियां जाएगी क्योंकि इच्छाशक्ति से निकलकर आती हैं और दृढ़ इच्छाशक्ति सर्वशक्तिमान है।

Wednesday, 17 July 2019

थोड़ी सी शक्कर अपनी हथेली पर लीजिए।

 आपके केवल एक ही प्रकार के कर सकता दिखाई देते हैं। 

अब आप अपने घर के आस-पास में मुट्ठी भर बालू मिट्टी लेकर उसे ध्यान से देखिए इसमें आपको कई प्रकार के कण जैसे कि मुर्दा छोटे करूंगा शादी दिखाई देते हैं, दोनों में क्या अंतर है।
एक पदार्थ है। जबकि मिश्रण के उदाहरण दैनिक जीवन में उपयोग मिश्रण की उपस्थिति में पदार्थों का मिश्रण के घटक या अयोग्य थे। कुछ मिश्रण में इन घटकों को आसानी से देखा जा सकता है। जबकि कुछ में मिश्रण के घटकों को देखना संभव नहीं होता है।
कांच का एक गिलास लीजिए।

उसको पानी से लगभग आधा भरिए और एक चम्मच नमक डालकर भूल जाता है। 

इसमें पानी और नमक को अलग अलग नहीं देखा जा सकता है। जिनमें दो या दो से अधिक उपस्थित है, किंतु उन्हें अलग-अलग नहीं देख सकते हैं। सामग्री मिश्रण के लाती है।
जैसे नमक का जलीय विलयन कांच के एक मैं थोड़ा पानी लीजिए। समें एक छोटा चम्मच मूंगफली सरसों का तेल मिलाकर हिलाई ए आप क्या देखते हैं। आप देखते हैं। कि विक्रय पानी तथा तेल की दो अलग-अलग परतें दिखाई देती है, आते हम कह सकते हैं।

 पदार्थों की प्रकृति के आधार पर मिश्रण को दो भागों में वर्गीकृत किया गया है।

 आपने अपनी माताजी को घूमते हुए देखा होगा। आपकी माताजी गांव में से छोटे-छोटे कंकड़ या अन्य अनाज के दाने की अशुद्धियों को हाथ से अलग करती है। यदि आप जो मक्का मिला कर दिया जाए।
तो करने के लिए कहा जाए तो आप पहचान के आधार पर और मक्के के मिश्रण को हाथ में बीन करते हैं। इस प्रकार किसी मिश्रण में से प्रत्येक को अलग करना पड़ता है। अशुद्धियों को उनकी गुणवत्ता सुधार एवं उपयोगिता बढ़ा सकते हैं साथ ही मिश्रण के घटकों का पाठ कर सकते हैं। जैसे सीमेंट में अशुद्धि के कारण उसकी सामर्थ्य कम हो जाती है।
सोने में अशुद्धियों से उसकी चमक कम हो जाती है। शुद्ध जल को पीने से बीमार हो सकते हैं।  कि मिश्रण के हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। गेहूं चावल दाल में अनुपयोगी पदार्थ जैसे अनाज कंकड़ मिट्टी व अन्य सुधिया मिली होती है, जो प्रायः बहुत कम मात्रा में होती है। इनकी आकृति एवं रंग गेहूं चावल दाल से भिन्न होती है।

मंत्रियों में कार्यों का बंटवारा करता है।

विधानसभा राज्य की जनता की ओर सर्वोच्च राजनीतिक अधिकार का प्रयोग करती है। 

विधानसभा अपनी बैठकों में निम्नलिखित कार्य संपन्न करती है। कानून बनाने से संबंधित कार्य विधायक आए कहलाते हैं। राज्य की विधानसभा इस पाठ के आरंभ में वर्णित राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषय पर कानून बनाती है। वह मौजूद कानून को संसद भी कर सकती है।
और उस पर भी कर सकती है। सविधान के कुछ हिस्सों में संशोधन की प्रक्रिया में भाग लेती है। राज्य सरकार के संबंधित कार्य पर विधानसभा का नियंत्रण होता है। सरकार द्वारा पस्ता बत्ती बजट का विधानसभा में स्वीकृत मिल जाने के पश्चात ही वह जनता को कर वसूल सकती है। और उस खर्च कर सकती है।

 कार्यपालिका अर्थात सरकार चलाने वाले निकाय विधानसभा के प्रति जवाबदेह हैं।

 विधानसभा में सार्वजनिक मसलों और सरकार की नीतियों पर बहस होती है। विधान सभा की बैठकों में विधायक मंत्री परिषद सरकार के कार्यों के संबंध में प्रश्न पूछते हैं। और उनसे सूचना मांग सकते हैं।
 बैठक के दौरान में काम रोको प्रस्ताव द्वारा किसी भी समय सरकार से किसी मुद्दे पर बयान की मांग कर सकते हैं। विधानसभा कार्यपालिका के संबंध में प्रस्ताव ला सकती है। सरकार विधानसभा के बहुमत का विश्वास प्राप्त होने तक ही कार्य कर सकती है। विधानसभा में कार सरकार के विरुद्ध प्रस्ताव को त्यागपत्र देना पड़ता है।
 विधानसभा के सदस्य अर्थात विधायक निर्वाचन मंडल के सदस्य भी हैं।
वे राष्ट्रपति और राज्यसभा के सदस्यों के चुनाव में भाग लेते हैं। वह सदन के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का निर्वाचन भी करते हैं।

 विधान परिषद राज्य व्यवस्थापिका द्वितीय सदन यह एक स्थानीय सदन है। 

इसका विघटन नहीं हो सकता इसे एक तिहाई सदस्य प्रत्येक वर्ष की समाप्ति पर निर्भर हो जाते हैं। विधानसभा परिषद के सदस्यों की संख्या कम से कम 40 होती है।
 सदस्य स्थानीय स्वशासन की कई शिक्षकों और विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि होते हैं विधानसभा परिषद साधारण विधेयक को प्रभावित कर सकती है और अंकित कर सकती है धन विधेयक परिषद द्वारा प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है विधानसभा बहस और प्रश्नों का मंत्रिमंडल के सदस्यों पर नियंत्रण रख सकती है वर्तमान में राजस्थान राज्य में विधान परिषद नहीं है। मंत्रियों में कार्यों का बंटवारा करता है। वह विभिन्न विभागों के कार्यो की निगरानी करता है, और उनके कार्यों का समन्वय करता है। सभी मंत्री उसी के नेतृत्व में काम करते हैं। वह मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता करता है। बहू मंदिर दल का नेता होने के कारण वह विधानसभा में सदन के नेता के रूप में कार्य करता है।

शिक्षा के प्रसार में सहयोग करना चाहिए।

विवेकपूर्ण मतदान मत वोट देने का अधिकार प्रत्येक नागरिक की सबसे बड़ी शक्ति है। 

 इस कारण मतदान का लोकतंत्र में विशेष महत्व है किंतु कुछ लोग अपने इस महत्वपूर्ण अधिकार का प्रयोग नहीं करते हैं। ऐसे ही जागरूक नहीं किए जा सकते क्योंकि वह मतदान के लिए नहीं जाते मतदान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य यदि आप मतदान नहीं करते हैं।
तो हो सकता है, कि आप जिस उम्मीदवार का योग्य समझते हैं। और जिस राजनीतिक दल की ठीक समझते हैं, वह जीत नहीं पाए और वह सरकार नहीं बना पाए, यदि बहुत बड़ी मात्रा में लोग मतदान के प्रति उदासीन रहते हैं। तो हो सकता है, कि देश अच्छे शासन से वंचित हो जावे समझदार व्यक्ति के पक्ष में मतदान का प्रयास करता है। परंतु ऐसे हो सकते हैं।

रिश्तेदारी जाति या धर्म के आधार पर अथवा प्रलोभन में आकर बिना सोचे समझे योगदान कर सकते हैं। 

समझ कर मतदान करना चाहिए। और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर बनाए रखें और अपने जीवन को खतरे में हमारे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है, सड़क दुर्घटना में मारे जाते हैं। जिसका एक कारण नहीं हो, पाते दूसरों का जीवन बचाने के लिए हमें रक्तदान करना चाहिए दान महादान है।
प्रशासन की सहायता करना हो सकता है। कि आप के आस पास कोई व्यक्ति नकली या मिलावटी माल भेजता हो आप ऐसे कार्यों की सूचना प्रशासन को देवें जिस लेना और देना दंडनीय अपराध नहीं देना चाहिए ।और रिश्वत मांगने वाले की प्रशासन को सूचना देनी चाहिए, और उत्पन्न करने से बचना चाहिए।
प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

हमारी प्राकृतिक धरोहर मंजिल और नदियों के रक्षा और सर्वजन करें। 

कुएं तालाब झील और नदियों में कचरा व अपशिष्ट पदार्थ अधिक से अधिक पर लगा। वे प्रकृति के साधन के साथ उपयोग करें, हम प्रकृति से उतना ही लें।
और इस प्रकार की प्रकृति उसे कमी पूर्ति कर ले जाना चाहिए। संघर्ष तक लोग निराश्रित वृद्धा और बालकों की मदद करनी चाहिए। अस्पताल अनाथालय वृद्ध शर्मा और गरीबों की बस्तियों में समय-समय पर अपनी सेवा में सहयोग प्रदान करना।
चाहिए शिक्षा के प्रसार में सहयोग करना चाहिए। दिन में कम से कम एक सेवा का कार्य तो अवश्य करना चाहिए।
हम भारतीय संस्कृति के साथ स्वस्थ जीवन मूल्यों के साथ राष्ट्रीयता प्रजातंत्र समझता और विश्व बंधुत्व के आदर्शों को एक सामान्य रूप में समाज में विकसित करना है। संस्कृति में संरक्षण के साथ-साथ उसकी भी  देखकर सजीव व सक्षम बनाना है।

समाज में सुख तथा शांति का वातावरण बना रहता है।

बार व्यक्ति का उसके समाज के साथ इन्हीं पहलुओं पर गंभीर विरोध उत्पादन हो सकता है।

जो उसकी परिस्थितियों से मेल नहीं खाते हो, किंतु इसका एक कारण यह भी हो सकता है सामाजिक व्यवस्था में ही हाथ हो सकता रहा हो, तथा इसी कारण से व्यक्ति और समाज में विरोध की स्थिति उत्पन्न हो, जाए समाज की स्थापना में विभिन्न कारणों से कभी विकार भी आ सकते हैं।
उदाहरण के लिए जो व्यक्ति राजनीतिक स्वतंत्रता के वातावरण में पला बढ़ा है।
यदि उसे दास प्रथा के वातावरण में रखे दिए जाए तो यह स्थिति उसके लिए और कष्टदायक होगी उस स्थिति में वह समाज विरोधी  है ।

उसके विरोध का कभी भी आकस्मिक तथा पूर्वक विस्फोट हो सकतहै।

  समाज में लोकतांत्रिक और व्यवस्था स्थापना करने के लिए समाज के सदस्यों का दृष्टिकोण और सामाजिक व्यवस्थाएं लोकतांत्रिक शादी होनी चाहिए। उसके विकास में समाज के प्रति कर्तव्य का निर्वाह करता है।
 इस प्रकार के विरोधी की संभावनाएं कम होती है। वेद में प्रार्थना की है। कि अपने पड़ोसी के प्रति अपने मित्र को हानि पहुंचाए हमारे प्रति प्रेम रखने वाले के प्रति हमसे कोई दुर्व्यवहार न हो जाए।

एक अन्य स्थान पर उन्होंने इस प्रकार प्रार्थना की है। 

कि सब मनुष्य पली प्रकार मिलजुलकर और प्रेम पूर्वक आपस में वार्तालाप करें सबके मनों में एकता का भाव हो। और विरोधी ज्ञान प्राप्त करने से सभी लोग सहयोग व पूर्व को कार्य करें समाज के सदस्य इस प्रकार का आचरण करते हैं।
 समाज में सुख तथा शांति का वातावरण बना रहता है।
और मनुष्य का कल्याण होता है।
 यह विचार मनुष्य मात्र के कल्याण के लिए है,
समाज और व्यक्ति का परस्पर निर्भर होते हैं।
 स्वस्थ और सुखी समाज की स्थापना के लिए व्यक्ति के समाज के प्रति कर्तव्य बनते हैं।
समाज के सदस्य के रूप में प्रत्येक व्यक्ति को निम्नलिखित प्रकार का आचरण करना उचित होगा।

 बदलते सामाजिक परिवेश को समझकर उसके अनुरूप व्यवहार करना चाहिए।

 हमारे समाजशास्त्र और विकास अनुमति जीवन व्यतीत कर सकें,
इसके लिए हम समाज के प्रचलित रूढ़ियां को समाप्त करना होगा।
और बहुत से सुधार करने होंगे
व्यक्ति की गर्मी का हनन करने वाली और महिलाओं का सम्मान करने वाले हजारी करतूतों का त्याग करें भारतीय परंपरा और संस्कृति के प्रति अन्य निष्ठावान महापुरुषों ने इन बुराइयों   नहीं करनी चाहिए।

व्यक्ति समाज के बिना अपना विकास नहीं कर सकता।

जिसकी एक समान संस्कृति होती है, समाज सामाजिक संबंधों की एक व्यवस्था है।

एक व्यक्ति किसी का पिता किसी का पुत्र किसी का पति तो किसी का भाई भी हो सकता है। यदि हम संसार को लैपटॉप व्यक्तियों का परिवार से और एक परिवार का अन्य परिवारों से सामाजिक संबंध पाया जाता है। अपनी आवश्यकताओं की अकेला मनुष्य सोए नहीं कर सकता था। अतः उसे दोस्तों के साथ सहयोग करना होता है। वह उनके साथ मिलजुल कर काम करता है इसी प्रकार के लोगों में सामाजिक संबंध बनाते हैं।
 सामाजिक संबंध अमूर्त होते हैं, मां सामाजिक संबंधों की अमूर्त व्यवस्था है। इन सामाजिक संबंधों के फलस्वरूप व्यक्ति को समाज में व्यक्ति प्रतिशत प्राप्ति होती है। और उनके अनुसार ही उसे विभिन्न दायित्वों का निर्वाह करना होता है।
क्योंकि समाज भी व्यक्ति उसको प्राप्त परिस्थितियों के अनुरूप ही उसके व्यवहार क्यों करता है। व्यक्ति और समाज एक दूसरे पर आश्रित है, उनका एक पक्षीय नहीं है बल्कि दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं, एक दूसरे के विकास के लिए अनिवार्य है।

व्यक्ति समाज के बिना अपना विकास नहीं कर सकता तो वही समाज का अस्तित्व व्यक्तियों से ही है।

मनुष्य स्वभाव से ही एक सामाजिक प्राणी है मनुष्य में स्वभाव से ही सहयोग एवं सह अस्तित्व की भावना पाई जाती है वह समाज में अलग अकेला नहीं रह सकता समाज में रहते हुए वे अन्य मनुष्यों के साथ समाज की गतिविधियों में भाग लेता है जिससे उसका विकास होता है आवश्यकता मनुष्य को सामाजिक प्राणी बनाती है मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समाज में रहता है। वह अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अन्य व्यक्तियों को सहायता से लेता है। व्यक्ति समाज में ही उत्पन्न होता है बच्चा माता-पिता की देखभाल में पलता है।

 उनके साथ रहकर की नागरिकता का पहला पाठ पड़ता है।

कोई भी व्यक्ति तब तक मनुष्य नहीं बन सकता जब तक कि वह अन्य मनुष्यों के हम दूसरों के साथ रहकर तथा उनकी साइट आदि की जरूरतें पूरी करते हैं।
 अपनी सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए भी व्यक्ति को सामाजिक बनना ही पड़ता है। मनुष्य के संपर्क से दूर और पशुओं के बीच पल जाने वाले कुछ बच्चों के उदाहरण भी मिले हैं। परंतु उनकी आदतें और व्यवहार परसों जैसी ही विकसित हो गई है, समाज में मानव के व्यक्तित्व का विकास होता है। समाज व्यक्ति के अंतर्गत शक्तियों को विकसित और  मर्यादित करता है।

Monday, 15 July 2019

भारतीय की प्राचीन व्यवस्था का अंतरण समझ सकते हैं।

भारतीय संस्कृति से प्रभावित भाषा और साहित्य का प्रचार विश्व के जिन क्षेत्रों में देखा गया है। 

वहां भारत के धार्मिक विचारों तथा दीवारों के नए लोगों के मन पर अपना पूर्ण अधिकार कर लिया था ।वर्मा और श्याम में बौद्ध धर्म प्रधान था जहां बौद्ध धर्म प्रधान था वहां सभी हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां भी पाई जाती हैं ।यद्यपि त्रिमूर्ति ब्रह्मा विष्णु और शिव की पूजा पर चली थी, परंतु शिव की पूजा मुख्य रूप से होती थी।
भारतीय धर्म एवं विचारों के परिचय के साथ यह ने समझा जाए कि वहां की मूल विश्वास और विधान नष्ट हो गए हैं ।हां कुछ तो मीठे पर कुछ अधिक विकसित होकर वहां के जन-जीवन में घुल मिल गए कुछ अवस्थाएं में हो। तो पुराने विश्वास और रीति-रिवाजों ने नए पंखों को भी प्रभावित किया इसका एक श्रेष्ठ उदाहरण जावा के बहुत लोकप्रिय मूर्ति उतारू हैं।

इस मूर्ति की लोकप्रियता देखकर अनुमान लगाया जाता है। 

 शायद कोई मूल देवता इसमें मेल गए कुछ लोग इसे ऋषि अगस्त्य का प्रतीक मानते हैं ।जिस की लोकप्रियता जावा में मिले अन्य अभिलेखों से प्रकट होती हैं, कम भुज के अभिलेखों से ज्ञात होता है। कि उनके विद्वान लोग भारत से कम हो जाते थे।
और वहां सम्मान प्राप्त करते थे। वहां के कई विद्वान लोग भारत आते थे उदाहरण के लिए हम शाम को ले सकते हैं, जो वहां के राजा इंद्र वर्मा के गुरु थे इन्होंने भक्त शंकराचार्य हो सकते हैं ।क्या शास्त्र का ज्ञान प्राप्त किया था दूसरी मुख्य विशेषताएं आश्रमों की संख्या है।
जो सारे गम भूल में फैली थी राजा यशोवर्धन में शौच आश्रम स्थापित किए थे।
 इन आश्रमों में रहने वाले लोगों एवं वहां के विद्यार्थियों का पूरा ध्यान रखा जाता है। बच्चों वृद्धों गरीबा काफी पालन ना समूह में किया जाता था। इन आश्रमों में भारतीय सभ्यता और संस्कृति के विस्तार का काम किया। वर्ण व्यवस्था दो भारतीय सभ्यता एवं समाज का मूल आधार था ,वह भारतीय संस्कृति के विभिन्न क्षेत्रों के हुए प्रचार के कारण भी स्थापित हुई।

परंतु जिस प्रकार बाद के समय में भारतीय वर्ण व्यवस्था के मूल स्वरूप में परिवर्तन आया। 

 वैसा वहां की संस्कृति में नहीं था बाली और कंबोज के निवासियों में जो जाति व्यवस्था का स्वरूप आज दिखता है उसे हम भारतीय की प्राचीन व्यवस्था का अंतरण समझ सकते हैं।
विधायक आदर्श विभिन्न प्रकार की राशन का स्वरूप और विवाह संबंध लगभग भारत के समाज की तरह है। सती प्रथा प्रचलित थी। भारत के प्राचीन समाज वहां भी पता नहीं थी ।भारत की स्त्री को अपना पति चुनने का अधिकार था।
 जहां भारतीय संस्कृति का प्रभाव रहा भारत की तरह वहां सभी जगह कल आप भी धर्म से प्रभावित रही है, यहां की कला का शुरूआती रूप पूर्णत भारतीय डंका है। वहां की प्राचीन कलावती हैं।
वहां जाकर बसने वाले भारतीय कलाकारों की कृतियां मानी जाती हैं वहां की प्राचीन मूर्तियों और मंदिरों का संक्षिप्त परिचय दिया था जावा के सबसे महत्वपूर्ण वस्तुओं का मंदिर है जो के बीच शैलेंद्र बना था।

प्राचीन समय में भारत में उद्योग एवं व्यापार अपने चरम सीमा पर थे।

प्राचीन भारतीय इतिहास का एक रोचक पक्ष भारत की सीमाओं के प्रेम देशों के जीवन और संस्कृति पर भारत का प्रभाव होना है। 

इन देशों में भारतीय दर्शन और विचार का प्रवेश हुआ जिसके फलस्वरूप वह भारतीय संस्कृति पलवी और वह एक प्रकार का वर्णन वर्ग बन गया विषय में अनेक देश है। जहां हमारे देश की संस्कृति का प्रभाव उनके समाज के हर क्षेत्र में आज भी दिखता है।
इन देशों के साथ हमारे संबंध हजारों साल पहले ही बन चुके थे एक के विचार का विषय है।
उन क्षेत्रों के साथ भारत के सांस्कृतिक साहित्यिक राजनीतिक एवं सामाजिक संबंधों पर अपने प्रभाव के लिए ताकत का प्रयोग नहीं किया हमने अपनी सांस्कृतिक ताकत अपने ज्ञान से दुनिया के देश पर अपना प्रभाव भारत की संस्कृति है।

भारत की सभ्यता व संस्कृति विषय में उन्नत रही है। 

सम्राट हर्ष के काल तक भारत को कला साहित्य शिक्षा और विज्ञान में संपूर्ण विश्व में आगे था इसलिए प्राचीन काल में भारत विश्व गुरु के लाता था। भारत में अन्न लंदन तक्षशिला विश्वविद्यालय शिक्षा केंद्र डाल देते हैं।
भारत की प्रसिद्ध सुनकर अनेक विदेशी यात्री भी इस काल में यहां आए उनमें भय यांचा और इनकी सिंह नामक चीनी यात्री प्रमुख यह सब विदेशों में भारतीय संस्कृति के साथ थे
 इन्होंने यहां रे करम रे ज्ञान विज्ञान का दिन किया अपने देश लौटते समय वह अपने साथ भारत की संस्कृति साहित्य अपने साथ ले। 
गए उन्होंने भारतीय ग्रंथों का अपनी भाषा में अनुवाद किया इस प्रकार भारतीय संस्कृति का विदेशों में खूब प्रचार-प्रसार हो गया।
प्राचीन समय में भारत में उद्योग एवं व्यापार अपने चरम सीमा पर थे।
भारत में बनी वस्तुओं की विदेशों में भारी मांग थी  यहां का बहुत सवाल विदेशों में निर्यात किया जाता था यह व्यापार जमीन में समुंदर दोनों ही राष्ट्रों में होता था।

 भारत में मलमठ चाहिए ट्रेजरी के वस्त्र नील गरम मसाले लोहे की वस्तुओं आदि।

 भारी मात्रा में निर्यात की जाती थी, यह मान जावा समुद्रा आदि दक्षिण पूर्व एशियाई देशों तथा पश्चिमी मध्य एशिया से आगे तक भेजा जाता था। क्षेत्रों में व्यापारियों का आना जाना लगा रहता था।
कुछ लोगों ने अपनी बस्तियां बसा ली इस प्रकार बस तू ही। नहीं अपितु भारतीय संस्कृत ज्ञान विज्ञान साहित्य धर्म और दर्शन भी वहां पहुंचे।
बरमसिया मलिया पर दिया कॉमेडी आया सुमित्रा जवाब ओढनिया वाली नदी पर भारतीय भाषा साहित्य एवं कला आदि के प्रभाव के जनजीवन में देखने को मिलते हैं। इन स्थानों पर मिलने वाले प्राचीन संस्कृति और जनजीवन और संबंधों का पता चला है, साथ ही भारत की सभ्यता और संस्कृति के विस्तार का भी पता चला है।

वर्षा होने पर मैदानी भागों में पानी भर जाता है।

यह तुमने किसी छोटे हैं इस सत्र में वर्षीय दिन के लगभग विषय समय में चलती हैं।

 राजस्थान में गर्मी की ऋतु में चलने वाली गर्म पहुंच जिसे लोग कहते हैं आकाश में उड़ते हुए हवाई जहाज अपने पीछे सेहत चिन छोड़ते हैं। इनके इंजनों से निकलने वाली संगठित हो जाती हैं वायु के गतिमान ने रहने की स्थिति में यह संगठन में कुछ देर तक पद के रूप में दिखाई देती हैं। यदि किसी कारण वंश जल वाष्प में बदल कर वायुमंडल में मिल जाती है।
तो भाई मंडल में मौजूद जी आप रूपी जल को आद्रता कहते हैं इसे वायुमंडल में जलवाष्प कहते हैं,
जैसे जैसे वायु गर्म हो जाती हैं इसकी जलवा धारण करने की क्षमता बढ़ती जाती है वर्षा ऋतु में वायु में अधिक होने के कारण कपड़े देरी से ऊपर उठती हैं। तो यह ठंडी होने शुरू हो जाती है जलवा सनी देओल की बदल जाती है। वर्षा ही एक ऐसा माध्यम है।

जो प्रतिवर्ष समुद्रों के कार्य जलवा मीठे जल में बदलकर हम तक हम तो पहुंचाता है।

 पृथ्वी पर जल का बूंदों के रूप में गिरना वर्षा के लाता है। अधिकतर भूमि का जल भी वर्षा से ही प्राप्त होता है पौधों तथा जीव-जंतुओं के जीवित रहने के लिए वर्षा बहुत महत्वपूर्ण है। इसे धरातल को ताजा जल प्राप्त होता है वर्षा कम होने के कारण जल की कमी आ जाती है तथा सूखा हो जाता है अधिक वर्षा होने पर मैदानी भागों में पानी भर जाता है तथा स्थिति को बढा जाता है। तीन प्रकार की होती हैं विश्व में सभी स्थानों पर एक स्थान नहीं होती है क्योंकि वर्षा का वितरण द्वारा प्रभावित होता है ।पर्वतों की समुद्र की दूरी धरातल का स्वरूप पवन आदि क्षेत्र विश्व के सर्वाधिक वर्षा होने वाले रहते हैं। जहां पर वार्षिक वर्षा 200 सेंटीमीटर से अधिक होती है मध्यम वर्षा वाले क्षेत्र मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय क्षेत्र हैं ।
जहां वर्षा की मात्रा है जबकि उसने कटिबंधीय देशों के पूर्वी भाग में कम वर्षा होती है। जिनकी मातृ रहती है विश्व के कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहां बरसाने के बराबर हैं या निम्न प्रकार की वर्षा होती हैं। दूरियां क्षेत्र में भी वर्षा कम हो जाती हैं जो हिमपात के रूप में होती है।

जल क्षेत्र का अपने निकटवर्ती क्षेत्र पर बहुत प्रभाव पड़ता है।

 समुद्रों के तटवर्ती क्षेत्र की जलवायु वर्ष पर बनी रहती है प्रताप ने तो शीत ऋतु में अधिक सर्दी पड़ती है और नए ग्रीष्म ऋतु में अधिक सर्दी पड़ती है समुद्र में अधिक वशीकरण होता है जिससे तटवर्ती क्षेत्रों में अधिक वर्षा होती है जिस प्रकार समुद्रों के जल कारण होता है उसी प्रकार पेड़-पौधों का वर्जन इसलिए जहां पेड़ पौधे अधिक होते हैं वहां वसा अधिक होती है ,साथ ही अधिक वनस्पति वाले क्षेत्रों के लिए बनी रहती इसके विपरीत जहां मैं वहां वहां की जलवायु शुष्क होती हैं।  रूप में चक्रवात निम्न दाब के केंद्र होते हैं जिनके चारों तरफ कुछ वायुदाब होता है ,अर्थात केंद्र से बाहर की ओर वायु दाब बढ़ता जाता है। जिससे वह परिधि से केंद्र की ओर चलती हैं सामान्यतः चक्रवात समुद्र पर विकसित होते हैं ,और तटीय भागों पर वर्षा करते हैं यह दो प्रकार के होते हैं। उसने कटिबंधीय चक्रवात शीतोष्ण कटिबंध शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात गति से चलते हैं।

सर्वाधिक वायुदाब समुद्र तल पर होता है।

तापमान का अर्थ एवं कितने गर्म हमेशा इस अनुभव करते हैं।

 हमें कभी गर्मी लगता मान लगती कभी सर्दी लगती है, और वायु के तापमान के कारण ही होता है जिसे हमारी चमड़ी महसूस करती है। दिन-रात एवं वेदों के अनुसार वायु के तापमान में निरंतर बदलाव होते रहते हैं, रात की अपेक्षा दिन में शीत ऋतु के प्रेक्षागृह दूध की अपेक्षा शहरों में तापमान अधिक होता है।
सर्वाधिक तापमान भूमध्य रेखा पर होता है। भूमध्य रेखा से जैसे-जैसे गुरुओं की ओर जाते हैं, तापमान लगातार कम होता जाता है। क्योंकि भूमध्य रेखा पर सूर्य की किरणें सीधी एवं ध्रुवों पर खींची पड़ती है, इसलिए दुर्गा पर बर्फ होती है।

सूर्य के दिन में पृथ्वी लघु तरंगों के रूप में उर्जा प्राप्त करती है। 

जिसका रात में दीर्घ तरंगों के रूप में विवरण खोजा जाता है। इससे पृथ्वी पर तापमान संतुलन बना होता है। का तापमान को मापने की इकाई सेंटीग्रेड अथवा फॉर रेंट है, जबकि तापमान मापने के यंत्र में तापमापी अथवा थर्मामीटर कहते हैं। यह जानकर आपको आश्चर्य होगा कि वायु हमारे शरीर पर उच्च दाब के साथ बल लगाती है, किंतु हमें इसका अनुभव नहीं करते हैं यह इसलिए होता है।
क्योंकि वायु हमारे ऊपर सभी दिशाओं से दबाव डालती है, और हमारा शरीर विपरीत बल लगाता है।
पृथ्वी की सतह पर ऊपरी वायुमंडल की परतों पर स्थित वायु को जॉब भार पड़ता है, उसे वायुदाब कहा जाता है।

धरातल पर  सेंटीमीटर पर लगभग किलोग्राम भार पड़ता है

 सर्वाधिक वायुदाब समुद्र तल पर होता है तथा वायुमंडल में ऊपर की ओर जाने पर वायुदाब तेजी से कम हो जाता है अधिक तापमान वाले क्षेत्रों में वायु गर्म होकर ऊपरी उठ जाती है। जिसे मैं निम्न वायुदाब मन जाता है।
कम तापमान वाले क्षेत्रों की वायु ठंडी होती है ठंडी वायु भारी होने के कारण धरातल के पास ही बनी रहती है जिसे हम उच्च वायुदाब बन जाता है।
हमारे हमेशा वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर चलती है वायु दाब को मापने की इकाई मिली है जिसकी वायुदाब मापने के यंत्र को वायु महाविद्या बैरोमीटर कहते हैं।
अपन को प्रतिदिन महसूस करते हैं। आपने सुखदेव कपड़ों को अपने आप हिलते हुए देखा होगा यह फोन के कारण होता है। दबाव क्षेत्र में निम्न दाब की और वायु की गति को फोन करते हैं।इसका प्रभाव भी स्पष्ट दिखाई देता है जब यह सड़क पर पड़ी पतियों को उड़ आती है, तथा तूफान के समय पेड़ों को काट देती है।
सोचिए तेज फोन में हमें कौन-कौन सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, मुख्य रूप से पॉर्न तीन प्रकार के होते हैं।

हमारी पृथ्वी के चारों और कई प्रकार की गैसों का आवरण पाया जाता है।

समुद्र में अथाह जल लेकिन यह जल खारा होता है।

 कई छोटे-छोटे शहरों से मिलकर महासागरों का निर्माण होता है जो अत्यंत विस्तृत एवं विशाल होते हैं प्रमुख रूप से पृथ्वी पर चार महासागर प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, मार्केटिंग महासागर ,आगरा  में जीवन का एक अच्छा है।
 संसार है इनमें अनगिनत जीव पाए जाते हैं जल के नीचे मास आगरा में भी धरातल की भांति कहीं रूप पाए जाते हैं जैसे पर्वत पठार मैदान खाया हमारे लिए भोजन एवं खनिजों के भी महत्वपूर्ण स्त्रोत हैं सदियों से ही मानव इंसानों का उपयोग परिवहन के साधन के रूप में करता रहा है यदि 2 स्थान समुद्र से एक दूसरे से जुड़े हुए हो बड़ों की सहायता से बिना कोई सड़क पर रेल मार्ग का निर्माण किए सामान को आसानी से पहुंचा जा सकता है। समुद्र के किनारे पर स्थित स्थल कहा जाता है ।लोग मनोरंजन के लिए भी आते हैं समुद्र के किनारे पर रहने वाले लोग मछली
मछली पालन भी करते हैं वही तट से थोड़ा दूर कर से भी होती हैं एक ऐसा स्थलीय भाग जो चारों तरफ जल से घिरा हुआ हो दीप कहलाता है यह महाद्वीपों से छोटा होता है तथा नदी तालाब समुंदर यामा सागर में कहीं भी स्थित हो सकता है। जैसे अंडमान एवं निकोबार दीप समूह दीप आदि असम में बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी में स्थित माजुली नदी में स्थित विश्व का सबसे बड़ा द्वीप है।

 आपने जाना कि चारों और पानी से घिरे स्थलीय भाग को देते हैं पर क्या आप बता सकते हैं। 

ऐसे स्थान को क्या कहेंगे जो तीन तरफ से गिरा हुआ ऐसे स्थानों को प्रायद्वीप कहते हैं दक्षिणी भारत भी एक प्रदीप है।
हमारी पृथ्वी के चारों और कई प्रकार की गैसों का आवरण पाया जाता है वायुमंडल का हुआ है जिसे हम वायुमंडल कहते हैं। इसकी मोटाई कहीं 100 किलोमीटर तक है ।पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण यह वही मंडल उसके साथ टिका हुआ है। पृथ्वी के सभी जीव शोषण के लिए वायुमंडल पर निर्भर है जो हमें सांस लेने के लिए शुद्ध वायु प्रदान करते हैं।
 वायुमंडल सूर्य से आने वाली दैनिक कर्मी तथा रात में पढ़ने वाली ठंड से मार रक्षा करते हैं।
 तथा वायुमंडल के कारण ही पृथ्वी के धरातल का तापमान रहने योग्य बना है।
गैसों के अतिरिक्त वायुमंडल में जलवाष्प पाई जाती हैं अधिकता के कारण जब जब आप बनकर वायुमंडल में चला जाता है तो वायुमंडल में विद्यमान सी गैस है। जल को जलवा जाते हैं यह केवल सौरमंडल में ही पाई जाती है इसे आधार तक भी कहते हैं धरातल से ऊंचाई बढ़ने पर इसकी मात्रा लगातार कम होती जाती हैं यह हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्षा इसी से होती है।

 वायुमंडल का तीसरा महत्वपूर्ण तत्व जो वायुमंडल में इधर-उधर उड़ते रहते हैं। 

इन दोनों द्वारा प्रकाश के प्रकरण के कारण ही हमें आकाश का रंग नीला दिखाई देता है। सूर्योदय व सूर्यास्त के समय लालिमा विदुर गुणों के कारण ही दिखाई देती है संगठन में इनकी भूमिका सबसे अहम होती है क्योंकि इन्हीं पर जल की छोटी-छोटी बूंदों का निर्माण करती है।

औसत समुद्र तल के निचली ऊंचाई से कम होती है।

पर्वत वर्षा को भी प्रवाहित ऊंचे पर्वतों से टकरा कर बादल वर्षा करते हैं।

पर्वतों के जिस तरफ बादल वर्षा करते उसे मुखी बात कहते हैं, क्योंकि उनका मुख पवन के सामने होता है। वहीं दूसरी तरफ के भाव को पानी मुखी कहते  यहां वर्षा कम होती  इसलिए इस वृष्टि छाया प्रदेश भी कहा जाता है, हमने पिछला कक्षा में पढ़ा की पड़ती है।
क्षेत्रों में डाल तेज होने के कारण कथित भूमिका में उपलब्ध होती  लोग भी काम भी करते  यहां पर रहने वाले अधिकांश लोग पसंद करते  जनजाति रहती है। वहां मौसमी प्रवास करती है यह लोग गर्मियों के साथ में चले  जाती है, यह घाटियों में करते हैं।

यह पर्वत प्राकृतिक वन्यजीवों को भी आश्रय प्रदान करते हैं।

 कम ढाल वाले ऐसे ऊंचे चौड़े वह भाग जो ऊपर से समतल होते हैं, पटाखे लेते हैं। उनका उपयोग अधिकांश चरवाहों के रूप में किया जाता है। कहीं कहीं जहां संभव हो वहां निचले पदों पर कृषि भी की जाती है।
भारत में दक्कन का पठार एवं छोटा नागपुर पठार इसके उदाहरण हैं। पठार सैकड़ों मीटर से हजारों मीटर तक ऊंचे हो सकते पैरों में खनिज के प्रति होते हैं, जैसे लोहा कोयला दी।
सामान्यतः समतल भूभाग का मैदान घर जाते हैं, औसत समुद्र तल के निचली ऊंचाई से कम होती है। पृथ्वी के फुल स्थलीय भाग की सतह के लगभग आधे भाग पर मैदान पाए जाते हैं। यह नदियों द्वारा पोषित होते हैं। और नदियों द्वारा बहाकर लाई गई मर्दा के जमने से इनका निर्माण होता है, इसी कार्य यह बड़े होते और अधिक मात्रा में होती है।

भारत में गंगा पुत्र के गाने मां पुत्र के विशाल मैदान इसका अच्छा उदाहरण है।

 सब पाठ भूमि होने के कारण परिवहन आसान होता है, और सड़क अथवा रेल मार्ग बनाने में बहुत आसानी होती है। यहां पर जनसंख्या घनत्व भी बहुत अधिक है, क्योंकि यहां लोग अधिक बसते हैं।
यह दो प्रकार के मैदान हो सकते हैं तटीय मैदान से समुद्र के किनारे तथा आंतरिक मैदान से मुख्य भूमि पर नदियों द्वारा मिट्टी का नेट पैक कैसे बनते हैं धरातल पर आर्थिक रूप से धारा के रूप में रहने वाले जल को नदी कहा जाता है जो हमेशा कान के नीचे की ओर बढ़ती है नदियों के  धरातल पर प्राकृतिक रूप से एक धारा के रूप में बहने वाले जल को नदी कहा जाता है जो हमेशा डाल के अनुसार ऊपर से नीचे की ओर बहती है। सामान्यतः नदी की उत्पत्ति पहाड़ी क्षेत्रों से होती है, यह मैदान में आती है। और अंत में सागर झील में मिल जाती है।

प्रकृति की सतह पर सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट एवरेस्ट है।

सूर्य की ऊर्जा से पेड़ पौधे अपना भोजन तोता मथुरा से पोषक तत्व प्राप्त करते है।

 पेड़ पौधों से कीट अपना भोजन प्राप्त करता है उसी की एक को चूहा चूहे को सांप को बात करता है बाज के मरने के बाद अपघटक जी उसे मिट्टी में मिला देते हैं। इस प्रकार एक खाद्य श्रृंखला पूरी हो जाती है वास्तव में छेत्र में कहीं खाद्य श्रंखला ओं का एक जटिल होता है। जिसे खाद्य जाल कहते हैं हमने पिछले कक्षा में पढ़ता है कि हमारी खबर है जलवायु परिवर्तन होता है यही भौगोलिक परिस्थितियां व्यक्त करती हैं।
इन्हीं बिंदुओं के गाना पृथ्वी पर ऐसा इनके सभी जीव अपने पर्यावरण के अनुरूप खुद को ढाल लेते हैं ।पर क्या पर्यावरण ही हम जीवन को प्रभावित करता है। नहीं केवल भौतिक पर्यावरण ही जीव जगत पर प्रभाव नहीं डालता है पिताजी भी अपने पर्यावरण को प्रभावित करते हैं मानव ने पर्यावरण में बहुत परिवर्तन किए हैं यह परिवर्तन सर्दी भी हो सकते हैं और गलत भी आज हम सिंचाई के सहायता से रेगिस्तान में कृषि कर सकते हैं वही मनुष्य ने कोई जंगलों को काट डाला है।

 पृथ्वी पर पाया जाने वाला एकमात्र जी हमारे अत्यंत महत्वपूर्ण होता है इसलिए उनका संरक्षण अत्यावश्यक है।

वर्तमान में वर्तमान में मानव आर्थिक विकास के नाम पर अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए पारितंत्र को बहुत नुकसान पहुंचा रहा है मानव अपने कार्यों जैसे प्राकृतिक वनस्पति एवं जीवो का विनाश करना मूल जंतु और वनस्पति के स्थान पर विदेशी जंतु और वनस्पति को स्थापित करना विकास के लिए पारितंत्र के संगठन में परिवर्तन करता है उर्वरकों का प्रयोग करना विकास के लिए पारितंत्र के संगठन वायुमंडल की गैसों के अनुपात पर्यावरण को प्रदूषित करना आदि के कारण पारितंत्र का संतुलित लगातार बिगड़ता जा रहा है।
 इसके दुष्प्रभाव के पृथ्वी पर जीवन संकट में पड़ जाएगा हत्या पारितंत्र के संतुलन को बनाए रखना अति आवश्यक है। और यह कार्य केवल मानव ही कर सकता है।

 हमें विकास के कार्य इस प्रकार करना चाहिए।

उससे पारितंत्र को किसी भी प्रकार का नुकसान ना हो मानव को प्रकृति के दौरान कल लूट लेने की नियत ना रखें बल्कि उसका सहयोग कर उसके साथ सामंजस्य बिठाने की कोशिश करें एवं सतत विकास की ओर अग्रसर होने का प्रयास करें।
ऐसे स्थान जो प्रकृति रूप से आसपास के स्थानों से अधिक ऊंचे एवं सैकड़ों किलोमीटर लंबे होते हैं इन्हें पर्वत का जाता है ।या नीचे से जोड़ें और ऊपर की ओर से सन करें तथा नुकीले होते हैं ऊपर के नुकीले भाग को पर्वत की चोटी कहते हैं आप जानते हैं कि प्रकृति की सतह पर सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट एवरेस्ट है जो धरती की विशालतम पर्वत श्रंखला में स्थित है इसकी एक के क्रम में होते हैं तो इस पर्वत श्रंखला कहते हैं यह किलोमीटर तक फैली होती हैं माउंट एवरेस्ट पर स्थित है।

Saturday, 13 July 2019

हमने उनसे पूछा यह बस चलती भी है।

तुम पास मित्रों में तय किया कि शाम की बस से चले पन्ना से इसी कंपनी के बस इतना के लिए घंटे भर बाद मिलती है।

 जो जबलपुर की ट्रेन मिला देती है। सुबह घर पहुंच जाएंगे हम में से को सुबह काम पर हाजिर होना था इसलिए वापसी का यह रास्ता अपनाना जरूरी था। लोगों ने सलाह दी कि समझदार आदमी शाम को वाली बस से सफर नहीं करते क्या रास्ते में डाकू मिलते हैं नहीं बस बाकी ने बस को देखा तो सरदा उमड़ पड़ी खूब वयोवृद्ध थी। सदियों के अनुभव के निशान लिए हुई थी। लोग इसलिए सब इससे सफर नहीं करना चाहते हैं कि वृद्धावस्था से इसे कष्ट होगा यह बस पूजा के योग्य थी। उस पर सवार कैसे हुआ जा सकता है।

बस कंपनी के एक हिस्सेदार भी उसी बस से जा रहे थे।

हमने उनसे पूछा यह बस चलती भी है वह बहुत चलती क्यों नहीं जी अभी चलेगी हमने कहा वही तो हम देखना चाहते हैं अपने आप चलती है या और कैसे चलेगी गजब हो गया ऐसी बस अपने आप चलती हैं। हम आगा पीछा करने लगे डॉक्टर मित्र ने कहा डरो मत चलो नई नवेली बसों से ज्यादा विषय है हमें बेटों की तरह प्यार में से गोद में ले कर जाएगी हम बैठ गए जो छोड़ने आए थे ।वह इस तरह देख रहे थे कि अंतिम विदा दे रहे हैं। उनकी आंखें कह रही थी आना जाना तो लगा ही रहता है सो जाएगा राजा रंक फकीर आदमी को कुछ करने के लिए एक निमित्त चाहिए इंजन सचमुच स्टार्ट हो गए। ऐसा जैसे सारी बस ही इंजन है।
 और हम इंजन के भीतर बैठे हैं आज बहुत कम बचत है जो बचे थे खिड़की से दूर रहा था हमें लग रहा था। कि हमारी सीट के नीचे इंजन है बस सचमुच चल पड़ी और हमें लगा कि यह गांधीजी के असहयोग और विज्ञान रही होगी उसे ट्रेनिंग में चुकी थी। हर दूसरे से कर रहा था। विज्ञान के दौर से गुजर रहा था।
 कभी लगता सीटी को छोड़ कर आगे निकल गई है अभी आ रही है 8 दिन बाद सारे भेदभाव मिट गए यह समझ में नहीं आता था, कि सीट में हम बैठे हैं या सीट पर बैठी।

एकाएक बस रुक गई मालूम हुआ कि पेट्रोल की टंकी में छेद हो गया है।

 ड्राइवर ने बाल्टी में पेट्रोल निकालकर उसे बगल में रखा और नली डालकर इंजन में रखने लगा अब मैं उम्मीद कर रहा था कि थोड़ी देर बाद बस कंपनी के इशिता इंजन को निकालकर गोद में रख। लेंगे और उसे नली से पेट्रोल पिलाएंगे जैसे मां बच्चे के मुंह में दूध किसी से लगाती है बस की रफ्तार सब उस 1520 मिल हो गई थी। मुझे उस के किसी हिस्से पर भरोसा नहीं था ब्रेक फेल हो गया था स्टेरिंग टूट गई थी। प्रकृति के दृश्य बहुत लुभावने थे। दोनों तरफ हरे भरे पेड़ पर पक्षी बैठे थे मेहर पेड़ को अपना दुश्मन समझ रहा था जो भी पढ़ाता डर लगता है कि इससे बस निकल जाता है तो दूसरा लगा लेगी।

किसी युवा पुरुष की संगति यदि पूरी होगी तो वह।

हम अपने को उनके भरोसे पर छोड़ सके और यह विश्वास कर सकें कि उनसे किसी प्रकार का दुकानें होगा।

जो बात ऊपर मित्रों के संबंध में की गई है वह जान पहचान वालों के संबंध में ठीक है जान पहचान के लोग ऐसे ही जिसमें हम कुछ लाभ उठा सकें।
मनुष्य का जीवन थोड़ा है,उसमें खोलने के लिए समय नहीं यदि के थे।
और गए हमारे लिए कुछ नहीं कर सकते हैं ना कोई बुद्धिमानी या विनोद द्वारा हमें डांस बांदा सकते हैं ना मारे आनंद ने सम्मिलित हो सकते हैं। नाम करते हुए का ध्यान दिला सकते हैं, तो ईश्वर हमें उनसे दूर ही।
आजकल ज्ञान पहचान वरना बड़ा ना कोई बड़ी बात नहीं है कोई भी युवा पुरुष एक अनेक युवा पुरुषों को पा सकता है, जो उसके साथ थिएटर देखने जाएंगे नाच रंग में जाएंगे और सपाटे में जाएंगे भोजन का निमंत्रण स्वीकार करेंगे यदि ऐसा जान-पहचान के लोग से कुछ महीने होगी तो लाभ भी नहीं होगा पर यदि हानि होगी तो बड़ी भारी।

कुसंग का ज्वर सबसे भयंकर होता है।

यह धरती का ही नाश नहीं करता बल्कि बुद्धि शेर करता है।
किसी युवा पुरुष की संगति यदि पूरी होगी तो वह उसके पैरों में बंधन चक्की के समान होगी।
जो उसे दिन-रात उन्नति के गड्ढे में गिर आती जाएगी यदि अच्छी होगी तो सहारा देने वाली बहू के समान होगी। जो उसे निरंतर उन्नति की ओर उठाती जाएगी इंग्लैंड में एक विद्वान और युवावस्था में रोज दरबारी में जगह नहीं। मिली इस पर जिंदगी भर वह अपने भाग्य को शेर आता रहा।
भू से लोग तो इसे अपने दुर्भाग्य समझते हैं।
बहुत से लोग ऐसे होते हैं।
जिनके घड़ी भर के साथ से भी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है।
क्योंकि उनकी ही बीच में ऐसी ऐसी बातें की जाती है।
जो कानों में नहीं पड़नी चाहिए चित्र पर ऐसा प्रभाव पड़ता है जिनसे उनकी पवित्रता का नाश होता है। बुराई अटल भाव जालना करके बैठती है। बुरी बातें हमारे धारणा मैं बहुत दिनों तक टिकती है इस बात को प्राय सभी लोग जानते हैं। कि देवे वड गीत जितनी जल्दी ध्यान पर चढ़ती है।

उतनी जल्दी कोई गंभीर या अच्छी बात नहीं है।

 एक बार एक मित्र ने मुझसे कहा था उसने लड़कपन में कईसे बुरी को सुनी थी जिसका ध्यान वेला करता है। कि न्याय पर बार-बार आता है जिन भावनाओं को हम दूर रखना चाहते हैं जिन बातों को हम याद रख करना नहीं चाहते वह बार बार और दिन में उड़ती है और बंधती है। तो तुम पूरी चौकसी रखो ऐसे लोगों को शादी ने बनाओ अश्लील बातों से तुम्हारा है।
जब एक बार मनुष्य अपना पैर कीचड़ में डाल देता है तब यह नहीं देखता कि वह करो और कैसी जगह पर रखता है। धीरे-धीरे बुरी बातों में व्यस्त होते होते तुम्हारी गिरना कम हो जाती है।

एक प्राचीन विद्वान का वचन है विद्वान का विश्वासपात्र मित्र है।

पुरुष अपने घर से बाहर निकल कर बारिश संसार में अपनी स्थिति जमाता है।

तब पहली कठिनता उससे मित्र चुनने में आती है, यदि उसकी स्थिति बिल्कुल एक कानपुर निराली नहीं रहती तो उसकी जान-पहचान के लोग धड़ाधड़ बढ़ते जाते हैं।
थोड़े ही दिनों में कुछ लोग से उसका व्हेल मेल हो जाता।
यह एल मेल बढ़ते बढ़ते मित्रता के रूप में परिणित हो जाता है। मित्रों को चुनाव की उपयोगिता पर उसके जीवन की सफलता निर्भर हो जाती क्योंकि संगति का गुप्त प्रभाव हमारे आचरण पर पड़ता है। हम लोग ऐसे समय में समाज में प्रवेश करके अपना कार्य आरंभ करते हैं।
 जबकि हमारा चित्त कोमल और हर तरह क्यों संस्कार करने योग्य और रहता है हमारे भाव परिमार्जित और मरी पर्वती उपर्युक्त रहती है।

हम लोग कच्ची मिट्टी की मूर्ति के समान रहते हैं।

 जिसे जो जिस रूप में चाहे उस रूप में डालने चाहिए राक्षस बनाएं चाहे देवता।
इस लुक के साथ रहना हमारे लिए बुरा है।
जो हम से अधिक दृढ़ संकल्प के हैं, क्योंकि हम उनकी हर बात बिना विरोध के मान लेना पड़ती है, पर ऐसे लोग के साथ रहना और बुरा है। जो अपनी ही बात को ऊपर रखते हैं क्योंकि ऐसे दशा मैंने तो हमारी ऊपर कोई नियंत्रण था रहती है। और ने हमारे लिए कोई सारा रहता है दोनों अवस्थाओं में जी से बात का भी रहता है। उसका पता भी लोगों को प्राय बहुत कम रहता है, यदि विवेक से काम लिया जाए तो यह नहीं रहता पर युवा पुरुष प्राइवेट से कम काम लेते हैं कितने आश्चर्य की बात है। कि लोग एक घड़ा लेते हैं।

 तो उसको शो गुण दोषों को कर लेते हैं।

पर किसी को मित्र बनाने में उसके पूर्ण आचरण और स्वभाव आदि, का कुछ भी विचार व अनुसार दिन नहीं करते उसमें सब बात अच्छी ही अच्छी मानकर अपना पूरा विश्वास जमा देते हैं। हंसमुख चेहरा बातचीत का ढंग थोड़ी चतुर हैं यह एहसास यही दो चार बातें किसी में देखकर लोग चटपट अपना बना लेते हैं।
हम लोग यह नहीं सोचते हैं, कि मैत्री का उद्देश्य क्या है क्या जीवन के विवाह से उसका कुछ मूल्य भी है यह बात हम नहीं समझती सूजी के बाद भी नहीं है। जिसमें आत्म शिक्षा का कार्य भूत सुगम हो जाता है
 एक प्राचीन विद्वान का वचन है विद्वान का विश्वासपात्र मित्र है।
जिसे ऐसा मित्र मिल जाए उसे समझना चाहिए कि खजाना मिल।
विश्वासपात्र मित्र जीवन की एक औषधि है हम अपने मित्रों से यह असर रखनी चाहिए कि वह उत्तम संघ लोगो सकें।

बेणेश्वर की यात्रा आइए यात्रा करते हैं।

बेणेश्वर की यात्रा आइए यात्रा  मैंने गत वर्ष अखबारों पढ़ाता बेणेश्वर धाम करते हैं।

 यहां माघ शुक्ल एकादशी से कृष्ण पंचमी तक मेला भरता है गुजरात मध्य प्रदेश तथा राजस्थान के लोग इस में भाग लेते हैं समाचार बहुत ही रोचक था मेरे मन में यह मेला देखने की प्रबल इच्छा जागृत होती हां कहते साल बीत गए मैंने तैयारी तो कर ही रखी थी आखिर माघ शुक्ल एकादशी नजदीक ही गई मैं बेणेश्वर धाम के लिए रवाना हुआ था।
चांदनी रात थी मैं बस में सवार था बस अरावली की पहाड़ियों को चीरती हुई बेणेश्वर धाम की ओर बढ़ रही थी यहां तीर्थ स्थान डूंगरपुर और बांसवाडा जिलों की सीमा पर स्थित है।

इससे आदिवासियों का कुंभ का जाता है।

बस यहां यहां लोग देखने को आते हैं मेला को।
महाराज नीचे की आवाज के साथ मेरी नींद खुल गई लोग आपस में बात कर रहे थे। और आप लोग अभी गिव अवे तो बेणेश्वर धाम 100 किलोमीटर है क्यों।
एबेला शिव जी ना मंदिर ना बहनों का ईश्वर के हैं।
सब हंस पड़े कुछ ही देर में साबला आ गया बस रुक गई आज माघ शुक्ल एकादशी है आज से मेला शुरू हो रहा है यह 10 दिन तक चलेगा पंचमी को पूरा होगा मुख्य महिला पूर्णिमा को रखता है। में बेणेश्वर टॉपिक पर पहुंचा यहां लगभग 240 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ टापू है यहां कई मंदिर है मेरी नजर शिलालेखों पर पड़ी इसके बाद मैंने शिव मंदिर देखा इसका निर्माण डूंगरपुर के महा रावण ने लगभग 5 साल पहले यहां बहुत पुराना हो गया था, इसलिए इसकी मरम्मत करवाई गई थी।
कहते हैं।

इस मंदिर में बैठकर मावजी महाराज ने अपना चोपड़ा लिखा था। 

मावजी क्षेत्र के प्रसिद्ध संत हुए हैं उनका जन्म 28 जून में हुआ था लोग इसको कृष्ण का अवतार मानते।
महाराज के नए सॉन्ग सागर प्रेम सागर मेघा सागर रत्न सागर सागर नामक ग्रंथ की रचना की थी बागड़ी भाषा में चोपड़ा का जाता है।
भविष्यवाणी लिखी हुई है अब तक सही साबित हुई है मुझे यह भी बताया गया कि उनकी बेटी है।

Thursday, 11 July 2019

मालदेव की मृत्यु पश्चात में चंद्रसेन छोटा होते हुए।

इसी समय प्रताप को मुगल सेना ने घेरा लिया।

 स्थिति में जाला मानकर के राज जी ने दसवीं गति ने अपने सिर पर धारण कर मुड़ मुगलों को धोखे में डाल दिया। और उसमें का बलिदान कर दिया लीड हल्दीघाटी से कुछ दूर बलीचा नामक स्थान पर घायल चेतक की मृत्यु हो गई, यार चेतक की छतरी बनाई हुई है। हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की तरह से झाला बिदा मानसिंह सोना ग्राम 7 ग्राम साहेब और उसके 3 पुत्र वीरता का प्रसारण करते हुए, मारे गए। सलूंबर का रावत कृष्णदास चूंडावत राव गोपाल दास मामासाहेब क्षेत्र में बसने वाले थे प्रमुख सरदार थे।

इस तरह हल्दीघाटी का युद्ध समाप्त हुआ फिर भी तत्कालीन एवं कालीन प्रणाम जो भी हुए। 

 इस युद्ध के दूरगामी परिणाम प्रताप एवं मेवाड़ के पक्ष में गए। हल्दीघाटी युद्ध के बाद अकबर ने प्रताप को बुरी तरह से के लिए साहिबा को तीन बार मेवाड़ भेजा किंतु उसे भी सफलता प्राप्त नहीं हो। सकी में अकबर ने अब्दुल रहीम खानखाना के विरुद्ध भेजा खान खान के साथ बंदी बनाया महाराणा प्रताप नाराज हुए। और उन्होंने रहीम खानखाना के परिवार को छोड़ दिया गया। आने के लिए कहा राणा प्रताप ने भामाशाह से प्राप्त आर्थिक सहायता से सेना का अपमान किया मेवाड़ का मैराथन की संख्या।ै प्रताप के विरूद्ध अंतिम अभियान  में जन्म कथा के कछुआ है। मैं किया गया किंतु उसको सफलता नहीं मिली।
धनुष की प्रत्यंचा खींचने में पर्यटन में मारा प्रताप घायल हो। गए। और 19 जनवरी 1597 ईस्वी को 57 वर्ष की आयु में प्रताप। मिश्रण चावल-600 गया।

राव चंद्रसेन जोधपुर के शासक राव मंदिर के कनिष्ठ पुत्र थे।

 मालदेव की मृत्यु पश्चात  में चंद्रसेन छोटा होते हुए। भी मारवाड़ का शासक बन गया थे। दोनों भाई राम सिंह और मोटा राजा सिंह उसके नाराज हो।गए बड़े भाई राम ने अकबर की शरण में जाकर शाही सहायता की प्रार्थना की एक हुसैन कुली खां के नेतृत्व में अपनी सेना जोधपुर के किले पर अधिकार कर लिया, राजेंद्र सर ने बाद अर्जुन में जाकर शरण ली।

लड़ाई से मैं नहीं डरता और जीवन की आखिरी घड़ी तब माहिम की रक्षा करूंगा,

सामत सरदार भी अब महाराज की भंवर धारा में बेकर व्यवहार बुद्धि से दुर्भावना के क्षेत्र में पहुंच गए।

 उन्हें के मुंह से निकला धन्य है, महाराज मिलने का मामला है रणथंबोर अब तुम्हारा घर है। आराम से यहां रो और विश्वास रखो कि अब किसी की हिम्मत नहीं जो तुम्हारी तरफ तिरछी आंखों से देखे कोई कष्ट हो, तो हमें के ना जाओ।
कानो कानो उड़ती खबर दिल्ली के बादशाह अलाउद्दीन खिलजी तक पहुंची तो, वहां तमाम उठा हमीर की है। हिमाकत कि मेरी जोर को आंसर दे क्या तुम नहीं जानते हमें तो। तुमने माहिम को अपनी छतरी खेर में बोलो को माफ करना जानता हूं। कोई बात नहीं माहिम को अपनी देखरेख में मुझे सुपुर्द करो और अपने कुसूर की माफी मांगो।

अलाउद्दीन का यह संदेश हम्मीर के पास पहुंचा तो वे मुस्कुराए उसने लिखा माहिम को शरण दी है।

 कोई नौकर नहीं रखा है। अपना सर्वस्व लुटा कर मिश्रा नाथ की रक्षा करना हमारे संस्कार हैं सपने में भी उम्मीद ने रखिए की मांग को मैं आपके दरवाजे लाऊंगा आप जो मुनासिब समझा कीजिए जवाब क्या था एक पीड़िता जिसने खिलजी के बारूद में आग लगा दी। और उसने कुछ दिन बाद ही, अपनी फौजों के साथ रणथंबोर का किला  घेर  लिया।

लड़ाई झगड़े से क्या फायदा हमीर लाम मीम को मुझे  खिलजी का यह आखिरी संदेश था।

 लड़ाई से मैं नहीं डरता और जीवन की आखिरी घड़ी तब माहिम की रक्षा करूंगा, हमीर का यह आखिरी  उत्तर था।
दूसरे दिन में रणबीर जुटी ऊंची पहाड़ी पर बना रणथंबोर का किला और चारों ओर फैली साहिब खोजे एक तरफ अपने बादशाह के लिए लड़ने वाली भौजी तो, दूसरी तरफ अपनी आन पर मर मिटने वाले सिपाही एक तरफ भरपूर साधन तो।
 दूसरी तरफ भरपूर लड़ाई क्या थी यह बात की बाजी और यह बाजी जिसका निशाना एक आदमी के प्राण और की हजारों प्राण सरसों के दानों की तरह हथेली पर।
दोनों तरफ हजारों योद्धा का माई बादशाह की ताकत जितनी चिति दिल्ली उस पर कर देत। हम पर हम अमीर की शक्ति दारा की जो लहर पे जाती फिरने लौटती पर टूटती तलवार  को न्याय करती और हर गिरता सिपाही हजार को  के रास्ते खुले हुए थे। आई के बंद करो का खजाना और कुबेर का कोर्स भी कब तक टिक पाता।

Saturday, 29 June 2019

युद्ध के बाद हुई मैया को भारत से पलायन करना पड़ा।

गुजरात के बहादुर साधने में चित्तौड़ का घेरा डाला।

रानी कर्णावती राणा सांगा की पत्नी ने ह्यूम आयु का राखी भेजकर सहायता मांगी किंतु हमारे आने में विलंब किया। फलस्वरूप चित्तौड़ पर बहादुर संस्था का अधिकार हो गया, एवं शासकीय  चौसा का युद्ध हुआ इस युद्ध में पराजित हो गया। में हुमायूं ने अपने भारत का विजय अभिमान प्रमाणित किया, और सर्वप्रथम लोहार पर कब्जा किया। उसने सिकंदरपुर के मछीवाड़ा के युद्ध में पराजित कर बंद पंजाब की अधिकार कर लिया। को हिमायू दिल्ली की गद्दी पर बैठा।  को जब हुमायूं दिन पता नी स्तुति पुस्तकालय की सीढ़ियों से उतर रहा था। तो उसका पैर फिसल गया।  जनवरी को उसकी मृत्यु हो गई सुर साम्राज्य का संस्थापक था।

यह जान पूर्ण राज्य के अंतर्गत से सारा सर बिहार का जमींदार का था। 

फरीद को बचाने शितोले मावे भाइयों के कारण सुखी नहीं था। वह दक्षिणी बिहार के प्रति बकाए का लोहानी की सेना में चला गया। इसी ने फरीद द्वारा शेर मार दिए। जाने के कारण सरंगा की उत्पन्न प्रकार की में कन्नौज के युद्ध के बाद हुई मैया को भारत से पलायन करना पड़ा।
 और इस प्रकार से साहेब को भारत का सिहासन प्राप्त हुआ। सम्राट बनने के बाद शेरशाह ने बंगाल ग्वार लिए। और मानव पर विजय प्राप्त की  में शेरशाह ने गिरी सुमेल का युद्ध में मारवाड़ साहेब राव मालदेव को पराजित किया शेरशाह ने रावण से युद्ध बड़ी मुश्किल से जीता क्योंकि मालदेव के सेनानायक जेता व्यकुंता ने वीरता पूर्वक संघर्ष किया तभी शेरशाह ने कहा था। मैं मुट्ठी भर बाजरे के लिए हिंदुस्तान की सूचना को देता में कालिंजर के किले पर आक्रमण के दौरान बारूद में विस्फोट होने में शेरशाह की मृत्यु हो गया।
अपने शासन प्रबंध और किए गए। कार्यों की दृष्टि से शेरशाह मध्यकालीन शासकों में एक विशेष स्थान रखता है।

बड़ी बड़ी सड़कों का निर्माण करवाया सासाराम का मकबरा भारत की सबसे बड़ी इमारतों में एक है।

अकबर का जन्म अमरकोट सिंध में राणा वर्षफल के महल में  ईसवी को हुआ था उसके पिता हिमायू और माता अमिता मनु बेगम ने यहां के राजपूत राजा के महल में शरण ली थी । को हनुमान जी की मृत्यु के बाद अकबर दिल्ली का शासक बन गया, मर गया  प्रधानमंत्री बन गया।

राजश्री का विधि विधान के जंगलों में ठीक उस समय बताइए

एक विजेता होने के साथ साथ हर्ष एक कुशल प्रशासक भी था।

वर्धन वंश की शक्ति और प्रतिष्ठा का संस्थापक परिवार जून तथा परिवारजनों के 3 संस्थानों थी राज्य वन और हर्ष तक पूरे राजश्री पूर्ति की राशि का विवाह मुख्य वंश के राजा गर्मी से हुआ प्रभावित के काल में उसका आक्रमण हुआ। प्रमाण काल में उनके लड़ने के लिए अपने दोनों पुत्रों को भेजा इसी दौरान परिवारों कारणों की मृत्यु हो। गई परमाणु का बंगाल के घोड़े शासक संस्थान द्वारा इसमें उनका वध कर दिया गया सुर में उनका छोटा भाई जिस समय हर्षवर्धन शासन बनावे अनेक समस्याओं से घिरा हुआ था

 उसकी बहन राजश्री कानो कान के का षणमुगम आहोर की हत्या मालवा के शासक ने करी थी।

राजश्री के करो जनों के कारण दिया लिया गया साथ ही अपने बहनोई के राज्य कोनो नाच की जिम्मेदारी भी हर्षवर्धन पर थी। प्रारंभिक समस्याओं का समाधान हर्षवर्धन ने बड़ी बहादुरी के साथ किया सर्वप्रथम बॉडीबिल्डर की साहित्य से और स्नेह राजश्री का विधि विधान के जंगलों में ठीक उस समय बताइए जब वह चिंता बनकर जलने तक जा रही थी। इस प्रकार ने अपनी बहन के सरंक्षण के रूप में रोजना का शासन भार उठाना भी स्वीकार किया हर्षवर्धन के संपूर्ण भारत का एक केंद्रीय सत्ता के अधीन करने हेतु कई युद्ध लड़े हर्ष का सबसे महत्वपूर्ण युद्ध दक्षिण भारत के चालू के साथ हुआ इस प्रकार युद्ध में हर्ष पराजित हुआ और उसे दक्षिणी सीमा नर्मदा को मानना पड़ा इसी युद्ध सेव के विषय की जानकारी पुलकेशिन द्वितीय के डोले अभिलेख से प्राप्त होती थी।

 जो रवि करते द्वारा लिखा गया था। 

उसने अशोक के सामने अपने पराजित के कार्य भी किए नालंदा विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय ख्याति हर्षवर्धन के समय ही हुई हर्षवर्धन प्रति 5 वर्ष प्रयास में महा मोक्ष परिषद का आयोजन करता था जिसमें दीन दुखियों एवं पक्षियों को उधारण पूर्वक दान दिया जाता था। उसके कार में प्रसिद्ध चीनी यात्री अविनाश ने भारत की यात्रा की एवं प्रयास महा मोक्ष प्रसिद्ध में भाग लिया करो राज्य सभा हर्ष के काल में प्रसिद्ध चीनी यात्री आने में भारत का हर्षवर्धन एक उच्च कोटि का विद्वान था। जिसे नागानंद परी कथा में बाढ़ फटे हुए मयूर जैसे विद्वान आश्चर्य पाते थे। वर्ड भट्ट में 68 चरित्र के बाद में भरी नामक संस्कृति के प्रसिद्ध ग्रंथ लिखे मयूर में स्थित की रचना की।

Friday, 21 June 2019

हजारों वर्ष पूर्व ही भारतीय चिंतन में सभी बात का उल्लेख मिलता है।

वैदिक साहित्य के अनुसार व्यक्ति को समाज के अन्य लोगों में बांट कर वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए

 ना कि अपने आप के लिए इससे स्पष्ट होता है। यह मेरा है यह तेरा है ऐसा विचार करने वाले व्यक्ति निम्न कोटि के होते हैं उच्च चरित्र वाले कि वह बोलता समानता के कल्याण पर आधारित होना, चाहिए सर्वे में उल्लेख किया गया है। कि भूखे मित्र नौकर अतिथि तथा पशु पक्षियों को ने खिलाकर से अकेला वह करना वाला भी होता है। जहां पाश्चात्य आर्थिक व्यवस्था अधिक अधिक संतुष्टि का पत मानती है। वहां भारतीय आर्थिक चिंतन में पूर्ण संतुष्टि की प्राप्ति मानी गई है।
उच्च चरित्र वाले व्यक्तियों के लिए तो संपूर्ण विश्व की कुटुंब आर के समान है, भारतीय संस्कृति में सभी का कल्याण हो, तथा सभी की सेवा को ही, सर्व बाबू मानव धर्म माना गया है। वर्तमान संदर्भ में जब धन  और संपत्ति में समान वितरण से अमीर गरीब के बीच की खाई बढ़ गई तो बार-बार चीन भारतीय आर्थिक चिंतन की समय पर वह सहयोग की ना समाज है। या पूर्ण वितरण द्वारा समानता की स्थापना सहायक हो सकती है।

 एवं सामाजिक कल्याण में वर्दी ला सकती है।

हजारों वर्ष पूर्व ही भारतीय चिंतन में सभी बात का उल्लेख मिलता है। कि मनुष्य की आवश्यकताएं समिति होती है, उनका उनकी मूर्ति के साधन सीमित ही होती है। प्रणाम और शक्ति की कुछ आवश्यक पूरी ना हो पाने से वे दुखी हो, जाता है, कौन इसमें कहा गया है कि कोई व्यक्ति कितना ही धन प्राप्त करी है। उस धन से नहीं हो सकता जिस प्रकार भोजन करने से पेट भर जाता है। परंतु बनी रही है उसी प्रकार धन प्राप्त करने की इच्छा कभी पूरी नहीं है। प्राचीन भारतीय साहित्य में यह कहा गया है, कि मनुष्य की आवश्यकताएं समिति है नहीं होती है। अपितु एक आवश्यकता पूर्ण होने पर दूसरी नई उत्पन्न हो जाती है। मनुष्य ज्ञान व परिश्रम द्वारा आजीविका उत्पन्न करें ताकि समाज में हड़ताल नहीं होता है,

क्योंकि दरिद्रता से समाज में आवश्यकताओं की संतुष्टि नहीं हो सकती है।

प्राचीन भारतीय साहित्य में शरीर मन बुद्धि एवं आत्मा के सुख की कल्पना की गई है, जिसे चतुर्वेदी सुख के नाम से जाना जाता है। चतुर्वेदी सुख की प्राप्ति के लिए कर्तव्य के रूप में धर्म अर्थ काम व मोक्ष विचार पूर्व शर्तों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें पुरुष कहते हैं। प्राचीन भारतीय चिंतन पुरुषों की तुलना नदी से की गई है। वह काम नदी के प्रवाह हैं, तथा धर्म में मोक्ष इस नदी के लोग तक बंधन है।

भारतीय प्राचीन शास्त्र के अनुसार काम विषय को चलाने वाला एक काम से बता करता है।

प्राचीन भारतीय साहित्य में धर्म का अर्थ ब्राह्मणों से नहीं है।

 अपितु की अवधारणा बहुत व्यापक है, गरम दस्तूर है। वह उसका संबंध आजीविका की शुद्धता से है, श्रेष्ठ बनने के लिए धर्म ढाणी में अचार नहीं है। धर्म का आधार नैतिक नियम में सादर चरण है। अतः धर्म समाज में व्यवस्था बनाए रखने के हैं।
शास्त्रों में मनुष्य की सुख-सुविधा का आधार धर्म को मनाया गया है, एवं धर्म का मूल अर्थ को मन माना गया है। वेदों में वैभव मुद्रा तथा संपत्ति को धन माना गया है। प्राचीन साहित्य में विद्या भूमि सोना-चांदी पशु धन धान्य धातु निर्मित आदि को अर्थ माना गया है।
भारतीय प्राचीन शास्त्र के अनुसार काम विषय को चलाने वाला एक काम से बता करता है। जिस प्रकार के व्यक्ति के काम होते हैं, व्यक्ति भी वैसा ही बन जाता है। अर्थ वेद में काम को ही, विविध कामनाओं के रूप में विभिन्न कार्यों का कारण व उत्पत्ति स्थान माना गया है।

प्राचीन आर्थिक चिंतन थे, के अनुसार धन साधन है। 

साध्य नहीं अपने आप को इच्छाओं के रहिता करते हुए बंधन से दूध नाही मुख से इसे आवागमन से बहुत चक्कर से मुक्ति भी कहा जाता है। एक ऐसी व्यवस्था जिसके तहत किसी निश्चित क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों का संचालन अर्थव्यवस्था के लाती है। ऐसी आर्थिक प्रणाली जिसमें उत्पत्ति के साधनों पर निजी व्यक्तियों का स्वामित्व व नियंत्रण होता है, पूंजीवादी अर्थव्यवस्था  कहलाती है।
ऐसी आर्थिक प्रणाली जिसमें उत्पत्ति के सभी साधनों पर सरकार द्वारा अभिव्यक्त संपूर्ण समाज का स्वामित्व होता है।

 समाजवादी अर्थव्यवस्था के लाती है, 

ऐसी आर्थिक प्रणाली जिसमें निजी और सार्वजनिक क्षेत्र दोनों का शहर होता है। मिश्रित अर्थव्यवस्था कहलाती है। प्राचीन भारतीय आर्थिक चिंतन सभी आर्थिक विचारों का सार है। जिन्हें भारत में समस्त प्राचीन ग्रंथों में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है, एकात्म मानव का अर्थ है। मानव शरीर मन बुद्धि व आत्मा का एकीकृत रूप चक्रवर्ती सुख शरीर मन बुद्धि व आत्मा के सुख की प्राप्ति के लिए प्राचीन भारतीय आर्थिक चिंतन में चार पुरुषार्थ धर्म अर्थ काम व मोक्ष का उल्लेख किया गया है।
पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की विशेषताएं समझाइए। समाजवादी एवं मिश्रित अर्थव्यवस्था के गुण दोष का उल्लेख करो, से मृत एवं सहयोग उपयोग की अवधारणा स्पष्ट कीजिए प्राचीन भारतीय आर्थिक चिंतन पर एक लेख लिखिए।

Thursday, 20 June 2019

मिश्रित अर्थव्यवस्था होती है।

निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र का शैक्षिक व श्रीमती अर्थव्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं। 

निजी तथा सार्वजनिक दोनों का सीएसएसयू है। सामाजिक लाभ के उद्देश्य से महत्वपूर्ण रोगों पर सरकार का अधिक होता है। जैसे जल विद्युत का उत्पादन किया जाता है। सारिका सरकार द्वारा भी किया जाता है। इस आर्थिक प्रणाली में भारी वे आधुनिक उद्योगों का संचालन विकास सरकार द्वारा किया जाता है। तथा कुटीर उद्योग कृषि कार्य आदि निजी क्षेत्र के अधीन होते हैं। इनके अतिरिक्त कक्ष की स्थापना भी की जाए।
मिश्रित अर्थव्यवस्था में वस्तु की कीमत निर्धारित की दोहरी प्रणाली होती है। निजी क्षेत्र में वस्तुओं की कीमत बाजार में स्वतंत्र रूप से होती है। परंतु सरकार कुछ मूल्य को तय करने का अधिकार अपने पास रखती है। जो सामान्य आदमी द्वारा उपयोग की जाती है। उदाहरण के लिए भारत में पेट्रोल डीजल के मूल्य सरकार द्वारा किए जाते हैं। मिश्रित अर्थव्यवस्था होती है।

जिसमें सरकार पूर्ण नियोजन के साथ सामाजिक एवं आर्थिक नीतियों निर्माण करती है। 

इन्हीं नीतियों के अनुरूप सामाजिक कार्यों को करती है। जैसे नदी घाटी परियोजना का निर्माण पेयजल सिंचाई पर्यटन मछली पालन विद्युत उत्पादन अधिकारियों का विकास करना सामाजिक लाभ के लिए आम जनता आपूर्ति करना सामाजिक महत्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर सरकार का नियंत्रण होने के कारण सरकार नियोजन किस प्रकार निर्भर करती है। कि सभी सत्रों का समान रूप से विकास हो सकता है। देसी शिक्षा चिकित्सा सड़क परिवहन पेयजल इत्यादि परिजनों का विस्तार एवं विकास।
मिश्रित अर्थव्यवस्था में नीचे क्षेत्र में उत्पादन करने उपभोग करने विनिमय तथा वितरण करने की व्यक्तिगत स्वतंत्रता दी है।

लेकिन यह स्वतंत्रता सामाजिक हित या कल्याण में वृद्धि करने

 की सत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डाल सकते इसलिए सरकार इसे स्वतंत्रता पर आंशिक नियंत्रण रखती है। जैसे सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान तथा मकानों का निषेध होना बाल बाल विवाह मृत्यु भोज आयोजन इत्यादि पर रोके।
विकास आर्थिक विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों के दोहे ने वस्तुओं और सेवाओं के उपयोग की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए होरे मानवीय मूल्यों और नैतिकता के हादसे में विश्व के पूंजीवादी एवं समाजवादी आर्थिक प्रणाली को विकास के एक विकल्प मार्ग को खोजने पर विशेष कर दे दिया जाता है। ऐसी परिस्थितियों में भारतीय आर्थिक चिंतन परंपरा का अध्ययन विषय का आर्थिक समस्याओं के समाधान की दिशा में मार्ग पर स्थित कर रहा है।

अर्थव्यवस्था समान कार्य के लिए समान मजबूरी के सिद्धांत पर कार्य करती है।

समाजवादी अर्थव्यवस्था से भरा एक ऐसी अर्थ प्रणाली से अमृत जिसे उत्पत्ति की के सभी साधनों पर सरकार द्वारा अभी तक संपूर्ण समाज का स्वामित्व होता है।

 अर्थात आर्थिक क्रियाओं का संचालन केंद्र द्वारा संविधान के उद्देश्य से किया जाता है।
कार्ल मार्क्स द्वारा विकसित समाजवादी विचारधारा से प्रभावित होकर सन 1917 में रूस की क्रांति हुई एवं समाजवादी अर्थव्यवस्था का प्रारंभ हुआ। और उसके बाद शेष कोर्स इन चीन युगोस्लावियन आदि देशों में आर्थिक प्रणाली को अपने-अपने परंतु वर्तमान में चीनी को छोड़कर शेष देशों से इस प्रणाली को छोड़ दिया है।
अर्थव्यवस्था में उत्पादन के भौतिक साधन अर्थात भूमि  कारखानों पूंजी खाने अधिक पर समाज या समाज का स्वामित्व और नियंत्रण होता है। इसे पूरा लिस्ट में नाम का उद्देश्य या निजी हित के लिए आर्थिक गतिविधियों का संचालन नहीं होता है।

व्यवस्था में वस्तुओं में उपयोग हो तू भोक्ता के चयन के प्रश्न पत्र उनकी वस्तुएं तक रहती है।

 जिन्हें सरकार के निर्देशानुसार किया गया है। सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा में ही उपभोक्ता द्वारा उपभोक्ता किया जाएगा समाजवादी अर्थव्यवस्था में समाजवादी आर्थिक लक्ष्यों में निर्धारित प्राप्ति हेतु। एक केंद्रीय सत्ता होती है। मैं आर्थिक निर्णय से क्या उत्पादन करना है। उत्पादन कैसे करना है। वह अधिनियम द्वारा ही लिए जाते हैं। अर्थव्यवस्था समान कार्य के लिए समान मजबूरी के सिद्धांत पर कार्य करती है। अतः इस आर्थिक प्रणाली में वर्ग संघर्ष की संपत्ति हो जाती है। साथ ही निजी पूंजी स्थापित करने हेतु। अवसरों की कमी के कारण आई कि ऐसा मानता भी कम हो जाती है।
समाजवादी अर्थव्यवस्था में केंद्रीय सरकार द्वारा सभी प्रकार के आर्थिक निर्णय अधिक केंद्रों में समाजिक में समूह को ध्यान में रखकर ही लिखे जाते हैं। ने की निजी लाभ के उद्देश्य से।

समाजवादी अर्थव्यवस्था का विश्लेषण निम्न गुण और दोषों के आधार पर कर सकते हैं।

 यह आर्थिक प्रणाली पूंजीवादी वे समाजवाद दोनों के आदर्श में लक्षणों का आदेश दे सकता अनुसार समावेश करने का एक प्रयास के दूसरे शब्दों में यह प्रणाली पूंजीवादी में समाजवाद के बीच का रास्ता है। श्रीमती अवस्था एक ऐसी प्रणाली है।
जिसमें निजी और सार्वजनिक क्षेत्र दोनों का स्विच में होता है। यह निजी उपकरण इजी लाभों का समर्थन करती है। उस परंतु साथ ही साथ संपूर्ण समाज के हितों की रक्षा के लिए सरकार के अस्तित्व को भी महत्वपूर्ण मानती है। श्रीमती अर्थव्यवस्था में यह प्रयास रहता है। कि निजी और सार्वजनिक क्षेत्र दोनों संयुक्त रूप से किस प्रकार कार्य में जिसे देश के सभी वर्गों का आर्थिक कल्याण बड़े एवं देश में वृद्धि व विकास भी संभावना का प्रवाह स्वतंत्रता के पश्चात भारत में ऐसी प्रणाली को अपनाया जाता है।

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता प्रस्तुत पुस्तक संपन्न होते हैं।

निजी संपत्ति का अधिकार पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में उत्पादन के घटक जैसे खाने का प्रयोग कारखाने मशीनें आदि सभी पर निजी व्यक्तियों का स्वामित्व होता है।

 इन साधनों के स्वामी अपनी इच्छा अनुसार इनका प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र होते हैं। व्यक्तियों के संपत्ति रखने उसे बढ़ाने व उसे प्रयोग करने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।
पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता प्रस्तुत पुस्तक संपन्न होते हैं। अर्थात उपभोक्ता की आवश्यकता व उसकी इच्छा के अनुरूप हो ही उत्पादक वस्तुओं का उत्पादन करते हैं। इसे उपभोक्ता के उस चंपारण ऊपर कहा जाता है। इसे आर्थिक प्रणाली अपनी मैं उपभोक्ता अपनी आई को इच्छा अनुसार व्यय करने के लिए स्वतंत्र होता है।
 वक्ता को सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने हेतु के कारण इसके आर्थिक प्रणाली में उपभोक्ता को बाजार का राजा कहा जाता है।

प्रत्येक व्यक्ति अपनी इच्छा अनुसार किसी भी आर्थिक गतिविधि का संचालन कर सकता है। 

उत्पादन के लिए तकनीकी करने की उपयोगिता स्थापित करने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है। सरकार को कोई हंसता पेश नहीं होने के कारण पूंजीवादी अर्थव्यवस्था वाली अर्थव्यवस्था भी कहलाती है।
पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में विक्रेताओं के बीच अपने अपने उत्पादक अथवा वस्तुओं को बचने के लिए तथा कर्ताओं के बीच अपनी अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वस्तुओं को खरीदने के लिए प्रयुक्त प्रतिभूतियों चलती रहती है। जिससे बाजार में कुशलता बढ़ती है। विज्ञापन देना हार देना मूल्य में कमी कर देना आदि तरीके पर इस्थित पदों हेतु अपनाए जाते हैं।
पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति द्वारा किसी भी कार्य करने का निर्णय अथवा किसी वस्तु के उत्पादन का निर्णय मुख्य अतिथि से लागू भावना के आधार पर ही लिया जाता है। अर्थात काम करने के रूप में क्या वह कितना लाभ प्राप्त होता है।

 किसी प्रकार उपभोक्ता वस्तुओं को उपरोक्त निजी हित के लिए भी करते हैं।

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में समाज दो वर्गों में विभाजित हो जाता है। उगम लगाने जोखिम उठाने वाला पूंजीपति कहलाता है। यह यह साधन संपत्ती वर्ग होता है। गोगो में काम करने वाले वर्ग सर में कहलाता है। यह साधन विहीन वर्ग होता है। पूंजीपतियों मेला बढ़ाने का उद्देश्य व श्रमिकों में शोषण से बचने का उद्देश्य वृक्ष संरक्षण को जन्म देता है।
संपत्ति के असमान वितरण के कारण पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में गरीब व अमीर की विषमता की खाई बढ़ती है। पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का निम्न गुण दोष के आधार पर विश्लेषण कर सकते हैं।

अर्थव्यवस्था एक ऐसा ढांचा है।

प्रत्येक देश में व्यक्ति अपनी जीविकोपार्जन के लिए विभिन्न प्रकार के आर्थिक क्रियाकलापों में सम्मेलन है। 

 किसान हो या श्रमिकों की हो या दुकानदार अध्यापक हो या डॉक्टर सभी अपनी अपनी आजीविका कमाने हेतु कार्य कर रहा है। विभिन्न आर्थिक वर्गों को द्वारा विभिन्न प्रकार के आर्थिक कार्यों के संपादन हेतु। किसी सुव्यवस्थित व्यवस्था प्रणाली की व्यवस्था होती है। व्यवस्था को ही कहा जा सकता है। कि एक ऐसी प्रणाली अथवा व्यवस्था जिसके द्वारा और लोग अपना जीवन करते हैं। अर्थव्यवस्था  कहलाती है।

अर्थव्यवस्था एक ऐसा ढांचा है।

 जिसमें जिससे विभिन्न वस्तुओं के उत्पादकों के बीच परस्पर समन्वय व सहयोग का जन्म होता है। अर्थव्यवस्था एक ऐसी प्रणाली है। जिसमें उत्पादन उपभोग विनिमय प्रणाली आर्थिक न्याय निरंतर चलती रहती है। सामान्य यह कहा भी यह काफी जा सकता है। कि एक ऐसी व्यवस्था जिसके तहत किसी भी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों होता है। अर्थव्यवस्था के लाती है उदाहरण के लिए चीनी का उत्पादन चीनी मिल द्वार किया जाता है। चीनी का उत्पादन के लिए उत्पादक गन्ना किसान से मशीन एवं उपकरणों तथा बिजली ऊर्जा संयंत्रों से प्राप्त करता है। उत्पादित चीनी को देश के विभिन्न भागों में एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाने ले जाने के लिए परिवहन के साधन रेल ट्रक जहाज आदि की आवश्यकता पड़ती है चीनी उत्पादन हेतु।

 विभिन्न उत्पादकों के प्रयोग में तालमेल का ढांचा भी अर्थव्यवस्था कहलाता है।

संपूर्ण गांव अथवा कस्बे के निवासियों का आर्थिक क्रियाकलापों का जीवन गांव की अर्थव्यवस्था राजस्थान राज्य के निवासियों के आर्थिक क्रियाकलापों का अध्ययन राजस्थान की अर्थव्यवस्था देश के निवासियों के अर्धवार्षिक लीला क्रियाकलापों का जन्म भारत की अर्थव्यवस्था के अंतर्गत की आती है।
किसी भी देश में उत्पादन उपयोग विनिमय वितरण आदि।

 आर्थिक क्रियाकलापों का संचालन अर्थव्यवस्था के स्वरूप पर निर्भर करता है।

 देश में आर्थिक क्रियाओं के संचालन में राज्य का हिस्सा कितना होगा आदि आधारों पर विषय की विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं को हम निबंध निबंध 3 वर्गों में विभाजित कर सकते हैं।
अर्थ पूंजीवादी अर्थव्यवस्था से अभिप्राय एक ऐसी आर्थिक प्रणाली है। जिसमें उत्पत्ति के सभी साधनों पर निजी व्यक्तियों का स्वामित्व व नियंत्रण होता है। तथा आर्थिक क्रियाओं का संचालन निजी एवं किसी भी प्रकार का हस्त पैसे नहीं करती है।

मनुष्य द्वारा किया गया शारीरिक व मानसिक प्रयास श्रम के लाता है।

अर्थव्यवस्था को स्वतंत्र बाजार अर्थव्यवस्था बाजार एमउत्पादन एक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि है।

 किसी भी वस्तु के उत्पादन को अपने चरणों से होकर गुजरना पड़ता है। उत्पादन पर के संपादन हेतु विभिन्न उत्पादन साधनों की आवश्यकता होती है। किसी भी वस्तु के उत्पादन में परियों के साधनों की मात्रा पर निर्भर करती है। हमें इन उत्पादन के साधनों को निम्न भागों में बांट सकते हैं।
अर्थशास्त्र में भूमि शब्द का अर्थ मात्र मिट्टी यात्रा तन ही नहीं है। भूमि में भूमि के अतिरिक्त प्राकृतिक संसाधन जलवायु वनस्पति पर्वतजन खाने आदि सभी सम्मिलित है। उपलब्धता की दृष्टि से भूमि की आपूर्ति स्तर है। भूमि उत्पादन  अश्वशक्ति उपयोग के आधार पर अलग-अलग श्रेणी की होती है। उत्पादन प्रक्रिया में भूमि के प्रयोग के बदले भूस्वामी को दिया जाने वाला प्रतिफल  लगान कहलाता है।

वस्तुओं व सेवाओं के उत्पादन हेतु। 

मनुष्य द्वारा किया गया शारीरिक व मानसिक प्रयास श्रम के लाता है। प्रेम सद्भावना एवं मनोरंजन के उद्देश्य से किया गया प्रयास या परिश्रम अर्थशास्त्र में शर्म नहीं। माना जाएगा केवल परिश्रम को ही शर्म माना जाएगा जो उत्पत्ति के उद्देश्य से किया जाए एवं जिससे किसी आर्थिक परीत फल की आशा हो उदाहरण के लिए ग्रहणी की सेवाएं श्रम नहीं मानी जाएगी जबकि नौकर की उत्पत्ति का एक साधन है।जो प्रत्यक्ष रूप से मनुष्य से जुड़ा है जबकि अन्य साधन प्रत्यक्ष रूप से मनुष्य से संबंधित नहीं होते हैं। उत्पत्ति का एक गतिशील साधन है सभी श्रम उत्पादक नहीं होते हैं। अर्थात यह आवश्यकता नहीं है। कि श्रम के द्वारा उत्पत्ति हो क्योंकि उत्पादन प्रक्रिया में कई बार प्रयास करने पर भी चित्र परिणामों की प्राप्ति नहीं होती है। पादन प्रक्रिया में श्रमिकों को श्रम के बदले प्राप्त होने वाला प्रतिफल मजदूरी कहलाता है।

समस्त वस्तुएं एवं मानवीय योग्यताएं जो की वस्तुओं व सेवाओं के उत्पादन में होती है

 एवं जिससे मूल्य की प्राप्ति होती है संपत्ति कहलाती है संपत्ति का कुछ भाग व्यर्थ पड़ा रहता है तथा कुछ भाग आगे और संपत्ति के उत्पादन के लिए प्रयुक्त किया जाता है। पूंजी मनुष्य की संपत्ति का वह भाग है। जो और आगे उत्पत्ति करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। पूंजी उत्पादन का ही एक उत्पादित घटक है। जिससे प्राकृतिक संसाधनों के साथ उपयोग करके मनुष्य द्वारा अर्जित किया जाता है। पूंजी को उत्पादन का मानवीय उपकरण भी कहा जा सकता है। मशीन उपकरण कारखाने यातायात आदि पूंजी के उदाहरण है। पूंजी लगाने वाले को इसके बदले मिलने वाला प्रतिफल कहलाता है।
उत्पादन प्रक्रिया में भूमि पूंजी है। श्रम का गतिशील अल करने वाला आदमी चलाता है। उनमें उत्पत्ति के सभी साधनों को उचित अनुपात निर्धारित का उत्पादन करता है अग्नि जोखिम को शेयर उत्पादन करता है। अतः इसे सांसी भी कहा जाता है।