Wednesday, 21 August 2019

हरिशंकर परसाई हिंदी के पहले रचनाकार है।

जिसमें किसी भी व्यक्ति का अलग रह पाना  संभव सामाजिक पाखंड और रूढ़िवादी जीवन मूल्यों की खिल्ली उड़ाती हुई।

 हरिशंकर परसाई हिंदी के पहले रचनाकार है। जिन्होंने विन को विदा का दर्जा दिलाया और उन ने हल्के-फुल्के मनोरंजन की परंपरागत प्रीति से उबर कर समाज के समय प्रश्नों से जुड़े उनके व्यंग रचनाएं हमारे मन में गुदगुदी पैदा नहीं करती बल्कि हमें उन सामाजिक वास्तविकता के समान खड़ा करती है
उन्होंने सदैव विवेक और विज्ञान समझ दृष्टि को सकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया है उनकी भाषा शैली में खास किस्म का अपनापन है जिससे पाठक लेखक के साथ का चमकता का अनुभव करता है।
लेखक ने अपने एक परिचित रिटायर्ड कर्मचारी की दुख पूर्ण यथार्थ घटना से प्रेरित होकर इस कहानी की रचना की कहानी का कथानक इतना है कि भोलाराम के जीव की तलाश वर्ग में हो रही है मगर उसका जीव यमदूत को चकमा देकर अपनी पसंद की फाइल में घुस गया जीव की तलाश करते हुए नाराज आता है।

वह सब को गुस्से में अपनी मीणा देखकर दाबी फाइल निकल आते हैं। 

फाइल में  चिपके भोलाराम के जीव से सूरत चलने के लिए कहते हैं मगर भोलाराम का जीव कहता है कि मैं तो अपनी पेंशन की दरख्वास्त में ही चिपक रहना चाहता हूं।
कनी सुंदरी कथा तक मैंने होकर उसके सारे ऊपर गई थी कि मार्ग और छुट्टी ले व्यंग के माध्यम से साकी ढांचे की लालफीताशाही घूसखोरी और करतूत को उजागर करने का प्रयत्न किया है।

भारत की समाज व्यवस्था और प्रशंसा तंत्र का चित्र इस कहानी में कुशलता और धार्मिकता के साथ किया।

गया इसमें मम्मी करता भी मानवीय संवेदना भी है पूर्ति के व्यंग से से तिलमिला देने वाली गंभिर भी है ऐसा कभी नहीं हुआ था पहले।
धर्मराज लाखों वर्षों से असंख्य आदमियों को कर्म और सिफारिश के आधार पर स्वर्ग नरक में निवास स्थान नोट करते आ रहे थे पर ऐसा कभी नहीं हुआ था सम्मान बेटे चित्रगुप्त  बार थूक से पन्ने पलटकर रजिस्टर देख रहे थे गलती पर मैं नहीं आ रहा था कि आखिर उन्होंने खींचकर रजिस्ट्री इतने जोर से बंद किया कि मक की में चपेट में आ गई थी।

शिव समग्र जीव जगत के लिए कल्याण तत्व है।

किरण तुमने भारतीय नारियों के बारे में सोच कर मुझे फेरे में डाल दिया है।

 इस समृति के चित्रपट के चित्रपट पर सैकड़ों हजारों मित्रों की भांति चमकते दमकते जीबीन एक के बाद एक ऐसे पढ़ते पढ़ते हैं। कि कल उसने पड़ गए हैं, किसका वर्णन हुआ और किसका नहीं उस अभी तो एक से एक बढ़कर है। कोई छोटा हो या बड़ा छोटे कहते अपराध की स्थिति है तो फिर जैसे-जैसे चित्र उभरता है उसका आंगन करता जाता है। सब तो एक जैसी गरीयसी मासी है और पत्र में बहुत अधिक लिखा भी भी तो नहीं जा सकता।
तुमने गोरी का नाम सुना है। वह पार्वती जिसने हिमाचल के घर जन्म लिया और पति रूप में शिव की प्राप्ति के लिए घोर तप किया था अब इस अभियान को समझने की कोशिश करो पार्वती नारी जाति का प्रतिनिधित्व करती है।

 शिव समग्र जीव जगत के लिए कल्याण तत्व है। 

जहां मानव दानव सुर असुर असुर दतिया सुर असुर दतिया गंधर्व सब एक समान आश्चर्य पाते हैं। वहां सांप बिच्छू बॉक्सिंग मूषक और मयूर सब एक साथ आनंद विचरण करते हैं शिव वह तत्व भी है। जो विषय वासना को पसंद करने की क्षमता रखता है। ऐसी कल्याणकारी शिव शक्ति को संसार के लिए सुलभ करने के नेतृत्व में सफल साधन की तुलना करने करने करने के बाद शिवजी संसार में खो गए थे  उनकी पूजा करती है,

सावित्री की कथा तो तुम्हें याद ही होगी। 

राज महल के लाड प्यार में पली उस सुकुमारी में ससुराल की मर्यादा की रक्षा के लिए किस प्रकार सहर्ष वन्यजीव अपना लिया था, उसने अनुसार ससुर की सेवा के साथ-साथ अनुपम पर्णपाती वर्तक आदर्श आदर्श संस्कार इस संसार के सम्मुख रखा इस त्याग तपस्या और निष्ठा से उसने ऐसी अलौकिक शक्ति का स्रोत पड़ा कि वे यमराज के फंदे से मृत्यु को भी जीवित लोटा जीवित लोटा भी जीवित लोटा जीवित लोटा लाने में समर्थ हुई।
एक थी माता अनुसूया ने श्री अत्रि की पत्नी उसके प्रतिवर्ती और राजनीति शक्ति के क्या कहने परीक्षा लेने आए त्रिदेव ब्रह्मा विष्णु और महेश और बन गईल समस्या सती की गोद में मचल तनिष्का सती सती का प्रताप भारतीय नारी की लोकोत्तर शक्ति अपने पुत्रों को शिक्षा देने वाली मौतों में 1 नाम होता है माता मदालसा का देवी बदल सब ब्रह्म ज्ञान की साकार ज्ञान की साकार ब्रह्म ज्ञान की साकार ज्ञान की साकार प्रतिभा थी ।

राम कृष्ण का विवाह बहुत कम उम्र में हो गया।

यदि रथ का पहिया निकल जाता तो पता नहीं क्या होता। 

राजा दशरथ विरत होकर पराजित भी हो सकते थे जानते हो कि तूने क्या किया वे राजा के साथ उसी रत्न थी जिसने की किस स्थान पर उंगली लगा दी रथ चलता रहा युद्ध उतारा विजय राजा की हुई, तब उनका ध्यान गया कि कई की और उसकी उंगली की और वह सब कुछ समझ गई उन्होंने रानी का जीवन आजीवन आभार माना एक थी। संहिता हालात यह थे कि पलंग पीटते जी गोदारा सीएनएनमनी कटोरा ऐसी राजकुमारी ऐसी परिस्थिति में पली-बढ़ी किंतु जब पति को भूल गई, अपनी सुख-सुविधा और पति की सेवा के लिए प्रदेश में 14 वर्ष में सेवा के लिए प्रदेश में  हजारों सीता को वनवास दिया वह सीता को कोई शिकायत नहीं।

फिर जब अयोध्या कर राम राजा  बने तो सीता को वनवास दे दिया वह सीता को को कोई शिकायत नहीं। 

कोई प्रतिवाद नहीं जो मर्जी पति परमेश्वर की हुई, हो उसने आत्म बल का सहारा लिया जंगल में जाकर कुटी छवाय वह पुत्रों के रूप में लव कुश नामक दो अनमोल निंदिया पाई और वह पुत्र भी कैसे कैसे भी कैसे कैसे अभी दूध के दांत भी नहीं टूटे थे। कि सीता के लालू ने अश्वमेध के घोड़े के लिए लड़ते समय राम की सेना के महारथियों के दांत खट्टे कर दिए ऐसी थी सीता की शक्ति ऐसी थी, उसने सुनी की शिक्षा आधुनिक युग की भर्ती महिलाओं में तुम रानी लक्ष्मी के बारे में इतिहास में नारियों ने भी अपने साथ सूर्य त्याग मृत्यु प्राप्त किया है।

 रामकृष्ण परमहंस की पत्नी शारदा मणि को भूल नहीं जा सकता।

 राम कृष्ण का विवाह बहुत कम उम्र में हो गया उनकी पत्नी शारदा मणि तो बहुत ही छोटी थी शारदा मणि ससुराल की सेवा में लग गई, उनके एक काली मंदिर के पुजारी थे और मां काली की पूजा करते थे।
वेतन तीव्र गति से अध्यात्म की ओर अग्रसर होने लगे मां शारदा मणि का सपूत दृश्य का मनोरथ भंग होने लगा किंतु यही उनकी भारतीय चरित्र उजागर हुआ।

मन किसी काम में नहीं लगता भूख भी पहले से कम हो गई है।

दिव्या अनिल की छोटी बहन है। यूं तो वे शुरू से ही कमजोर है लेकिन इधर कुछ दिनों से उससे हर समय थकान महसूस होती रहती है।

 मन किसी काम में नहीं लगता भूख भी पहले से कम हो गई है। अस्पताल में उसे डॉक्टर ने तो देखा तो कहां लगता है दिव्या के शरीर में रक्त की कमी हो गई है। जांच कराकर देखते हैं यह कहकर उन्होंने दिव्या को रक्त की जांच के लिए पास के एक कमरे में भेज दिया वहां अनिल को अपने ही जान पहचान के डॉक्टर  दीदी ना कहो अनिल कैसे आना हुआ। अनिल ने बताया कि डॉक्टर ने दिव्या को खून की जांच के लिए आपके पास भेजा है। इतना सुनते ही डॉक्टर दीदी ने दिव्या की उंगलियों से रक्त की कुछ बूंदे एक एक छोटी सी में डाल दी और पर लगा दी, अनिल से बोली अनिल से रिपोर्ट अगले दिन अस्पताल पहुंच कर दीदी के कमरे के दरवाजे पर दस्तक दी आ जाओ अनिल ने कमरे में प्रवेश द्वारा एक फ्लाइट की जांच कर रही थी। दीदी के पास रखी कुर्सी पर बैठ गया फ्लाइट की जांच पूरी होने पर ठीक हो जाएगा।
एक सवाल पूछूं।

हां हां क्यों नहीं डॉक्टर दीदी ने कहा एनीमिया से आपका क्या मतलब है। 

दीदी उसने पूछा यह जानने के लिए तुम्हें रक्त के बारे में जानना होगा, डॉ दीदी ने कहा फिर बोली अनिल देखने में रक्त लाल दुर्गा दुर्गा के समान दिखता है। किंतु इसे सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखे तो यह भानुमति के पिटारे से कम नहीं मोटे तौर पर इसके 2 भाग होते हैं एक बाग में जो तरल है।
जिसे में प्लाज्मा कहते हैं दूसरे हुए जिसमें छोटे-बड़े कई तरह के कण होते हैं कुछ लाल कुछ सफेद वह कुछ ऐसे जिनका कोई रंग नहीं जिन्हें प्लेटलेट कम कहते हैं।
इतना कि के डॉक्टर दीदी ने सूक्ष्मदर्शी के नीचे एक स्लाइड लग गई उसे फॉक्स किया और बोली देखो अनिल सूक्ष्मदर्शी द्वारा जो कल तुम्हें दिखाई दे रहा है। यह लाल रक्त कन्हैया से  लाइट देख मानव आश्चर्य से चल पड़ा था, अनिल रक्त की एक बूंद में इतने सारे गण इसकी तो वह कल्पना भी नहीं कर सकता वह बोलना इन्हें देखकर तो ऐसा लग रहा है,

 मानो बहुत सी छोटी-छोटी बालूशाही रख दी गई है। 

हां दीदी बोली लालगढ़ बनावट में बालूशाही की तरह ही होते हैं। गोलू और कल्याणी बीच में दबे हुए रक्त की एक बूंद में इनकी संख्या लाखों में होती है, यदि 1 मिलीमीटर रक्त ले तो उसमें हम 40 से 55 लोग कल मिलेंगे उनके कारण ही हमें रक्त लाल रंग का नजर आता है।

यह भारतीय चिंतन और आचरण की एक महाशक्ति है।

यह जानकर बड़ी प्रसन्नता हुई कि पिछली परीक्षा में तुम्हें अच्छे अंक प्राप्त हुए हैं। 

 और अब तुम्हें सातवीं कक्षा में पहुंचा गया हो तुमने यह भी लिखा है कि तुम्हारी बहन रोमा और अनुज शंकर को को को रमेश तीसरी और दूसरी कक्षा में आ गए हैं, मुझे यह जानकर और भी अधिक खुशी हुई कि मेरी पोती रोमा को अपनी कक्षा में प्रथम स्थान मिला है। इस सफलता के लिए तुम्हें सभी बच्चों बच्चियों को बाबा की ओर से सनसनी बधाई हो।
अब तुम्हारे पत्र का उत्तर तुम भारत की मन इस वनी महिलाओं के विषय में कुछ जानना चाहती हो तुम्हारी इस जिज्ञासा में अपनी पूजा भारतीय महिलाओं के प्रति हमारी श्रद्धा जलती है।

 यह एक बड़ा ही शुभ लक्षण है। 

मनुष्य जैसा सोचता है वैसा ही बनता है तुमने सुनी महिलाओं के बारे में जाने की तो उनके सद्गुणों अनायास तुम्हारी मन में आ जाएगी, तुम्हारे जीवन में उनके करमास समावेश से से तुम्हारे उज्जवल भविष्य का पथ प्रशस्त प्रशस्त प्रशस्त हो जाएगा भारतीय नारियां अनादि काल से ही अपनी विद्या बुद्धि कला कुशलता सरिता के आधार पर मानव जीवन और जगत् को अधिकांश सुख में बनाने का सफल प्रयास करती है, साथ ही अपने त्याग तपस्या सॉरी उदारता भक्ति वात्सल्य सम्मुख उच्च आदर्श प्रस्तावना करती आ रही है इनकी कीर्ति कल आपसे आपसे आज भी समस्त भारतीय वंश में उनका शोरूम शैली है।

आज भी किसी अनजान व्यस्क महिला को माताजी के क संबोधित करने की परंपरा विद्यमान है। 

यह भारतीय चिंतन और आचरण की एक महाशक्ति है। नारी जाति के प्रति पुरुष वर्ग का यह श्रद्धा सम्मान बुरा आचरण अकारण नहीं प्रत्यक्ष कारण है। नारी नहीं मनुष्य को गृहस्थ और किसान बनाया उसका यह प्रत्येक मानव सभ्यता संस्कृति के भवन की नींव की पहली शीला प्रमाणित हुई, स्वयं ग्रस्त जीवन के केंद्र में स्थित रहकर भारतीय नारी ने बड़े बूढ़ों की सेवा की को पाला पोसा और पति के कंधे से कंधा मिलाकर पारिवारिक निवारण किया है।

Sunday, 18 August 2019

बिच्छू संस्कृति वरुण और मंत्रों को लिखने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने लगे हैं।

जापान में संस्कृति को भीतर बसा के स्थान प्राप्त हुआ है। 

बिच्छू संस्कृति वरुण और मंत्रों को लिखने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने लगे हैं।
सिंघम का अर्थ ऐसी लिपि जो सीख देती है आज भी जापानी विद्वान संस्कृति के अध्ययन के लिए उत्सुक रहते हैं वास्तव में बौद्ध ग्रंथों की भाषा के होने के कारण संस्कृति भारत और जापान के मध्य एक महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य कर रही है सातवीं शताब्दी में राजकुमार छोटू के समय चीनी भाषा में अनूदित बौद्ध ग्रंथ जापान पहुंचे थे, वहीं ग्रंथों के दुश्मन से बहुत प्रभावित हुए त्रिविध मूल्य के उत्तर में बहुत ही ऊंचे पठार पर बसा है।

 तिब्बत के लोग बुधनी माना जाता है।

तिब्बत के राजा नरदेव ने अपने एक मंत्री फोन में वोट के साथ शोले श्रेष्ठ विद्वानों को मगध भेजा इन विद्वानों ने अपने भारतीय शिक्षकों से ज्ञान प्राप्त किया उस समय के पश्चात थाना कुसमी चले गए थे, ऐसा कहा जाता है। कि भारतीय लिपि के आधार पर तिब्बत के लिए एक नई लिपि का आविष्कार किया आज तक इस लिपि का प्रयोग किया जाता है। तथा ऐसा मालूम पड़ता है कि पुस्तकों ले गए तिब्बत लोड कर दोनों में समर्थन ने तिब्बती लोगों के लिए नए व्याकरण की रचना की यह पानी यह पानी द्वारा लिखी संस्कृत व्याकरण पर आधारित मानी जाती है संवादों के माध्यम से यह आई साहित्य के प्रति राज्य इतना आकर्षित हुआ है। कि उसने साहित्य के दिन हो 4 साल बिता दिए उसने संस्कृत में तिब्बती भाषा में अनुवाद की नींव डाली है।

भारत और जापान के सांस्कृतिक संबंधों का इतिहासिक 15 वर्ष पुराना माना जाता है। 

लेकिन भारतीय संस्कृति की जापान में प्रवेश के लिखित प्रमाण चंपारण सुबह उनसे है उस समय कोरिया के सम्राट ने जापानी सम्राट के लिए अनेक प्रकार की भेंट भेज इसमें बहुत मूर्तियां सूत्र पूजा में प्रयोग होने वाली संस्थाओं और एक साथ मूर्तियां कलाकार और शिकारी सम्मिलित हुए हैं, उनके साथ और इस तरह भारत में और जापान में संस्कृति भाषा का उल्लेख गया और इसी के कारण भारत और जापान के बीच बहुत गहरा संबंध है इसी भाषा के कारण और माना जाता है। कि आज भी पहले भी और आने वाले दिनों में भी यह बस इसी तरह चलती रहेगी भारत और जापान के बीच में।

भारत से धर्म दर्शन मूर्ति बनाने की कला चित्रकला जाति विज्ञान आदि।

भारत और चीन के आपसी संपर्क दूसरी शताब्दी ईस्वी में आरंभ हुआ है। 

भारतीय संस्कृति ने सर्वप्रथम दो भारतीय चोरी उधर म्यूजिक शिवपुर कश्यप मांगद के माध्यम से चीन में प्रवेश किया जो चीनी सम्राट में किस सन में चीन गए थे आचार्य धर्म और कश्यप मातंग के पश्चात चीन और भारत के बीच विद्वानों का आना-जाना नियंत्रण विभाग की गति से चलता राजीनी बहुत ही सभ्य लोग थे सभी नए बुध की पूर्ण कहानियों को बहुत ध्यान से सुना जो भी चीनी यात्री ज्ञान की खोज में उन्होंने अपनी यात्रा की दृष्टि से मेरे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण बन गई है भारतीय विश्वविद्यालयों और बिहारियों के अनेक शिक्षक चीन में प्रसिद्ध हुए हैं।

दुश्मन एचडी वीडियो न्यू को आकर्षित किया।

क्योंकि उन्हें के पास पहले से ही नमक विकसित दर्शन थे।
छठी शताब्दी में वंश के राजाओं ने सत्ता संभाली विश्वास के पहले सम्राट ने बौद्ध धर्म को विराज ब्रह्म घोषित कर दिया इसके बौद्ध दर्शन के प्रचार को गति मिली इस काल में हजारों संस्कृति किताबों को चीनी भाषा में अनुवाद हुआ था संकट में भयानक और लंबी यात्रा को बहादुर सिंह की भूमि पर आई।
कोरिया चीन के उत्तर पूर्व में स्थित है कोरिया को भारतीय संस्कृति के प्रति चीन से प्राप्त हुए थे सबसे पहले सुनना मूवी बुध की मूर्ति और सूत्र लिखकर सन में कोरिया पहुंचा उसका फ्रांसन 380 में आचार्य आनंद  कोरिया के भारतीय मंदिरों का निर्माण निर्माण करवाया था।

 इसके बाद अनेक भारतीय शिक्षक कोरिया जाते रहे हुए।

भारत से धर्म दर्शन मूर्ति बनाने की कला चित्रकला जाति विज्ञान आदि विषयों के ज्ञान अपने साथ लाए ज्ञान की खोज करते करते कोरिया से भी विद्वान द्वारा विशेष रूप से ज्योतिषी विज्ञानं आयुर्वेदिक विज्ञान के अन्य कई क्षेत्रों में परीक्षण प्राप्त किया कोरिया में मंदिर और धर्म के साथ ज्ञान केंद्र भी बड़ी संख्या में किया गया। इतिहास में भारत और भूटान के बीच संबंध का एक प्रमाण यह है कि भिक्षु को और शिक्षकों का आगमन निरंतर चलता रहा वहां से प्राप्त पहली शताब्दी के सिक्कों पर एक वह चीनी भाषा में लिखा हुआ है। तो दूसरी ओर प्राकृत भाषा में खरोष्ठी लिपि में गोदान की संस्कृति को प्रमाणित करता है।