Thursday, 18 July 2019

जिस बलिदान को प्रसिद्ध प्राप्त है।

वह ईट जो जमीन में इसलिए गार्ड गई।

 कि दुनिया के इमारत मिले को अंगूर मिल एक में एक दो शब्दों से ज्यादा पक्की थी यदि ऊपर लगी होती तो अंगूर की सौ बार सौ गुनी कर देती किंतु उसने देखा कि इमारत की पायल धारी उसकी न्यू पर निर्भर होती है। इसलिए उसने अपने को न्यू में अपील किया वे ईट जिसने अपने साथ जमीन के अंदर इसलिए गाड़ दिया।
कि हमारे जमीन क  हाथ ऊपर जा सके वे एड जिसने अपने लिए अन्य साथियों को स्वच्छ हवा मिलती है। बलिदान ईद का हो, या व्यक्ति का सुंदर इमारत बनने या कुछ पक्की पक्की लाल ईंटों को चुपचाप न्यू में जाना है। सुंदर समाज मैंने इसलिए कुछ तब तक पायल लोगों को मूर्ख शहादत का लाल चेहरा होना है।
आदत और मोनू की शहादत की सूरत है।

 जिस बलिदान को प्रसिद्ध प्राप्त है। 

वही इमारत का मंदिर का खेला सहित और समाज के राष्ट्रीय ही है। ईसाई धर्म को अमर बना दिया आप कह लीजिए कि मेरी समझ में इसाई धर्म को अमर बना उन लोगों ने जिन्होंने उस धर्म के प्रचार में अपने नाम कर दिया।
उसमें से कितने जिंदा जलाए गए कितने सूली पर चढ़ाए गए, कितने वन की खाल जंगली जानवरों के शिकार हुए। कितने उसके भी भयानक जंतु की भूख प्यास का शिकार हुए, किंतु इसाई धर्म उन्हीं के पुण्य प्राप्त किस से फल-फूल रहा है।
यह नींद की एक्सएक्स गाजर के  सदस्य से चमक है। आज हमारा देश आजाद हुआ सिर्फ उनके बलिदानों के कारण नहीं जिन्होंने इतिहास में आया है। यदि ऐसा होगा। जो जहां कुछ ऐसे नहीं हुए जिनकी हड्डियां हम जिस देश नहीं सके।

वैसे क्या नहीं यह मैं बूंद धारण ढूंढने से सत्य मिलता हमारा काम है। 

ऐसी नीव की ईट ओं के आधार पर ध्यान दो सदियों के बाद नए समाज की सृष्टि और हमने पहला कदम बढ़ाया। इसके निर्माण के लिए ही हम नवीन ईट चाहिए एपिसोड कंगारू बनने के लिए चारों ओर दौड़ा दौड़ा मची है।
नीव की ईंट बेचने के हो रही है। गांव का नव वर्ष हजारों वर्षों कोर कारखानों का कोई इसे संभव नहीं कर सकता जरूरत हहै। से नौजवानों की जो इस काम के लिए अपना चुपचाप खफा जो एक नई प्रेरणा से अनु पारित हो। एक नई चेतना से दूर होने की कामना की कामनाओं से दूर से दूर उदय के लिए आतुर हमारा समाज जिला रहा है, हमारी नीट किधर है देश के नौजवानों को यह चुनौती है।

मनुष्य निर्माण तथा चरित्र निर्माण में सहायक होै।

शिक्षा विविध जानकारियों का डर नहीं जो तुम्हारे मस्तिष्क में ढूंढ दिया गया है। 

और जो आदमी साथ हुए बिना वहां आजन्म पढ़ा रहे कर गड़बड़ मचाया करता है, हमें उन विचारों की अनुभूति कर लेने की आवश्यकता है।
 जो जीवन निर्माण मनुष्य निर्माण तथा चरित्र निर्माण में सहायक हो ,यदि आप केवल पांच ही पर के वे विचार आत्मसात कर उनके अनुसार अपने जीवन को चरित्र का निर्माण कर लेते हैं ।
तो उन पूरे संग्रहालय को कंठस्थ करने वाले की अपेक्षा अधिक शिक्षित है ,अपने भाइयों का नेतृत्व करने का उनकी सेवा करने का प्रयत्न करो नेता बनने की पूर्णता ने बड़े-बड़े जहाजों को इस जीवन रूपी समुद्र में डुबो दिया है ,मैं तुमसे यही चाहता हूं ।कि तुम आत्म प्रतिष्ठा दिल बंधी और एशिया को सदा के लिए छोड़ दो तुम्हें पृथ्वी माता की तरह सहनशील होना चचाहिए।

तुम यह गुण प्राप्त कर सको तो संसार तुम्हारे पैरों पर लौटेगा।

राष्ट्रीय लंदन में सक्रिय से भागी विचारे चिंतक और पत्रकार रामवृक्ष बेनीपुरी शुक्लोत्तर युग के प्रसिद्ध साहित्यकार थे। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में 8 वर्ष जेल में व्यतीत करने के साथ ही समाचार पत्रों के माध्यम से राष्ट्रीय जागरण का कार्य करते रहे ।
इनका जन्म बिहार में मुजफ्फरपुर जिले के बेनीपुरी नामक गांव में हुआ था। गांधी जी और जयप्रकाश नारायण से प्रभावित हो अध्ययन को छोड़कर पूर्णतया सावधानी आंदोलन से सक्रिय हैं। उनकी रचनाओं में जेल के कैदी हैं भारत के निर्माण की पृष्ठभूमि में त्याग भावना का संदेश देता है। राष्ट्रीय लाखों-करोड़ों के त्याग और निर्माण भावना और भव्य बनता है ,
इस सत्य की ओर इंगित करते हुए लेखक भारत के नव युवकों को मात्र की मनोवृति जागता है। निर्माण के पाठ के अनुच्छेद योजना विशेष ध्यान आकर्षित करती हैं एक-एक विचार भावपूर्ण वाक्यों में अभिव्यक्त किए गए हैं।और ऐसे अनुच्छेद बनाते हैं ,किंतु वे पाठक को बहुत सोचने विचारने के लिए प्रेरित करते हैं। वे जो चमकीली सुंदर सुदृढ़ इमारत हैं हम वह किस पर टिकी हैं ।

इसके कंगूरे को आप देखा करते हैं। 

क्या कभी आपने इसी न्यू की ओर भी ध्यान दिया है ,दुनिया चमक देती हैं ।ऊपर आवरण देखती हैं, आवरण के नीचे जो छोड़ सकते हैं ।उस पर कितने लोगों का ध्यान जाता है वह सत्य सदाशिवम है ,किंतु हम हमेशा ही सुंदर भी हो यह आवश्यक नहीं है।
सत्य कठोर होता है ।और तो और भद्दा पन साथ-साथ जन्मा करते हैजिया करते हैं, हम कठोरता से भागते हैं। अपन से मोड़ते हैं ।
इसलिए सत्य से भी भागते हैं ।नहीं तो हम इमारत के गीत न्यू के गीत से प्रारंभ करते हैं करती हैं ।और बस लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं किंतु धन्य है। वह जो जमीन से साथ-साथ नीचे जाकर गढ़ गई और इमारत की पहली ईद मनी क्योंकि इसी पर उसकी मजबूती और सारी इमारत की स्थिति निर्भर है।

लोकसभा में देशभक्ति की चर्चा करते हैं।

मैंने तो नवयुवक को का संगठन करने के लिए जन्म लिया है।

 यही क्या प्रत्येक नगर में सड़कों पर और जो मेरे साथ सम्मिलित होने को तैयार है, मैं चाहता हूं। कि इन्हें प्रीत गतिशील तरंगों की भांति भारत और भेजूं जो दीनू हेलो दलितों के प्रति करता कैसे उड़ते हैं।
 और इसे में करूंगा मैं सुधार के लिए विश्वास नहीं करता मैं विश्वास करता हूं।
स्वामित्व नीति  मैं अपने ईश्वर के स्थान पर पड़ती जल को अपने समाज के लोगों के सिर पर यह उपदेश तुम्हें इस बाती चलने होगा, दूसरे प्रकार नहीं मैंने के साहस नहीं कर सकता मैं तो सिर्फ उसे गिलहरी की बातें होना चाहता हूं। दूसरी रामचंद्र जी के पुल बनाने के समय थोड़ा बालू देकर अपना भाग पूरा कर संतुष्टि हो गई थी वही मेरी भी थी।

लोकसभा देशभक्ति की चर्चा करते हैं।

 सब देश भक्ति में विश्वास करता हूं। परसों देशभक्ति के संबंध में मेरे एक आदर्श है, बड़े काम करने के लिए तीनों चीजों की आवश्यकता होती है। और विचार शक्ति हम लोग की थोड़ी सेट कर सकती है वह हमको थोड़ी दूर अग्रसर करा देती है, और वहीं ठहर जाती है। किंतु के द्वारा हम मां शक्ति होती है। प्रेम अतः मेरे भाई संस्कार को मेरी भाभी देशभक्ति है।

और तुम हरदे बनो क्या तुम्हारे अज्ञात के काले बादल ने सारे भारत को अचानक कर लिया है।

 क्या तुम सब समझ कर कभी अस्तित्व थे, क्या तुम कभी इससे अन्य  हो। वह हो क्या वे तुम्हारे हरदे के स्पंदन से कभी मिले हैं। क्या उसने कभी तुम्हारे पागल बनाया है, क्या कभी तुम्हें निर्धनता और नाश्ता ध्यान आया है।
क्या तुम अपने नाम यह संपत्ति यहां तक कि हम अपने शरीर को भी भूल गए हो क्या तुम ऐसे हो गए हो। यदि तुम जानो कि तुमने सर देशभक्ति की पृथ्वी पर रखे हैं। मनुष्य उठो जागो सुबह जाकर औरों को जगाओ अपने मनुष्य जन्म को सफल करो लिस्ट जागृत प्राय उठो ।

जागो और तब तक रुको नहीं जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो। 

जाए यह एक बड़ी सच्चाई है। शक्ति ही जीवन और कमजोरी की मृत्यु है शक्ति परमसुख है। जीवन अधर्म अजर है। कमजोरी कभी नहीं हटने वाला बौद्ध और यंत्रणा एक कमजोरी ही मृत्यु है।
सबसे पहले हमारे दोनों को मजबूत बनाना है। धर्म इसके बाद ही वस्तु है ।मेरे तरुण मित्रों से मेरी संगीता के अध्ययन की अपेक्षा फुटबॉल खेल के द्वारा ही स्वर्ग के अधिकृत पहुंच सकोगे यह कुछ कर सकते हैं। पर मैं उन्हें कहना चाहता हूं।योंकि प्यार करता हूं ।मैं जानता हूं, ऋकि कांटा कहां छपता है।

भारत वर्ष का पुण्य स्थान होगा।

मेरी ऐसा मेरा विश्वास नई पीढ़ी नवीन के नवयुवक पर है। 

उन्हीं से मैं अपने कार्यकर्ताओं का निर्माण होगा। वह केंद्र से दूसरा केंद्र का विस्तार करेंगे, और इस प्रकार हम धीरे-धीरे इसमें भारत में फेल जाएंगे ।भारत वर्ष का पुण्य स्थान होगा, वह शारीरिक शक्ति से नहीं वरन आत्मा की शक्ति द्वारा व उत्थान विनाश की दवा लेकर नहीं वरन शांति और प्रेम की दवा भारत के राष्ट्रीय आदर्श त्याग और सेवा आराम कीजिए ।
और सब अपने आप ठीक हो जाएगा तुम काम में लग जाओ फिर देखोगे ,
इतनी शक्ति आई कि तुम उसे भूल न सकोगे दूसरों के लिए रत्ती भर सोचने काम करने से भीतर की शक्ति जागती है ,

दूसरों के लिए रत्ती भर सोचने से धीरे-धीरे का आ जाता है।

तुम लोगों से मैं इतना स्नेह करता हूं परंतु यदि तुम लोग दूसरों के लिए परिश्रम करते करते मर भी जाऊं तो भी यह देख कर मुझे पता ही होगी केवल वही व्यक्ति रूप से कार्य करता है।
जो पूर्णतया निस्वार्थ हैं तो धन की लालसा हैं ने की थी, कि उन्हें किसी अन्य वस्तु की ही और मनुष्य जब ऐसा करने में समर्थ हो जाएगा तो वह भी एक बुद्ध बन जाएगा। उसके भीतर से ऐसी प्रकट होगी जो संसार की व्यवस्था संपूर्ण रूप से परिवर्तित कर सकेगी। हमेशा बढ़ते चलो मरते दम तक गरीबों दलितों के लिए सहानुभूति यही हमारा आदर्श वाक्य है।
वीर युवकों बढ़ते चलो ईश्वर के प्रति आस्था रुको दुखियों का दर्द समझो और ईश्वर से सहायता की प्रार्थना करो ,वह अवश्य मिलेगी तुम लोग ईश्वर की संतान हो अमर आनंद के बागी हो ,पवित्र और पूर्ण आत्मा हो तुम एक कैसे अपने को जबरदस्ती दुर्बल करते हो उठो साहसी बनो वीर्य दान हो और सब उत्तरदायित्व अपने कंधे पर लो। यह याद रखो कि तुम स्वयं अपने भाग्य के निर्माता हो,

 तुम जो कुछ बल या सहायता तो सब तुम्हारे ही भीतर विद्यमान है। 

एक बात पर विचार करके देख कर मनुष्य नियमों को बनाता है?यह मनुष्य को बनाते हैं मनुष्य पैदा करता है ?या रुपैया मनुष्य को पैदा करता है ?मनुष्य की और नाम पैदा करता है या कीर्ति और नाम मनुष्य को पैदा करते हैं? मनुष्य बनी है तब आप देखेंगे कि वह सब बाकी चीजें स्वयं आपका अनुसरण करेगी,
परस्पर के गणेश भाऊ को छोड़िए और सदस्य सहर्ष का अवलंबन कीजिए। आप ने मनुष्य जाति में जन्म लिया है तो अपनी कीर्ति यही छोड़ जाएंगे हमें केवल मनुष्य की आवश्यकता है ।और सब कुछ हो जाएगा किंतु आवश्यकता विद्यमान तेजस्वी और अनंत तक पढ़ रही थी कि इस प्रकार के सोनोव्यू को से संसार के सभी भाव बदल दिए जा सकते हैं ।और सब चीजों की अपेक्षा इच्छाशक्ति का अधिक प्रभाव है। इच्छाशक्ति के सामने और सब शक्तियां जाएगी क्योंकि इच्छाशक्ति से निकलकर आती हैं और दृढ़ इच्छाशक्ति सर्वशक्तिमान है।

Wednesday, 17 July 2019

थोड़ी सी शक्कर अपनी हथेली पर लीजिए।

 आपके केवल एक ही प्रकार के कर सकता दिखाई देते हैं। 

अब आप अपने घर के आस-पास में मुट्ठी भर बालू मिट्टी लेकर उसे ध्यान से देखिए इसमें आपको कई प्रकार के कण जैसे कि मुर्दा छोटे करूंगा शादी दिखाई देते हैं, दोनों में क्या अंतर है।
एक पदार्थ है। जबकि मिश्रण के उदाहरण दैनिक जीवन में उपयोग मिश्रण की उपस्थिति में पदार्थों का मिश्रण के घटक या अयोग्य थे। कुछ मिश्रण में इन घटकों को आसानी से देखा जा सकता है। जबकि कुछ में मिश्रण के घटकों को देखना संभव नहीं होता है।
कांच का एक गिलास लीजिए।

उसको पानी से लगभग आधा भरिए और एक चम्मच नमक डालकर भूल जाता है। 

इसमें पानी और नमक को अलग अलग नहीं देखा जा सकता है। जिनमें दो या दो से अधिक उपस्थित है, किंतु उन्हें अलग-अलग नहीं देख सकते हैं। सामग्री मिश्रण के लाती है।
जैसे नमक का जलीय विलयन कांच के एक मैं थोड़ा पानी लीजिए। समें एक छोटा चम्मच मूंगफली सरसों का तेल मिलाकर हिलाई ए आप क्या देखते हैं। आप देखते हैं। कि विक्रय पानी तथा तेल की दो अलग-अलग परतें दिखाई देती है, आते हम कह सकते हैं।

 पदार्थों की प्रकृति के आधार पर मिश्रण को दो भागों में वर्गीकृत किया गया है।

 आपने अपनी माताजी को घूमते हुए देखा होगा। आपकी माताजी गांव में से छोटे-छोटे कंकड़ या अन्य अनाज के दाने की अशुद्धियों को हाथ से अलग करती है। यदि आप जो मक्का मिला कर दिया जाए।
तो करने के लिए कहा जाए तो आप पहचान के आधार पर और मक्के के मिश्रण को हाथ में बीन करते हैं। इस प्रकार किसी मिश्रण में से प्रत्येक को अलग करना पड़ता है। अशुद्धियों को उनकी गुणवत्ता सुधार एवं उपयोगिता बढ़ा सकते हैं साथ ही मिश्रण के घटकों का पाठ कर सकते हैं। जैसे सीमेंट में अशुद्धि के कारण उसकी सामर्थ्य कम हो जाती है।
सोने में अशुद्धियों से उसकी चमक कम हो जाती है। शुद्ध जल को पीने से बीमार हो सकते हैं।  कि मिश्रण के हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। गेहूं चावल दाल में अनुपयोगी पदार्थ जैसे अनाज कंकड़ मिट्टी व अन्य सुधिया मिली होती है, जो प्रायः बहुत कम मात्रा में होती है। इनकी आकृति एवं रंग गेहूं चावल दाल से भिन्न होती है।

मंत्रियों में कार्यों का बंटवारा करता है।

विधानसभा राज्य की जनता की ओर सर्वोच्च राजनीतिक अधिकार का प्रयोग करती है। 

विधानसभा अपनी बैठकों में निम्नलिखित कार्य संपन्न करती है। कानून बनाने से संबंधित कार्य विधायक आए कहलाते हैं। राज्य की विधानसभा इस पाठ के आरंभ में वर्णित राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषय पर कानून बनाती है। वह मौजूद कानून को संसद भी कर सकती है।
और उस पर भी कर सकती है। सविधान के कुछ हिस्सों में संशोधन की प्रक्रिया में भाग लेती है। राज्य सरकार के संबंधित कार्य पर विधानसभा का नियंत्रण होता है। सरकार द्वारा पस्ता बत्ती बजट का विधानसभा में स्वीकृत मिल जाने के पश्चात ही वह जनता को कर वसूल सकती है। और उस खर्च कर सकती है।

 कार्यपालिका अर्थात सरकार चलाने वाले निकाय विधानसभा के प्रति जवाबदेह हैं।

 विधानसभा में सार्वजनिक मसलों और सरकार की नीतियों पर बहस होती है। विधान सभा की बैठकों में विधायक मंत्री परिषद सरकार के कार्यों के संबंध में प्रश्न पूछते हैं। और उनसे सूचना मांग सकते हैं।
 बैठक के दौरान में काम रोको प्रस्ताव द्वारा किसी भी समय सरकार से किसी मुद्दे पर बयान की मांग कर सकते हैं। विधानसभा कार्यपालिका के संबंध में प्रस्ताव ला सकती है। सरकार विधानसभा के बहुमत का विश्वास प्राप्त होने तक ही कार्य कर सकती है। विधानसभा में कार सरकार के विरुद्ध प्रस्ताव को त्यागपत्र देना पड़ता है।
 विधानसभा के सदस्य अर्थात विधायक निर्वाचन मंडल के सदस्य भी हैं।
वे राष्ट्रपति और राज्यसभा के सदस्यों के चुनाव में भाग लेते हैं। वह सदन के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का निर्वाचन भी करते हैं।

 विधान परिषद राज्य व्यवस्थापिका द्वितीय सदन यह एक स्थानीय सदन है। 

इसका विघटन नहीं हो सकता इसे एक तिहाई सदस्य प्रत्येक वर्ष की समाप्ति पर निर्भर हो जाते हैं। विधानसभा परिषद के सदस्यों की संख्या कम से कम 40 होती है।
 सदस्य स्थानीय स्वशासन की कई शिक्षकों और विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि होते हैं विधानसभा परिषद साधारण विधेयक को प्रभावित कर सकती है और अंकित कर सकती है धन विधेयक परिषद द्वारा प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है विधानसभा बहस और प्रश्नों का मंत्रिमंडल के सदस्यों पर नियंत्रण रख सकती है वर्तमान में राजस्थान राज्य में विधान परिषद नहीं है। मंत्रियों में कार्यों का बंटवारा करता है। वह विभिन्न विभागों के कार्यो की निगरानी करता है, और उनके कार्यों का समन्वय करता है। सभी मंत्री उसी के नेतृत्व में काम करते हैं। वह मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता करता है। बहू मंदिर दल का नेता होने के कारण वह विधानसभा में सदन के नेता के रूप में कार्य करता है।

शिक्षा के प्रसार में सहयोग करना चाहिए।

विवेकपूर्ण मतदान मत वोट देने का अधिकार प्रत्येक नागरिक की सबसे बड़ी शक्ति है। 

 इस कारण मतदान का लोकतंत्र में विशेष महत्व है किंतु कुछ लोग अपने इस महत्वपूर्ण अधिकार का प्रयोग नहीं करते हैं। ऐसे ही जागरूक नहीं किए जा सकते क्योंकि वह मतदान के लिए नहीं जाते मतदान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य यदि आप मतदान नहीं करते हैं।
तो हो सकता है, कि आप जिस उम्मीदवार का योग्य समझते हैं। और जिस राजनीतिक दल की ठीक समझते हैं, वह जीत नहीं पाए और वह सरकार नहीं बना पाए, यदि बहुत बड़ी मात्रा में लोग मतदान के प्रति उदासीन रहते हैं। तो हो सकता है, कि देश अच्छे शासन से वंचित हो जावे समझदार व्यक्ति के पक्ष में मतदान का प्रयास करता है। परंतु ऐसे हो सकते हैं।

रिश्तेदारी जाति या धर्म के आधार पर अथवा प्रलोभन में आकर बिना सोचे समझे योगदान कर सकते हैं। 

समझ कर मतदान करना चाहिए। और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर बनाए रखें और अपने जीवन को खतरे में हमारे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है, सड़क दुर्घटना में मारे जाते हैं। जिसका एक कारण नहीं हो, पाते दूसरों का जीवन बचाने के लिए हमें रक्तदान करना चाहिए दान महादान है।
प्रशासन की सहायता करना हो सकता है। कि आप के आस पास कोई व्यक्ति नकली या मिलावटी माल भेजता हो आप ऐसे कार्यों की सूचना प्रशासन को देवें जिस लेना और देना दंडनीय अपराध नहीं देना चाहिए ।और रिश्वत मांगने वाले की प्रशासन को सूचना देनी चाहिए, और उत्पन्न करने से बचना चाहिए।
प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

हमारी प्राकृतिक धरोहर मंजिल और नदियों के रक्षा और सर्वजन करें। 

कुएं तालाब झील और नदियों में कचरा व अपशिष्ट पदार्थ अधिक से अधिक पर लगा। वे प्रकृति के साधन के साथ उपयोग करें, हम प्रकृति से उतना ही लें।
और इस प्रकार की प्रकृति उसे कमी पूर्ति कर ले जाना चाहिए। संघर्ष तक लोग निराश्रित वृद्धा और बालकों की मदद करनी चाहिए। अस्पताल अनाथालय वृद्ध शर्मा और गरीबों की बस्तियों में समय-समय पर अपनी सेवा में सहयोग प्रदान करना।
चाहिए शिक्षा के प्रसार में सहयोग करना चाहिए। दिन में कम से कम एक सेवा का कार्य तो अवश्य करना चाहिए।
हम भारतीय संस्कृति के साथ स्वस्थ जीवन मूल्यों के साथ राष्ट्रीयता प्रजातंत्र समझता और विश्व बंधुत्व के आदर्शों को एक सामान्य रूप में समाज में विकसित करना है। संस्कृति में संरक्षण के साथ-साथ उसकी भी  देखकर सजीव व सक्षम बनाना है।