Tuesday, November 12, 2019

हृदय परिवर्तन बहुत समय पहले की बात है।

विचित्र से नाम का एक राजा था। 

मैं उटपटांग बातें सोचता और आदेश दे देता था एक बार उसने पूरे राज्य में ऐलान कर दिया कि जो व्यक्ति राज्य के सबसे बड़े मुंह को दरबार में हाजिर कर देगा उसे मुंह मांगा इनाम दिया जाएगा।
लोग इनाम के लालच में दरबार में आने लगे राजा विचित्र सेन सब की मूर्खतापूर्ण बातें सुनते और कहते हैं यह तो सामान्य सी मूर्खता है मैं देश के मुंह शिरोमणि की तलाश में हूं।
1 दिन महात्मा दरबार में आए और बोले राजन में महमूद का नाम आपको एक शर्त पर बता सकता हूं क्या शर्त है तुम्हारी राजा ने कहा।

ग्रुप की खामियों और कार पुजारियों को सुनने के पश्चात ही आप कोई निर्णय देंगे महात्मा बोले। 

राजा ने कहा मुझे मंजूर है बताओ कौन है वह मूर्ख साधु ने कहा वह स्वयं आप है राजन मैं तुमने मुझे मूर्ख कहा। क्रोध से आग बबूला हो उठा महात्मा बोले महाराज का भजन दे चुके हैं क्या कि मूर्ख की गुजरिया सुनने के बाद ही आप कोई निर्णय देंगे।

राजाजी चित्रसेन अपमान का कड़वा घूंट पीकर ले गया। 

महात्मा बोले राजन आप अपना कर्तव्य भूल कर बेकार ही बातों में उलझा हैं लोग मुक्ता के मन घटक किसे आपको सुनाते हैं आपको विद्वान की तलाश कर उनका विधाता का सम्मान करना चाहिए ना कि उठ पटाया की बातें।
राजा का क्रोध काफूर हो गया उसने गंभीर स्वर में कहा हम वास्तव में ग्रुप में अभी तक अज्ञानता के मकड़जाल में उलझा था मांगू अपना मुंह मांगा इनाम मांगू।
महात्मा बोले मैं आपसे आपका राज्य मांगता हूं दरबार में सन्नाटा छा गया।
और आजम महात्मा से माफी मांगने लगा और वह प्रजा पालक राजा बन गया।

शहीदे आजम भगत सिंह।

शहीदे आजम भगत सिंह एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे। 

भगत सिंह ने अपने क्रांतिकारी विचारों से आजादी की लड़ाई में शामिल युवाओं में जोश भर दिया था उन्होंने ब्रिटिश सरकार के विरोध में प्रदर्शन किया और ब्रिटिश पर बम फेंके।
इसके विरोध में ब्रिटिश सरकार ने उन्हें फांसी की सजा दी हुए शहीद जरूर हो गए परंतु भारत के लोगों के लिए अमर हो गए।

बचपन से ही भगत सिंह को पढ़ाई में बहुत ज्यादा रूचि थी वह अपनी कक्षा के सारे बच्चों में सबसे आगे रहते थे। 

भगत सिंह ने न केवल अपने साथियों के बीच बल्कि अध्यापकों में भी लोकप्रिय थे वे छात्रों के नेता थे उनका गुण देखकर ही कहा जा सकता था कि वह बड़े होकर व क्रांतिकारी बनेंगे भगत सिंह बड़ी आसानी से सबको अपना मित्र बना लेते थे एक बार भगत सिंह ने कपड़े सीना ने दिए बूढ़ा दर्जी जिसने उनके कपड़े सिले थे उनके घर आया और कपड़े दे गया कि मैंने उनसे पूछा वह कौन था तब उन्होंने जवाब दिया वह मेरा दोस्त था। 

बचपन से ही भगतसिंह लोगों का दिल जीत लेते थे। 

इसी आचरण के कारण ही बड़े होकर वह हजारों लोगों को आजादी की लड़ाई में शामिल होने के लिए प्रेरित करते रहे हम इस महान देशभक्त स्वतंत्रता सेनानी पर गर्व है अपने देश के लिए मर मिटने वाले शहीद का नाम इतिहास में सदैव अमर रहेगा।

किसी से सीखो माफ करना।

कभी-कभी आपकी जैसी छोटी सी बात को लेकर अपने दोस्त के साथ लड़ाई हो जाती होगी। 

आप उसे नाराज होकर बात करना बंद कर देते होंगे ऐसे में आप चाहकर भी उससे दोस्ती नहीं कर पाते होंगे कारण कि आपने उसे माफ नहीं किया और बात ज्यादा बिगड़ गई।
यदि आप सहन शक्ति बढ़ाकर माफ करना सीख जाते हैं तो इस तरह की परिस्थितियों से बच सकते हैं यदि आप अपने से पार्टियों को माफ कर देते हैं तो आप की लड़ाई नहीं होगी लड़ाई से आपको तनाव भी होता है और आप पढ़ाई पर भी ध्यान नहीं दे पाते हैं।

अपने साथियों को माफ करके आप सभी परेशानियों से बच सकते हैं। 

जानते हो बच्चों को तुम जितने भी कहा है कि घृणा को घृणा से नहीं बल्कि प्यार से समाप्त किया जा सकता है।
यदि आप प्यार देते हैं तो आपको भी बदले में प्यार ही मिलेगा इससे आपके सभी के साथ दोस्ताना संबंध बनाएंगे यदि आप अपने साथियों को माफ कर देते हैं

 तो आप सबके चहेते बन जाएंगे। 

जो आपने प्रीति रिया गुस्से जैसी भावनाओं को खत्म करके प्यार शांति हो और दूसरों की मदद करने वाली भावनाओं को अपना ही है इससे आप माफ करना सीखेंगे और देश के अच्छे नागरिक बनेंगे।
उस सभी लोग आपके जैसे बनने की इच्छा करेंगे और आपका बहुत समाज में मान सम्मान बढ़ेगा जिससे आपको आने वाली पीढ़ी आपको याद करेगी या रखेगी।

शरारत का परिणाम।

शरारत का परिणाम प्रमोद की उम्र मात्र 7 वर्ष की थी। 

परंतु वह बड़ा ही नटखट था हर रोज कोई न कोई शरारत अवश्य करता था जहां तक कि जो काम उसके बस का नहीं होता, वह भी करने का प्रयास करता रहता उसके सिर पर बड़ा बनने की धुन सवार थी इस धुन के चलते हुए नई-नई हरकतें करता रहता था। उसके पापा एक डॉक्टर थे वे उसे शरारत करने से रोकने की कोशिश करते उसे समझाते तुम अभी बहुत छोटे हो बड़े जैसे काम तुम नहीं कर सकते।
की तरफ से भी उसे रोज झिड़कियां मिलती थी।

वह सब की अनसुनी कर दिन भर इसी उधेड़बुन में लगा रहता था कि बड़ा कैसे बना जाए। 

प्रमोद के डॉक्टर पापा ने कमरे में मरीज को देखने के लिए खुशी टेबल लगा रखी थी वह बैठकर वे मरीजों का उपचार करते थे।
प्रमोद रोज वहां जा कर देखता रहता था एक दिन मौका देकर प्रमोद उस कमरे में अकेला पहुंच गया अब बड़ा बनने की धुन में पापा वाली कुर्सी पर बैठकर नकल करते हुए टेबल पर पड़े सामान को उलट-पुलट करने लगा।
सीरीज की सुई सीसी के बजाय उसकी उंगली में घुस गई खून बहने लगा दर्द कराओ उठा।

उसकी चीख सुनकर मम्मी पापा बागे बागे कमरे में आई है उसकी शरारत पर उन्हें बहुत गुस्सा आया। 

परंतु है अपनी हंसी को रोक भी नहीं पाई उंगली में से सुई निकलकर मलमपट्टी की फिर उन्होंने प्रमोद को समझाया कि तुम बहुत छोटे हो बड़े नहीं बन सकते हो बड़े बनने के चक्कर में कभी बड़ा नुकसान कर बैठोगे सुई किस चुंबन से उड़ते दर्द और पापा की सलाह ने प्रमोद को प्रेरणा दी।

राजा ने मनुष्य को मृत्युदंड देने को कहा।

राजा ने मनुष्य को मृत्युदंड देने को कहा रजनी काहे मंत्री यह व्यक्ति वास्तव में मनहूस है। 

हां सर्वप्रथम मैंने उसका मुंह देखा तो मुझे दिन भर भोजन नहीं नसीब हुआ।
इस पर मंत्री ने कहा महाराज क्षमा करें प्रातः इस व्यक्ति ने भी सर्वप्रथम आपका मुख देगा आपको तो भोजन नहीं मिला परंतु आपको मुख दर्शन से तो उसे मृत्युदंड मिल रहा है अब आप स्वयं निर्णय करें कि कौन में अधिक मनहूस है।

राजा भौचक्का रह गया। 

उसने इस दृष्टि से तो सोचा ही नहीं था राजा के इस विवाद को लेकर मंत्री ने कहा राजन किसी भी व्यक्ति का चेहरा मनुष्य नहीं होता मनहूसियत तो हमारे देखनी है सोचने के ढंग में होती है आप कृपा करके इस व्यक्ति को मुक्त कर दे राजा ने उसे मुक्त कर दिया।

इस प्रकार मंत्री ने अपनी चतुराई से निर्देश व्यक्ति को मृत्युदंड से बचा लिया। 

तुम मनुष्य कोई नहीं रहता हमारे सोचने के अलावा भगवान ने मनुष्य को सब कुछ एक समान बनाया है सबको एक ही रूप दिया है रंग दिया है बुद्धि दी है तुम्हारी सोचने की क्रिया ही अलग है किसी को मनुष्य मानते हैं कि तो किसी को शुभ मानते हैं तो हम इसलिए हमारे विचार से ही रहना चाहिए मनुष्य कोई नहीं होता उसे कोई नहीं होता जैसा हम सोचते हैं वैसा ही नहीं होता कर्म करते रहे और कर्म पर ही निर्भर करो मनोज कोई नहीं होता।
और वह मनुष्य उस मंत्री से बहुत प्रसन्न हुआ और अपने घर चला गया तब से उसे कोई भी मनहूस नहीं समझते हैं।

चतुर मंत्री बहुत समय पहले की बात है।

एक गांव में एक व्यक्ति इस बारे में मशहूर हो गया। 

कि उसका चेहरा बहुत मनुष्य लोग उसका चेहरा नहीं देखना चाहते थे उनका मानना था कि उसका चेहरा देख लेने से यह तो मैं व्यापार में हनी हो जाएगी या किसी से झगड़ा हो जाएगा या फिर कुछ ना कुछ सुकून हो जाएगा। इसलिए सभी लोग उस व्यक्ति से दूर बनाए रखने में ही समझदारी समझते थे। किसी व्यक्ति किसी को कहीं दिख जाता सभी लोग यह कहते हुए भागने लगते थे बाबू बाबू मनुसा गया यदि कोई उसे भूल से ही देख भी लेता तो वह पवित्र होने के लिए नदी में जाकर स्नान करता था।

किसी की मौत के बारे में सारे गांव में बहुत अधिक अंधविश्वास फैल गया था। 

लोगों ने इसकी शिकायत राजेश से कि राजा ने अपने लोगों की इस बात पर विश्वास नहीं किया लेकिन उसने इस बात की जांच करने का फैसला किया राजा ने उस व्यक्ति को बुलाकर मेल के अतिथि गृह में रखा अगले दिन प्रातः काल सबसे पहले उस व्यक्ति का मुंह देखा।

शिवम से राज कार्यों की व्यवस्था के कारण राजा दिन भर भोजन नहीं कर सका। 

राजा इस नतीजे पर पहुंचा कि उस व्यक्ति का चेहरा सचमुच मन्नू हूं उसे उसने जल्लाद को बुलाकर उस व्यक्ति को मृत्यु दंड देने का हुक्म सुना दिया जब मंत्री ने राजा का यह हुकुम सुना तो उसने पूछा महाराज इस निर्देश को क्यों मृत्युदंड दे रहे हो।

हमारे राष्ट्रीय पिता महात्मा गांधी।

हमारे राष्ट्रीय पिता महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। 

और उनका जन्म दो अक्टूबर को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था इनके पिता का नाम करमचंद और माता का नाम पुतलीबाई था।
इंटरव्यू छोटी उम्र में ही कस्तूरी बाई के साथ हो गया था उनका सेवा बहुत सीधा-साधा हुआ चरित्र बहुत ऊंचा था गांधी जी ने अपना शिक्षा भारत में ही पूरी की और फिर वकालत पास करने के लिए इंग्लैंड चले गए।

वकालत पास करने के बाद भारत आइए भारत आकर उन्होंने मुंबई में वकालत आरंभ की। 

फिर भी वकालत करने दक्षिण अफ्रीका चले गए वहां भारतीयों के अधिकारियों के लिए वह गोरे लोगों से लड़ते रहे। अंग्रेजों से लगातार संघर्ष करके उन्होंने अपने देश को स्वतंत्रता दिलाई इसके लिए वे कई बार जेल गए अनंत में अपना उद्देश्य पूरा करके ही छोड़ा। गांधीजी अहिंसा वादी थे वे सदा सच बोलते थे वे अपने अधिकारों को पाने के लिए सत्याग्रह करते थे गांधीजी ने छुआछूत का विरोध किया

और हरिजनों को समान अधिकार दिलाया। 

गांधीजी बहुत सादगी से रहते थे वे केवल शादी की धोती लपेट ते रहते थे रोजाना चरका कहते थे और अपना काम अपने हाथों से ही करते थे।
 और नाथूराम गोडसे नामक व्यक्ति ने उन्हें गोली मार दी आज भी हम प्रतिवर्ष 30 जनवरी को 11 बजे ईश्वर से उनकी आत्मा को शांति प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं तथा 2 मिनट के लिए मौन साधना रहते हैं।

राजकुमार और दैत्य चिंकारा।

राजकुमार और दैत्य चिंकारा 1 दिन शिकार करते हुए राजकुमार विक्रम रास्ता भूल गया। 

जंगली जानवरों से बचने के लिए वे एक गुफा में सो गया रात होने पर एक विशाल देती चिंकारा एक मासूम बच्चे को लेकर गुफा में पहुंचा।
बच्चे को बचाने के लिए राजकुमार ने देती से युद्ध किया परंतु द्वितीय ने उन्हें जादुई शक्ति समृद्ध बना दिया।
1 दिन मृत बने राजकुमार विक्रम लायंस मारते हुए एक उद्यान में पहुंच गया वहां राजकुमार सुनैना भ्रमण कर रही थी उसने मुझको अपनी गोद में उठा लिया और प्यार से उस पर हाथ फेरने लगी।

स्पर्श पाते ही मृत बने राजकुमार विक्रम फिर मनुष्य बन गए।

क्योंकि राजकुमार सुनैना की अंगूठी में लालमणि जड़ी थी। यह अंगूठी राजकुमार को इंद्रदेव से वरदान में मिली थी। राजकुमार विक्रम ने राजकुमारी को सारी बात समझाई लालमणि की रहस्य में सहायता से राजकुमार विक्रम ने दैत्य चिंकारा को मारकर मासूम बच्चे को देते कि गिरफ्तार से छुड़ा लिया।

राजकुमार विक्रम ने राजकुमारी सुनैना से विवाह कर लिया अब शेर राज महल में सुख से रहने लगे। 

पुलिस तेरे राजकुमार ने उस देश के चिंकारा को भी सबक सिखा दिया और वह बच्चे खुश होकर अपने घर चली गई।

बेटी भगवान ने हर प्राणी के लिए उसके जीने का तरीका बना रखा है।

मां की सीख 1 दिन रात को पर्वत जब बिस्तर पर जा कर लेती तो उसकी नजर दीवार से चिपकी एक छिपकली पर पड़ी। 

छिपकली ट्यूबलाइट के करीब छोटे-छोटे कीट पतंगों को लपक लपक कर खा रही थी कभी-कभी कोई गीत चिपकती कल पकने से पहले भाग भी निकलता था।
देखकर प्रभा को बड़ा आनंद आ रहा था परंतु छिपकली भी बड़ी सयानी थी कि जैसे ही दोबारा ट्यूबलाइट के समय तक दांत लगाकर उसका अपना शिकार बना ही लेती थोड़ी देर में छिपकली कीड़ों को निकालना बंद कर दिया शायद उसका पेट भर चुका था।

प्रभा ने दूसरी ओर करवट बदल ली पर नींद नहीं आ रही थी। 

व्हिच पगली के बारे में सोच रही थी आखिर यह दीवार से चिपक की कैसे रहती है गिरती क्यों नहीं परवाने ट्यूबलाइट की ओर देखा तो वह छिपकली नहीं थी तब उसने दरवाजे पर इधर उधर नजर दौड़ाई तो देखा कि छिपकली छत पर ठीक उसके ऊपर चिपकी हुई थी वह डर के मारे अचानक चिल्ला पड़ी मम्मी मम्मी जल्दी आओ।
प्रभु बिस्तर से उठकर एक कोने में बैठ गई उसकी मां आई तो उसने कहा मम्मी देखो कहीं में छिपकली मुझ पर गिरने पड़े परवाने अपनी मम्मी का हाथ पकड़ लिया। बेटी तुम तो बेकार डर रही हो यह छिपकली नहीं गिरती जा चुपचाप सो जा अब प्रभाव पर हाथ फेरते उसकी मम्मी बोली।

मम्मी आप कैसे जानती हैं कि छिपकली नहीं गिरेगी। 

बेटी भगवान ने हर प्राणी के लिए उसके जीने का तरीका बना रखा है छिपकली को छत पर चिपकना और चलना आता है लेकिन वह गिरती नहीं है उसकी मम्मी ने प्रभाव को सिखाया।

घमंडी का सिर नीचा।

घमंडी का सिर नीचा एक वन में एक बारहसिंघा रहता था। 

उसका सुनहरा शरीर और सिंह बहुत सुंदर थे उसे अपने सुंदर सिंह ऊपर बहुत ज्यादा घमंड था किंतु वे अपनी पत्नी खूब टांगों को देख कर बहुत दुखी होता था।
फिर भी वह स्वयं को वन के सभी जीव जंतुओं से सुंदर समझता था। इस विचार ने बारहसिंघा को बहुत घमंडी बना दिया था एक दिन वह बारिश में नदी के किनारे जल पी रहा था जल में वे अपनी परछाई देखकर फूला नहीं समा रहा था।

सभी पक्षियों का शोर उसके कानों में पड़ा। 

उसने देखा कि एक शिकारी उसके और बढ़ रहा है यह देख बार सिंगर तेजी से भगा परंतु कुछ ही दूर पर घनी लेता हूं का एक कुंज था उसने बारहसिंघा के सुंदर सिंह अटक गए रेसिंग निकालने की जितनी कोशिश करता है उतनी ही वह और उलझ जाता।
शिकारी ने लगता हूं कि कुंज में पहुंचकर उसे बार सिंह को पकड़ लिया बंदी होने पर वह सोचने लगा कि जिन क्रूपोर्टल को को वह गुस्सा करता था उन्होंने तो उसे बचाया परंतु जिन सुंदर सुनो पर उसे गर्व था उन्होंने

 उसे फंसा दिया पत्ते बच्चों कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए। 

और सभी जीव जंतु ने बारहसिंघा को ऐसे बंदी बनाकर शिकारी को ले जाते हुए देख कर बहुत दुखी होगी क्योंकि वह तो उसे यूं बंदी बनाते हुए ले जाते हुए देख कर खुश नहीं हुए लेकिन उस बारहसिंघा का घमंड ही उसे चकनाचूर कर दिया वह शिकारी के हाथ में पकड़ा दिया तो कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए और दूसरों को अपने से कम सुंदर नहीं आंकना चाहिए जिससे कि आपकी सुंदरता को ठेस पहुंचे।

वरदान का फल बहुत समय पहले की बात है।

विमल नाम का माली एक गांव में रहता था। 

1 दिन विमल बाद में काम कर रहा था तभी उसने किसी के चिल्लाने की आवाज सुननी है यह बोलना आदमी फव्वारे में डूब रहा था बोलना आदमी चिल्ला रहा था बचाओ बचाओ।
विमल नेम बोने आदमी को पानी से बाहर निकाल लिया बोलना आदमी खुश हुआ।
बोलना बोला तुमने मेरी जान बचाई है इसलिए मैं तुम्हारी एक इच्छा पूरी करने का वचन देता हूं विमल सोचने लगा आखिर क्या मांगू विमल बोला मैं अपने घरवालों से सलाम मसूरी करके कल अपना वरदान मांग लूंगा।

विमल शाम को अपने घर पहुंचा उसने अपने पिता से पूछा पिता बोला बेटा मैं अंधा हूं।

तुम बोलने से मेरे लिए आंखें मांग लो।
विमल ने अपनी मां से पूछा मां बोली बेटा तुम उससे अपने लिए धन मांग लो ताकि हमारी गरीबी दूर हो जाए।
विमल ने अपनी पत्नी से पूछा पत्नी बोली हमारी शादी के कई साल हो गए पर हमारी कोई संतान नहीं है इसलिए तुम वरदान में अपने लिए एक पुत्र मांग लो विमल रात भर सोचता रहा।
अंत में उसे एक उपाय सूची गया दूसरे दिन विमल फिर बगीचे में गया बोल ना बोला मांगू माली मैं तुम्हें इच्छा पूरी करने को तैयार हूं।

विमल बोला मेरी इच्छा यही है कि मेरे पिताजी मेरे बेटे को सोने के कटोरा में दूध पीता हुआ देखें। 

बोलना बोलना ठीक है ऐसा ही होगा।
1 साल बाद विमल की तीनों इच्छा एक साथ पूरी होगी इस प्रकार विमल ने अपनी सूझबूझ से वरदान में तीनों ही चीजें एक साथ मांग ली।

नन्ही नेहा का त्याग।

एक बार नेहा अपनी सहेली मेगा के जन्मदिन की पार्टी से वापस अपने घर लौट रही थी। 

कड़ाके की सर्दी थी उसके साथ उसकी बहन रोशनी और पालतू कुत्ता टॉमी भी था टॉमी को बहुत तेज सर्दी लग रही थी घर जाकर वह बाहर बरामदे में सिकुड़ कर बैठ गया क्योंकि टॉमी के रहने के लिए अलग से कोई स्थान नहीं था इसलिए उसे बरामदे में ही बांधा जाता था नया टोनी को टूटती हुई देख रही थी।
2 दिन बाद नेहा का जन्मदिन था उसने अपने पापा से इस बारे में बात की उसके पापा उसकी मदद करने के लिए तैयार हो गए जन्मदिन वाले दिन नेहा के दोस्त और सभी रिश्तेदार नया के घर आ गए।

परंतु ने तो उसका घर सजा हुआ था।

और न ही केक था कुछ देर बाद नया सब को लांन में ले गई।
सब ने देखा कि वहां एक छोटा सा खूबसूरत कुत्ते का घर है जिसमें टॉमी बेटा है नया बोली इस बार मैंने अपने जन्मदिन पर फिजूल खर्च ने करके टॉमी के लिए यह कुत्ता घर बनवाए हैं अब मैं अपना हर जन्मदिन एहसास लोगों की सहायता करके मनाऊंगी इस पर सभी ने नैनी नेहा की प्रशंसा की।

और तब से उसकी सारी सहेलियां नैनी नेहा का यह सुंदर सा विचार देखते।

अपना जन्मदिन ने मनाते हुए किसी नहीं बोल सकते जानवर की मदद करने लगी और जिनके चलते हुए सारी स्कूल से इनके बारे में चर्चा करती रहती थी वह सभी को अपनी फिजूलखर्ची से पैसे बचाकर इन जीवो की ध्यान देने की बात कही।

राजा ने शिकारी को गिफ्ट दिया।

आज तक मैंने एसएम की तीरों से न जाने कितने जिलों की जान ली है। 

मैंने कभी भी नहीं सोचा कि इन्हें भी दर्द होता है मैं कितना पापी हूं भगवान मुझे कभी माफ नहीं करेगा आज से मैं कभी भी बेगुनाहों की जान नहीं लूंगा नहीं मरे रहते कोई इनका शिकार कर सकेगा।
कहते हुए राजा ने अपने तीर कमान फेंक दिए राजा के बदले व्यवहार से प्रभावित होकर शिकारी ने भी अपना धनुष बाण फेंक।
तब से उस राजा और वे शिकारी दोनों गहरे मित्र हो गए जब शिकारी ने राजा के छोटे हुए किरण को मारते हुए।

देखकर शिकारी ने राजा को तीर मार दिया। 

और राजा से शमा मांगने के लिए वह शिकारी राजा के पास पहुंचा और राजा का तेल निकालने लगा तब राजा को एहसास हुआ कि शिकारी का तीन लगने पर उसे कितना दर्द हुआ वैसे ही उसी रन को कितना दर्द हुआ होगा जो कि उस राजा ने उस हिरण को वह तीर मारा था।

जब तीर निकालने के बाद राजा ने शिकारी से बोला कि आज मुझे पता। 

चला कि कैसे किसी जीव को दर्द होता होगा मैंने न जाने कितने जीवो को मार दिया मुझे पता नहीं कि मैंने कितनी हत्या की है आज मुझे सब कुछ पता चला कि कैसा दर्द होता है।
तुमने मुझे बता ही दिया कि दर्द कैसा होता है तो मैं तुम्हें चलो महल चलो मैं तुम्हें गिफ्ट दूंगा।

दर्द का अहसास।

सूरजपुर नगर के राजा भवानी सिंह शिकार के बेहद शौकीन थे। 

उनका अधिकतर समय शिकार खेलने में ही बीत जाता था वह सुबह से शाम तक जंगलों में जंगली जीवो का शिकार करते रहते थे जब तूणीर में एक भी तीर नहीं बचता तब वह अपने महल की और रुक करते थे कभी भी ऐसा दिन नहीं जाता था जब वह शिकार करने गए हो।
यह रोज नए-नए जंगली जानवरों का शिकार करते थे आज तक वह जानने उन्होंने कितने ही जंगली जानवरों को अपना निशाना बनाया था।

एक दिन में शिकार पर गए उसी जंगल में एक अन्य शिकारी भी शिकार खेल रहा था।

 राजा रहने दो ही अपना तीर सामने दौड़ रही हिरण पर मारा शिकारी का तीर राजा की पीठ में आग लगा राजा दर्द से चीख पड़ा चीख सुनकर शिकारी दौड़ता हुआ आया राजा को देखकर शिकारी ने हाथ पांव फूल गए।
उसे अपनी मौत आंखों के आगे मंडराती नजर आने लगी उसने हाथ जोड़कर राजा से माफी मांगी और उनकी पीठ में 10 साती निकालने लगा राजा ने मना करते हुए कहां पहले सामने तड़प रहे हिरण को यहां लाओ फिर तीर निकालना।

शिकारी कुछ समझ नहीं पाया फिर भी आज्ञा अनुसार हीरोइन को ले आया।

 हिरण घायल अवस्था में तड़प रहा था। घोड़े से नीचे उतर कर राजा ने हिरण की गर्दन में दशा तीर निकाला मलहम लगाया और पट्टी बांधी।
जिगर जाने लगा तो राजा ने टूटते हुए कहा सचमुच आज तुमने मेरी आंख खोल दी आज तुमने मुझे एहसास करा दिया कि दर्द क्या होता है।

मात्रिक वर्ण क्या होते हैं।

बाबा आया बादल आया सावन आया बादल छाया रामा छाता लेकर बाजार जा रहा था यह सब मात्रिक वर्ण में आते हैं। 

थाल सजाकर ना पक्का विमल दिन निकल आया खटिया उठा गिलास वर्जन पीला बाजार जा मिठाईलाल फालना टिकट लगा दीपावली का दिन आया।
सीमा घर की सफाई कर रही है सीमा की दादी आई कि वह मिठाई लाई सीमा की चाची भी आई वह भी मिठाई लाई सीमा वह मिठाई खाती सीमा का भाई हरीश बाजार गया वहां नहीं कमीज पहनकर बाजार गया हुए बाजार से लीची लाया सीमा ने मीठी-मीठी लीची खाई और रात को सो गई।

सुबह हुई सुनहरी किरण की सुमन दातुन कर सुमन नियम अनुसार काम करना।

 सीख गुलाब चुन चुन कर माला बना सुमन बाजार से सामान खरीद कर. ला दुकान पर जा साबुन से मलमल का नाश राहुल के साथ पाठशाला जा अपना पाठ याद कर सूरज निकला धूप खिल गई चिड़िया चेकुट्टी कुसुम फूल ला कर पूजा कर फूलदान में सजा भालू वाला आया साथ भालू लाया भालू झूम झूम कर खूब नाचे सभी ने भालू का खेल देखा सामान दिखा भालू वाला सामने पाकर बहुत खुश हुआ, वह डमरू बजाता हुआ बहुत दूर चला गया।

गणे वन में ऋषि की एक कुटिया थी ऋषि ने एक मूर्ख पाल रखी थी।

एक राजकुमार मुर्गी का शिकार करते हुए ऋषि की कुटिया में आगे ऋषि ने राजकुमार को समझे जीव का शिकार करना पाप है अमृत पर कृपा करो राजकुमार के मन में मृत के लिए दया आई वह कृपालु बन गया।
चुप चुप करती रेल आई साथ में बहुत सारी सवारी लाई गणेश रेल से बरेली गया मामा रेल से घर आया मामा केले लेकर घर आया रेखा के लिए किताब लेकर आया गणेश मामा की सेवा कर दुकान से जलेबी व पेड़े खरीद कर ला रहा था मामा यह सब मात्रिक वर्ण में आते हैं।

Sunday, October 27, 2019

तुलसी महतो अपनी लड़की सुभागी से बहुत प्यार करते थे।

 छोटी उम्र में भी वह घर के काम में चतुर और खेती-बाड़ी के काम में निपुण थी। 

उसका भाई रामू जो उम्र में बड़ा था बड़ा ही कामचोर और आवारा था तुलसी ने सुभागी और रामू दोनों की शादी कर दी थोड़े दिन बीते अचानक एक दिन बड़ी आफत आ गई सुबह की बहुत छोटी उम्र में ही विधवा हो गई सुबह की के दुख की तो सीमा ही ने थी बेचारी को अपना जीवन पहाड़ जैसा लगने लगा था।

कुछ साल बीते लोग तुलसी महत्व पर दबाव डालने लगे।

 की लड़की की कहीं दूसरी शादी करा दो आजकल कोई से बुरा नहीं मानता तो क्या सोच विचार करते हो तुलसी ने कहा भाई मैं तो तैयार हूं लेकिन सुबह की भी तो माने वह किसी तरह राजी नहीं होती है हरियार मैं सुबह की को समझाकर कहां बेटी हम तेरे ही भले के लिए कहते हैं मां-बाप अब बूढ़े हो गए हैं उनका क्या भरोसा तुम इस तरह कब तक बैठी रहोगी सुबह कि मैं सर झुका कर कहा आपकी बात समझ रही हूं लेकिन मेरी मन शादी करने को नहीं करता।

मुझे आराम की चिंता नहीं है मैं सब कुछ जाने को तैयार हूं।

 जो काम माफ करो वह सिर्फ आपको केबल करूंगी मेरी मगर शादी के लिए मुझसे ले गई है।
सुभागी ने गर्व से भरे स्वर में काम मैंने आपको आसरा भी नहीं किया और भगवान ले जाए तो कभी करूंगी भी नहीं अब सुबह कि उनके साथ ही रहने लगी उसने घर का सारा काम संभाल लिया बेचारी पैर रात से उठकर घुटने में लग जाती चौका बर्तन करती गोबर था थी खेत में काम करने चली जाती।
रात को कभी मां के सिर में तेल लगाती तो कभी उसकी तह दबाती तब उसका बस चलता मां-बाप को कोई काम नहीं करने देती हां भाई को ने रोक की सोचती यह तो जवान आदमी है यह काम नहीं करेगा तो गृहस्ती कैसे चलेगी।
मगर राम को यह बुरा लगता अम्मा और दादा को तिनका का तक नहीं उठाने देती और मुझे पीसना चाहती है।

सुभागी का दुख भरा जीवन।

सुभागी ने तो कुछ जवाब नहीं दिया बात बढ़ जाने का भय था। 

मगर उसके मां बाप बेटे सुन रहे थे मैं तो से ले रहा गया बोला क्या है रामू से गरीब बन से क्यों लड़ते हो रामू पास आकर बोला तुम क्यों बीच में कूद पड़े मैं तो उसको कह रहा हूं तुलसी जब तक मैं जिंदा हूं तुम उसे कुछ नहीं कर सकते मेरे पीछे जो चाहे करना बेचारी का घर में रहना मुश्किल कर दिया है।
रामू आपको बेटी बहुत प्यारी है तो उसे गले में बांध कर रखी है मुझसे तो नहीं रुका जाता तुलसी अच्छी बात है अगर तुम्हारी यह मर्जी है तो यही होगा मैं कल गांव के आदमियों को बुलाकर बटवारा करा दूंगा तुम से अलग हो जाओ सुभागी अलग नहीं होगी।

रात को तुलसी लेट तो वह पुरानी बात याद आई। 

जब राम के जन्म जन्म उत्सव में उन्होंने रुपए कर्ज लेकर जलसा किया तो और सुबह की पैदा हुई तो घर में रिपेयर रहते हुए भी उन्होंने एक कोढ़ी तक खरीदने की अनुमति नहीं दी पुत्र को रतन समझौता पुत्री को पूर्व जन्म के पापों का दंड वेतन कितना कठोर निकले और यह दिल कितना मंगल में है इससे उनके मां-बाप सोचने लगे।
दूसरे दिन में तो ने गांव के आदमियों को इकट्ठा करके कहां पंचो आगरा मुक्का और मेरे घर का निवारण नहीं होता मैं चाहता हूं कि तुम लोग इंसाफ से जो कुछ मुझे दे दो मैं लेकर अलग हो जाऊं

 रात दिन की बस अच्छी नहीं है। 

 गांव के मुखिया बाबू सज्जन सिंह बड़े सज्जन पुरुष थे उन्होंने राम को बुलाकर पूछा क्यों भाई तुम अपने आप से अलग रहना चाहते हो तुम्हें शर्म नहीं आती मां-बाप को अलग कर देते हो रामा मैं ठिठाई के साथ का जब एक साथ गुजरने वह तो अलग हो जाना ही अच्छा है।
तुलसी देख लिया आप लोगों ने इसका मिजाज भगवान ने बेटी को दुख दे दिया नहीं तो मुझे खेती-बाड़ी लेकर क्या करना था जहां रहता वही कमाता खाता भगवान ऐसा बेटा वेरी को भी मैं लड़के से लड़की बड़ी हो रामू ऐसा सोचने लगा।

महतो ने सुभागी के माता-पिता को समझाया।

मगर शाहिद महतो को यह सुख बहुत दिनों तक बोगना ने लिखा था। 

सात आठ दिन से महत्व को बहुत तेज बुखार हुआ है लक्ष्मी पास बेटी रो रही है अभी एक्शन पहले महतो ने पानी मांगा था पर जब तक वह पानी लाई तब तक उनके हाथ-पांव ठंडे हो गई है सुबह कि उनकी यह दशा देखते ही रामू के घर गई और बोली भैया चलो देखो आज दादा ने जान कैसे हुआ आता है सात दिन से बुखार नहीं उतरा।
रामू ने चारपाई पर लेटे लेटे का तो क्या मैं डॉक्टर हकीम हूं कि देखने चलूं जब तक अच्छे थे।

 तब तक तो तुम उनके गले का हार बनी हुई थी आज जब मरने लगे तो मुझे बुलाई है। 

सुभागी ने फिर उससे कुछ नहीं कसीदे सज्जन सिंह के पास गई उधर सज्जन सिंह ने जूही महत्व की हालत के बारे में सुना तुरंत सुबह की के साथ भागे चले आए वहां पहुंचते ही महतो की दशा और खराब हो चुकी थी नाड़ी देखी तो बहुत धीमी थी समझ गई कि जिंदगी के दिन पूरे हो गए महतो जैसे नींद से जाग कर बोले बहुत अच्छी है भैया अब तो चलने की बेला है सुबह की के पिता अब तुम्हें हो उसे तुम ही को सोंपे जाता हूं।

सज्जन सिंह ने रोते हुए कहा भैया महत्व घबराओ मत भगवान ने चाहे। 

 तो तुम अच्छे हो जाओगे सुबह की को तुम मैंने हमेशा अपनी बेटी ही समझा है और जब तक जिऊंगा ऐसा ही समझता रहूंगा तुम निश्चित रहे हो कुछ और इच्छा हो तो वह भी कह दो  महतो ने विनती नेत्रों से देखकर का और नहीं कहूंगा भैया भगवान तुम्हें सदा सुखी रखे सजन रामू को बुला कर लाता है और उससे वह जो भूल चूक हुई शमा कर दो मैं तो नहीं भैया उसे पापी का मुंह में नहीं देखना चाहता।
उसके बाद गोदान की तैयारी होने लगी रामू को गांव वालों ने समझाया पर वेस्टी करने पर राजी नहीं हुआ का जिस पिता ने मरते समय मेरा मुंह देखना स्वीकार नहीं किया हुआ है ने मेरे पिता है ने में उसका बेटा हूं।

रणथंबोर की यात्रा।

हटीले हमीर की पुण्य धरा रणथंबोर स्मरण आते हैं। 

सभी के मन में इस धरा को देखने की इस वक्त ही इच्छा होती है अब यह सत्र वन क्षेत्र के रूप में विकसित है अरावली एवं विद्यांचल की सूर्यमणि पर्वतमाला के मध्य में स्थित विश्व प्रसिद्ध रणथंभोर बाघ अभ्यारण को देखने की परिवार के सदस्यों को तीव्र उत्कृष्टता हुई सभी ने मिलकर रणथंबोर को भ्रमण का कार्यक्रम तैयारी किया।
हम सभी ने 9 अक्टूबर को जयपुर से रेल देवरी सवाई माधोपुर के लिए रवाना हुई एक का एक मेरी बेटी ने मुझे पिताजी यह सवाईमाधोपुर कितनी दूर है।

मैंने बताया कि बेटी रेल मार्ग द्वारा जयपुर सवाई माधोपुर की कुल दूरी 132 किलोमीटर है। 

वहां हमने रेलवे स्टेशन के पास ही एक होटल में कमरा लिया और कुछ समय आराम किया।
सुबह उठकर सभी ने जल्दी-जल्दी स्नान से निवृत्त होकर बुकिंग खिड़की के लिए चल पड़े।
बुकिंग खिड़की हमारे होटल से लगभग कुछ ही दूरी पर थी बुकिंग खिड़की से प्रथम पारी में भ्रमण का टिकट लेना था बुकिंग खिड़की से ही उद्यान भ्रमण के लिए जिप्सी एक टैंकर मिलते हैं।

 जिसके द्वारा उज्जैन का भ्रमण करवाया जाता है हम सभी ने 6:00 बजे बुकिंग खिड़की पर पहुंच गई है। 

मैं आपको बता दूं कि रणथंबोर भ्रमण के लिए आप पारिवारिक सदस्यों में मेरी पत्नी मेरी दो बेटियां स्विंग ईवे श्रद्धा एक बेटा शुभम इस प्रकार कुल 5 सदस्य थे हम पांचों जिप्सी में सवार हो चुके थे रणथंबोर अभ्यारण की ओर निकल पड़े रणथंभोर बाघ अभ्यारण क्षेत्र की शुरुआत खिलचीपुर ग्राम पंचायत गणेश्वर धाम सिरोही से होती है जिसकी दूरी सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन से कुछ ही दूर है यहां अभ्यारण में प्रवेश करने के लिए चेक पोस्ट बनी हुई है।

शिवांगी भैया यह पानी कहां से आ रहा है।

हम बातों ही बातों में गणेश धाम सिरोही पर कब पहुंच गए। 

सच पूछो तो इसके दो कारण थे एक तो रणथंबोर के प्रति हमारी उत्कृष्टा और दूसरी और बच्चों द्वारा पहुंचा जा रे नए नियम प्रशन।
वैसे तो रणथंबोर की हरीतिमा सवाई माधोपुर नगर से निकलते ही प्रारंभ हो जाती है लेकिन गणेश धाम किराई के पश्चात घने जंगल की शुरुआत होती है हमने सभी में एक गाइड भी लिया था जो हमने नई जानकारियां दे रहा था। यूं ही हमने हरियाली से आच्छादित क्षेत्र में प्रवेश किया उससे सुर में दृश्य को देखकर सभी रोमांचित हो गई है और सभी के चेहरे खिल उठे।
सर्वप्रथम हमने मिस रुद्रा दरवाजा देखा हुआ

कल कल करते बहते झरने हुए को मुख से गिरता पानी देखा बहुत ही मनोहारी दृश्य था। 

मेरी बेटी शिवांगी ने गाइड से बातों ही बातों में जानकारी ली।
शिवांगी भैया यह पानी कहां से आ रहा है। गई पहाड़ों के ऊपर छोर पर एक पानी बहकर जड़ने के रूप में यहां आ रहा है। शिवांगी भैया यह अभ्यारण क्षेत्र कितने वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है गई पूर्व में रणथंबोर बाग क्षेत्र क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 13 से 34 पॉइंट 6 वर्ग किलोमीटर था।

शिवांगी बाघों की बढ़ती संख्या एवं भागों के परसूर घटकर से क्या तात्पर्य है। 

पूर्व में बाघों का शिकार हो जाने के कारण बाबू की संख्या घट गई थी केंद्र व राज्य सरकार तथा वन विभाग के प्रयासों से बाघों के शिकार पर रोक लगी और बाघों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी बाघ अपनी एक निर्धारित क्षेत्र बनाते हैं जिसका क्षेत्र लगभग 2 वर्ग किलोमीटर होता है उसे तो दूसरे भाग के प्रवेश करने पर उनमें टकराव की स्थिति बन जाती है। इस तरह शिवांगी ने गाइड से सारी जानकारी ली।

प्रातकाल की गिन्नी धूप में दोनों मस्त हो बेटे थे।

गाड़ी के बिल्कुल सामने झड़ने के किनारे एक बाघ और बाघिन धूप सेकते हुए दिखाई दिए। 

 बाग इन बाग के बालों को अपनी जीभ से साफ कर रहे थे गाइड ने बताया कि इस स्थान का नाम चिड़ी कोड है तथा यह दोनों भाग बाकी मां बेटे हैं।
बाघिन के नाम नूर और बाघ का नाम सुल्तान है यह रणथंबोर अभ्यारण में बाघों को नाम व नंबर दिए हुए हैं जिससे इनकी पहचान होती है बाघ बाघिन की हथेलियों हमने लगभग आधे घंटे तक नहीं हो रही है मनोहर में दृश्यता धूप उनके बदन को की चमक को बढ़ा रही थी काली धारियां और सफेद रंग की जाए उनके शरीर की शोभा को कई गुना बढ़ा दिया था।

बागोर बहुत सावधानी और चकना वन्य प्राणी होता है। 

 पानी के किनारे पर्स रे बाबू को मारा वह जम रहना अच्छा नहीं लगा होगा वह दोनों आराम से उठे अपनी रूबी मुद्रा में पूछ उठाई और धीरे-धीरे झाइयों के जुर्म में हमारी नजरों से ओझल हो गई गाइड के निर्देश पर हमारी गाड़ी आगे बढ़ी उसने जंगल में अनेक जंगली जानवर देख कर जिनके चुनकर आगरा भालू बंदर जंगली बिल्ली अनेक प्रकार के पक्षी थे।

बर्मन की समय सीमा नजदीक आ जाने के कारण हम मुख्य द्वार की ओर आगे बढ़े लगभग समय बीत चुका था।  

हम रणथंबोर के ऐतिहासिक दुर्ग के मुख्य द्वार पर पहुंच गए रणथंबोर दुर्ग को देखना जान पड़ता है कि यह इतिहास में बहुत प्राचीन और अभिजीत ग्रुप है। 
गाइड ने बताया कि इस ग्रुप के निर्माण का कहीं कोई इतिहास नहीं मिलता यहां के प्रतापी राजा राव अमीर व्यक्ति थे माना जाता है कि इस ग्रुप का निर्माण 1380 पूर्व हुआ था।
मेरी बेटी सीरियल ने गाइड शेर राव हमीर के बारे में पूछा गाइड ने बताया कि राव हमीर महान प्रतापी और शरणागत वत्सल राजा थे।

इस जानकारी लेते हुए पैदल ही आगे बढ़ रहे थे।

इस जानकारी लेते हुए पैदल ही आगे बढ़ रहे थे। 

चलते चलते हम रुक के प्रथम द्वार पर पहुंचे क्या विशाल दरवाजा था देखते ही हमारी आंखें फटी की फटी रह गई। इस नौलखा दरवाजा कहते हैं नौलखा दरवाजा में प्रवेश करें हम ग्रुप में आगे ही और बड़े आगे हमें हाथीपोल दरवाजा दिखाई दिया। यहां से दुर्ग की दीवार बिल्कुल सीधी है कहते हैं कि यह हमीर का घोड़ा अमीर को लेकर सीधा ग्रुप पर चढ़ा था हमें घोड़े के खुर के निशान देखकर आश्चर्यचकित रह गई दुर्गा मनोहर में दृश्य देखते देखते हम अंधेरी दरवाजे पर पहुंचे।

एक साथ तीन दरवाजे हैं तथा इन दरवाजों में अंधेरा रहता है।

अंधेरी दरवाजों को पार कर हम ग्रुप के ऊपर छोर पर आ पहुंचे वहां से चारों और दृश्य डालने पर हरियाली से आच्छादित जंगल बहुत ही सुंदर दिखाई दे रहा था यहां से थोड़ी आगे बढ़ने पर हमें खंभों की छतरी दिखाई दी लगभग 1 किलोमीटर की दूर की दुर्घटना चढ़ाई चढ़ने के पश्चात 32 खंभों की छतरी जाकर बैठे तो यह शीतल बयार बह रही थी।

गाइड ने बताया कि ग्रुप के सपोर्ट मैदान पर निर्मित। 

 यह छतरी राव हमीर के शासनकाल में चारों ओर से हवा खोल सभा दरवाजा विचार-विमर्श विश्राम व आमोद प्रमोद की जगह थी
 जिसका उपयोग काफी पर्यटक इन कामों के लिए करते हैं इस छतरी पर लगभग आधे घंटे विश्राम किया विश्राम पश्चात हम आगे बढ़े सपाट मैदान में एक और राव हमीर का महल खड़ा दिखाई दिया।
कहा जाता है कि राव हमीर की पुत्री पद्मावती इस तालाब में पारस पत्थर लेकर कूद गई थी पद्मावती के आत्म बलिदान के कारण इस तालाब का नाम पदमल पड़ा इस तालाब के पानी से किले में जलापूर्ति की जाती है हमने रानी हो तालाब को देखा काली मंदिर के नजदीक स्थित है गहराई वाला यह तालाब रानियों के स्नान करने के लिए था।

सुभाष चंद्र बोस का पत्र।

पिछले कुछ महीनों से आप को पत्र लिखने की सोच रहा था।

जिसका कारण केवल यह है कि आप तक ऐसी जानकारी पहुंचा दूं जिसमें आपको दिलचस्पी होगी मैं नहीं जानता कि आपको मालूम है। या नहीं कि मैं यह गत जनवरी से कारवास में हूं।
जब ब्रह्मपुत्र जेल में मुझे मॉडल जेल के लिए स्थानांतरण का आदेश मिला था तब मुझे यह समझ नहीं आया था कि लोकमान्य तिलक ने अपने कार्यकाल का अधिकांश भाग मॉडल जेल में ही गुजारा था इस चार दीवार में यहां के बहुत ही हतोत्साहित कर देने वाले परिवेश में स्वर्गीय लोकमान्य ने अपने सुप्रसिद्ध गीत वशीकरण कब परिणाम किया था।

जेल के जींस वर्ल्ड में लोकमान्य रहते थे वह आज तक सुरक्षित है।

 यद्यपि उस में फेरबदल किया गया है।
और उसे बड़ा बनाया गया है हमारे अपने जेल के बोर्ड की तरह हुए लकड़ी के तत्वों से बना है जिसमें गर्मी में लू उर्दू से वर्ष में पानी से शीत वर्षा ऋतु में सर्दी से तथा सभी ऋतु में धूल भरी हवाओं से बचाव नहीं हो पाता मेरे यहां पहुंचने के कुछ ही क्षण बाद मुझे उस वर्ड का परिचय दिया गया मुझे यह बात अच्छी नहीं लग रही थी कि मुझे भारत से निष्कासित कर दिया गया था।

हम जानते हैं कि लोकमान्य ने कार्रवाई में 6 वर्ष बिताए लेकिन मुझे विश्वास है।

 कि बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि उस अवधि में उन्हें किस हद तक शारीरिक और मानसिक यंत्रणा से गुजरना पड़ा था।
वहां एकदम अकेले थे और उन्होंने कोई बौद्धिक स्तर का साथी नहीं मिला मुझे विश्वास है कि उन्हें किसी अन्य बंदी से मिलने जुलने नहीं दिया जाता था।
यह था सुभाष चंद्र बोस पत्र का जवाब सुभाष चंद्र बोस कब पत्थर पूरा हो चुका है।

Friday, October 4, 2019

राजू ने रेल गाड़ी को रुकवा दिया।

राजू ने रेल गाड़ी को रुकवा दिया सभी ने राजू की सूझबूझ की प्रशंसा की।

अगले दिन समाचार पत्रों में उस घटना का विस्तृत वर्णन छपा वहां के स्टेशन मास्टर ने भारत सरकार से राजू को पुरस्कार देने की सिफारिश की 26 जनवरी के दिन राजू को वीर बालक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
तब राजू ने सभी गांव वालों से शिक्षा ली कि समय से पहले सूचना ही सबसे बड़ा काम होता है

 राजू उस समय अपना दिमाग नहीं लगाता तो बहुत बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।

 जब तक स्टेशन मास्टर आता तब तक तो दुर्घटना हो जाती है अगर राजू ने अपने वस्त्र खोल कर उस ट्रेन के आगे नहीं ढूंढना शुरू किया तो ट्रेन वहां आ जाती और पटरी टूटी हुई थी जिसके कारण बहुत बड़ी दुर्घटना हो सकती थी राजू ने अपने दिमाग से उस ट्रेन को रोक दिया जिससे गांव वाले बहुत प्रसन्न हुए पूरे ट्रेन में सफर कर रहे व्यक्ति ने राजू को प्रशंसा की।

राजू के पिताजी बहुत खुश हुए और राजू को सबसे अच्छी स्कूल में पढ़ाया। 

और बहुत बड़ा अफसर बना दिया और सारे ट्रेन वाली को उसके ऊपर गर्व हुआ और सभी ने राजू को और हौसला बढ़ाया और राजू ने आज बहुत बड़ी तरक्की कर ली है।
राजू को सफल होते देख सारे गांव वाले बहुत खुश हुए और उस दिन ट्रेन से सभी लोगों को बचाने के लिए ट्रेन वालों ने राजू को बहुत हिम्मत दी जिससे राजू आज बहुत ऊंचे स्तर पर पहुंच गया और सारे देश वालों की सेवा करने लगा।

अभी मैं थोड़ी ही दूर चला था कि उसने एक जगह रेलवे पटरी उखड़ी हुई दिखी।

राजू की बुद्धिमानी एक दिन राजू गांव से अपने पिताजी के लिए खाना देने जा रहा था।

अभी मैं थोड़ी ही दूर चला था कि उसने एक जगह रेलवे पटरी उखड़ी हुई दिखी। रेलवे पटरी उखड़ी देखकर उसके होश उड़ गए इस घटना को देखकर में तेजी से रेलवे चौकी की ओर भागा चौकी पहुंचते ही उसने सारी घटना अपने पिताजी को सुनाई राजू की बात सुनकर उसके पिताजी विषय में ठहरने के लिए किधर से निकले निकट की स्टेशन की ओर दौड़ पड़े अभी थोड़ी ही समय समय बीता था कि दूसरी ओर से रेलगाड़ी की सिटी सुनाई पड़ी हुए सूचना लगा यदि इसकी सूचना ड्राइवर को समय पर नहीं दी गई।

तो बहुत बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

संयोगवश राजू ने उस दिन लाल रंग की कमीज पहन रखी थी उसने जल्दी से अपनी कमीज़ उतारी और उसे हिलाते हुए उसी और दौड़ना प्रारंभ किया जिस ओर से रेलगाड़ी आ रही थी।
ग्रेवल ने लाल रंग का सिग्नल देखकर गाड़ी की चाल धीमी कर दी।

धीरे-धीरे गाड़ी रुक ड्राइवर ने राजू से पूछा क्यों क्या बात है गाड़ी क्यों रुक गई।

गड्डी रुकने पर सभी यात्री नीचे उतर आए उन्होंने भी गाड़ी रुकवाने पर राजू को बुरा भला कहा परंतु जब राज्यों ने उन्हें सारी घटना के बारे में बताया तो वह सब राजू के साथ उसकी सत्यता जानने के लिए चल पड़े।
राजू उन सबको लेकर उसी स्थान पर पहुंचा ही था कि उसके पिताजी भी स्टेशन मास्टर को साथ लेकर वहां पहुंच गए।

मेहनत रंग लाई एक छोटा सा गांव था।

गांव का नाम रामपुर था यहां गांव चार और पहाड़ियों के बीच बसा था।

पास में एक नदी बेटी थी वर्षा के दिनों में जब नदी उफन थी तब रामपुरा का संपर्क उस पार के गांव से टूट जाता बाढ़ में कभी कोई आदमी बह जाता।
कभी कोई बच्चा हजारों जानवर का पता तक नहीं लगता बाढ़ इतनी उत्तरण पर चारों और कीचड़ की कीचड़ हो जाता जिससे गांव वालों की गाड़ियां फंस जाती इस प्रकार महीनों रामपुरा का संपर्क पार के गांव से टूट जाता है यह दुख सभी का था किंतु कोई भी कुछ नहीं कर पाता।

गांव का ही एक छात्र इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करके वहां आया हुआ था।

उसने समझाया कि इस मुसीबत से छुटकारा तो पुल बनाने पर ही मिल सकता है इस सुझाव से सारे गांव वाले सहमत हो गए युवकों ने कहा कि विपुल के लिए प्रतिदिन 2 घंटे काम करेंगे सावित्री बहन नहीं स्त्रियों की ओर से विश्वास दिलाया कि वह भी अपने भाइयों से पूछे नहीं रहेगी।
ठेकेदार ने चुना मिट्टी और पत्थर लाने के लिए अपनी गाड़ी देने का वचन दिया विद्यार्थियों ने कहा कि वे टोलियां बनाकर नियमित श्रमदान करेंगे बस फिर क्या था पुल बनना शुरू हो गया।

पासी की पार्टी से बैलगाड़ी पत्र ला रही थी गधे वाले बिना पैसे रेतला रहे थे पानी तो नदी ही कथा ही।

गांव के युवक युवतियां और छात्र सभी पुल के निर्माण में हाथ बंटा रहे थे सारा गांव एक लक्ष्य से जुड़ गया था थोड़े ही दिनों में पुल के खंबे दिखाई देने लगे गांव के लोगों ने सरकारी अधिकारियों तक भी अपनी बात पहुंचाई उनकी भी खुली हुई उन्होंने फूल के लिए आर्थिक सहायता के लिए एक अधिकारी भेज दिया एक बार काम शुरू हुआ तो फूल बन कर ही लोगों ने दम लिया।

सोनपुर गांव में एक कुमार रहता था वह मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए प्रसिद्ध था।

आपसी सहयोग बीच में पहले की बात है।

सोनपुर गांव में एक कुमार रहता था वह मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए प्रसिद्ध था। उसके बनाए गए बर्तन दूर-दूर तक बिकने के लिए जाते थे एक दिन कुमार को अपने आप पर बड़ा घमंड हुआ वह सोचने लगा कि यह घड़ा मेरा बनाया हुआ है यह मेरी मेहनत का फल है मिट्टी कुमार के इस घमंड को सहन न कर सके।
उसने कुमार से कहा यदि मैं नहीं होती तो तुम गढ़ा कैसे बनाते कुमार चुप रहा परंतु पानी को यह बात पसंद नहीं आई उसने मिट्टी से कहा मिट्टी बहन यदि मैं नहीं होता तो तुम और कुमार क्या कर सकते थे चाहिए सब सुन रहा था।

उसने तीनों से कहा यदि आप तीनों होते और मैं नहीं होता तो क्या यह घड़ा बन सकता था।

आपको चारों की मृत्यु पर हंसी आ गई उसने कहा यह क्यों भूल जाते हो कि तुम सब होते और मैं नहीं होती तो यह घड़ा पकता कैसे।

मेरी गर्मी के कारण ही तो यह पकता है सच तो यह है कि गड़ा में सब मेल का फल है।

हम मिल जुल कर रहना चाहिए हम एक दूसरे के मेल के बिना अधूरे हैं उस दिन से किसी ने अपने आप पर घमंड नहीं किया सब ने समझ लिया कि आपसी सहयोग से ही नहीं वस्तु बन पाती है अतः बच्चों आपसे सहयोग के लिए बिना कोई भी कार्य पूर्ण नहीं हो सकता।
हमें शिक्षा यह मिलती है हम सदैव मिलजुल कर कार्य करना चाहिए जिससे कार्य में उन्नति हो और हमारा कार्य भबड़े।

पर्यावरण प्रदूषण हमारे देश की एक प्रमुख समस्या है।

आज संसार के छोटे बड़े देश इस समस्या से परेशान हैं।

और इसके निराकरण के लिए परिषद प्रयत्न कर रहे हैं पर्यावरण शब्द परी प्लस आवरण के योग से बना है परी का अर्थ चारों और आवरण का अर्थ है ढकने वाला अत्य पर्यावरण शब्द का अर्थ एवं चारों ओर से ढकने वाला।
प्रदूषण चार प्रकार का होता है भूमि प्रदूषण वायु प्रदूषण ध्वनि प्रदूषण और जल प्रदूषण आज व्यक्ति भौतिक सुखों को प्राप्त करने के लिए वनों को अंधाधुन काट रहा है बच्चे यह उन सभी को पता है कि वनों से हम लकड़ी खाद्य पदार्थ आदि प्राप्त होते हैं।

वनों की लगातार कटाई से भूमि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है कल कारखाने का विषैला दुआ वायुमंडल को दूषित कर रहा है।

विज्ञान की प्रगति और यातायात के अनेक साधनों के कारण प्रदूषण निरंतर बढ़ता ही जा रहा है इस बढ़ते हुए प्रदूषण के कारण मनुष्य आज के बीमारियों से ग्रस्त हो रहा है।

जिस आंखों की बीमारियां फेफड़ों के रोग आदि।

यातायात के साधन मशीन और कल कारखाने इतना शोर उत्पन्न करते हैं कि कान के पर्दे फटने लगते हैं आज हम छोटे से छोटे कार्यों में भी लाउडस्पीकर ओ का उपयोग करते हैं हमारी यह लापरवाही ध्वनि प्रदूषण को बढ़ावा दे रही है।
कल कारखानों द्वारा उत्पादित बेकार पदार्थो और दूषित जल को नदी नालों में बहा दिया जाता है जिससे जल प्रदूषण बढ़ता है जल प्रदूषण के और भी कई कारण हैं जिसे नदी नालों के किनारे शौच क्रिया करना जानवरों को जल महल आना घाटों पर वस्त्रों को धोना आदि जल प्रदूषण अक्षय पेट संबंधी कई बीमारियां उत्पन्न हो रही है।

लड़का अपनी बहन के पास जाकर रोने लगा।

रामू काका अपने बेटे से परिश्रम कराते हुए।

लड़का अपनी बहन के पास जाकर रोने लगा। मैंने अपना बटुआ खोलना उसमें से 10 निकाले और भाई को दे दिए रात को पिता ने अपने बेटे से पूछा आज तुमने क्या कमाया।
बेटे ने जेब से 10 निकाल के पिता के सामने रख दी बिताने का इन्हें कुएं में फेंक और लड़के ने तत्व के साथ आज्ञा का पालन किया। अनुभवी पिता सब कुछ समझ गया दूसरे दिन उसने अपनी बेटी को ससुराल भेज दिया इसके बाद उसने एक दिन फिर बेटे को बुलाकर कहा जाकर कुछ कमा करना नहीं तो रात को खाना नहीं मिलेगा।

बाजार में उसे एक सेठ मिला सेठ ने कहा मेरा संदूक उठाकर घर ले चल मैं तुझे 10 दूंगा।

राम ने संदूक उठाओ सेठ के घर पहुंचाया लेकिन उसकी सारी द है पसीने सेतर थी।
पांव कांप रहते पीठ और गर्दन में दर्द हो रहा था।
रात को पिता ने बेटे से पूछा आज तुमने क्या कमाया।

लड़के ने जेब से 10 निकाल कर पिता के सामने रख दिया पिता ने कहा जाए ने कुएं में फेंका आओ।

लड़की की आंखों में क्रोध की ज्वाला निकलने लगी हुए बोला मेरी गर्दन टूट गई है और आप कहते हैं इसे कुएं में फेंका अनुभवी यह सब कुछ समझ गया।
अबे अपनी कमाई का महत्व समझ गया था दूसरे दिन से रामू अपने पिता के साथ खेतों में काम करने जाने लगा दोनों के परिश्रम से खेतों में भरपूर फसल हुई जिससे हुए कुछ साल हो गए।

विजय बहुत ही परिश्रमी किसान था।

मेहनत की कमाई एक गांव में विजय नामक किसान रहता था।

विजय बहुत ही परिश्रमी किसान था। वह अपने खेतों में कठिन परिश्रम करता था इसलिए उनके खेतों में फसल बहुत ही अच्छी होती थी विजय काका में 1 गुण और था कि वह पूरे गांव की यथासंभव मदद करते थे जिससे पूरा गांव उनका विजय काका कहकर पुकारता था।
विजय काका सभी तरह से सुखी थे परंतु उनका एक दुख था कि उनका एक बेटा था जिसका नाम रामू था वह मां के लाड प्यार से रामू बिगड़ गया था वह आराम मतलब तो तब भी परवाह हो गया था परिश्रम करने से हमेशा कतरा तथा विजय काका अपने बेटे को सुधारना चाहते थे।
इसलिए उन्होंने एक दिन अपने बेटे को अपने पास बुलाया और कहा जाकर कुछ कमा कर लाओ नहीं तो रात को खाना नहीं मिलेगा रामू सीधा अपनी मां के पास गया और रोने लगा।

मां ने बेटे की आंखों में आंसू देखे तो मैं बेचैन हो गई।

उसने अपना संधू खोला और 10 निकालकर बेटे को दिए रात को पिता ने बेटे से पूछा आज तुमने क्या कम है।
लड़के ने जेब से 10 निकाल कर पिता के सामने रख दिए।

बाप ने कईले कुएं में फेंका हूं लड़के ने तुरंत पिताजी की आज्ञा पालन किया।

दीनू सब कुछ समझ गया।
दूसरे दिन उसने अपनी पत्नी को मायके भेज दिया दूसरे दिन उसने फिर अपने बेटे को बुलाया और कहां जाकर कुछ कमा कर लाओ।
और नहीं तो शाम को खाना नहीं मिलेगा।

स्वच्छता एवं स्वास्थ्य एक मानवीय गुण है।

जब तक हम इस अपनी जीवन में नहीं अपनाते इसका अभाव हम अपने चारों ओर दिखाई देता है।

कई लोग अपने घर का कूड़ा कचरा कचरा पात्र नहीं डालकर उसे सड़क पर ही फेंक देते हैं जिससे वह कचरा सड़क पर ही सड़ता रहता है और बीमारी के कीटाणु को जन्म देता है जिससे हम बीमार हो सकते हैं।
सोचता तन की मंकी और बाहर सभी की होनी चाहिए प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठना सुबह-शाम नियमित समय पर सो जाना नित्य दांतो की सफाई करना स्वच्छ जल से स्नान करना मौसम के अनुसार स्वच्छ वस्त्र पहनना प्रातकाल खुशी हवा में घूमना शाम के समय नियमित रूप से कोई खेल खेलना।

आदत ऐसी है जो मरे स्वस्थ को बनाए रखती है।

सोच तन में सोच मन का वास होता है सोचता तभी रहेगी जब हम सभी घर में गली मोहल्ला सभी जगह से कोई रखेंगे यदि व्यक्ति सोच रहेगा तो उसका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा जिससे उसकी कार्य करने की क्षमता में वृद्धि होगी कार्य करने से देश में समृद्धि आएगी और हम समृद्ध होंगे।
लोग बसों में रेल में सफर करते समय कचरा फैलाते रहते हैं यह गलत आदत है यदि हम लोग ध्यान रख के कागज के टुकड़े छिलके फेंकने लायक चीजें अगर कचरा पात्र में ही डाले तो वातावरण को स्वच्छ रखा जा सकता है।

स्वच्छता का संबंध व्यक्ति के स्वास्थ्य से है हम देखते हैं।

कि प्रतिदिन कितनी धूल उड़ती है हमारी त्वचा में छोटे-छोटे कौन होते हैं।
छिद्रों से पसीना निकलता है इन पर धूल मिट्टी जम जाती है यदि हम प्रतिदिन स्नान न करें तो धीरे-धीरे छिद्र बंद हो जाते हैं इसे पसीना निकलने में रुकावट आने लगती है जिससे हम बीमार पड़ सकते हैं।

Tuesday, September 24, 2019

पापा ये सफल जीवन क्या होता है।

शिवराज सिंह चौहान ने भिंड पुलिस की कार्यशैली पर उठाए सवाल युवा मोर्चा भिण्ड के रक्षपाल की दोनों बेटियों के साथ बैठकर पत्रकार बंधुओं से की चर्चा । 

युवा मोर्चा भिंड के रक्षपाल को गणेश विसर्जन के दौरान पुलिस ने बिना विवाद के पीटा रक्षपाल की बेटियों के सामने पुलिस महकमे के रोहित और संजय सोनी ने रक्षपाल की अकारण बेरहमी से पिटाई की । पुलिस द्वारा व्यपवर्तन क्षेत्र होने के कारण धारा 11, 13 लगाई गई है जिसके अंतर्गत डकैती अपहरण जैसे अपराध आते है । पूस थाने द्वारा सरकारी डॉक्टर और अस्पताल पर भी दबाब बनाकर रक्षपाल की मेडिकल रिपोर्ट से भी छेड़छाड़ की गई है । मैं कमलनाथ जी से पूछना चाहता हूँ कि मध्य प्रदेश में क्या चल रहा है ?
हम यह अन्याय नहीं सहेंगे , लोकतंत्र में इसकी इजाजत नहीं है । सरकार दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्यवाही करें नहीं तो हम सड़क पर प्रदर्शन करेंगे ।
एक बेटे ने पिता से पूछा-
पापा.. ये 'सफल जीवन' क्या होता है ?

पिता, बेटे को पतंग  उड़ाने ले गए। 

बेटा पिता को ध्यान से पतंग उड़ाते देख रहा था.

थोड़ी देर बाद बेटा बोला-
पापा.. ये धागे की वजह से पतंग अपनी आजादी से और ऊपर की और नहीं जा पा रही है, क्या हम इसे तोड़ दें !  ये और ऊपर चली जाएगी....

 पिता ने धागा तोड़ दिया ..

पतंग थोड़ा सा और ऊपर गई और उसके बाद लहरा कर नीचे आयी और दूर अनजान जगह पर जा कर गिर गई.

तब पिता ने बेटे को जीवन का दर्शन समझाया...


बेटा..
'जिंदगी में हम जिस ऊंचाई पर हैं..
हमें अक्सर लगता की कुछ चीजें, जिनसे हम बंधे हैं वे हमें और ऊपर जाने से रोक रही हैं
जैसे :और हम उनसे आजाद होना चाहते हैं. वास्तव में यही वो धागे होते हैं जो हमें उस ऊंचाई पर बना के रखते हैं.